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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. ज़ीलैंडिया (Zealandia)

 

सामान्य अध्ययन-II

1. विश्व बैंक की STARS परियोजना

2. फिलिस्तीन के अस्तित्व पर खतरा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (FME)

2. 59 मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध

3. नागालैंड में कानून और व्यवस्था पर चिंता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कोवाक्सिन (Covaxin)

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं में परिवर्तन

ज़ीलैंडिया

(Zealandia)

हाल ही में, न्यूजीलैंड में GNS साइंस के शोधकर्ताओं ने घोषणा की है कि उन्होंने ज़ीलैंडिया (Zealandia) महाद्वीप के आकार और विस्तार का विस्तृत मानचित्रण कर लिया है।

पृष्ठभूमि:

विश्व में ज्ञात रूप में सात महाद्वीप हैं जिसमें अन्टार्टिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया,अफ़्रीका, यूरोप, दक्षिणी अमरीका और उत्तरी अमरीका शामिल है।

वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने न्यूजीलैंड तथा इसके निकट महासागरीय सतह के नीचे एक आठवें महाद्वीप, ज़ीलैंडिया, के अस्तित्व की पुष्टि की थी।

चूंकि, ज़ीलैंडिया के कुल क्षेत्रफल, 2 मिलियन वर्ग मील का 94% भाग महासागरीय सतह के नीचे स्थित है, अतः महाद्वीप का मानचित्रण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

नवीनतम निष्कर्ष:

  1. ज़ीलैंडिया महाद्वीप का कुल क्षेत्रफल लगभग 2 मिलियन वर्ग मील (5 लाख वर्ग किलोमीटर) है, जोकि ऑस्ट्रेलिया के लगभग आधे आकार के बराबर है।
  2. परन्तु, ज़ीलैंडिया महाद्वीप का मात्र 6% भाग समुद्र तल से ऊपर है। यह भाग न्यूजीलैंड के उत्तरी और दक्षिणी द्वीपों तथा न्यू कैलेडोनिया द्वीप के साथ स्थित है।
  3. इस महाद्वीप के नवीनतम मानचित्र में तटीय रेखाओं, क्षेत्रीय सीमाओं और प्रमुख अधोःमहासागरीय संरचनाओं के नाम दर्शाए गए हैं।
  4. यह मानचित्र, वर्ष 2030 तक पृथ्वी के संपूर्ण महासागरीय तल का मानचित्रण करने हेतु एक वैश्विक पहल का हिस्सा है।
  5. इस मानचित्र से यह भी पता चलता है कि ज़ीलैंडिया किन टेक्टॉनिक प्लेटों पर स्थित है तथा इन प्लेटों में से कौन सी प्लेट, किस अन्य प्लेट की नीचे अधःक्षेपित हो रही है, और यह प्रक्रिया किस गति से संपन्न हो रही है।

ज़ीलैंडिया का उद्भव

पृथ्वी के निर्माण के दौरान पैंजिया महाद्वीप का दो खंडो, ‘गोडवानालैंड तथा लॉरेसिया’ में विखंडन हुआ था।

  • उत्तरी भाग लॉरासिया में यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका महाद्वीपों का निर्माण हुआ।
  • दक्षिण भाग गोंडवानालैंड में आधुनिक अफ्रीका, अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप विकसित हुए।

इसके अतिरिक्त, भूगर्भिक बलों द्वारा इन स्थलीय पिंडो को पुनर्व्यवस्थित करना जारी रहा, तथा गोडवानालैंड से पृथक होने के 30 मिलियन से 50 मिलियन वर्ष पश्चात, सबसे बड़ी टेक्टॉनिक प्लेट – प्रशांत प्लेट के भाग के रूप में, ज़ीलैंडिया, महासागरीय सतह के नीचे क्षेपित होता रहा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पैंजिया, गोंडवाना और लौरसिया
  2. ज़ीलैंडिया कहाँ है?
  3. टेक्टोनिक प्लेट्स क्या हैं? प्रमुख प्लेटों के नाम बताइए।
  4. भूपर्पटी का आकार और संरचना

मेंस लिंक:

ज़ीलैंडिया पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: TOI

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: शिक्षा संबंधी विषय।

विश्व बैंक की STARS परियोजना

यह क्या है?

