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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. पुणे स्थित एक एनजीओ द्वारा ‘लाल-बाल-पाल’ की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट (GEM)

2. काला अजार (Kala Azar)

3. अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस, 2020

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारतीय रिज़र्व बैंक के निगरानी में शहरी, बहु-राज्य सहकारी बैंक

2. कार्बन मुक्त परिवहन परियोजना

3. लॉकडाउन के दौरान कई शहरों में ओजोन प्रदूषण में वृद्धि

4. अकादमिक और अनुसंधान सहयोग संवर्द्धन योजना (स्पार्क)

5. स्टाइरीन गैस रिसाव

6. अवैध वन्यजीव व्यापार पर वैश्विक रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. देश में गेहूं का शीर्ष योगदानकर्ता

2. देश में गेहूं का शीर्ष योगदानकर्ता

3. भारत के बाहर दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय

4. नैविगेटिंग द न्यू नॉर्मल

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

पुणे स्थित एक एनजीओ द्वारा ‘लाल-बाल-पाल’ की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास

संदर्भ: पुणे स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) सरहद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की म्रत्यु शताब्दी के अवसर पर साहित्यिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रंखला शुरू करेगा।

इसका उद्देश्य स्वतंत्रता-संग्राम काल के दौरान ‘लाल-बाल-पाल’ के नाम से प्रसिद्ध ‘लाला लाजपत राय’, ‘लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक’ तथा ‘बिपिन चन्द्र पाल’ की स्मृतियों को पुनर्जीवित करना है। इसके साथ ही यह कार्यक्रम पश्चिमी बंगाल तथा महाराष्ट्र के मध्य संबंधो को मजबूत करेंगे

कार्यक्रमों के आयोजन का कारण

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आधुनिक काल में, भारत के इन तीनो राज्यों के मध्य ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबधो को ‘लाल-बाल-पाल’ त्रिमूर्ति में मजबूती प्रदान की है।

स्वतंत्रता-पश्चात, महाराष्ट्र और पंजाब के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक बंधनों में मजबूती आयी है, परन्तु, अतीत की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आत्मीयता की समृद्ध विरासत के बाद भी महाराष्ट्र तथा बंगाल के संबंध कुछ कमजोर हुए हैं।

मुख्य विशेषताएं

  • इस कार्यक्रम की अवधि दो वर्ष की होगी तथा इसे महाराष्ट्र-बंगाल मैत्री अध्याय नाम दिया गया है।
  • कार्यक्रम को दोनों राज्यों में जनता के ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थानवादी आंदोलन’ के रूप में परिकल्पित किया है।
  • इसका आरम्भ लोकमान्य तिलक की मृत्यु शताब्दी (1 अगस्त, 1920) से होगा तथा महान दार्शनिक, श्री अरबिंदो घोष की 150 वीं जयंती (15 अगस्त, 2022) तक जारी रहेगा।

‘लाल- बाल- पाल’ के कार्यों का संक्षिप्त परिचय

  • इस त्रिमूर्ति ने स्वदेशी आंदोलन के दूसरे चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह आंदोलन, वर्ष 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल के विभाजन के बाद जबरदस्त तेजी से फैला था, तथा इसमें सभी आयातित वस्तुओं के बहिष्कार और भारत-निर्मित वस्तुओं के उपयोग का आह्वान किया गया था।
  • लाल-बाल-पाल ने बंगाल विभाजन के विरोध में संपूर्ण देश में भारतीयों को संगठित किया तथा ब्रिटिश वस्तुओं के बाहिष्कार, हडतालों, धरना-प्रदर्शन आदि के लिए जनता को प्रेरित किया। बंगाल से आरंभ होकर यह आन्दोलन शीघ्र ही देश के अन्य भागों में फ़ैल गया।
  • यह राष्ट्रवादी आंदोलन अपने मुख्य नेता बाल गंगाधर तिलक की गिरफ्तारी तथा बिपिन चंद्र पाल और अरबिंदो घोष द्वारा सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के कारण धीरे-धीरे फीका पड़ गया।

कुछ तथ्य:

