HINDI - INSIGHTS CURRENT EVENTS QUIZ 2020
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Welcome to Current Affairs Quiz in HINDI Medium. Hope you are happy with our Hindi Current Affairs. The following Quiz is based on the Hindu, PIB and other news sources. It is a current events based quiz. Solving these questions will help retain both concepts and facts relevant to UPSC IAS civil services exam – 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
1 pointsनिम्नलिखित में से कौनसे देश सीरिया के सीमावर्ती देश हैं?
- सऊदी अरब
- इराक
- जॉर्डन
- लेबनान
- तुर्की
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
Incorrect
उत्तर: c)
-
Question 2 of 5
2. Question
1 pointsनवीनतम परिवर्तनों के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पोस्टल बैलेट (postal ballot) सुविधा का विकल्प चुन सकता है।
1.दिव्यांग व्यक्ति
- केवल 70 वर्ष या इससे अधिक आयु के व्यक्ति
- कोविड-19 संदिग्ध या प्रभावित व्यक्ति
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
- COVID-19 महामारी के मद्देनजर, कानून मंत्रालय ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पोस्टल बैलट का विकल्प चुनने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयु सीमा कम कर दी है।
- अक्टूबर 2019 में, कानून मंत्रालय ने दिव्यांग व्यक्ति और जिनकी आयु वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान पोस्टल बैलेट का विकल्प चुनने की अनुमति देने के लिए चुनाव संचालन नियमों में संशोधन किया।
- हालाँकि, निर्वाचन आयोग ने सरकार से इस नियम को परिवर्तित करने के लिए संपर्क किया क्योंकि महामारी वर्ष के अंत तक जारी रह सकती है।
- 19 जून को, मंत्रालय ने नियमों में नए बदलाव को अधिसूचित किया, जिससे 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को पोस्टल बैलट का विकल्प चुनने की अनुमति प्राप्त हुई है।
- निर्वाचन आयोग के सुझावों पर नियमों में संशोधन करते हुए, मंत्रालय ने पोस्टल बैलट सुविधा का उपयोग करने के लिए “कोविड-19 संदिग्ध या प्रभावित व्यक्तियों” को भी अनुमति दी है।
Incorrect
उत्तर: b)
- COVID-19 महामारी के मद्देनजर, कानून मंत्रालय ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पोस्टल बैलट का विकल्प चुनने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयु सीमा कम कर दी है।
- अक्टूबर 2019 में, कानून मंत्रालय ने दिव्यांग व्यक्ति और जिनकी आयु वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान पोस्टल बैलेट का विकल्प चुनने की अनुमति देने के लिए चुनाव संचालन नियमों में संशोधन किया।
- हालाँकि, निर्वाचन आयोग ने सरकार से इस नियम को परिवर्तित करने के लिए संपर्क किया क्योंकि महामारी वर्ष के अंत तक जारी रह सकती है।
- 19 जून को, मंत्रालय ने नियमों में नए बदलाव को अधिसूचित किया, जिससे 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को पोस्टल बैलट का विकल्प चुनने की अनुमति प्राप्त हुई है।
- निर्वाचन आयोग के सुझावों पर नियमों में संशोधन करते हुए, मंत्रालय ने पोस्टल बैलट सुविधा का उपयोग करने के लिए “कोविड-19 संदिग्ध या प्रभावित व्यक्तियों” को भी अनुमति दी है।
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Question 3 of 5
3. Question
1 points‘वर्गीकृत सेवा मतदाता’ (Classified Service Voter) शब्द से आप क्या समझते हैं?
