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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के निष्कर्ष

 

सामान्य अध्ययन-II

1. समीक्षा याचिका क्या होती है?

2. नशा मुक्त भारत: वार्षिक कार्य योजना (2020-21)

3. सीमा संबंधी दावे: दक्षिण एशिया में सीमाओं की पुनर्कल्पना

 

सामान्य अध्ययन-III

1. MSME वर्गीकरण और पंजीकरण हेतु समेकित अधिसूचना

2. सांख्यिकी दिवस

3. एंथ्रोपोज़ क्या है?

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. मारीच (Maareech)

2. संकल्प पर्व

3. मछली पकड़ने वाली बिल्लियां

4. गाइनान्ड्रोमॉर्फ्स

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ।

आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के निष्कर्ष

(WMO findings on lightning strikes)

प्रमुख बिंदु:

  1. वर्ष 2018 में, ब्राजील में 709 किलोमीटर लंबी आकाशीय बिजली (lightning– तड़ित) चमकने का रिकार्ड दर्ज किया गया।
  2. इससे पहले, सबसे लंबी आकाशीय बिजली चमकने का रिकार्ड अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य के नाम था, यहाँ 20 जून 2007 को 321 किमी की लंबाई में आकाशीय बिजली चमकी थी।
  3. विश्व में आकाशीय बिजली गिरने की सर्वाधिक घटनाएं, प्रति वर्ष औसतन 8 मिलियन, ब्राजील में घटित होती है।
  4. वर्ष 2019 में अर्जेंटीना में आकाशीय बिजली की चमक 73 सेकंड तक दिखी, जोकि अब तक बिजली चमकने का सर्वाधिक लंबा रिकार्ड है।
  5. इसके पहले, सर्वाधिक देर तक बिजली चमकने का रिकॉर्ड 30 अगस्त 2012 को फ़्रांस के प्रांत ‘एल्प्स कोट डीएज़ुर’ (Alpes-Côte d’Azur) में दर्ज किया गया था, जिसकी अवधि 74 सेकंड थी।
  6. बिजली चमकने को अब रिकॉर्ड- बुक्स में सामिलित किया जाता है, इन्हें वैज्ञानिक भाषा में ‘मेगाफ़्लैश’ (Megaflashes) के नाम से जाना जाता है।

भारत में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं:

  1. भारत में आकाशीय बिजली के गिरने से होने वाली सर्वाधिक मौतें उत्तर प्रदेश में होती है, इसके पश्चात बिहार का स्थान है।
  2. वर्ष 2019 के दैरान, 1 अप्रैल से 31 जुलाई के मध्य बिहार में बिजली गिरने से कम से कम 170 लोगों की मृत्यु हो गई।
  3. समस्त भारत में, प्रति महीने आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
  4. भारत में, किसी अन्य मौसम संबंधी दुर्घटना की अपेक्षा आकाशीय बिजली गिरने के कारण अधिक मौतें होती हैं।

आकाशीय बिजली (तड़ित) क्या होती है?

आकाशीय बिजली अथवा तड़ित, वातावरण में बिजली का एक तीव्र तथा व्यापक निस्सरण होती है। इसका कुछ भाग पृथ्वी की ओर निर्देशित होता है।

सामन्यतः यह तड़ित निस्सरण, 10-12 किमी. ऊँचे आद्रता-युक्त बादलों में उत्पन्न होता है, तथा यह बादल के ऊपरी हिस्से और निचले हिस्से के बीच विद्युत आवेश के अंतर का परिणाम है।