  1. वर्ष 1895 में, लाला लाजपत राय द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की शुरुआत की गयी। यह पहला भारतीय बैंक था, जो पूर्णतयाः भारतीय पूंजी से शुरू किया गया था, और आज तक काम कर रहा है।
  2. वर्ष 1917 में, लाला लाजपत राय ने अमेरिका में इंडियन होम रूल लीग की स्थापना की।
  3. वर्ष 1884 में, बाल गंगाधर तिलक द्वारा ‘डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की गयी। इस सोसाइटी के तहत, उन्होंने, प्राथमिक शिक्षा के लिए न्यू इंग्लिश स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना की।
  4. बिपिन चंद्र पाल का विचार था कि स्वदेशी वस्तुओं पर निर्भरता से भारतीय जनता को गरीबी से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय सिविल सेवा (ICS) में शामिल होने वाला पहला भारतीय
  2. अरबिंदो घोष का योगदान
  3. तिलक की गीता-रहस्य और संत तुकाराम के अभंगों का बंगाली में अनुवाद किसने किया?
  4. रवींद्रनाथ टैगोर का योगदान
  5. शान्तिनिकेतन की स्थापना किसने की?
  6. बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय कौन था?
  7. स्वदेशी आंदोलन के उद्देश्य
  8. लाल- बाल- पाल’ का योगदान

मेंस लिंक:

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ‘लाल- बाल- पाल’ के योगदान पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: शिक्षा संबंधी विषय।

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट (GEM)

 (Global Education Monitoring Report GEM)

संदर्भ: हाल ही में, यूनेस्को द्वारा ‘वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट’ (Global Education Monitoring Report GEM), 2020 जारी की गयी है।

GEM रिपोर्ट, 2020 में, शिक्षा संबधी ‘सतत विकास लक्ष्य’-4 (Sustainable Development Goal 4- SDG 4) के अंतर्गत प्रगति का मूल्यांकन किया गया है।

मुख्य निष्कर्ष:

  • COVID-19 महामारी के कारण, विश्व की शिक्षा प्रणालियों में असमानताओं में वृद्धि हुई है।
  • विश्व में लगभग 40% अल्प तथा निम्न-मध्यम आय वाले देश COVID-19 से उपजे संकट के दौरान लागू लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर छात्रों के लिए पढाई हेतु उचित माध्यम उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। इसके साथ ही इन देशों में, निर्धन, भाषाई अल्पसंख्यकों तथा विकलांग छात्रों को पढाई से वंचित होने के सकंट का सामना करना पड़ा।
  • महामारी के दौरान पढाई को जारी रखने के प्रयासों से गैर-सुविधा प्राप्त छात्रों में बहिष्करण की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। अप्रैल 2020 में, विश्व भर में स्कूल बंद होने के दौरान, लगभग 91% छात्र स्कूल से बाहर थे।

शैक्षणिक विकल्पों के साथ समस्याएं:

  • स्कूल बंद होने के दौरान, शैक्षणिक संस्थाओं ने दूरस्थ शिक्षा प्रणालियों से पढाई जारी रखने का प्रयास किया, परन्तु, कक्षा में पढाई के विकल्प के रूप में अपर्याप्त व्यवस्था प्रदान कर पाए।
  • कई गरीब देशों ने रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से पढाई का विकल्प चुना, तथा निम्न आय वाले 55% देशों ने, निम्न-मध्यम-आय वाले 73% देशों तथा उच्च-मध्यम-आय वाले 93% देशों ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों को चुना।
  • सरकारों की प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता के कारण डिजिटल विभाजन ने शिक्षा-प्रणाली के इन माध्यमों की सीमाओं को उजागर कर दिया है।
  • सभी छात्रों और शिक्षकों को उपलब्ध प्लेटफार्मों का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त इंटरनेट कनेक्शन, उपकरण, कौशल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं प्राप्त नहीं है।

सुविधाहीन विद्यार्थियों के लिए समस्याएं

  • स्कूल बंद होने से, वह सभी प्रणालियाँ भी बाधित हो गयी जिससे कई वंचित शिक्षार्थी लाभान्वित होते हैं।
  • नेत्रहीन तथा बहरे छात्रों के लिए पढाई के संसाधन स्कूलों के बाहर उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
  • ऑटिज्म तथा अन्य अक्षमता ग्रस्त बच्चों को कंप्यूटर के सामने कार्य करने अथवा दैनिक स्कूल दिनचर्या के बाधित होने की चुनौती का सामना करना पड़ा है।
  • निर्धन छात्रों की, जिन्हें स्कूल में मुफ्त भोजन या मुफ्त सैनिटरी नैपकिन की सुविधा प्राप्त होती है, स्कूल बंद होने से मुसीबते बढी है।

परीक्षाओं का रद्द होना

  • भारत सहित कई देशों में परीक्षाओं को रद्द होने से छात्रों की स्कोरिंग के लिए शिक्षकों के निर्णयों पर निर्भरता में वृद्धि हो सकती है।
  • इससे छात्रों की छवि के अनुसार परिणाम प्रभावित हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GEM रिपोर्ट कौन जारी करता है?
  2. रिपोर्ट का अवलोकन
  3. यूनेस्को और इसके प्रमुख कार्यक्रमों के बारे में
  4. SDG क्या हैं?
  5. शिक्षा संबंधी SDG लक्ष्य

