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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना

2. PCR परीक्षण एक दोधारी तलवार है।

3. चीन से निपटने के लिए SAARC को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘सतत’ पहल

2. स्वच्छ ऊर्जा भारत के आर्थिक सुधार में मदद

3. चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध: डिलीट करने की बजाय नियंत्रण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कॉगएक्स 2020

2. ग्लोब्बा एंडरसोनी

3. जैव सुरक्षा स्तर

4. अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन।

प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करने के दौरान ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ का नवंबर के अंत तक विस्तार करने की घोषणा की। सरकार योजना के विस्तार की दिशा में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना क्या है?

  1. ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना’ को विश्व की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना जाना जाता है, तथा इसका उद्देश्य, कोरोनोवायरस संकट-काल में निर्धनों तथा जरूरतमंदों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न की प्राप्ति सुनिश्चित करना है।
  2. इस योजना को, COVID-19 महामारी के दौरान पहले राहत पैकेज के भाग के रूप में घोषित किया गया था।
  3. इस योजना के अंतर्गत, ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (Antyodaya Anna Yojana- AAY) और ‘प्राथमिकता वाले परिवार’ (Priority Household- PHH) राशन कार्डधारकों हेतु ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (public distribution systemPDS) के तहत सभी लाभार्थियों को खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।
  4. अद्यतन अधिसूचना के अनुसार, परिवार के प्रत्येक सदस्य को 5 किग्रा मुफ्त चावल / गेहूं प्रदान करने के साथ, प्रत्येक परिवार को प्रति माह 1 किग्रा मुफ्त चना भी प्रदान किया जाएगा।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना की मुख्य विशेषताएं
  2. पात्रता
  3. अंत्योदय अन्न योजना’ (AAY)
  4. PDS के बारे में

मेंस लिंक:

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना’ के महत्व तथा विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

PCR परीक्षण एक दोधारी तलवार है।

(PCR testing is a double-edged sword)

Covid-19 का पता लगाने के लिए RT-PCR का उपयोग

SARS-CoV-2 वायरस, Covid19 बीमारी के लिए रोग-कारक एजेंट है। यह एक आरएनए वायरस (RNA virus) होता है, अर्थात, यह अपनी वृद्धि करने हेतु एक स्वस्थ कोशिका में पैठ बनाता है।

SARS-CoV-2 RNA का पता लगाने के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन’ (Reverse Transcriptase Polymerase Chain Reaction- RT-PCR) परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण में वायरस का पता लगाने हेतु ‘रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन’ नामक प्रक्रिया के माध्यम से RNA को DNA में परिवर्तित किया जाता है

क्रियाविधि:

SARS-CoV-2 RNA वायरस का सामान्यतः संक्रमण के तीव्र चरण के दौरान में ‘श्वसन नमूनों’ (respiratory specimens) में पता लगाया जा सकता है।

  1. इसके लिए ऊपरी और निचले श्वसन नमूने (नाक, नासाग्रसनी संबंधी- Nasopharyngeal) एकत्र किए जाते हैं।
  2. इन नमूनों को कई रासायनिक विलयनों में संशोधित करके प्रोटीन तथा वसा जैसे पदार्थों को हटा दिया जाता है, तथा इसके उपरांत नमूने में उपस्थित RNA को अलग किया जाता है।
  3. यह रियल-टाइम RT-PCR सेटअप, आमतौर पर 35 चक्रों से गुजरता है, अर्थात, प्रक्रिया के अंत तक, नमूने में मौजूद वायरस के प्रत्येक कतरे से लगभग विषाणुजनित DNA खंडो की लगभग 35 बिलियन नई प्रतियां बनाई जाती हैं।
  4. विषाणुजनित DNA खंडो की नई प्रतियां बनते ही प्रत्येक को चिन्हित करके फ्लोरोसेंट रंग छोड़ा जाता है, जिसे रियल टाइम में मशीन से जुड़े कंप्यूटर द्वारा मापा जाता है। कंप्यूटर प्रत्येक चक्र के बाद नमूने में फ्लोरोसेंट की मात्रा को ट्रैक करता है। जब फ्लोरोसेंट की मात्रा, एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है, तब नमूने में वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हो जाती है।

 इस परीक्षण को दोधारी तलवार क्यों कहा जाता है?

