HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
भारतीय इतिहास में मुगल काल के दौरान प्रचलित ‘परवान’ शब्द निम्नलिखित में से किसे संदर्भित करता है
Correct
उत्तर: c)
निशान (Nishan) – शाही परिवार के एक सदस्य का आदेश।
फरमान (Farman) – बादशाह का आदेश।
परवान (Parwana) – उच्च अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेश।
सियाहा हुज़ूर (Siyaha huzur) – प्रांतीय अदालत की कार्यवाही।
Incorrect
उत्तर: c)
निशान (Nishan) – शाही परिवार के एक सदस्य का आदेश।
फरमान (Farman) – बादशाह का आदेश।
परवान (Parwana) – उच्च अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेश।
सियाहा हुज़ूर (Siyaha huzur) – प्रांतीय अदालत की कार्यवाही।
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Question 2 of 5
2. Question
चोलों के शिलालेखों में विभिन्न प्रकार के करों का उल्लेख मिलता है। इन शिलालेखों में सर्वाधिक उल्लिखित कर निम्नलिखित में से कौन-सा है?
Correct
उत्तर: b)
चोलों के शिलालेखों में विभिन्न प्रकार के करों के लिए 400 से अधिक सूचक शब्दों का उल्लेख मिलता है।
सर्वाधिक उल्लिखित कर वेट्टी (Vetti) है, जिसे नगद के बजाए जबरन श्रम के रूप में वसूला जाता था अर्थात् जबरन श्रम और कदामई, भू-राजस्व थे।
इसके अतिरिक्त, घर पर छाजन डालने पर लगने वाला कर, खजूर या ताड़ के पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी का उपयोग पर लगने वाला कर, पारिवारिक संपत्ति का उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए लगने वाले कर आदि का भी उल्लेख मिलता है।
Incorrect
उत्तर: b)
चोलों के शिलालेखों में विभिन्न प्रकार के करों के लिए 400 से अधिक सूचक शब्दों का उल्लेख मिलता है।
सर्वाधिक उल्लिखित कर वेट्टी (Vetti) है, जिसे नगद के बजाए जबरन श्रम के रूप में वसूला जाता था अर्थात् जबरन श्रम और कदामई, भू-राजस्व थे।
इसके अतिरिक्त, घर पर छाजन डालने पर लगने वाला कर, खजूर या ताड़ के पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी का उपयोग पर लगने वाला कर, पारिवारिक संपत्ति का उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए लगने वाले कर आदि का भी उल्लेख मिलता है।
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Question 3 of 5
3. Question
चोल शिलालेखों में भूमि की कई श्रेणियों का उल्लेख मिलता है। उनमें से “वेल्लनवगाई भूमि” निम्नलिखित में से किससे संबंधित थी?
Correct
उत्तर: c)
भूमि की प्रमुख श्रेणियां निम्नलिखित थीं:
वेल्लनवगाई: गैर-ब्राह्मण किसान स्वामियों की भूमि।
ब्रह्मदेय: ब्राह्मणों को भेंट की गई भूमि।
शालाभोग: किसी स्कूल के रखरखाव के लिए दी गई भूमि।
देवदाना, तिरुनमटुक्कनी: मंदिरों को उपहार में दी गई भूमि।
पल्लिच्चदम: जैन संस्थाओं को दान की गई भूमि।
Incorrect
उत्तर: c)
भूमि की प्रमुख श्रेणियां निम्नलिखित थीं:
वेल्लनवगाई: गैर-ब्राह्मण किसान स्वामियों की भूमि।
ब्रह्मदेय: ब्राह्मणों को भेंट की गई भूमि।
शालाभोग: किसी स्कूल के रखरखाव के लिए दी गई भूमि।
देवदाना, तिरुनमटुक्कनी: मंदिरों को उपहार में दी गई भूमि।
पल्लिच्चदम: जैन संस्थाओं को दान की गई भूमि।
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Question 4 of 5
4. Question
यंग बंगाल आन्दोलन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसने पुरानी परंपराओं और अनुचित रीति-रिवाजों का विरोध किया।
- इसने महिलाओं के अधिकारों और उनकी शिक्षा की वकालत की।
- इसने मूर्ति पूजा के विरुद्ध चर्चाएं आयोजित कीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: d)
यंग बंगाल आन्दोलन के संस्थापक हेनरी विलियम डेरेजिओ थे। वे कलकत्ता के हिंदू कॉलेज में अध्यापक थे।
उनके अनुयायियों को डेरेजियन और उनके आंदोलन को यंग बंगाल आंदोलन के रूप में जाना जाता था।
उन्होंने पुरानी परंपराओं और अनैतिक रीति-रिवाजों का विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और उनकी शिक्षा की भी वकालत की।
उन्होंने मूर्ति पूजा, जातिवाद और अंधविश्वासों के विरुद्ध संगठनों की स्थापना की और चर्चाएं आयोजित कीं।
Incorrect
उत्तर: d)
यंग बंगाल आन्दोलन के संस्थापक हेनरी विलियम डेरेजिओ थे। वे कलकत्ता के हिंदू कॉलेज में अध्यापक थे।
उनके अनुयायियों को डेरेजियन और उनके आंदोलन को यंग बंगाल आंदोलन के रूप में जाना जाता था।
उन्होंने पुरानी परंपराओं और अनैतिक रीति-रिवाजों का विरोध किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और उनकी शिक्षा की भी वकालत की।
उन्होंने मूर्ति पूजा, जातिवाद और अंधविश्वासों के विरुद्ध संगठनों की स्थापना की और चर्चाएं आयोजित कीं।
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Question 5 of 5
5. Question
प्रार्थना समाज का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या था
Correct
उत्तर: b)
प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में आत्मराम पांडुरंग ने की थी, जिसका उद्देश्य लोगों को एक ईश्वर में विश्वास करने और केवल एक ईश्वर की पूजा के लिए प्रेरित करना था। मुख्य सुधारक वे बुद्धिजीवी थे जो हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था में सुधारों की वकालत करते थे।
इसने जातिगत प्रतिबंध को हटाने, बाल विवाह को समाप्त करने, महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग की।
इस समाज की धार्मिक बैठकें हिंदू, बौद्ध और ईसाई ग्रंथों पर आधारित थीं।
Incorrect
उत्तर: b)
प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में आत्मराम पांडुरंग ने की थी, जिसका उद्देश्य लोगों को एक ईश्वर में विश्वास करने और केवल एक ईश्वर की पूजा के लिए प्रेरित करना था। मुख्य सुधारक वे बुद्धिजीवी थे जो हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था में सुधारों की वकालत करते थे।
इसने जातिगत प्रतिबंध को हटाने, बाल विवाह को समाप्त करने, महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग की।
इस समाज की धार्मिक बैठकें हिंदू, बौद्ध और ईसाई ग्रंथों पर आधारित थीं।