lighting

आकाशीय बिजली का निर्माण

  1. आकाशीय बिजली उत्पन्न करने वाले बादलों का आधार पृथ्वी की सतह से लगभग 1-2 किमी. ऊपर होता है तथा उनका शीर्ष लगभग 10-12 किमी. की ऊँचाई तक होता है। इन बादलों के शीर्ष पर तापमान -35 डिग्री सेल्सियस से -45 डिग्री सेल्सियस तक होता है।
  2. जैसे ही, जलवाष्प इन बादलों में ऊपर की उठता है, तापमान में कमी के कारण इसका संघनन हो जाता है। इस प्रक्रिया में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे जल के अणु और ऊपर की ओर गति करते हैं।
  3. जैसे-जैसे वे शून्य से कम तापमान की ओर बढ़ते हैं, जल की बूंदें छोटे बर्फ के क्रिस्टल में बदल जाती हैं। इन जल कणों की ऊपर की ओर गति जारी रहती है, जिससे उनके द्रव्यमान में भी वृद्धि होती है। अंत में भारी होकर पृथ्वी की ओर गिरना शुरू कर देते हैं।
  4. इस प्रकार एक प्रक्रिया का निर्माण हो जाता है, जिसमे बर्फ के छोटे क्रिस्टल ऊपर की ओर जबकि बड़े क्रिस्टल नीचे की ओर गति करते हैं।
  5. इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, इन कणों के मध्य टकराव होता है जिससे इलेक्ट्रॉन निर्मुक्त होते हैं, यह प्रक्रिया विद्युत स्पार्क की उत्पत्ति के समान कार्य करती है। गतिमान मुक्त इलेक्ट्रॉनों में परस्पर अधिक टकराव होता है, तथा नए इलेक्ट्रॉनों का निर्माण होता हैं; इस प्रकार एक चेन रिएक्शन का आरंभ होता है।
  6. इस प्रक्रिया से एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें बादलों की ऊपरी परत धनात्मक रूप से आवेशित तथा मध्य परत नकारात्मक रूप से आवेशित होती है। इन दोनों परतों के मध्य विद्युत-विभव में कई बिलियन वोल्ट का अंतर विद्यमान होता है। इससे कुछ ही समय में ही दोनों परतों के मध्य एक विशाल विद्युत धारा (लाखों एम्पीयर) का प्रवाह होने लगता है।
  7. परिणामस्वरूप भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है जिससे बादल की दोनों परतों के मध्य वायु-स्तंभ का तापमान बढ़ जाता है। इस ऊष्मा के कारण बिजली कड़कने के दौरान वायु-स्तंभ का रंग लाल नजर आता है। गर्म वायु के विस्तारित होने से प्रघाती तरंगे (shock waves) उत्पन्न होती है, जिसके परिणामस्वरूप गड़गड़ाहट की आवाज़ आती है।

आकाशीय बिजली पृथ्वी पर किस प्रकार गिरती है?

  1. पृथ्वी, बिजली की अच्छी संवाहक होत्ती है, तथा विद्युतीय रूप से तटस्थ होती है। हालांकि, बादल की मध्य परत की तुलना में, यह धनात्मक रूप से आवेशित हो जाती है। परिणामस्वरूप, लगभग 15% -20% बिजली का प्रवाह पृथ्वी की ओर निर्देशित हो जाता है। यह विद्युत प्रवाह जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है।
  2. आकाशीय बिजली की, पेड़ों, टावरों या इमारतों जैसी लंबी वस्तुओं पर गिरने की अधिक संभावना होती है। सतह से लगभग 80-100 मीटर की दूरी पर आकाशीय बिजली में इन लंबी वस्तुओं की ओर मार्ग परिवर्तित करने की प्रवृत्ति होती है। इसका कारण होता है, कि वायु, बिजली की अच्छी संवाहक नही होत्ती है, और वायु में गतिशील इलेक्ट्रान, पृथ्वी की ओर अपेक्षाकृत अच्छे संवाहक तथा निकटवर्ती माध्यम से प्रवाहित होते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पृथ्वी पर बिजली किस प्रकार गिरती है?
  2. मेगाफ्लैश क्या हैं?
  3. क्या पृथ्वी बिजली की एक सुचालक है?
  4. बादलों के प्रकार
  5. भारत में बिजली गिरने की घटनाएँ

मेंस लिंक:

आकाशीय बिजली की घटनाओं पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

समीक्षा याचिका क्या होती है?

(Review Petition)

संदर्भ:

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा, व्यभिचार (Adultery) को गैर-अपराध घोषित करने संबंधी वर्ष 2018 के निर्णय की समीक्षा करने से इंकार कर दिया गया है।

वर्ष 2018 का फैसला

उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में एक संवैधानिक पीठ द्वारा वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक ठहराया गया था है, जिसके तहत व्यभिचार (Adultery) एक आपराधिक कृत्य माना जाता था।

संवैधानिक पीठ के अनुसार, यह कानून महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाता है तथा महिलाओं को ‘पतियों की संपत्ति’ बनाता है।