STARS का पूर्ण स्वरुप (Strengthening Teaching-Learning and Results for States ProgramSTARS) है।

STARS, छह भारतीय राज्यों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और शासन में सुधार करने हेतु विश्व बैंक समर्थित एक परियोजना है। परियोजना में सम्मिलित छह राज्य- हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान हैं।

इस परियोजना से 1.5 मिलियन स्कूलों में 10 मिलियन शिक्षक और 250 मिलियन स्कूली छात्र लाभान्वित होंगे।

परियोजना के अंतर्गत सुधार:

  1. स्कूल सुधार की दिशा में स्थानीय स्तर पर विशिष्ट रूप से निर्मित उपायों के माध्यम से राज्य, जिला और उप जिला स्तरों पर शिक्षा सेवाओं के प्रतिपादन पर ध्यान केंद्रित करना
  2. अध्ययन गुणवत्ता का आकलन करने हेतु बेहतर डेटा संग्रह करना;
  3. बृहत्तर जवाबदेही तथा समावेशन हेतु हितधारकों, विशेष रूप से माता-पिता की मांगों का समाधान करना;
  4. कमजोर वर्ग के छात्रों पर विशेष ध्यान देना।
  5. इन परिवर्तनों के प्रबंधन हेतु शिक्षकों को तैयार करना।
  6. भारत की मानव-पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की शिक्षा पर निवेश करना, तथा इनका संज्ञानात्मक, सामाजिक-व्यवहार और भाषा कौशल विकास सुनिश्चित करना।

आत्मनिर्भर भारत तथा शिक्षा:

‘आत्मनिर्भर भारत’ ऐसे भारत का आह्वान करता है जो अपने नागरिकों के लिए स्थानीय वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन और वितरण करने में सक्षम हो। यह ‘सभी बच्चों के लिए शिक्षा’ पर भी समान रूप से लागू होता है।

विशाल तथा विविधता युक्त जनसँख्या को देखते हुए, शिक्षा जैसी सेवाओं के वितरण हेतु ‘सक्षम-राज्य’ का होना आवश्यक होता है।

राज्य की क्षमता-निर्माण के अंतर्गत ‘अपनी चीजों को स्वतः करने के बारे में सीखने की प्रक्रिया’ सम्मिलित होती है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अवधारणा का मूलतः यही आधार है।

इसलिए, मूलतः इसे आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है।

  • दूसरे शब्दों में, राज्य की क्षमता का अर्थ, सरकार में सरकार द्वारा कार्यों का निष्पादन करना है। इसके अंतर्गत, सरकार द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना तथा विभिन्न सुधारों को लागू करने में सक्षम होने भी सम्मिलित होता है।

राज्य क्षमता निर्माण हेतु STARS का दृष्टिकोण त्रुटिपूर्ण क्यों है?

  1. बुनियादी क्षमता संबंधी विषयों के समाधान में विफलता: STARS के अंतर्गत, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs), जिला और ब्लॉक शिक्षा कार्यालयों तथा स्कूलों में शिक्षकों की रिक्तियों को भरने पर ध्यान नहीं दिया गया है।
  2. विकेंद्रीकृत निर्णय-लेने हेतु, शक्ति प्रदान करना तथा वित्त-अंतरण करना अनिवार्य होता है, STARS के अंतर्गत इस तथ्य की अनदेखी की गयी है। इस हेतु, अग्रिम पंक्ति के अधिकारी-तंत्र क्षमता में निवेश के साथ सामाजिक जवाबदेही को बढ़ावा देते हुए इनकी विवेकाधीन शक्तियों में वृद्धि करना भी आवश्यक होता है।
  3. विश्व बैंक परियोजना में ‘विश्वास’ की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। इसके स्थान पर, बैंक से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) पर पूरी तरह निर्भर करता है, जिसमे साक्ष्यों के आधार पर प्रतिपुष्टि का अभाव होता है।
  4. ‘निजी पहलों का विस्तार’ तथा ‘सरकारी कार्यों को कम करना’ के माध्यम से बुनियादी प्रशासनिक कार्यों को आउटसोर्स करना, शिक्षा को ’स्थानीय आवश्यकताओं के लिए अधिक प्रासंगिक’ या ‘स्थानीय अधिकारियों को सशक्त बनाकर लोकतांत्रिक रूप से लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देना’ जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उपयुक्त नहीं है।