मेंस लिंक:

COVID 19 महामारी ने दुनिया भर में शिक्षा को किस प्रकार प्रभावित किया है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

काला अजार (Kala Azar)

संदर्भ:

लीशमैनियासिस (leishmaniasis) के इलाज के लिए उपलब्ध एकमात्र दवा मिल्टेफोसिन (miltefosine) तेजी से अपनी प्रभाविकता खोती जा रही है। इसका कारण, इस बीमारी के लिए जिम्मेदार परजीवी के अंदर औषधि प्रतिरोध की क्षमता विकसित हो रही है।

  • इस हेतु, शोधकर्ताओं की एक टीम मिल्टेफ़ोसिन प्रतिरोध से निपटने के तरीके तलाश रही है। इस अनुसंधान समूह ने पहली बार कम्प्यूटेशनल रूप से डिज़ाइन किए गए सिंथेटिक पेप्टाइड्स का उपयोग करके लीशमैनिया के ट्रांसपोर्टर प्रोटीन के ऑलस्टेरिक मॉड्यूलेशन को दिखाया है।
  • इन आशाजनक शोध परिणामों से संकेत मिलता है कि यह पद्यति औषध प्रतिरोधी लीशमैनिया परजीवी के उपचार के लिए आने वाले समय में उपयोगी साबित हो सकती है।

‘काला अजार’ क्या होता है?

आंत के लीशमैनियासिस (Visceral leishmaniasisVL) को आमतौर पर भारत में काला अजार के रूप में जाना जाता है। यदि इसका समय से इलाज नहीं कराया गया तो 95% से अधिक मामलों में यह घातक साबित होता है।

प्रसरण: लीशमैनिया जीन के प्रोटोजोआ परजीवी के कारण, यह बीमारी यकृत, प्लीहा (आंत) और अस्थि मज्जा जैसे आंतरिक अंगों में फ़ैल जाती है।

लक्षण: इसके लक्षणों में बुखार, वजन में कमी, थकान, एनीमिया और यकृत और प्लीहा में सूजन आदि शामिल हैं।

अतिरिक्त तथ्य:

  • लीशमैनियासिस एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी है, भारत सहित लगभग 100 देश इस बीमारी की चपेट में हैं।
  • यह लीशमैनिया नामक एक परजीवी के कारण होता है जो रेत मक्खियों के काटने से फैलता है।
  • लीशमैनियासिस के तीन मुख्य रूप होते हैं –

आंत (visceral): जो कई अंगों को प्रभावित करता है और यह रोग का सबसे गंभीर रूप है।

त्वचीय (cutaneous): जो त्वचा के घावों का कारण बनता है और यह बीमारी का आम रूप है।

श्लेष्मत्वचीय (mucocutaneous):  जिसमें त्वचा और श्लैष्मिक घाव होता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. लीशमैनियासिस के बारे में
  2. लीशमैनियासिस के रूप
  3. काला अजार के विभिन्न नाम
  4. लक्षण
  5. प्रोटोजोअन्स क्या हैं?
  6. मिल्टेफोसिन किसके लिए प्रयोग किया जाता है?

मेंस लिंक:

काला- अजार कैसे होता है? इन बीमारियों से निपटने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस, 2020

(International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिवर्ष 26 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

2020 थीम:बेहतर देखभाल के लिए बेहतर ज्ञान’ (Better Knowledge for Better Care)।

26 जून को आयोजन का कारण?

26 जून को, ‘अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस’ को, चीन में प्रथम अफीम युद्ध से ठीक पहले 25 जून 1839 को लिन ज़ेक्सु (Lin Zexu’s) द्वारा हुमेन, ग्वांगडोंग प्रांत में अफीम के व्यापार को खत्म करने की स्मृति में मनाया जाता है।

इस अवसर पर ‘यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम’ (UNODC) द्वारा ‘वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट’ (World Drug Report). 2020 भी जारी की गयी

प्रमुख बिंदु:

  • वर्ष 2018 में समस्त विश्व में ड्रग्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगभग 269 मिलियन थी, जो वर्ष 2009 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है।
  • 35 मिलियन से अधिक लोग नशीली दवाओं के सेवन से होने वाले विकारों से पीड़ित हैं।
  • बढ़ती बेरोजगारी और महामारी के कारण अवसरों की कमी से भी गरीबों के सर्वाधिक प्रभावित होने की संभावना है। गरीबी और बेरोजगारी, इनको नशीली दवाओं के प्रयो तथा पैसों के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
  • वर्ष 2018 में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ: भांग (Cannabis)।
  • सर्वाधिक हानिकारक पदार्थ: ओपियोड (Opioids)। इन पदार्थों में अफीम, हेरोइन, मॉर्फीन आदि सम्मिलित होते है।
  • उपयोगकर्ता: किशोरों और युवा सबसे अधिक संख्या में इन ड्रग्स का इस्तेमाल करते है। इन ड्रग्स के प्रयोग से युवा सर्वाधिक बुरे तरह से प्रभावित होते है, क्योंकि इस आयु में उनका मस्तिष्क विकसित हो रहा होता है।
  • निम्न आय वाले देशों में अभी भी दर्द- निवारक तथा देखभाल के लिए फार्मास्यूटिकल ओपिओइड की भारी कमी है।

मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गए कदम

  • नवंबर, 2016 में, भारत सरकार द्वारा ‘नार्को कोआर्डिनेशन सेंटर’ (Narco-Coordination CentreNCORD) का गठन किया गया तथा “नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता” योजना को पुनर्जीवित किया गया।
  • वर्ष 2017 में, सरकार ने नए प्रतिफल दिशानिर्देशों को मंजूरी दी, जिसके अंतर्गत अवैध दवाओं के प्रतिबंध अथवा जब्ती करने पर पुरुस्कार की मात्रा में वृद्धि की गयी है।
  • नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को एक नया सॉफ्टवेयर, ‘जब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली’ (Seizure Information Management SystemSIMS) विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है, जिसके माध्यम से ड्रग अपराधों और अपराधियों का एक पूरा ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जायेगा।
  • सरकार ने नारकोटिक ड्रग्स की अवैध तस्करी से निपटने हेतु “नशीली दवाओं के सेवन के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कोष (National Fund for Control of Drug Abuse), का गठन किया है।
  • सरकार एम्स के ‘नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर’ की मदद से भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को मापने के लिए ‘राष्ट्रीय ड्रग एब्यूज सर्वे’ भी कर रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम’ (UNODC) के बारे में
  2. “नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता” योजना का अवलोकन
  3. नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की संरचना
  4. ड्रग एब्यूज नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कोष
  5. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बारे में

मेंस लिंक:

भारत मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील है। इसके कारणों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ड्रग समस्या से निपटने में सरकार की भूमिका पर भी टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: यूएन, द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

भारतीय रिज़र्व बैंक के निगरानी में शहरी, बहु-राज्य सहकारी बैंक

(Urban, multi-State cooperative banks to come under RBI supervision)

सन्दर्भ:

केंद्र सरकार ने, जमाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सभी शहरी तथा बहु-राज्य सहकारी बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की प्रत्यक्ष देखरेख में लाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस आशय के अध्यादेश को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

इन बैंकों को अब तक कैसे विनियमित किया जाता था?

वर्तमान में, ये बैंक RBI तथा सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के दोहरे विनियमन के अधीन आते हैं।

  • सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, इन बैंकों के निगमन, पंजीकरण, प्रबंधन, लेखा परीक्षा, बोर्ड का निवर्तन और विघटन के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • RBI इन बैंकों के विनियामक की भूमिका निभाती है, तथा आरक्षित नकदी और पूंजी पर्याप्तता, जैसे नियमों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होती है।

सहकारी बैंक, राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत होते हैं। वे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दो कानूनों, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, और बैंकिंग कानून (सहकारी समितियाँ) अधिनियम, 1955 के तहत विनियामक दायरे में आते हैं।

आवश्यकता

सरकार द्वारा यह निर्णय, धोखाधड़ी और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की कई घटनाओं के घटित होने के पश्चात लिया गया है, जिसमें पिछले वर्ष, पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (Punjab and Maharashtra Co-operative- PMC) बैंक में हुए बड़े घोटाले शामिल हैं।

सितंबर में, RBI को PMC बैंक के बोर्ड को विघटित करने और सख्त प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया था।

निहितार्थ:

इस निर्णय के द्वारा, भारतीय रिज़र्व बैंक को, सभी शहरी और बहु-राज्य सहकारी बैंकों को, वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर विनियमित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

सरकार का यह कदम, जमाकर्ताओं को अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा।

  • वर्तमान में, देश में 1,482 शहरी सहकारी बैंक और 58 बहु-राज्य सहकारी बैंक हैं।
  • इन बैंकों में 86 मिलियन से अधिक जमाकर्ताओं की 4.84 ट्रिलियन राशि जमा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सहकारी बैंक क्या होते हैं?
  2. उन्हें कैसे विनियमित किया जाता है?
  3. दोहरा विनियमन क्या है?
  4. किन प्रावधानों के तहत इन बैंकों का गठन और विनियमन किया जाता है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

कार्बन मुक्त परिवहन परियोजना

 (Decarbonizing Transport Project)