PCR परीक्षण का लाभ तथा हानि यह है कि, यदि नमूने की 35 बिलियन नई प्रतियों में से एक में भी विषाणु जीन की मौजूदगी का संकेत मिलता है, तो इस परीक्षण में पूरे नमूने को ‘पॉजिटिव’ होने की पुष्टि कर देता है।

  1. इस परीक्षण का लाभ यह है कि वायरस की उपस्थिति का सटीक पता लगाता है।
  2. इसकी हानि यह है, कि इसमें ‘गलत नेगेटिव’ (false negative) तथा ‘गलत पॉजिटिव’ (false positive) परिणामों की अधिकता होती है।

इस परीक्षण में गलत रिपोर्ट आने का कारण

परीक्षण के लिए नमूना तैयार करने के दौरान, यदि प्रयोगशाला वातावरण से किसी जीन का एक भी अंश, परीक्षण ट्यूब में गिर जाता है, तो परीक्षण के दैरान यह परिवर्धित हो जायेगा, तथा परीक्षण का परिणाम ‘पॉजिटिव’ हो जायेगा- परन्तु ‘गलत-पॉजिटिव’।

एक ‘गलत नेगेटिव’ (false negative) PCR रिपोर्ट का मतलब होगा कि, परीक्षण के दौरान व्यक्ति में संक्रमण का पता नहीं लग सका है।

चिंताएं:

‘गलत नेगेटिव’ परिणामों की अपेक्षाकृत उच्च आवृत्ति से महामारी की भयावहता का सही आंकलन नहीं हो पाता है। इसके अलावा, जिन संक्रमित व्यक्तियों की परीक्षण के दौरान ‘गलत नेगेटिव’ रिपोर्ट आती है, उन्हें संगरोध (Quarantined) नहीं किया जाएगा, जिससे वायरस का प्रसरण होगा तथा परिणाम स्वरूप महामारी फैलने की गति में वृद्धि होगी।

समय की मांग:

  • कई नमूनों के परीक्षण करने वाली प्रयोगशालाओं को पर-संदूषण (cross-contamination) से बचना चाहिए।
  • परीक्षणों की विश्वसनीयता के लिए, केवल गुणवत्ता प्रमाणित प्रयोगशालाओं को परीक्षण करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • जनवरी में मात्र एक प्रयोगशाला (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे) में PCR परीक्षण किये जाते थे, जिनकी संख्या बढ़कर 1,000 हो चुकी है।
  • किसी एक गलत पॉजिटिव’ (false positive) परिणाम के संदेहात्मक होने पर चिकित्सक द्वारा अधिकारियों को सतर्क किया जाना चाहिए, तथा संदिग्ध व्यक्ति का अन्य मान्यता-प्राप्त प्रयोगशाला में पुन: परीक्षण किया जाना चाहिए।
  • नतीजों में विसंगति होने पर, संबंधित प्रयोगशाला को सील किया जाना चाहिए तथा प्रोटोकॉल और रिकॉर्ड अनुपालन संबंधी जांच की जानी चाहिए।

RNA

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RNA और DNA में अंतर
  2. RT- PCR तथा एंटीबॉडी परीक्षणों में अंतर
  3. RNA वायरस क्या है?
  4. एंटीबॉडी क्या हैं?

