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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. अन्य पिछड़ा वर्ग के भीतर उप-श्रेणीकरण के परीक्षण हेतु आयोग

 

सामान्य अध्ययन-II

1. उप-ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGSSD)

2. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)

3. वार्षिक टीबी रिपोर्ट 2020

4. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ‘ग्रे लिस्ट’ में पाकिस्तान

5. अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा H-1B वीजा पर प्रतिबंध

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड (AHIDF)

2. भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन तथा प्रमाणीकरण केंद्र (IN-SPACe)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. स्किल्स बिल्ड रिगनाइट

2. आषाढ़ी बीज, कच्छी नववर्ष

3. कुशीनगर हवाई अड्डा

4. म्यांमार में श्वे तेल एवं गैस परियोजना

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।

अन्य पिछड़ा वर्ग के भीतर उप-श्रेणीकरण के परीक्षण हेतु आयोग

 (Commission to Examine Sub Categorization of other Backward Classes)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केन्द्रीय सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग के भीतर उप-श्रेणीकरण के मुद्दे के परीक्षण के लिए संविधान के अनुच्छेद 340 के अंतर्गत गठित आयोग के कार्यकाल के विस्तार को स्वीकृति प्रदान की गयी।

अनुच्छेद 340

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340 के अंतर्गत पिछड़े वर्गों की स्थितियों की जांच के लिए एक आयोग की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति, भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए, आदेश द्वारा, एक आयोग नियुक्त कर सकते हैं। इस आयोग में, राष्ट्रपति, जिन व्यक्तियों को अन्वेषण हेतु उचित समझेगा, सम्मिलित कर सकते है।

संवैधानिक आधार

संविधान के अनुच्छेद 14 में विधि के समक्ष समता की गारंटी प्रदान की गयी है। इसका अर्थ है, कि गैर-बराबरों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं किया जा सकता है। उन्नत वर्गों के साथ समान स्तर पर लाने हेतु गैर-बराबरों के उत्थान के लिए उपाय किए जाने की आवश्यकता है।

अनुच्छेद 16 (4) के अनुसार, राज्य, किसी भी पिछड़े वर्ग के नागरिकों के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए कोई प्रावधान कर सकते हैं, यदि, राज्य की राय में, जिनका राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं हैं।

उप-श्रेणीकरण:

वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (National Commission for Backward ClassesNCBC) द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Classes- OBCs) के उप-श्रेणीकरण का प्रस्ताव पेश किया गया।

अक्टूबर 2017 में, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा, संविधान के अनुच्छेद 340 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत, अत्यंत पिछड़े वर्गों (Extremely Backward ClassesEBCs) को प्राथमिकता प्रदान्र करते हुए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की अध्यक्षता में OBC समूह के उप-श्रेणीकरण संबंधी विषयों का अन्वेषण करने हेतु एक आयोग की नियुक्ति की गयी थी।

उप-श्रेणीकरण की आवश्यकता

OBC समूह के उप-श्रेणीकरण से OBC समुदायों के मध्य अधिक पिछड़े समूहों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ सुनिश्चित होगा।

वर्तमान में, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) में कोई उप-श्रेणीकरण नहीं है तथा सभी समुदायों को संयुक्त रूप से 27% आरक्षण प्रदान किया जाता है।

विश्लेषण

अन्य पिछड़ा वर्ग समूह के क्रीमी लेयर द्वारा लम्बे समय से आरक्षण प्रणाली का लाभ लिया जाता रहा है, जिसके कारण समूह के अत्यंत पिछड़े समुदायों को आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिल पाता  है।