Correct
उत्तर: c)
सशस्त्र बलों या सेना के जिन मतदाताओं के पर सेना अधिनियम, 1950 के प्रावधान लागू हैं, उनके पास पोस्टल बैलेट (postal ballot) के माध्यम से या उनके द्वारा नियुक्त एक प्रॉक्सी मतदाता ( proxy voter) के माध्यम से मतदान का विकल्प है। एक सेवा मतदाता जो प्रॉक्सी के माध्यम से मतदान करने का विकल्प चुनता है, उसे वर्गीकृत सेवा मतदाता (Classified Service Voter: CSV) कहा जाता है।
Incorrect
उत्तर: c)
सशस्त्र बलों या सेना के जिन मतदाताओं के पर सेना अधिनियम, 1950 के प्रावधान लागू हैं, उनके पास पोस्टल बैलेट (postal ballot) के माध्यम से या उनके द्वारा नियुक्त एक प्रॉक्सी मतदाता ( proxy voter) के माध्यम से मतदान का विकल्प है। एक सेवा मतदाता जो प्रॉक्सी के माध्यम से मतदान करने का विकल्प चुनता है, उसे वर्गीकृत सेवा मतदाता (Classified Service Voter: CSV) कहा जाता है।
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Question 4 of 5
4. Question
1 pointsभारत में, निम्न में से किसे ‘विदेशज वन्यजीव प्रजातियाँ‘ (exotic wildlife species) माना जाता है
- वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के परिशिष्ट I, II और III के अंतर्गत नामित पशु।
- वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूचियों में शामिल प्रजातियाँ।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
- पर्यावरण मंत्रालय के वन्यजीव प्रभाग ने ‘विदेशज वन्यजीव प्रजातियों‘ (exotic wildlife species) के आयात और निर्यात को विनियमित करने के लिए नए नियम पेश किए हैं।
- वर्तमान में, वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशक (Directorate General of Foreign Trade: DGFT), इस तरह के व्यापार की देखरेख करते हैं।
- नए नियमों के तहत, ऐसे जानवरों और पक्षियों के मालिकों और मालिकाना हक़ रखने वाले सभी को अपने राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) के पास अपने स्टॉक को पंजीकृत करना होगा।
- वन्यजीव विभाग के अधिकारी भी इस तरह की प्रजातियों की एक सूची तैयार करेंगे और ऐसे व्यापारियों की सुविधाओं का निरीक्षण करने का अधिकार होगा जिससे वे यह जांच कर सकें कि ये पौधे और जानवर अनुकूल परिस्थितियों में रखे जा रहे हैं या नहीं।
- इसके अतिरिक्त, मालिक के पास अपना स्टॉक घोषित करने के लिए छह महीने का समय होगा।
- हाल ही में जारी की गई एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि ‘विदेशज वन्यजीव प्रजातियाँ‘ (exotic wildlife species) में वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय ( the Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora: CITES) के परिशिष्ट I, II और III के अंतर्गत नामित पशु भी शामिल होंगे।
- इसमें वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसूचियों की प्रजातियाँ शामिल नहीं होगी।
- CITES एक बहुपक्षीय संधि का हिस्सा है जिसमें विलुप्त होने के खतरे की बदलती श्रेणियों के तहत पौधे, पशु और पक्षी शामिल हैं और जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature: IUCN) के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से संरक्षित किया जाएगा। भारत इसका हस्ताक्षरकर्ता सदस्य है।
- संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ क्राइम रिपोर्ट ( World Wildlife Crime Report) 2016 के अनुसार, अपराधी विश्व भर में जंगली जानवरों और पौधों की 7,000 से अधिक प्रजातियों की अवैध रूप से व्यापार कर रहे हैं।
- हाल ही में जारी, अवैध वन्यजीव व्यापार पर अपनी पहली वैश्विक रिपोर्ट में, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने वन्यजीव तस्करी को एक “वैश्विक खतरा” बताया है, जो अन्य संगठित अपराधों जैसे कि आधुनिक दास प्रथा (modern slavery), नशीली दवाओं की तस्करी और हथियारों के व्यापार से भी संबंधित है।
- वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (The Wildlife Crime Control Bureau) एक संगठन है जिसे अवैध व्यापार की निगरानी करने का कार्य सौंपा जाता है।
Incorrect
उत्तर: a)
- पर्यावरण मंत्रालय के वन्यजीव प्रभाग ने ‘विदेशज वन्यजीव प्रजातियों‘ (exotic wildlife species) के आयात और निर्यात को विनियमित करने के लिए नए नियम पेश किए हैं।
- वर्तमान में, वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशक (Directorate General of Foreign Trade: DGFT), इस तरह के व्यापार की देखरेख करते हैं।
- नए नियमों के तहत, ऐसे जानवरों और पक्षियों के मालिकों और मालिकाना हक़ रखने वाले सभी को अपने राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) के पास अपने स्टॉक को पंजीकृत करना होगा।