मेंस लिंक:

RT- PCR टेस्ट के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन से निपटने के लिए SAARC को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता

(Reviving SAARC to deal with China)

संदर्भ:

भारत-चीन सीमा तनाव के बीच, चीन अपनी वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत दक्षिणी एशिया में भारत के हितों पर हमला कर रहा है।

  1. चीन की पाकिस्तान से निकटता जगजाहिर है।
  2. नेपाल, वैचारिक और भौतिक कारणों से चीन से नजदीकियां बढ़ा रहा है।
  3. चीन बांग्लादेशी उत्पादों पर 97% तक टैरिफ की छूट देकर बांग्लादेश को लुभा रहा है।
  4. चीन ने व्यापक निवेश करके श्रीलंका के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत किया है।

अतः  भारत से भौगोलिक निकटता के बावजूद भी अधिकांश दक्षिण एशियाई देश आयात के लिए चीन पर निर्भर हैं।

नई दिल्ली के लिए यह चिंता का एक प्रमुख विषय होना चाहिए।

वर्तमान में SAARC की प्रासंगकिता

कई विदेशी नीति विशेषज्ञों का मानना है, कि भारत को चीन से रणनीतिक ढंग से निपटने के लिए दक्षिण एशिया से शुरुआत करनी चाहिए।

इस संदर्भ में, SAARC को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है, जो कि वर्ष 2014 के पश्चात निष्क्रिय अवस्था में है।

  • गत कुछ वर्षों के दौरान, पाकिस्तान के साथ बढ़ती शत्रुता के कारण, SAARC में भारत के राजनीतिक हितों में काफी गिरावट आई है।

भारत ने SAARC के विकल्प के रूप में BIMSTEC जैसे अन्य क्षेत्रीय निकायों में निवेश करना आरम्भ कर दिया है।

  • हालांकि, BIMSTEC, दक्षिण एशिया में SAARC को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है, इसका मुख्य कारण, SAARC देशों की साझा पहचान तथा इतिहास है। इसके अतिरिक्त, बिम्सटेक भौगोलिक रूप से ‘बंगाल की खाड़ी क्षेत्र’ आधारित है, अतः, यह दक्षिण एशियाई देशों के संयोजन हेतु उपयुक्त मंच बनने के लिए अनुपयुक्त है।

समय की मांग:

  • दक्षिण एशियाई आर्थिक एकीकरण की प्रक्रिया को पुनर्जीवित किया जाए।
  • विश्व में, दक्षिणी एशिया आर्थिक व्यापार की दृष्टि से सर्वाधिक विभाजित क्षेत्र है, SAARC देशों के मध्य कुल दक्षिण एशियाई व्यापार का बमुश्किल 5% व्यापार होता है, जबकि आसियान क्षेत्र में कुल व्यापार का 25% अंतर-क्षेत्रीय व्यापार होता है।
  • यदपि दक्षिण एशियाई देशों के मध्य व्यापार-समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, परन्तु, राजनीतिक इच्छाशक्ति तथा परस्पर विश्वास की कमी के कारण व्यापार में सार्थक वृद्धि नहीं हुई है।
  • भारत को आगे बढ़ कर अपने पड़ोसियों के साथ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए कार्य काम करना चाहिए।
  • इसके साथ ही, वर्ष 2007 से लंबित SAARC निवेश संधि पर वार्ता को फिर से शुरू करने की आवश्यकता है।

आगे की चुनौतियां:

भारत में अक्सर पाकिस्तान विरोधी बयानबाजी और इस्लामोफोबिया संबंधी बातें होती रहती हैं। इसके साथ ही बांग्लादेशी प्रवासीसंबंधी बयानबाजी की प्रवृत्ति में बढ़ोत्तरी हो रही है।

  • इस प्रकार की बहुसंख्यक राजनीति से विदेश नीति पर अवांछनीय प्रभाव पड़ता है। इससे भारत की उदार और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र तथा सॉफ्ट पॉवर (Soft Power) की छवि को ठेस पहुचती है, भारत की यही छवि इस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को नैतिक वैधता प्रदान करती है।
  • इन कारणों से, सरकार की आर्थिक परिकल्पना पेचीदा बनी रहती है। इससे, ‘आत्म-निर्भर भारत’ तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे नारों का वास्तविक अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता है।
  • वर्तमान स्थिति को देखते हुए, कई लोगों का मानना है कि, भारत को अपनी आयात-निर्भरता में कटौती करने की आवश्यकता है, यह, आयात प्रतिस्थापन के अप्रचलित आर्थिक दर्शन पर लौटने का संकेत है।
  • यदि यह संरक्षणवाद की ओर वापस लौटने की निशानी है, तो भारत द्वारा, दक्षिण एशियाई आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने में अनिश्चय की स्थिति होगी।