OBC समूह के उप-श्रेणीकरण का निर्णय द्वारा, केंद्र सरकार, पिछड़े वर्गों के तहत आने वाले जाति समूहों को सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार विभाजन कर रही है, जिससे आरक्षण लाभ का अधिक समान वितरण सुनिश्चित हो सके।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 340, 14, 15 और 16 का अवलोकन
  2. OBC समूह के उप-श्रेणीकरण संबंधी विषयों का अन्वेषण करने हेतु आयोग
  3. अनुच्छेद 340 के तहत राष्ट्रपति की शक्ति
  4. मंडल आयोग
  5. OBC की केंद्रीय सूची में समुदायों को सम्मिलित करने या बाहर करने की शक्तियां।
  6. राज्य की OBC को श्रेणीबद्ध करने की शक्ति

मेंस लिंक:

OBC समूह के उप-श्रेणीकरण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

उप-ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGSSD)

(Credit Guarantee Scheme for Sub-ordinate Debt)

सन्दर्भ: हाल ही में, वित्त मंत्री द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत ‘उप-ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी’ (Credit Guarantee Scheme for Sub-ordinate DebtCGSSD) योजना की घोषणा की गयी।

इस योजना को “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए संकटग्रस्त परिसंपत्ति फंड-उप-ऋण” (Distressed Assets Fund–Sub-ordinate Debt for MSMEs) भी कहा जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह योजना संकटग्रस्त MSME क्षेत्र के पुनरुत्थान हेतु आरंभ की गयी है।
  • इस योजना के अंतर्गत, उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), जो वर्तमान में चालू हालात में है परन्तु 30 अप्रैल, 2020 तक गैर-निष्पादित परिसंपति (NPA) हो चुके है, के संस्थापकों को सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
  • इस योजना का संचालन MSE के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट’ (Credit Guarantee Fund Trust for MSEsCGTMSE) के माध्यम से किया जाएगा।

 योजना का कार्यान्वयन:

  1. इसके अंतर्गत, MSME के संस्थापकों को उनकी हिस्सेदारी (इक्विटी व ऋण मिलाकर) के 15% के बराबर अथवा 75 लाख रुपये, जो भी कम हो, का ऋण दिया जाएगा।
  2. संस्थापक, इस राशि को MSME इकाई में इक्विटी के रूप में निवेश करेगा और इस तरह नकदी (तरलता) बढ़ाएगा और ऋण-इक्विटी अनुपात को बनाए रखेगा।
  3. इस उप-ऋण के लिए 90% गारंटी कवरेज, योजना के तहत दी जाएगी और 10% संबंधित प्रमोटर द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी;
  4. मूलधन के भुगतान पर 7 वर्ष की मोहलत मिलेगी जबकि पुनर्भुगतान के लिए अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी।

योजना का महत्व

यह योजना लगभग 2 लाख MSMEs को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी और इससे MSME क्षेत्र में और इस क्षेत्र के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। यह योजना उन लाखों लोगों की आजीविका और नौकरियों की रक्षा करने में भी मदद करेगी, जो इन पर निर्भर हैं।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना के तहत लाभार्थी
  2. ‘MSE के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट’ (CGTMSE) के बारे में
  3. MSME का वर्गीकरण
  4. भारत के सकल घरेलू उत्पाद में MSME की भागीदारी

मेंस लिंक:

इस योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)

(Pradhan Mantri MUDRA Yojana)

संदर्भ:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana- PMMY) के अंतर्गत ‘शिशु ऋणों’ की त्वरित अदायगी पर 12 माह की अवधि के लिए 2% ब्याज सब्सिडी को मंजूरी प्रदान की गयी है।

  • इस योजना की अनुमानित लागत लगभग 1,542 करोड़ रुपये होगी जो भारत सरकार द्वारा मुहैया कराई जाएगी।
  • यह योजना एमएसएमई से संबंधित कई उपायों में से एक उपाय को लागू करने के लिए है, जिनकी घोषणा ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत की गई है।

पात्रता:

यह योजना उन ऋणों के लिए मान्‍य होगी जो इन मानदंडों को पूरा करते हैं–

  • जिन ऋणों पर 31 मार्च, 2020 को बकाया था; और
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार 31 मार्च 2020 को तथा योजना की परिचालन अवधि के दौरान गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (Non-Performing Asset- NPA) श्रेणी में नहीं थे।
  • ब्याज सब्सिडी उन महीनों के लिए देय होगी, जिनमें खाते NPA की श्रेणी में नहीं आते हैं। इनमें वे महीने भी शामिल है, जिनमें खाते NPA बनने के बाद फिर से निष्‍पादित परिसंपत्ति बन जाते हैं।

कार्यान्वयन रणनीति:

यह योजना भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of IndiaSIDBI) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी और 12 महीने तक परिचालन में रहेगी।

योजना का महत्व:

  • इस योजना को अभूतपूर्व परिस्थितियों से निपटने के लिए एक विशिष्ट कदम या उपाय के रूप में तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य ऋण की लागत को कम करके ‘पिरामिड के निचले भाग’ वाले उधारकर्ताओं की वित्तीय मुश्किलों को कम करना है।
  • यह योजना लोगों को प्रोत्साहित करेगी जो ऋणों की नियमित अदायगी करेंगे।
  • योजना से इस सेक्‍टर को बहुप्रतीक्षित राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे छोटे कारोबारियों को धन की कमी के कारण कर्मचारियों की छंटनी किए बिना ही अपना कामकाज निरंतर जारी रखने में मदद मिलेगी।

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) योजना के बारे में:

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल 2015 में की गयी थी।

  • इस योजना का उद्देश्य ऋणदाताओं द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को दिए गए संपार्श्विक-मुक्त ऋण को पुनर्वित्त करना है।
  • Mudra योजना के अंतर्गत गैर-कृषि गतिविधियों जैसे डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन आदि के लिए 10 लाख रु. तक तक का ऋण प्रदान किया जाता है।
  • PMMY के तहत तीन प्रकार के ऋण प्रदान किये जाते हैं:

शिशु ऋण (Shishu Loan) 50,000 रुपए तक के ऋण

किशोर ऋण (Kishor Loan) – 50,001 से 5 लाख रुपए तक के ऋण

तरुण ऋण (Tarun Loan) – 500,001 से 10 लाख रुपए तक के ऋण

  • इस योजना के अंतर्गत एक मुद्रा कार्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से एटीएम और कार्ड मशीनों से कार्यशील पूंजी निकाली जा सकती है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. MUDRA योजना का विस्तार
  2. ऋण के प्रकार
  3. सिडबी के बारे में
  4. योजना के तहत सुविधाएँ और लाभ
  5. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत नई योजनाएं

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)  के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

वार्षिक टीबी रिपोर्ट 2020

(Annual TB Report 2020)

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री द्वारा वार्षिक टीबी रिपोर्ट 2020 जारी की गयी है। वार्षिक टीबी रिपोर्ट को केंद्रीय टीबी प्रभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा तैयार एवं प्रकाशित किया जाता है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  1. वर्ष 2019 में लगभग 24.04 लाख टीबी रोगियों को अधिसूचित किया गया है। वर्ष 2018 की तुलना में टीबी अधिसूचना में यह 14% की वृद्धि है।
  2. वर्ष 2017 में टीबी रोगियों के 10 लाख से अधिक गैर-अधिसूचित मामले थे, जो घटकर 2.9 लाख हो गए है।
  3. निजी क्षेत्र में35% की वृद्धि के साथ 78 लाख टीबी रोगियों को अधिसूचित किया गया है।
  4. आण्विक निदान की आसान उपलब्धता के कारण 2018 में 6% की तुलना में 2019 में टीबी के निदान वाले बच्चों का अनुपात बढ़कर 8% हो गया है।
  5. सभी अधिसूचित टीबी रोगियों की एचआईवी जांच का प्रावधान 2018 में 67% से बढ़कर 2019 में 81% हो गया है।
  6. उपचार सेवाओं के विस्तार से अधिसूचित रोगियों की उपचार सफलता दर में 12% सुधार हुआ है। 2018 में 69% की तुलना में 2019 के लिए यह दर 81% है।

निक्षय प्रणाली:

देश में निक्षय प्रणाली (NIKSHAY system) के माध्यम से टीबी के रोगियों के विषय में लगभग सभी सूचनाये ऑन-लाइन प्राप्त हो रही है।

  • निक्षय एक वेब-आधारित सूचना प्रबंधन प्रणाली है जिसका उपयोग मरीजों की जानकारी के प्रबंधन तथा पूरे देश में कार्यक्रम की गतिविधियों एवं निगरानी के लिए एक-केंद्रीय समाधान के रूप में कार्य करती है।
  • इसे केंद्रीय टीबी प्रभाग (Central TB Division- CTD), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), और भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से परिचालित किया जाता है।

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP):

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Elimination ProgramNTEP) एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है जिसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वावधान में राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के समन्वय से चलाया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का लक्ष्य, टीबी-जनित गरीबी के उन्मूलन के साथ भारत को टीबी-मुक्त करना है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्षय रोग संबधी सतत् विकास लक्ष्य (SDG)
  2. राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) तथा इसके लक्ष्य क्या है?
  3. केंद्रीय टीबी प्रभाग (CTD) के बारे में
  4. वार्षिक टीबी रिपोर्ट किसके द्वारा जारी की जाती है?
  5. क्षय रोग क्या है? यह किस प्रकार होता है?

मेंस लिंक:

“भारत की टीबी रिपोर्ट को देश की ‘हंगर इंडेक्स’ में निम्न स्थिति के आलोक में देखा जाना चाहिए”, हाल ही में जारी वार्षिक भारत क्षय रोग रिपोर्ट के प्रकाश में इस कथन का आलोचनात्मकविश्लेषण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ग्रे लिस्टमें पाकिस्तान

 (Pakistan to remain on FATF grey list)

संदर्भ:

वैश्विक आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाले संगठन ‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (Financial Action Task ForceFATF)  ने पाकिस्तान को ग्रे-सूची में रखने का फैसला किया है। पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकी संगठनों पर लगाम कसने में विफल रहा है जिसको देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

पृष्ठभूमि

FATF की फरवरी, 2020 में हुई बैठक में, इस्लामाबाद को चेतावनी दी गयी थी, कि पाकिस्तान को आतंकवादी वित्तपोषण पर कार्यवाही करने के लिए लिए दी गयी सभी सीमायें समाप्त हो चुकी है, और यदि पाकिस्तान, इसी वर्ष जून तक संबंधित आतंकियों पर कार्यवाही नहीं करता है तो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स उस पर कार्यवाही करेगा।

इससे पहले, FATF के पेरिस सत्र में भी पाकिस्तान द्वारा 27-सूत्रीय कार्ययोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने विफल रहने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। यह समय-सीमा सितंबर 2019 में समाप्त हुई थी।

निहितार्थ:

पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’  सम्मिलित होने के बाद, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और यूरोपियन यूनियन जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा।

पाकिस्तान, पहले से अस्थिर आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है, ऐसे में FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ से उसकी स्थिति अधिक खराब होगी।

इसके अतिरिक्त, वैश्विक संस्था द्वारा पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टमें सूचीबद्ध करने की पूरी संभावना है।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।

इसका सचिवालय पेरिस में ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and DevelopmentOECD) मुख्यालय में स्थित है।

सदस्य देश: फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) वर्त्तमान में 39 सदस्य सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें 2 क्षेत्रीय संगठन भी सम्मिलित हैं- गल्फ ऑफ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) तथा यूरोपियन कमीशन (EC)।

FATF की डिसीज़न मेंकिंग बॉडी FATF प्लैनरी है जिसकी हर साल तीन बार बैठक होती है। इसकी प्रति वर्ष तीन बैठकें होती है।

ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट

ब्लैक लिस्ट: आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने वाले तथा इन गतिविधियों पर रोक लगाने वाले वैश्विक प्रावधानों से सहयोग नहीं करने वाले देशों (Non-Cooperative Countries or TerritoriesNCCTs) को ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखा जाता है।

FATF द्वारा नियमित रूप से ब्लैकलिस्ट का संशोधन किया जाता है, जिसमे नयी प्रविष्टियों को शामिल अथवा हटाया जाता है।

ग्रे लिस्ट: जिन देशों को आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, उन्हें FATF द्वारा ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जी-7, जी-8 तथा जी- 20 में अंतर
  2. ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट
  3. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
  4. FATF का प्रमुख कौन है?
  5. इसका सचिवालय कहाँ है?