  • यदि रिश्ते में कोई एक व्यक्ति दूसरे को धोखा देता है, तो वे आपस में अलग हो सकते हैं, लेकिन बेवफ़ाई (Infidelity) को अपराध के साथ जोड़ना उचित नहीं है।
  • न्यायालय का तर्क था कि इस दावे के पक्ष में कोई डेटा मौजूद नहीं है कि व्यभिचार को गैर-अपराध घोषित करने से ‘यौन नैतिकता में अराजकता’ अथवा तलाक की संख्या में वृद्धि हो जायेगी।

धारा 497 को निरस्त करने के कारण

  • धारा 497, महिलाओं को अधीनस्थ स्थिति बनाए रखती है तथा गरिमा, यौन स्वायत्तता से वंचित करती है, और लैंगिक रूढ़िवादी विचारधारा पर आधारित है।
  • धारा 497, महिलाओं को चल संपति समझते हुए, उनकी कामुकता को नियंत्रित करने का प्रयास करती है तथा महिलाओं की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा को ठेस पहुचाती है।
  • ये संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) का भी उल्लंघन करती है।

व्यभिचार पर उच्चत्तम न्यायालय के फैसले:

व्यभिचार संबंधी कानून पर, अतीत में तीन बार – 1954 में, 1985 में और 1988 में न्यायालय में निर्णय दिए गए है।

  1. वर्ष 1954 में, उच्चत्तम न्यायालय ने धारा 497 द्वारा ‘समानता के अधिकार’ के उल्लंघन को अस्वीकार कर दिया था।
  2. वर्ष 1985 में, यह कहा गया कि महिलाओं को कानून में शिकायतकर्ता पार्टी के रूप में शामिल करने की आवश्यकता नहीं है।
  3. वर्ष 1988 में, उच्चत्तम न्यायालय ने कहा कि व्यभिचार कानून “तलवार के बजाय ढाल” है।

समीक्षा याचिका क्या है और इसे कब दायर किया जा सकता है?

संविधान के अनुच्छेद 137 के अंतर्गत भारत के उच्चतम न्यायालय को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्रदान की गई है। इसके तहत, उच्चतम न्यायालय अपने किसी भी निर्णय या आदेश की समीक्षा कर सकता है।

समीक्षा का विषय-क्षेत्र:

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा किसी निर्णय की समीक्षा किये जाने हेतु, प्रावधान यह होता है कि, इसमें मामले से संबंधित किसी नए तथ्य को सम्मिलित नहीं किया जाए बल्कि गंभीर त्रुटियों के कारण हुई न्यायिक विफलता में सुधार किया जाए।

समीक्षा याचिका में उच्चत्तम न्यायालय अपने पूर्व के निर्णयों में निहित ‘स्पष्टता का अभाव’ तथा ‘महत्त्वहीन’ गौण त्रुटियों की समीक्षा कर उनमें सुधार कर सकता है।

वर्ष 1975 के एक फैसले में, न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर ने कहा था कि एक ‘समीक्षा याचिका को तभी स्वीकार किया जा सकता है जब न्यायालय द्वारा दिये गए किसी निर्णय में भयावह चूक या अस्पष्टता जैसी स्थिति उत्पन्न हुई हो।‘

वर्ष 2013 के एक फैसले में, उच्चत्तम न्यायालय ने अपने निर्णय की समीक्षा करने के तीन आधार स्पष्ट किये थे-

  1. नए और महत्त्वपूर्ण साक्ष्यों की खोज, जिन्हें पूर्व की सुनवाई के दौरान शामिल नहीं किया गया था। जो पहले याचिकाकर्ता के संज्ञान में नहीं थे, अथवा उसके द्वारा पर्याप्त प्रयासों के बाद भी न्यायालय में उपस्थित नहीं किये जा सके हो।
  2. दस्तावेज़ में कोई त्रुटि अथवा अस्पष्टता रही हो।
  3. कोई अन्य पर्याप्त कारण, अर्थात् ऐसा कोई कारण जो अन्य दो आधारों के अनुरूप हो।

समीक्षा याचिका कौन दायर कर सकता है?