संदर्भ: नीति आयोग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय परिवहन मंच (the International Transport Forum- ITF) के साथ मिलकर 24 जून 2020 को “भारत में कार्बन मुक्त परिवहन सेवा” परियोजना की शुरूआत की गयी।

भारत 2008 से ही परिवहन नीति तय करने वाले अंतर-सरकारी संगठन ITF का सदस्य है।

परियोजना के बारे में

इस महत्वाकांक्षी पंचवर्षीय परियोजना का उद्देश्य भारत के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली परिवहन प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करना है।

  • यह परियोजना भारत के लिए एक तदनुकूल परिवहन उत्सर्जन आकलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
  • “भारत में कार्बन मुक्त परिवहन सेवा” परियोजना अंतर्राष्ट्रीय परिवहन फोरम की “परिवहन प्रणाली” को कार्बन मुक्त करने की व्यापक पहल का हिस्सा है।

 उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कार्बनमुक्त परिवहन

(Decarbonising Transport in Emerging Economies- DTEE)

यह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में परिवहन प्रणालियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का एक वैश्विक अभियान है।

वर्तमान भागीदार: भारत, अर्जेंटीना, अजरबैजान और मोरक्को।

कार्यान्वयन: यह परियोजना अंतर्राष्ट्रीय परिवहन फोरम (ITF), DTEE और जर्मनी के पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा इंस्टीट्यूट द्वारा समर्थित पहल है।

 परियोजना का भारत के लिए महत्व

भारत में, परिवहन क्षेत्र, तीसरा सर्वाधिक ‘ग्रीनहाउस गैस’ (greenhouse gasGHG) उत्सर्जित करने वाला क्षेत्र है, इसमें सड़क परिवहन क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान होता है।

भारत के कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में, परिवहन क्षेत्र 13% CO2 उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।

भारत के परिवहन क्षेत्र द्वारा CO2 उत्सर्जन में वर्ष 2030 तक लगभग 6% सालाना वृद्धि होने की संभावना है।

यह परियोजना भारत के परिवहन क्षेत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों के बारे में सूचनाएं उपलब्ध कराने के साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कटौती से इसके संबंध को जानने का अवसर भी प्रदान करेगी।

अंतर्राष्ट्रीय परिवहन फोरम (ITF)

ITF का गठन वर्ष 2006 में 43 देशों के मंत्रियों द्वारा किया गया था।

  • यह ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Organization for Economic Co-operation and DevelopmentOECD) के अधीन एक अंतर-सरकारी संगठन है, तथा इसमें 60 सदस्य देश सम्मिलित हैं।
  • यह परिवहन नीति के लिए एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है और परिवहन मंत्रियों के वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन करता है।
  • ITF एकमात्र वैश्विक निकाय है जो परिवहन सभी माध्यमों को सम्मिलित करता है।
  • ITF प्रशासनिक रूप से OECD के साथ एकीकृत है, फिर भी राजनीतिक रूप से स्वायत्त है।
  • इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OECD क्या है?
  2. ITF क्या है? सदस्य?
  3. DTEE के प्रतिभागी
  4. अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI) क्या है?
  5. परिवहन मंत्रियों के वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन कौन करता है?

मेंस लिंक:

DTEE के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

लॉकडाउन के दौरान कई शहरों में ओजोन प्रदूषण में वृद्धि

संदर्भ:

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (Centre for Science and Environment- CSE) के एक विश्लेषण के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रस ऑक्साइड के स्तर में गिरावट दर्ज की गयी, परन्तु, एक अन्य हानिकारक प्रदूषक, ‘ओजोन’ का स्तर कई शहरों में में बढ़ गया।

क्षोभमण्डलीय ओजोन प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारक

ओजोन, भारत में मुख्य रूप से धुप-युक्त खुले मौसम की समस्या है, जो अक्सर वर्ष-भर परिवर्तनशील रहता है।

ओजोन प्रदूषण में वृद्धि का कारण ग्रीष्म-काल की कुछ विशेषतायें है। इनमें तेज़ हवाएँ, रुक-रुककर वर्षा तथा झंझावात, उच्च तापमान और ग्रीष्म लहर (Heat Waves) सम्मिलित हैं।

ओजोन क्या है?

ओजोन (O3) एक रंगहीन, प्रतिक्रियाशील आक्सीकारक गैस है जो वायुमंडलीय स्मॉग का एक प्रमुख घटक है।

क्षोभमण्डलीय अथवा अधो-स्तरीय ओजोन का निर्माण किस प्रकार होता है?