मेंस लिंक:

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) का अधिदेश तथा उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए FATF के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा H-1B वीजा पर प्रतिबंध

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका ने वर्ष 2020 के अंत तक आप्रवासी और गैर-आप्रवासी श्रमिक वीजा पर 60-दिवसीय प्रतिबंध के विस्तार करने का निर्णय लिया है।

  • यह प्रतिबंध को तत्काल रूप से प्रभावी किये गए है, अतः सभी नए H-1B, H-2B, J और L वीजा श्रेणियों का प्रक्रमण निलंबित कर दिया गया है।
  • इन नए श्रमिक वीजा प्रतिबंध से H-1B, H-2B, J और L वीजा धारक, तथा अमेरिका में पहले से रहने वाले उनके पति / पत्नी और बच्चे प्रभावित नहीं होंगे।

H-1B, H-2B, J और L एवं अन्य कार्य वीजा क्या हैं?

आईटी तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में कुशल तथा सस्ते कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए, अमेरिकी प्रशासन प्रत्येक वर्ष एक निश्चित संख्या में वीजा जारी करता है। इसके माध्यम से अमेरिका से बाहर स्थित कंपनियां, ग्राहकों की मांग पर अपने कर्मचारियों को अमेरिका में काम करने हेतु भेजती हैं।

  1. H-1B वीजा: ये एक गैर-प्रवासी वीजा होता है, जो किसी विदेशी नागरिक या कामगार को अमेरिका में काम करने के लिए 6 साल के लिए जारी किया जाता है। इस वीजा के लिए कर्मचारी को स्नातक होने के साथ-साथ किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञ भी होना आवश्यक है।
  2. L1 वीजा: उन कुशल विदेशी कर्मचारियों और मैनेजर की रैंक के लोगों के लिए होता है, जिनका अमेरिका में किसी कंपनी के अंदर ट्रांसफर हो रहा है।
  3. H-2B वीजा: खाद्य और कृषि श्रमिकों को अमेरिका में रोजगार की अनुमति देता है।
  4. J-1 वीजा: यह कार्य-अध्ययन के ग्रीष्मकालीन कार्यक्रमों में छात्रों के लिए होता है।

वीजा प्रतिबंध का कारण

महामारी के दौरान अमेरिकी नौकरियों को सुरक्षा प्रदान करना।

H-1B, H-2B, J, और L गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रमों के माध्यम से श्रमिकों का देश में प्रवेश, घरेलू श्रमिकों के लिए रोजगार अवसरों के कम होने के लिए हानिकारक होता है।

वीजा प्रतिबंध का भारतीय आईटी कंपनियों पर प्रभाव

भारतीय आईटी कंपनियां US H-1B वीजा व्यवस्था के सबसे बड़े लाभार्थियों में से हैं। पिछले 5 साल में जारी किए H-1B वीजा में 70 फीसदी से ज्यादा भारतीयों को मिले हैं।

  • मार्च 2021 को समाप्त हुए चालू वित्त वर्ष के लिए 1.84 लाख भारतीयों ने H-1B कार्य वीजा के लिए आवेदन किया था, जो कि कुल H-1B वीजा का 67 प्रतिशत था।
  • कार्यकारी आदेश द्वारा H-1B कार्य वीजा मानदंडों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इसके अंतर्गत वर्तमान में प्रचलित लॉटरी प्रणाली समाप्त हो जायेगी।
  • नए मानदंडों के अनुसार, उच्च-कुशल श्रमिकों वीजा प्रदान किया जायेगा, जिन्हें उनकी संबंधित कंपनियों द्वारा उच्चतम वेतन भुगतान किया जाता है।