नागरिक प्रक्रिया संहिता और उच्चतम न्यायालय के नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो फैसले से असंतुष्ट है, समीक्षा याचिका दायर कर सकता है भले ही वह उक्त मामले में पक्षकार हो अथवा न हो। न्यायालय प्रत्येक समीक्षा याचिका पर विचार नही करता है। न्यायालय समीक्षा याचिका को कोई महत्त्वपूर्ण आधार दिखने पर ही अनुमति देता है।

समीक्षा याचिका दायर किये जाने की समयावधि:

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1996 के नियमों के अनुसार:

  1. समीक्षा याचिका निर्णय की तारीख के 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिये।
  2. कुछ परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता द्वारा देरी के उचित कारणों को न्यायालय के समक्ष पेश करने पर, न्यायालय समीक्षा याचिका दायर करने की देरी को माफ़ कर सकती है।

समीक्षा याचिका हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

  1. न्यायालय के नियमों के अनुसार, ‘समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई वकीलों की मौखिक दलीलों के बिना की जाएगी’। सुनवाई न्यायधीशों द्वारा उनके चैम्बरों में की जा सकती है।
  2. समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई, व्यवहारिक रूप से न्यायाधीशों के संयोजन से अथवा उन न्यायधीशों द्वारा भी की जा सकती है जिन्होंने उन पर निर्णय दिया था।
  3. यदि कोई न्यायाधीश सेवानिवृत्त या अनुपस्थित होता है तो वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्थापन किया जा सकता है।
  4. अपवाद के रूप में, न्यायालय मौखिक सुनवाई की अनुमति भी प्रदान करता है। वर्ष 2014 के एक मामले में, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि “मृत्युदंड” के सभी मामलों संबधी समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा खुली अदालत में की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. समीक्षा याचिका तथा क्यूरेटिव याचिका में अंतर
  2. समीक्षा याचिका प्रक्रिया
  3. कौन दाखिल कर सकता है?
  4. समीक्षा याचिका दायर करने की समय-अवधि
  5. IPC की धारा 497 क्या है?
  6. अनुच्छेद 137 क्या है?

मेंस लिंक:

समीक्षा याचिका क्या है? समीक्षा याचिका हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

नशा मुक्त भारत : वार्षिक कार्य योजना (2020-21)

 संदर्भ:

“अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस” के अवसर पर “सबसे ज्यादा प्रभावित 272 जिलों के लिए नशा मुक्त भारत : वार्षिक कार्य योजना (2020-21)” का ई-शुभारम्भ किया।

इस कार्यक्रम का आरंभ केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया है।

कार्य योजना के घटक

  1. जागरूकता संबंधी कार्यक्रम;
  2. उच्च शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों और विद्यालयों पर जोर;
  3. अस्पतालों में उपचार सुविधाओं पर जोर;
  4. सेवा प्रदाताओं हेतु क्षमता निर्माण कार्यक्रम।

कार्यान्वयन:

  1. नशा मुक्त भारत वार्षिक कार्य योजना, 2020-21 में सबसे ज्यादा प्रभावित 272 जिलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है और नारकोटिक्स ब्यूरो, सामाजिक न्याय द्वारा जागरूकता और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार के संयुक्त प्रयासों सहित त्रिस्तरीय कार्यवाही की जायेगी।
  2. नशा मुक्ति केन्द्रों की स्थापना की जाएंगी।
  3. नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में बच्चों और युवाओं को जागरूक करना; सामुदायिक भागीदारी और जन सहयोग बढ़ाना; एकीकृत नशा मुक्ति केन्द्रों (Integrated Rehabilitation Centre for AddictsIRCAs) की स्थापना की जायेगी।
  4. सरकारी अस्पतालों को नशा मुक्ति केन्द्र खोलने के लिए सहायता; और भागीदारों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमो का आयोजन।

प्रमुख तथ्य:

  1. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा “सबसे अधिक प्रभावित” 272 जिलों की पहचान की गयी है, जिनमे से अधिकतर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के हैं।
  2. ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत मूल रूप से वर्ष 2015 में पंजाब में शिरोमणि अकाली दल द्वारा की गयी थी।
  3. मादक द्रव्यों के सेवन से सर्वाधिक प्रभावित जिलों की राष्ट्रीय सूची के अनुसार, पंजाब के 22 जिलों में से 18 जिले, तथा हरियाणा के 22 जिलों में से 10 जिले NCB द्वारा चिन्हित किए गए हैं।