 निष्कर्ष:

क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने से SAARC देशों में परस्पर निर्भरता में वृद्धि होगी, जिसमे भारत की केंद्रीय भूमिका होगी। परिणामस्वरूप, भारत के भारत के रणनीतिक हितों की सुरक्षा भी होगी।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. सार्क बनाम बिम्सटेक
  2. BBIN
  3. मोटर वाहन समझौता
  4. CPEC क्या है?
  5. बेल्ट एंड रोड पहल (Belt and Road initiative)

मेंस लिंक:

SAARC का पुनरुत्थान भारत को चीन से निपटने में किस प्रकार सहायक होगा, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

‘सतत’ पहल

(Sustainable Alternative towards Affordable Transportation-SATAT) Initiative

संदर्भ: हाल ही में, दिल्ली के ओखला स्थित ऊर्जा संयंत्र के लिए इंडियन ऑयल, एनटीपीसी लिमिटेड और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) के बीच अपशिष्ट को लेकर आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है।

  • यह संयंत्र प्रति वर्ष नगरपालिका अपशिष्टों के दहनशील घटकों से उत्पन्न होने वाले 17,500 टन अपशिष्ट व्युत्पन्न ईंधन (Refuse Derived FuelRDF) को संसाधित करेगा, जिसका उपयोग बिजली उत्पन्न करने में किया जाएगा।

यह कंपोजिट बायोगैस उत्पादन संयंत्रों के लिए ‘सतत योजना’ (SATAT scheme) के अंतर्गत, उठाव गारंटी प्रदान करने का एक मौजूदा मॉडल है।

‘सतत’ पहल के बारे में:

इस पहल का उद्देश्य, ‘किफायती परिवहन के लिये सतत विकल्प’ (Sustainable Alternative towards Affordable Transportation-SATAT) प्रदान करना है जो वाहन-उपयोगकर्त्ताओं के साथ-साथ किसानों और उद्यमियों दोनों को लाभान्वित करेगा।

इसके अंतर्गत, संपीडित जैव-गैस (Compressed Bio-Gas-CBG) सयंत्रों को स्वतंत्र उद्यमियों के माध्यम से स्थापित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

क्रियाविधि:

  1. इन संयंत्रों में उत्पादित CBG को हरित परिवहन ईंधन विकल्प के रूप में विपणन के लिये ‘आयल मार्केटिंग कंपनियों’ (OMCs) के ईंधन स्टेशन नेटवर्क में अधिक संख्या में सिलेंडरों के माध्यम से पहुँचाया जाएगा।
  2. उद्यमी, इन संयंत्रों के माध्यम से अन्य उप-उत्पादों को पृथक करके निवेश पर लाभ बढ़ाने के लिये जैव-उर्वरक, कार्बन डाइऑक्साइड सहित बाज़ार में बेचने में सक्षम होंगे।
  3. इस पहल से 75,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार और फसलों के लिए 50 मिलियन टन जैव खाद का उत्पादन करने की उम्मीद है।

नगरपालिका अपशिष्ट तथा ठोस कचरे को CBG में परिवर्तित करने के लाभ

  1. अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी।
  2. किसानों के लिए अतिरिक्त राजस्व स्रोत
  3. उद्यमशीलता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को प्रोत्साहन।
  4. जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में सहायता।
  5. प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के आयात में कमी।
  6. कच्चे तेल / गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के विरुद्ध सुरक्षा।

जैव-गैस (Bio- Gas) क्या होती है?

बायो-गैस प्राकृतिक रूप से अपशिष्ट / जैव स्रोतों, जैसे, कृषि अवशेषों, मवेशियों का गोबर, गन्ना के अपशिष्ट, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्ट, आदि के अवायवीय अपघटन की प्रक्रिया के माध्यम से निर्मित होती है।

संसाधन के पश्चात, इसे संपीडित किया जाता है तथा इसे ‘संपीडित जैव-गैस’ (Compressed Bio-Gas-CBG) कहा जाता है। इसमें 95% से अधिक शुद्ध मीथेन की मात्रा होती है।

CBG क्या होती है?