- वन्यजीव विभाग के अधिकारी भी इस तरह की प्रजातियों की एक सूची तैयार करेंगे और ऐसे व्यापारियों की सुविधाओं का निरीक्षण करने का अधिकार होगा जिससे वे यह जांच कर सकें कि ये पौधे और जानवर अनुकूल परिस्थितियों में रखे जा रहे हैं या नहीं।
- इसके अतिरिक्त, मालिक के पास अपना स्टॉक घोषित करने के लिए छह महीने का समय होगा।
- हाल ही में जारी की गई एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि ‘विदेशज वन्यजीव प्रजातियाँ‘ (exotic wildlife species) में वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय ( the Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora: CITES) के परिशिष्ट I, II और III के अंतर्गत नामित पशु भी शामिल होंगे।
- इसमें वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसूचियों की प्रजातियाँ शामिल नहीं होगी।
- CITES एक बहुपक्षीय संधि का हिस्सा है जिसमें विलुप्त होने के खतरे की बदलती श्रेणियों के तहत पौधे, पशु और पक्षी शामिल हैं और जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature: IUCN) के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से संरक्षित किया जाएगा। भारत इसका हस्ताक्षरकर्ता सदस्य है।
- संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ क्राइम रिपोर्ट ( World Wildlife Crime Report) 2016 के अनुसार, अपराधी विश्व भर में जंगली जानवरों और पौधों की 7,000 से अधिक प्रजातियों की अवैध रूप से व्यापार कर रहे हैं।
- हाल ही में जारी, अवैध वन्यजीव व्यापार पर अपनी पहली वैश्विक रिपोर्ट में, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने वन्यजीव तस्करी को एक “वैश्विक खतरा” बताया है, जो अन्य संगठित अपराधों जैसे कि आधुनिक दास प्रथा (modern slavery), नशीली दवाओं की तस्करी और हथियारों के व्यापार से भी संबंधित है।
- वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (The Wildlife Crime Control Bureau) एक संगठन है जिसे अवैध व्यापार की निगरानी करने का कार्य सौंपा जाता है।
-
Question 5 of 5
5. Question
1 pointsहाल ही में समाचारों में चर्चित “पॉलीक्रैक तकनीक” (Polycrack technology) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
Correct
उत्तर: d)
- देश का पहला सरकारी स्वामित्व वाला अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र (Waste-to-Energy Plant) ओडिशा के मानचेस्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप स्थापित किया गया है।
- पोलीक्रैक (Polycrack ) नामक एक पेटेंट तकनीक वाला संयंत्र है, जो भारतीय रेलवे में पहला और देश में चौथा है। यह विभिन्न प्रकार के कचरे (फ़ीड स्टॉक) को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन, गैस, कार्बन और जल में परिवर्तित करता है।
पॉलीक्रैक (Polycrack ) क्या है?
- यह विश्व की सबसे पहली पेटेंटकृत विषम उत्प्रेरक प्रक्रिया (heterogeneous catalytic process) है जो कई फीडस्टॉक्स को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन, गैस, कार्बन और साथ ही जल में परिवर्तित करती है।
- इससे उत्पन्न होने वाला कचरा ऊर्जा संयंत्र में कचरे के लिए फीडर सामग्री बन जाएगा।
- जो ऊर्जा संयंत्र में उत्पादित की जाएगी, वह हल्के डीजल तेल के रूप में होगी और इस तेल का उपयोग प्रकाश भट्टियों (light furnaces) के लिए किया जाएगा।
Incorrect
उत्तर: d)
- देश का पहला सरकारी स्वामित्व वाला अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र (Waste-to-Energy Plant) ओडिशा के मानचेस्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप स्थापित किया गया है।
- पोलीक्रैक (Polycrack ) नामक एक पेटेंट तकनीक वाला संयंत्र है, जो भारतीय रेलवे में पहला और देश में चौथा है। यह विभिन्न प्रकार के कचरे (फ़ीड स्टॉक) को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन, गैस, कार्बन और जल में परिवर्तित करता है।
पॉलीक्रैक (Polycrack ) क्या है?
- यह विश्व की सबसे पहली पेटेंटकृत विषम उत्प्रेरक प्रक्रिया (heterogeneous catalytic process) है जो कई फीडस्टॉक्स को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन, गैस, कार्बन और साथ ही जल में परिवर्तित करती है।
- इससे उत्पन्न होने वाला कचरा ऊर्जा संयंत्र में कचरे के लिए फीडर सामग्री बन जाएगा।
- जो ऊर्जा संयंत्र में उत्पादित की जाएगी, वह हल्के डीजल तेल के रूप में होगी और इस तेल का उपयोग प्रकाश भट्टियों (light furnaces) के लिए किया जाएगा।