आवश्यकता

लगभग 8,50,000 भारतीय ड्रग्स का सेवन करते है। लगभग 4,60,000 बच्चों और 1.8 मिलियन वयस्कों को सूघने वाले नशों से मुक्ति हेतु सहायता की आवश्यकता है तथा 7.7 मिलियन भारतीयों को अफीम-जनित नशों से मुक्ति की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. “अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस” – इस वर्ष की थीम।
  2. IRCAS क्या हैं? उन्हें कैसे वित्त पोषित किया जाता है?
  3. UNODC के बारे में
  4. भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग के विस्तार तथा पैटर्न पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण- मुख्य विशेषताएं

मेंस लिंक:

2020-21 के लिए वार्षिक नशा-विरोधी कार्ययोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

सीमा संबंधी दावे: दक्षिण एशिया में सीमाओं की पुनर्कल्पना

(इस लेख को समझने हेतु निम्नलिखित तथ्यों को समझ लें।)

  • राज्य-केंद्रवाद (State-centrism), किसी राज्य को, राष्ट्र-राज्य (Nation States) की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर, विभिन्न समुदायों अथवा क्षेत्रों के मध्य किसी विवाद के उत्पान होने पर एकमात्र निर्णायक होने का अधिकार प्रदान करता है।
  • इस सिद्धांत के अनुसार, ‘राज्य’ वह होता है, अन्य राज्यों के साथ वार्ता में “राष्ट्रीय” हितों को स्पष्ट, परिभाषित तथा प्रतिनिधित्व करता है।

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चर्चा का कारण

दक्षिण एशियाई राजनीति को देखते हुए, ‘कालापानी विवाद’, जैसे सीमा-विवादों का ‘समाधान करने’ के बजाय ‘नियंत्रित’ (Handle) किये गए हैं।

यहां पर मुख्य समस्या यह है कि संबधित फैसले ‘राज्य-केंद्रित प्रतिमानों’ (State-Centric Paradigm) के अनुसार लिए जाते है।

  • इन निर्णयों में, विवादित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा उनकी भावनाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
  • प्रायः, राष्ट्र-राज्य के सीमाओं पर रहने वाले लोगों के जीवन, उनकी जीविका तथा उनकी भलाई से क्षेत्रीय सीमाओं को अधिक मूल्यवान तथा महत्वपूर्ण माना जाता है।

निर्णयकर्ता भूल जाते हैं कि इन स्थानों पर देश न केवल सांस्कृतिक और सभ्यतागत पृष्ठभूमि को साझा करते हैं, बल्कि एक ‘आधिकारिक’ मान्यता प्राप्त खुली सीमा भी होती है।

समय की मांग:

दक्षिण एशिया संभवतः समस्त विश्व में राज्यों का सबसे प्राकृतिक क्षेत्रीय समूह है। और साथ ही, यह सबसे जटिल तथा विवादित समूहन भी है।

दक्षिण एशिया को ‘एक राज्यों के क्षेत्र’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘विभिन्न क्षेत्रों का क्षेत्र’ के रूप में देखे जाने की आवश्यकता है।

यह एक ऐसी भूमि है जहां ‘संपर्क क्षेत्र’ संबधित सदस्य-राज्यों द्वारा साझा क्षेत्रीय सीमाओं की सीमाओं से परे मौजूद होने चाहिए।

‘किस क्षेत्र में किस राज्य द्वारा और किस आधार पर “अतिक्रमण” किया गया है?‘ ऐसे “परेशान करने वाले” सवालों के इर्द-गिर्द घूमती साधारण बहसों से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

ऐसा इसलिए आवश्यक है क्योंकि इस तरह के सवाल उन लोगों को सर्वाधिक परेशान करते हैं जो उन क्षेत्रों में सामान्य जीवन-यापन करते हैं।

  • एक प्रकार से, दक्षिण एशिया में ‘राष्ट्र-राज्यों’ के सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासी वास्तव में किसी एक राष्ट्र-राज्य से संबंधित नहीं होते हैं।
  • दूसरे शब्दों में, वे एक साथ दोनों राज्यों से संबंधित होते हैं।

बहुलता, भिन्नता और समावेशिता सीमावर्ती सत्ता मीमांसा हेतु सम्बद्धता प्रदान करती है; ये राष्ट्र विशेषाधिकार को व्यक्त करने वाले तत्वों, यथा: व्यष्‍टिक, एकीकरणीय, विशिष्ट पहचान आदि तर्कों की उपेक्षा करते है।