संपीडित जैव-गैस (CBG), संरचना और ऊर्जा क्षमता में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध प्राकृतिक गैस के समान होती है। इसकी कैलोरी क्षमता (~ 52,000 KJ/kg) तथा अन्य गुण CNG के समान होते है। CBG को वैकल्पिक, नवीकरणीय मोटर वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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आगे की राह:

भारत में विभिन्न स्रोतों से संपीडित बायो-गैस उत्पादन की क्षमता लगभग 62 मिलियन टन प्रति वर्ष है।

मौजूदा बाजारों में घरेलू और खुदरा उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए संपीडित बायो-गैस नेटवर्क को शहर में गैस वितरण (city gas distribution- CGD) नेटवर्क के साथ एकीकृत किया जा सकता है। OMC ईंधन स्टेशनों से खुदरा बिक्री के अलावा, संपीड़ित बायो-गैस को CGD पाइपलाइनों में इंजेक्ट किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बायो गैस क्या है?
  2. CBG क्या है?
  3. बायोगैस में मीथेन की मात्रा
  4. प्राकृतिक गैस बनाम बायोगैस
  5. SATAT पहल की मुख्य विशेषताएं

मेंस लिंक:

SATAT पहल के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

स्वच्छ ऊर्जा भारत के आर्थिक सुधार में मदद

हाल ही में, नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (Rocky Mountain Institute- RMI) द्वारा ‘स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर: भारत की ऊर्जा और गतिशीलता क्षेत्रों के लिए कोविड –19 के बाद अवसर रिपोर्ट’ जारी की गयी।

रिपोर्ट का विषय?

इस रिपोर्ट में भारत के लिए एक स्वच्छ, प्रत्यास्थ तथा न्यूनतम लागत वाले ऊर्जा भविष्य के निर्माण की दिशा में कार्य-प्रोत्साहन तथा बहाली-प्रयत्नों की सिफारिश की गई है।

इन प्रयत्नों में इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम शामिल हैं।

Covid-19 द्वारा प्रस्तुत चुनौतियां:

Covid-19 ने भारत के परिवहन और विद्युत् क्षेत्रों के समक्ष नकदी अवरोध तथा आपूर्ति की कमी से लेकर उपभोक्ता मांग और प्राथमिकताओं में बदलाव संबंधी चुनौतियों को पेश किया है।

स्वच्छ ऊर्जा भविष्य हेतु चार सिद्धांत:

रिपोर्ट में भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को मदद देने के लिए नीति निर्माताओं और अन्य प्रमुख निर्णय लेने वालों के लिए एक रूपरेखा के रूप में चार सिद्धांतों का वर्णन किया गया है:

  1. न्यूनतम लागत वाली ऊर्जा समाधानों में निवेश,
  2. प्रत्यास्थ और सुरक्षित ऊर्जा प्रणालियों की सहायता,
  3. दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्राथमिकता,
  4. सामाजिक और पर्यावरणीय इक्विटी को बढ़ावा।

 आगे की राह:

भारत को लघु, मध्यम और दीर्घ अवधि में आर्थिक सुधारों हेतु रणनीतिक अवसरों की पहचान करने की आवश्यकता है, इस प्रकार, महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के अवसरों में बदला जा सकता है।

परिवहन क्षेत्र में अवसरों के अंतर्गत, सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाना, गैर-मोटर चालित परिवहन अवसंरचना को बढ़ाना और उसका विस्तार करना, जहां तक संभव हो घर से कार्य करने के जरिए वाहन से यात्रा की दूरी को घटाना, माल और यात्री खंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए राष्ट्रीय रणनीतियों का समर्थन करना आवश्यक है, इसके अतिरिक्त भारत को मोटर वाहन निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु प्रयास किये जाने चाहिए।