आगे की राह:

  1. प्रशासन को पर्याप्त भौतिक, वित्तीय और मानव संसाधनों से युक्त होना चाहिए। प्रशासनिक रिक्तियां तथा अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त भार, परियोजना के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हानिकारक है।
  2. आवश्यक होने पर, प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत, स्थानीय मामलों को हल करने हेतु संबंधित अधिकारियों को विवेकाधिकार दिया जाना चाहिए।
  3. इस हेतु, प्रशासन में विभिन्न स्तरों पर तथा अपने सहकर्मियों पर विश्वास होना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. STARS परियोजना के तहत शामिल राज्य
  2. विश्व बैंक और इसके वित्त पोषण के बारे में
  3. विश्व बैंक की संस्थाएँ
  4. विश्व बैंक समूह
  5. ओपन डेटा पहल क्या है?

मेंस लिंक:

विश्व बैंक की STARS परियोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

फिलिस्तीन के अस्तित्व पर खतरा

संदर्भ:

24 जून को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में,  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) ने ‘इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष’ को एक ‘ऐतिहासिक मोड़’ पर बताया है।

  • इजराइल द्वारा ‘वेस्ट बैंक’ के कुछ हिस्सों पर अधिकार स्थापित करने की योजना ने फिलिस्तीनियों, कुछ इजरायलियों तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है।

इस तरह का ‘कब्ज़ा’, ‘अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन’ होगा।

उपयुक्त कदम:

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इजरायली सरकार से उसकी ‘कब्ज़ा करने’ संबंधी योजनाओं को छोड़ने के लिए कहा है तथा ‘मध्य पूर्व चतुष्टय’ (Middle East Quartet) (संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र) से अधिदेशित ‘मध्यस्थता’ भूमिका को फिर से शुरू करने के लिए कहा है।

विवाद का विषय

हाल ही में, इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, कथित रूप से, 1 जुलाई को वेस्ट बैंक के लगभग 30% भू-भाग पर कब्ज़ा करने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस घोषणा के मद्देनजर ही चेतावनी का संकेत दिया था।

इस राज्य-हरण में वेस्ट बैंक में वर्ष 1967 के बाद स्थापित बस्तियों तथा उनके आस-पास के क्षेत्रों तथा इन क्षेत्रों से जुडी सड़कों पर इजराइल का कब्ज़ा हो जायेगा।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार ‘राज्य-हरण’ (Annexation) क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, किसी राज्य द्वारा दूसरे राज्य-क्षेत्र पर जबरन कब्ज़ा किये जाने को राज्य-हरण कहा जाता है।
  • इज़राइली कानून द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद भी, ऐसा कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गैरकानूनी है तथा यह ‘किसी राज्य-क्षेत्र पर बल पूर्वक अधिकार को अमान्यता’ के सार्वभौमिक स्वीकृत सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय सहित सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनी निकायों द्वारा अनुमोदित सिद्धांत है।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (UN Human Rights) ने भी ‘आबादी युक्त क्षेत्रों के राज्य-हरण’ को संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा जिनेवा सम्मेलन के उल्लंघन के रूप में घोषित किया है।
  • इस तरह का जबरन कब्ज़ा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तथा महासभा द्वारा स्थापित किये गए ‘युद्ध अथवा बल पूर्वक राज्य-क्षेत्र अधिग्रहण को अमान्यता’ नियम के विपरीत है।

‘वेस्ट बैंक’ कहां है?