आगे की राह:

भारत और नेपाल दोनों, तथा ऐसे मामलों में, अन्य दक्षिण एशियाई देशों को “क्षेत्रीय सहयोग” की नई भाषा की प्रविष्टियाँ प्रस्तुत करने से पहले दक्षिण एशिया को ‘क्षेत्रों के एक क्षेत्र’ के रूप में पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

‘क्षेत्र और क्षेत्रीय पहचान’ दक्षिण एशिया में मात्र “व्यावहारिक राजनीति” के मुद्दे नहीं हैं; बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि आधिकारिक तौर पर राजनीति करने के बजाय, स्वाभाविक रूप से तैयार किए गए उपायों को समायोजित किया जाय।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय:  समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

MSME वर्गीकरण और पंजीकरण हेतु समेकित अधिसूचना

(Consolidated notification on MSME classification and registration)

संदर्भ: हाल ही में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (Micro Small and Medium Enterprises- MSME) मंत्रालय द्वारा, 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी होने वाली ‘MSME वर्गीकरण और पंजीकरण हेतु समेकित अधिसूचना’ जारी की गयी है।

यह अधिसूचना MSME के वर्गीकरण या पंजीकरण के संबंध में पूर्व में जारी की गई सभी अधिसूचनाओं का स्‍थान लेगी।

प्रमुख बिंदु:

  1. अधिसूचना के अनुसार, इसके बाद, एक MSME को उद्यम के नाम से जाना जाएगा, क्योंकि यह एंटरप्राइज़ शब्द के अधिक करीब है। फलस्‍वरूप, पंजीकरण की प्रक्रिया को उदयम पंजीकरण के नाम से जाना जाएगा।
  2. उद्यम पंजीकरण स्व-घोषणा के आधार पर ऑनलाइन कराया जा सकता है। इसके लिए किसी दस्तावेज, कागजात, प्रमाण पत्र या प्रमाण को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं है।
  3. MSME वर्गीकरण के लिए बुनियादी मानदंड, संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश और ‘कारोबार’ होंगे।
  4. किसी भी उद्यम चाहे सूक्ष्‍म, लघु अथवा मध्‍यम हो, उसके कारोबार की गणना करते समय वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के निर्यात को बाहर रखा जाएगा;
  5. मंत्रालय ने देश भर में चैंपियंस कंट्रोल रूम को पहल के अंतर्गत पंजीकरण और इसके बाद भी उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह बनाया है।

नए वर्गीकरण के अनुसार:

  1. सूक्ष्म उद्यम: एक करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं होगा और 5 करोड़ रुपये का कारोबार होगा।
  2. लघु उद्यम: 10 करोड़ रुपये तक का निवेश और 50 करोड़ रुपये तक का कारोबार।
  3. मध्यम उद्यम: – 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश तथा 250 करोड़ रुपये तक का कारोबार।

महत्व तथा निहितार्थ

यह उपाय MSMEs के कार्य-प्रणाली को पूरी तरह से परिवर्तित कर, यह विश्व स्तर पर MSME  के प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेंगे।

महामारी नियंत्रण के तुरंत बाद ही, प्रोत्साहन पैकेज के साथ, ये उद्यम तेजी से V -आकार की अर्थव्यवस्था बहाली की स्थिति में होंगे।

MSMEs का महत्व

देश के भौगोलिक विस्तार के अंतर्गत, लगभग 63.4 मिलियन यूनिट के साथ, MSMEs सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 6.11% और सेवा गतिविधियों के अंतर्गत जीडीपी का 24.63% तथा  भारत के विनिर्माण उत्पादन में 33.4% योगदान करते हैं।

MSMEs लगभग 120 मिलियन व्यक्तियों को रोजगार देने में सक्षम हैं और भारत से कुल निर्यात में लगभग 45% योगदान करते हैं।

लगभग 20% MSME ग्रामीण क्षेत्र आधारित हैं, जो MSME क्षेत्र में महत्वपूर्ण ग्रामीण कार्यबल के उपयोग को इंगित करता है।

अतिरिक्त तथ्य:

अंतर्राष्ट्रीय MSME दिवस 27 जून को  मनाया गया।

इसका विषय- COVID-19: द ग्रेट लॉकडाउन और लघु व्यवसाय पर इसके प्रभाव” था।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत के GDP और निर्यात में MSME क्षेत्र का हिस्सा
  2. MSME वर्गीकरण के लिए बुनियादी मानदंड।
  3. भारत सरकार के अनुसार उदयम किसे कहा जाता है?
  4. MSME का वर्गीकरण।
  5. V -आकार की अर्थव्यवस्था बहाली क्या है?