विद्युत् क्षेत्र में, अवसरों के अंतर्गत, बिजली वितरण व्यवसाय और इसके संचालन में सुधार करना, नवीकरणीय ऊर्जा को वितरित करना और ऊर्जा संसाधनों को वितरित करना और ऊर्जा लचीलापन और नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा हेतु प्रयास किये जाने चाहिए।

क्षमता:

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का परिवहन क्षेत्र 1.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोक सकता है।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 2030 तक साझा, इलेक्ट्रिक और कनेक्टेड यात्री आवाजाही और किफायती, स्वच्छ और अनुकूलित माल परिवहन के माध्यम से ईंधन की मांग के बराबर 600 मिलियन टन तेल बचा सकता है।

बिजली क्षेत्र में भी नवीकरणीय ऊर्जा,ऊर्जा भंडारण,दक्षता और लचीला उत्पादन एवं मांग को अपनाकर महत्वपूर्ण बचत की जा सकती है।

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स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषय।

चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध: डिलीट करने की बजाय नियंत्रण

(Control, not delete: On China apps ban)

संदर्भ:

डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए, भारत सरकार द्वारा 59 ऐप को अवरुद्ध किये जाने की घोषणा की गयी। इनमें से अधिकाँश ऐप्स, चीनी कंपनियों से संबंधित हैं।

सरकार के अपने निर्णय के पक्ष में तर्क:

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने खतरों की उभरती प्रकृति को देखते हुए 59 ऐप्स को ब्लॉक करने का निर्णय लिया है क्योंकि उपलब्ध जानकारी के मद्देनजर ये उन गतिविधियों में लगे हुए हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।

  • मंत्रालय के अनुसार, डेटा सुरक्षा से संबंधित पहलुओं और 130 करोड़ भारतीयों की निजता की सुरक्षा के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं।
  • ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से भारत के बाहर स्थित सर्वरों पर प्रसारित कर रही हैं।
  • इन आंकड़ों का संकलन और इनकी माइनिंग एवं प्रोफाइलिंग उन तत्वों द्वारा किया जा रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की रक्षा के लिए खतरनाक हैं। इस प्रकार उसका प्रभाव अंततः भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए नुकसानदेह है।

डेटा स्थानीयकरण (Data localisation):

सरकार ने कहा कि यह कदम भारतीय उपयोगकर्ताओं के डिजिटल डेटा को चीनी सरकार से बचाने के लिए उठाया गया है तथा यह ‘डेटा स्थानीयकरण’ संबंधी चिंताओं का समाधान करता है।

डेटा स्थानीयकरण का क्या अर्थ है?

डेटा स्थानीयकरण का अर्थ, डेटा उत्पन्न करने वाली किसी देश की सीमाओं में भौतिक रूप से मौजूद किसी डिवाइस पर डेटा संग्रहीत करना है। भारतीय नागरिकों का डेटा भारतीय भू-भाग में ही स्थित किसी केंद्र में संग्रहीत किया जाना अनिवार्य है।

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भारत के लिए डेटा स्थानीयकरण क्यों आवश्यक है?

  1. नागरिक डेटा की सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डेटा संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के आर्थिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए।
  2. न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट, आरबीआई की सिफारिशें, ई-कॉमर्स नीति ड्राफ्ट और क्लाउड नीति पैनल ड्राफ्ट में डेटा स्थानीयकरण के संकेत दिया गया है।
  3. प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा किया गया व्यापक डेटा संग्रह, उन्हें देश के बाहर भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को संसाधित और मुद्रीकृत (monetize) करने में सक्षम बनाता है। अतः व्यक्तिगत डेटा के अनियंत्रित और मनमाने ढंग से उपयोग के खतरों को कम करने के लिए, डेटा स्थानीयकरण आवश्यक है।
  4. डिजिटल तकनीकें जैसे मशीन लर्निंग (machine learningML), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of ThingsIoT), विभिन्न डेटा से प्रचुर कमाई कर सकते हैं। इसके लिए सीमायें स्थापित करना आवश्यक है, अन्यथा इसके परिणाम विनाशकारी हो सकता है।
  5. क्लाउड कंप्यूटिंग के आगमन के साथ, भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश की सीमाओं के बाहर पहुच जाता है, जिससे किसी भी विवाद के उत्पन्न होने पर अधिकार क्षेत्र संबधी संघर्ष होता है।