ओजोन, किसी भी स्रोत से सीधे उत्सर्जित नहीं होती है। इसका निर्माण नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अन्य वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (Volatile Organic CompoundsVOCs) के मध्य प्रकाशरासायनिक अभिक्रियाओं (Photochemical Reactions) द्वारा होता है। यह वायु में ऊष्मा तथा सौर-प्रकाश की उपस्थिति में गैसों के परस्पर अभिक्रिया करने पर भी निर्मित होती है।

वाहनों, विद्युत् संयंत्रों, औद्योगिक भट्टियों, रिफाइनरी, रासायनिक संयंत्र और अन्य स्रोतों से उत्सर्जित प्रदूषकों के रासायनिक रूप से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अभिक्रिया करने पर ओजोन का निर्माण होता है।

चिंताएं:

भूमि स्तर पर ओजोन एक हानिकारक वायु प्रदूषक होती है, तथा यह मनुष्यों पर्यावरण को सीधे प्रभावित करती है। इसके अतिरिक्त, यह वायुमंडलीय स्मॉग का एक प्रमुख मुख्य घटक है।

उच्च जमीनी स्तर पर ओजोन, कृषि फसलों तथा वनस्पति, विशेषकर दीर्घ-जीवी वृक्षों तथा धीमी गति से बढ़ने वाली फसलों को प्रभावित करती है।

Ozone

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ओजोन क्या है?
  2. क्षोभमण्डलीय तथा समतापमंडलीय ओजोन
  3. जमीनी स्तर ओजोन का निर्माण कैसे होता है?
  4. स्मॉग के निर्माण में ओजोन की भूमिका
  5. वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (Volatile Organic Compounds- VOC) क्या हैं?

मेंस लिंक:

जमीनी स्तर पर ओजोन के निर्माण संबंधी स्वास्थ्य चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

अकादमिक और अनुसंधान सहयोग संवर्द्धन योजना (स्पार्क)

 (Scheme for Promotion of Academic and Research CollaborationSPARC)

संदर्भ:

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के शोधकर्ताओं ने हरित ऊर्जा समाधान हेतु नए पदार्थों को विकसित करने के लिए जर्मनी में अपने समकक्षों के साथ मिलकर कार्य आरंभ किया है।

  • इस परियोजना को ‘अकादमिक और अनुसंधान सहयोग संवर्द्धन योजना’ (Scheme for Promotion of Academic and Research CollaborationSPARC) के तहत आरंभ किया गया है।
  • इसका उद्देश्य हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करने हेतु हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए वैकल्पिक तकनीकों को विकसित करना है।

 परियोजना की आवश्यकता और महत्व

हाइड्रोजन को निर्मित करने की पारम्परिक पद्धतियों में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है, जो कि एक ग्रीनहाउस गैस है तथा पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

इस परियोजना का उद्देश्य हाइड्रोजन उद्भव प्रतिक्रियाओं के लिए नए कम लागत वाले इलेक्ट्रो-कैटलिस्ट्स (Electrocatalysts) को विकसित करना है।

स्पार्क (SPARC) क्या है?

  • यह मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक पहल है।
  • इस योजना का उद्देश्य भारतीय संस्‍थानों और विश्‍व के सर्वोत्‍तम संस्‍थानों के बीच अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुगम बनाकर भारत के उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में अनुसंधान परिदृश्‍य को बेहतर बनाना है।
  • इस योजना के अंतर्गत, दो वर्षों के लिये 600 संयुक्‍त शोध प्रस्‍ताव दिये जाएंगे, ताकि कक्षा संकाय में सर्वश्रेष्ठ समझे जाने वाले भारतीय अनुसंधान समूहों और विश्‍व के प्रमुख विश्‍वविद्यालयों के प्रख्‍यात अनुसंधान समूहों के बीच विज्ञान तथा मानव-कल्याण से संबधित क्षेत्रों में शोध संबंधी सुदृढ़ सहयोग का निर्माण किया जा सके।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर SPARC कार्यक्रम को लागू करने वाला राष्ट्रीय समन्‍वयकारी संस्थान है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

स्टाइरीन गैस रिसाव

(Styrene Gas leak case)

संदर्भ:

आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने एलजी पॉलिमर इकाई में स्टाइरीन मोनोमर गैस रिसाव संबंधी घटना की जांच कर रही उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने का समय 30 जून तक बढ़ा दिया है।

पृष्ठभूमि:

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 7 मई को एलजी पॉलिमर प्लांट से स्टाइरीन गैस लीक की घटना हुई थी। इस त्रासदी में 12 लोग मारे गए तथा कई गंभीर रूप से बीमार हो गए। इस घटना की जांच करने हेतु आंध्र प्रदेश सरकार ने एक उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया है।

  • सरकार ने पहले कमेटी को 22 जून तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था।
  • कमेटी, घटना के कारणों की जांच करने के अतिरिक्त, पीड़ितों द्वारा उठाए गयी चिंताओं का समाधान करने हेतु सिफरिशे करेगी, साथ ही खतरनाक उद्योगों की पहचान भी करेगी।

स्टाइरीन गैस तथा उसके प्रभावों पर एक त्वरित नज़र:

स्टाइरीन (Styrene) क्या है?