यह पश्चिमी एशिया के भूमध्यसागरीय तट के पास एक स्थल-रुद्ध क्षेत्र है। पूर्व में इसकी सीमा जॉर्डन से मिलती है तथा यह दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में ‘ग्रीन-लाइन’ द्वारा इज़राइल से पृथक होता है। वेस्ट बैंक के अंतर्गत पश्चिमी मृत सागर तट का काफी हिस्सा भी आता है।

इस क्षेत्र की विवादित बस्तियाँ

  1. वर्ष 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के पश्चात् वेस्ट बैंक पर जॉर्डन द्वारा कब्जा कर लिया गया था।
  2. इजरायल ने वर्ष 1967 के छह दिवसीय युद्ध के पश्चात इसे वापस छीन लिया, और तब से वेस्ट बैंक पर इसका अधिकार है।
  3. इजराइल ने वेस्ट बैंक में लगभग 130 बस्तियों का निर्माण किया है, तथा पिछले 20-25 वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में इसी तरह की कई छोटी, अनौपचारिक बस्तियां विकसित हो चुकी हैं।
  4. इस क्षेत्र में 4 लाख से अधिक इजरायल उपनिवेशी निवास करते है, उनमें से कई यहूदी धार्मिक लोग, इस भूमि पर बाइबिल के अनुसार अपने पैदाइशी हक़ का दावा करते हैं।
  5. इनके अतिरिक्त्त, इस क्षेत्र में 26 लाख फिलिस्तीनियों इस क्षेत्र में निवास करते है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रस्तावित पश्चिम एशिया शांति योजना का अवलोकन?
  2. सिक्स डे वॉर क्या है?
  3. मानवाधिकार उच्चायुक्त
  4. ‘मध्य पूर्व चतुष्टय’ (Middle East Quartet)

मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को खोजिए:

  1. गोलन हाइट्स
  2. वेस्ट बैंक
  3. यरूशलेम
  4. मृत सागर

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: खाद्य प्रसंस्करण।

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (FME)

(Scheme for formalization of Micro Food Processing Enterprises- FME)

संदर्भ:

हाल ही में सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (PM Formalization of Micro Food Processing EnterprisesPM FME) का आरम्भ किया गया है।

PM FME योजना” को 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा।

योजना के बारे में:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पिछले महीने इस योजना को अपनी मंजूरी प्रदान की गयी थी।

यह अखिल भारतीय स्तर पर असंगठित क्षेत्र के लिए एक केन्द्र प्रायोजित योजना है।

उद्देश्य:

  1. सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के द्वारा वित्त अधिगम्यता में वृद्धि
  2. लक्ष्य उद्यमों के राजस्व में वृद्धि
  3. खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अनुपालन
  4. समर्थन प्रणालियों की क्षमता को सुदृढ़ बनाना
  5. असंगठित क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में पारगमन
  6. महिला उद्यमियों और आकांक्षापूर्ण जिलों पर विशेष ध्यान
  7. अपशिष्ट से धन अर्जन गतिविधियों को प्रोत्साहन
  8. जनजातीय जिलों में लघु वनोपजों पर ध्यान देना।

मुख्य विशेषताऐं:

  1. केन्द्र प्रायोजित योजना। व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा।
  2. 2,00,000 सूक्ष्म-उद्यमों को ऋण से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
  3. योजना को 2020-21 से 2024-25 तक के लिए 5 वर्ष की अवधि हेतु कार्यान्वित किया जाएगा।
  4. समूह दृष्टिकोण
  5. खराब होने वाली वस्तुओं पर विशेष ध्यान

प्रशासनिक और कार्यान्वयन तंत्र

  1. इस योजना की निगरानी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (IMEC) के द्वारा केन्द के स्तर पर की जाएगी।
  2. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य/संघ शासित प्रदेशों की एक समिति एसएचजी/ एफपीओ/क़ोओपरेटिव के द्वारा नई इकाईयों की स्थापना और सूक्ष्म इकाईयों के विस्तार के लिए प्रस्तावों की निगरानी और अनुमति/अनुमोदन करेगी।
  3. राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करते हुए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे।
  4. इस कार्यक्रम में तीसरे पक्ष का एक मूल्याँकन और मध्यावधि समीक्षा तंत्र भी बनाया जाएगा।

योजना के लाभ:

  1. करीब आठ लाख सूक्ष्म-उद्यम सूचना, बेहतर विवरण और औपचारिक पहुँच के माध्यम से लाभान्वित होंगे।
  2. विस्तार और उन्नयन के लिए 2,00,000 सूक्ष्म उद्यमों तक ऋण से जुड़ी सब्सिडी और हैंडहोल्डिंग सहायता को बढ़ाया जाएगा।
  3. यह उन्हें गठित, विकसित और प्रतिस्पर्धी बनने में समर्थ बनाएगा।
  4. इस परियोजना से नौ लाख कुशल और अल्प-कुशल रोजगारों के सृजन की संभावना है।
  5. इस योजना में आकांक्षापूर्ण जिलों में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, महिला उद्यमियों और उद्यमियों को ऋण तक पहुँच बढ़ाया जाना शामिल है।
  6. संगठित बाजार के साथ बेहतर समेकन।
  7. सोर्टिग, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण आदि जैसी समान सेवाओं को पहुँच में वृद्धि।

योजना की आवश्यकता

इस क्षेत्र के 98 प्रतिशत, लगभग 25 लाख अपंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण उद्यम, असंगठित और अनियमित हैं। इन इकाईयों का करीब 68 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और इनमें से 80 प्रतिशत परिवार आधारित उद्यम हैं।

यह क्षेत्र बहुत सी चुनौतियों, जैसे ऋण तक पहुँच न होना, संस्थागत ऋणों की ऊँची लागत, अत्याधुनिक तकनीक की कमी, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के साथ जुड़ने की असक्षमता और स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के साथ अनुपालन, आदि का सामना करता है।

इस क्षेत्र को मजबूत करने से, नुकसान में कमी, खेती के अतिरिक्त रोजगार सृजन अवसर और किसानों की आय को दुगना करने के सरकार के लक्ष्य तक पहुँचने में महत्वपूर्ण रूप से मदद मिलेगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. केंद्र प्रायोजित तथा केंद्रीय क्षेत्रक योजना के मध्य अंतर
  2. इस योजना में राज्यों की भूमिका
  3. राज्य स्तर पर इस योजना की निगरानी कौन करता है?
  4. योजना का उद्देश्य

मेंस लिंक:

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (FME) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषय।

59 मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध

संदर्भ: भारत सरकार ने TikTok और WeChat सहित 59 ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों की भारतीय बाजार से सबसे बड़ी सफाई है।

सरकार द्वारा 59 चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित करने का कारण

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत दी गई सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के उपयोग को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम 2009 के अंतर्गत तथा खतरों की उभरती प्रकृति को देखते हुए 59 ऐप्स को ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया है।

  • उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये ऐप्स उन गतिविधियों में लगे हुए हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।
  • सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कई मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के बारे में विभिन्‍न प्रकार की रिपोर्ट शामिल हैं। इन ऐप्स का दुरुपयोग चोरी करने तथा उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से भारत के बाहर स्थित पर सर्वरों पर प्रसारित करने में किया जा रहा है।

इसलिए, करोड़ों भारतीय मोबाइल उपयोगकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया है।

पृष्ठभूमि:

इन प्रतिबंधों को भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों पर इन चीनी ऐप्स को चिन्हित करने के बाद लागू किया गया है।

गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी इन दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को ब्‍लॉक करने के लिए एक व्‍यापक सिफारिश भेजी है।

इस मंत्रालय को कुछ ऐप के संचालन के संबंध में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए जोखिम के बारे में नागरिकों की चिंताओं को जाहिर करने वाली कई प्रस्‍तुतियां भी मिली हैं।

यह प्रतिबंध भारतीय उपयोगकर्ताओं को किस प्रकार प्रभावित करेंगे?

इनमे से अधिकांश प्लेटफार्मों पर भारतीय निर्माता काम करते हैं, जिनमें से कई के लिए यह आय का एकमात्र स्रोत है। प्रतिबंधित सूची में सम्मिलित कुछ ऐप भारतीयों में व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं।

  • TikTok, (प्रतिबंधित ऐप्स में से एक), के भारत में 100 मिलियन से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। टिक टॉक (TikTok), कई उपयोगकर्ताओं के लिए आय का एकमात्र स्रोत था।

इसके अलावा, इनमें से यूसी न्यूज़ (UC News) जैसे कई ऐप्स के भारत में कार्यालय और कर्मचारी हैं, इसलिए प्रतिबंध के बाद इनकी नौकरियों पर संकट आ सकता है।

आगे की राह:

  • सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Google और Apple को अपने संबंधित एप्लिकेशन स्टोर से प्रतिबंधित एप्लिकेशन को हटाने के निर्देश जारी किए हैं।
  • इसके अलावा, दूरसंचार ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को अपने नेटवर्क पर इन एप्लिकेशन की पहुंच और उपयोग को अवरुद्ध करने के लिए कहा जाएगा।
  • इसके लिए, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत दी गई सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के उपयोग को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम 2009 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग किया है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषय।

नागालैंड में कानून और व्यवस्था पर चिंता

संदर्भ:

हाल ही में, नागालैंड के राज्यपाल ने, मुख्यमंत्री को पत्र द्वारा राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में चिंता व्यक्त की है। इनके अनुसार, “सशस्त्र गिरोहों द्वारा दिन-प्रतिदिन संवैधानिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकार की वैधता को चुनौती दी जा रही है।” तथा वह “संविधान के अनुच्छेद 371ए (1)(बी) के तहत राज्य में संवैधानिक दायित्वों से दूर नही रह सकते है”।

अनुच्छेद 371A(1)(b) क्या है?

यह अनुच्छेद विशेष रूप से नागालैंड में लागू होता है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल को “कानून और व्यवस्था के संबंध में विशेष जिम्मेदारी” प्रदान की गयी है।

इसके प्रावधानों के अनुसार, सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, राज्य के कानून और व्यवस्था संबंधित सभी मामलों पर राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा।

चर्चा का विषय

राज्यपाल द्वारा कानून और व्यवस्था के पतन पर नागरिक समाज के वर्गों की चिंताओं को उठाया गया है; राज्य में सशस्त्र समूहों द्वारा अवैध वसूली का मुद्दा कई वर्षों से चिंता का विषय रहा है।

आगे की राह

सरकार द्वारा, वर्ष 2015 से नागा शांति समझौते की घोषणा के बाद भी, राज्य में इन समूहों के साथ समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

इसका एक प्रमुख कारण, एक अलगाववादी संगठन ‘NSCN-IMद्वारा नागालैंड राज्य के लिए अलग ध्वज तथा अलग संविधान की मांग है। इसके साथ ही, यह संगठन, राज्य में समानांतर प्रशासनिक और अर्धसैनिक संरचना चला रहा है, जिसे यह समाप्त करने नहीं चाहता है।

यह संगठन, ‘ग्रेटर नागालैंड’ की मूल अवधारणा में विश्वास रखता है, जिसके माध्यम से यह अन्य नागा-संगठनों तथा उत्तर-पूर्वी संगठनों में असंतोष भडकाता रहता है। इस कारण अन्य उग्रवादी संगठनों को एक साथ वार्ता के मंच पर नहीं आ पाते, जिससे संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद भी समस्या बनी हुई है।

 नागा राजनीति का संक्षिप्त इतिहास

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया गया तथा वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से चले जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National CouncilNNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. NNC ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड का समर्थन किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ नगालिम (NSCN) का गठन

वर्ष 1975 में नागा नेशनल कौंसिल (NNC) ने सरकार के साथ शिलांग समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, तथा भारतीय संविधान को स्वीकार कर लिया। NNC के निर्णय से नाराज होकर थ्यूइंगालेंग मुइवा तथा खपलांग ने मिलकर वर्ष 1980 में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड (NSCN) का गठन किया।

वर्ष 1988 में, हिंसक झड़प के बाद NSCN,  NSCN (IM) और NSCN (K) में विभाजित हो गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
  2. नागा क्लब और NNC
  3. नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
  4. AFSPA का अवलोकन।
  5. अनुच्छेद 371 का अवलोकन

मेंस लिंक:

नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

कोवाक्सिन (Covaxin)

  • भारत की कोविड-19 की पहली संभावित वैक्सीन कोवाक्सिन (COVAXIN) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (Drug Controller General of India- DCGI) से पहले और दूसरे चरण के लिए मानव परीक्षण की अनुमति मिल गई है।
  • इस वैक्‍सीन का जुलाई से मानवों पर परीक्षण शुरू किया जाएगा।
  • इस वैक्सीन को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी द्वारा ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Medical Research- ICMR) तथा ‘राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान’ (National Institute of Virology- NIV) के सहयोग से विकसित किया गया है।

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