अनुशंसाएँ:

श्रीकृष्ण समिति ने डेटा के सीमा पार स्थानांतरण और भंडारण पर रोक लगाने हेतु इससे संबंधित मानकों को सख्त करने का सुझाव दिया है। समिति, विदेशी सर्विलांस को रोकने हेतु, भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परिवेश तैयार करने तथा कानून प्रवर्तन के लिए डेटा का स्थानीयकरण पर जोर देती है।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने केवल भुगतान प्रणाली डेटा को भारत में संग्रहीत करने के लिए भुगतान प्रणाली प्रदाताओं के लिए एक कठोर डेटा स्थानीयकरण अधिदेश लागू किया है।

सरकार, वर्ष 2018 से एक डेटा संरक्षण नीति ड्राफ्ट पर भी काम कर रही है, जो इस समय एक संयुक्त संसदीय समिति के विचाराधीन है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्रीकृष्ण समिति किससे संबंधित है?
  2. IoT क्या है?
  3. आईटी एक्ट की धारा 66A
  4. डेटा स्थानीयकरण क्या है?

मेंस लिंक:

डेटा स्थानीयकरण पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कॉगएक्स 2020

(CogX)

  • CogX कृत्रिम बुद्धिमता (ArtifiCial Intelligence) पर आयोजित किये जाने विश्व के प्रमुख आयोजनों में से एक है।
  • इस समारोह का आयोजन प्रतिवर्ष लंदन में किया जाता है तथा इसमें व्यापार, सरकार, उद्योग और अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े 15,000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं।
  • CogX पुरस्कार: कृत्रिम बुद्धिमता में सर्वश्रेष्ठ नवाचारों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दिया जाता है।

चर्चा का कारण:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम MyGov कोरोना हेल्पडेस्क ने प्रतिष्ठित CogX 2020 महोत्सव में बैस्‍ट इनोवेशन फॉर कोविड-19 सोसाइटी” तथा “पीपुल्स च्वाइस कोविड-19 ओवरऑल विनर” श्रेणियों के अंतर्गत दो पुरस्कार प्राप्‍त किए हैं।

ग्लोब्बा एंडरसोनी

(Globba Andersonii)

  • यह दुर्लभ और ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) पौधों की प्रजाति है।
  • इस पौधे को सामान्यतः डांसिंग लेडीज़’ (Dancing Ladies)’ या स्वान फ्लावर्स‘ (Swan Flowers) के रूप में जाना जाता है।
  • यह प्रजाति मुख्य रूप से तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र तक ही सीमित है जिसमें सिक्किम हिमालय एवं दार्जिलिंग पर्वत श्रृंखला शामिल हैं।
  • यह पौधा सामान्यतः सदाबहार वनों में चट्टानी ढलानों पर लिथोफाइट (चट्टान या पत्थर पर उगने वाला पौधा) के रूप में उगता है।

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चर्चा का कारण

शोधकर्त्ताओं की टीम ने लगभग 136 वर्षों के अंतराल के पश्चात तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र के पास सिक्किम हिमालय में इस दुर्लभ व गंभीर रूप से लुप्तप्राय पौधे की प्रजाति को पुनः खोजा है।

जैव सुरक्षा स्तर

बहुधा समाचारों में चर्चित

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अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस

(International Asteroid Day)

  • प्रतिवर्ष 30 जून को मनाया जाता है।
  • इस दिन को 1908 में साइबेरिया और रूसी संघ पर क्षुद्रग्रह के कारण तुंगुस्का (Tunguska) विस्फोट के प्रभाव की वर्षगांठ के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है।
  • इसका उद्देश्य क्षुद्रग्रह प्रभाव खतरे के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना है।
  • 30 जून 1908 को रूस की तुंगुस्का नदी के पास बहुत बड़ा विस्फोट हुआ था जिसे क्षुद्रग्रह के चलते पृथ्वी पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह प्रभाव है।

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