स्टाइरीन एक रासायनिक यौगिक है जिसे न्यूरो-टॉक्सिन्स के रूप में जाना जाता है। यह पॉलिमर, प्लास्टिक और रेजिन के उत्पादन में प्रयुक्त एक कार्बनिक यौगिक होता है।

स्टाइरीन- का निर्माण पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में होता है।

यह एक जहरीली, ज्वलनशील गैस है।

इसे PVC गैस (पॉलीविनाइल क्लोराइड- Polyvinyl Chloride) के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसका उपयोग पीवीसी के उत्पादन में किया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्टाइरीन दुनिया में 20 वां सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन है।

यह कहां पाया जाता है?

स्टाइरीन रासायन, पर्यावरण में एक बार निर्मुक्‍त होने के बाद यह हवा, पानी और मिट्टी में पाया जा सकता है। वायु में इसका 1-2 दिनों में विखंडन हो जाता है, जबकि मृदा और उथले पानी की सतहों से वाष्पित होता रहता है। मृदा में इस रसायन का सूक्ष्म जीवों द्वारा बिखंडन किया जाता है।

स्टाइरीन, प्राकृतिक अवस्था में कुछ पौधों और खाद्य पदार्थों (दालचीनी, कॉफी बीन्स, गुलमेंहदी के पेड़ और मूंगफली) में कम मात्रा में पाया जाता है तथा इसे कोयला टार (coal tar) में भी पाया जाता है

यह प्राणियों को किस प्रकार प्रभावित करता है?

  1. स्टाइरीन के संपर्क में आने से मनुष्य की आंखों में जलन तथा जठरांत्र (gastro-intestinal) संबंधी समस्याएं होती है।
  2. यह त्वचा में ऊतकों की बाहरी परत को भी प्रभावित करता है जिससे कुछ समय बाद त्वचा गलने लगती है तथा रक्तस्राव शुरू हो जाता है।
  3. दीर्घकालिक प्रभावों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की शिथिलता, अवसाद, श्रवण हानि और परिधीय न्यूरोपैथी (हाथ और पैरों का सुन्न होना) शामिल हैं।
  4. इस के प्रभाव से कलर ब्लाइंडनेस (वर्णान्धता) होने संभावना बढ़ जाती है।
  5. स्टाइरीन एक कैंसरकारी तत्व है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्टाइरीन क्या है? यह कहाँ पाया जाता है?
  2. तरल स्टाइरीन कैसे और कब गैसीय रूप में बदल जाता है?
  3. क्या यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है?
  4. स्वास्थ्य पर असर
  5. अनुप्रयोग

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषय।

अवैध वन्यजीव व्यापार पर वैश्विक रिपोर्ट

 (Global report on the illegal wildlife trade)

संदर्भ:

हाल ही में, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा ‘अवैध वन्यजीव व्यापार पर पहली वैश्विक रिपोर्ट’ जारी की गई है। इसे “मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वन्यजीव व्यापार” रिपोर्ट कहा जाता है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने अवैध वन्यजीव व्यापार को “वैश्विक खतरा” बताया है, जो  आधुनिक दासता, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों के व्यापार जैसे अन्य संगठित अपराधों के साथ जुड़ा होता है।

मुख्य निष्कर्ष:

  1. प्रति वर्ष लगभग 23 बिलियन डॉलर मूल्य का अवैध व्यापार होता है।
  2. अपराधी वन्यजीव अपराधों से अवैध रूप से आगे बढ़ने हेतु अक्सर वैध वन्यजीव व्यापार तथा अन्य आयात-निर्यात प्रावधानों का दुरुपयोग करते है।
  3. वे अपने अवैध व्यापार को अंजाम देने हेतु भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और कर चोरी का सहारा लेते है।
  4. सरकारी एजेंसीयों, निजी क्षेत्र और सिविल सोसाइटी की प्रतिक्रिया से बचने के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस और मोबाइल तथा सोशल मीडिया-आधारित भुगतान प्रणालियों का उपयोग करते है।
  5. UN वर्ल्ड वाइल्डलाइफ क्राइम रिपोर्ट, 2016 के अनुसार, विश्व भर में 7,000 से अधिक वन्य-जीवों तथा पौधों की प्रजातियों से अवैध रूप से व्यापार किया जा रहा है।