मेंस लिंक:

भारत के MSME क्षेत्र की संभावित क्षमता कितनी है? भारत में MSME क्षेत्र की वृद्धि से जुड़ी चुनौतियों और चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

सांख्यिकी दिवस

(Statistics day)

प्रतिवर्ष 29 जून को मनाया जाता है।

सांख्यिकी दिवस को प्रो. पी सी महालानोबिस की जयंती पर, राष्ट्रीय सांख्यिकी संबंधी प्रणाली की स्थापना करने में उनके अमूल्य योगदान के सम्मान में मनाया जाता है।

विषय (Theme)

इस वर्ष का थीम है: SDG- 3 (स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करें एवं सभी उम्रों के लिए कल्याण को बढ़ावा दें) & SDG- 5 (लैंगिक समानता हासिल करें और सभी महिलाओं तथा लड़कियों को अधिकार संपन्न बनायें)।“

पीसी महालनोनोबिस का सांख्यिकी में योगदान (1893-1972):

  1. उन्हें भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के मुख्य वास्तुकार और भारत में सांख्यिकीय विज्ञान के पिता के रूप में जाना जाता है।
  2. उन्होंने 1931 में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical InstituteISI) की स्थापना की।
  3. संस्थान ने कार्ल पियर्सन की बायोमेट्रिका (Biometrika) की तर्ज पर सांख्य पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया।
  4. 1959 में ISI को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था बनाया गया था।
  5. उन्होंने केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO), नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) और एनुअल सर्वे ऑफ़ इंडस्ट्रीज (ASI) की स्थापना में भी मदद की।
  6. उन्होंने सांख्यिकीय प्रतिरूपों पर संयुक्त राष्ट्र उप-आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
  7. 1936 में उन्होंने महालनोबिस दूरी नाम का एक सांख्यिकीय पद्यति प्रस्तुत की। इसका व्यापक रूप से क्लस्टर विश्लेषण और वर्गीकरण तकनीकों में उपयोग किया जाता है।
  8. महालनोबिस मॉडल को द्वितीय पंचवर्षीय योजना में लागू किया गया था, जिसने भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण की दिशा में वृद्धि हेतु कार्य किया।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण संबंधी विषय।

एंथ्रोपोज़ क्या है?

(Anthropause)

एंथ्रोपोज़ (Anthropause), ब्रिटेन में शोधकर्ताओं द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है। यह दो शब्दों, एंथ्रोपो (Anthropo) अर्थात् मनुष्य से संबंधित और पॉज (Pause) अर्थात् ठहराव से मिलकर बना है।

इसे ‘ग्रेट पॉज़’ (Great Pause) के रूप में भी जाना जाता है।

यह COVID-19 से प्रेरित लॉकडाउन अवधि तथा अन्य प्रजातियों पर इसके प्रभाव को संदर्भित करता है।

इस अवधि में लगाये गए प्रतिबंधो के कारण असामान्य पशु व्यवहार

लॉकडाउन के दैरान कई स्थानों पर वन्यजीवों में असामान्य व्यवहार की प्रवृत्ति देखी गई; जैसे चिली के सैंटियागो में प्यूमा (Pumas), तेल अवीव (इज़राइल) के शहरी पार्कों में दिन के समय सियार, इटली के पास शांत जल में डॉल्फिन को, तथा थाईलैंड की सड़कों पर बंदरों की बंदर लड़ाई।

इस अवधि के अध्ययन का कारण

लॉकडाउन के परिणामस्वरूप, प्रकृति में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए है। विशेषकर शहरी वातावरण में, अब अधिक जानवर देखे जा रहे हैं तथा साथ ही कुछ “अप्रत्याशित जीव” भी देखे गए हैं।

वहीं, दूसरी ओर कुछ जीवों के लिए लॉकडाउन ने स्थितियों को और जटिल तथा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