चुनौतियां:

अवैध व्यापार के माध्यम से प्राप्त धन से उत्पन्न खतरों का आकलन तथा उसका प्रतिरोध करने के लिए न्यायाधिकरणों के पार आवश्यक ज्ञान, विधायी आधार और संसाधन नहीं होते हैं।

  • आपराधिक संगठन, अवैध रूप से अर्जित की गयी आय का शोधन करने हेतु औपचारिक वित्तीय क्षेत्र का दुरुपयोग करते हैं।
  • अवैध आय को ऋण या भुगतान, ई-बैंकिंग प्लेटफॉर्म, लाइसेंस प्राप्त मनी वैल्यू ट्रांसफर सिस्टम और बैंकों के माध्यम से, तथा तीसरे पक्ष के वायर ट्रांसफर की आड़ में, वैध मुद्रा में परिवर्तित किया जाता है।

फ्रंट कंपनियां, अक्सर आयात-निर्यात उद्योगों से जुड़ी होती हैं, और शेल फर्मों का उपयोग माल की आवाजाही और सीमा-पर मनी ट्रांसफर के लिए किया जाता है।

आगे की राह

  1. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय जांच द्वारा अपराध में शामिल सिंडिकेट को समाप्त करना अति आवाश्यक है, इससे संबद्ध आपराधिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से रोक लगाई जा सकती है।
  2. सभी अधिकार-क्षेत्रों द्वारा उचित प्रणालियों के लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।
  3. अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े अपराधों के लिए मनी- लांड्रिंग रोधी कानूनों की प्रयोज्यता बढ़ाने के लिए विधायी परिवर्तन आवश्यक हैं।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ऑर्डर ऑफ नाइन एंगल्स (O9A)

(Order of the Nine Angles)

O9A को 1970 में यूके में स्थापित एक शैतानी, अराजकतावादी समूह माना जाता है जो अब अमेरिका सहित दुनिया भर में विस्तारित हो चुका है।

यह समूह खुद को “विविध, और विश्वव्यापी, विविध समूहों, जनजातियों और व्यक्तियों के सामूहिक के रूप में वर्णित करता है, जो समान भयावह, विध्वंसक, रुचियों, उद्देश्यों और जीवन-शैलियों को साझा करते है।

चर्चा का कारण

अमेरिकी सेना के एक सैनिक ने इस अस्पष्ट शैतानी नव-नाजी समूह के साथ गुप्त सूचना साझा करके अपनी ही इकाई पर हमले की साजिश रची।

देश में गेहूं का शीर्ष योगदानकर्ता

मध्य प्रदेश, इस वर्ष पंजाब को पीछे छोड़ते हुए गेहूं का नंबर एक योगदानकर्ता बन गया।

  • हालाँकि, पंजाब अभी भी गेहूं की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता की दृष्टि से मध्यप्रदेश से आगे है।
  • इस वर्ष देश में 330.2 लाख हेक्टेयर पर गेहूं बोया गया था, जबकि पिछले वर्ष 296.98 लाख हेक्टेयर गेहूं की बुआई की गयी थी।
  • देश के कुल गेहूं क्षेत्र में, मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जबकि पंजाब ने कुल राष्ट्रीय क्षेत्र के 10.6 प्रतिशत पर गेहूं का उत्पादन किया।

भारत के बाहर दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय

भारत के बाहर दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय लॉस एंजिल्स में शुरू किया गया है।

  • इसका नाम विवेकानंद योग विश्वविद्यालय (VaYU) है।
  • VaYU वैज्ञानिक सिद्धांतों और योग पर आधुनिक अनुसंधान दृष्टिकोण के आधार पर ऑनलाइन स्नातक कार्यक्रम प्रदान करेगा।
  • प्रख्यात भारतीय योग गुरु डॉ. एच. आर. नगेन्द्र, ‘स्वामी विवेकानंद योग अनुसन्धान संस्थान’ (SVYASA) के कुलाधिपति VaYU के पहले अध्यक्ष हैं।

नैविगेटिंग द न्यू नॉर्मल

(Navigating the New Normal)

  • नीति आयोग ने बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन BMGF), सेंटर फॉर सोशल एंड बिहैवियरल चेंज (CSBC), अशोका विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य और WCD मंत्रालय के साथ भागीदारी में ‘नैविगेटिंग द न्यू नॉर्मल’ (नए सामान्य में चलना) नाम के एक अभियान का शुभारम्भ किया।
  • यह अभियान, वर्तमान में जारी महामारी के इस दौर में ‘अनलॉक’के चरण में कोविड-सुरक्षित व्यवहार, विशेष रूप से मास्क पहनने पर केन्द्रित है।

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