  • उदाहरणार्थ: शहरी आवास वाले जीव-जंतुओं जैसे चूहे, और बंदरों के लिये, जो मनुष्यों द्वारा प्रदान किये गए भोजन पर निर्भर होते है, लॉकडाउन ने उनका जीवन अधिक कठिन एवं चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि 21वीं सदी में इस लॉकडाउन अवधि का अध्ययन मानव-वन्यजीव संबंधों के लिये एक मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।

यह वैश्विक जैव विविधता (Global Biodiversity) के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता (Integrity of Ecosystems) बनाए रखने तथा वैश्विक स्तर पर ज़ूनोसिस रोग एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों की भविष्यवाणी करने में भी उपयोगी हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानचित्र पर, तेल अवीव, सैंटियागो और थाईलैंड की अवस्थिति
  2. भारत में डॉल्फ़िन प्रजातियाँ और उनके निवास स्थान
  3. एंथ्रोपॉज क्या है? यह शब्द किसने गढ़ा है?
  4. ज़ूनोसेस (Zoonoses)

 मेंस लिंक:

एंथ्रोपॉज पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


मारीच (Maareech)

यह एक स्वदेश निर्मित उन्नत ‘टॉरपीडो डेकॉय प्रणाली’ (Torpedo Decoy System) है जिसे सभी फ्रंटलाइन जहाजों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।

  • इसे हाल ही में भारतीय नौसेना द्वारा अपने बेड़े में शामिल किया गया है।
  • इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • यह अपनी ओर आने वाले टॉरपीडो खोजने तथा बेअसर करने में सक्षम है।

संकल्प पर्व

(Sankalp Parva)

  • संस्कृति मंत्रालय पेड़ लगाने के लिए 28 जून से 12 जुलाई 2020 तक ‘संकल्प पर्व’ का आयोजन कर रहा है।
  • संस्कृति मंत्रालय द्वारा उन पांच पेड़ों को लगाए जाने को प्राथमिकता दे रहा है, जो हमारे देश की हर्बल विरासत का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • ये पेड़ हैं – (i) ‘बरगद’ (ii) ‘आंवला’ (iii) ‘पीपल’ (iv) ‘अशोक’ (v) ‘बेल’।

 मछली पकड़ने वाली बिल्लियां

(Fishing Cats)

चर्चा का कारण

ओडिशा सरकार ने भितरकणिका राष्ट्रीय उद्यान में दो वर्ष के लिए मछली पकड़ने वाली बिल्लियों के लिए संरक्षण परियोजना शुरू की है।

प्रमुख तथ्य:

मछली पकड़ने वाली बिल्ली रात्रिचर (Nocturnal) जीव है।

यह पश्चिम बंगाल का राज्य पशु है।

पर्यावास: भारत में, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी की घाटियों और पश्चिमी घाटों में हिमालय की तलहटी में सुंदरवन के मैंग्रोव जंगलों में मछली पकड़ने वाली बिल्लियाँ मुख्य रूप से पाई जाती हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN लाल सूची में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध।
  2. CITES की परिशिष्ट II में सूचीबद्ध।
  3. भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I में सूचीबद्ध।

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गाइनान्ड्रोमॉर्फ्स

(Gynandromorphs)

ये नर तथा मादा ऊतकों वाले जीव होते है, तथा इन्हें वैज्ञानिक समुदाय द्वारा आनुवंशिक विपथन के रूप में देखा जाता है।

सामान्यतः नर और मादा जीवों में उनके उतकों के वितरण के कारण विषमता पाई जाती है लेकिन किसी एक जीव में दोनों विशेषताओं का एक साथ पाया जाना गाइनान्ड्रोमॉर्फी (Gynandromorphism) कहा जाता है।

यह क्रस्टेशिया (Crustacea) और एरेक्निडा (Arachnida) जैसे कुछ संधिपाद प्राणीयों में सामान्य रूप से पाई जाती है।

चर्चा का कारण

शोधकर्ताओं ने भारत की लिबेलुलिड ड्रैगनफ्लाई क्रोकोथेमिस सर्विलिया (Libellulid Dragonfly Crocothemis Servilia) में गाइनान्ड्रोमॉर्फी (Gynandromorphism) का पता लगाया है।

gynandromorphs


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