आलोचना तथा चिंताएँ

इस कार्यकारी आदेश की प्रोद्योगिकी इंडस्ट्रीज के साथ-साथ दोनों देशों के राजनेताओं द्वारा आलोचना की गयी है। अमेरिकी राजनेताओं के अनुसार, इस कदम से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।

  • आलोचकों का कहना है, इस आदेश से अमेरिका की सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली लोगों को काम देने की प्रतिष्ठा को स्थायी नुकसान पहुंचेगा।
  • वीजा प्रतिबंध से, नियोक्ताओं, परिवारों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, तथा समुदायों को हानि पहुंचेगी और अमेरिका के आर्थिक सुधार में देरी होगी।
  • कुशल आप्रवासियों के बिना, अमेरिकी उद्योगों में शिथिलता आयेगी।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड (AHIDF)

 (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund)

संदर्भ: हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के अनुरूप केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड’ (Animal Husbandry Infrastructure Development FundAHIDF) की स्थापना के लिए 15,000 करोड़ रुपये की मंज़ूरी प्रदान की गयी है।

प्रमुख बिंदु:

  • AHIDF के अंतर्गत 15000 करोड़ रु. की राशि की सहायता प्रदान की जाएगी।
  • यह कोष डेयरी एवं मीट प्रसंस्करण और पशु आहार संयंत्रों में बुनियादी ढांचे के निवेश को प्रोत्साहित करेगा।

पात्रता तथा कार्यान्वयन

  • लाभार्थी: AHIDF योजना के तहत योग्य लाभार्थी, किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organizations- FPOs), MSMEs, सेक्शन 8 कंपनियां, निजी कंपनियां और निजी उद्यमी होंगे जिन्हें 10 प्रतिशत की मार्जिन राशि का योगदान करना होगा।
  • शेष राशि: शेष 90 प्रतिशत की राशि अनुसूचित बैंक द्वारा कर्ज के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
  • सरकार योग्य लाभार्थी को ब्याज पर 3 प्रतिशत की आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी।
  • योग्य लाभार्थियों को मूल कर्ज के लिए दो वर्ष की अधिस्थगन अवधि के साथ कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा और कर्ज की पुनर्भुगतान अवधि 6 साल होगी।

क्रेडिट गारंटी फंड:

  • भारत सरकार 750 करोड़ रुपये के क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना भी करेगी।
  • क्रेडिट गारंटी फंड का प्रबंधन नाबार्ड (NABARD) द्वारा किया जायेगा। क्रेडिट गारंटी उन स्वीकृत परियोजनाओं के लिए दी जाएगी, जो एमएसएमई के तहत परिभाषित होंगी।
  • कर्जदार की क्रेडिट सुविधा की 25 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज दी जाएगी।

महत्व:

  • पशुपालन क्षेत्र में निजी क्षेत्र के जरिए निवेश से संभावनाओं के कई रास्ते खुलेंगे।
  • AHIDF निजी निवेशकों के लिए ब्याज में आर्थिक सहायता की योजना से इन परियोजनाओं के लिए जरूरी निवेश को पूरा करने में पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और इससे निवेशकों को अपना रिटर्न बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  • लाभार्थियों द्वारा प्रसंस्करण और मूल्य वर्धित बुनियादी ढांचे में निवेश से भी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्रेडिट गारंटी फंड का प्रबंधन कौन करेगा?
  2. योजना के तहत ब्याज छूट
  3. पात्र कौन है?
  4. अनुदान
  5. डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (DIDF) के बारे में
  6. नाबार्ड- रचना और महत्वपूर्ण कार्य

मेंस लिंक:

पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड (AHIDF) की विशेषताओं तथा महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन तथा प्रमाणीकरण केंद्र (IN-SPACe)

(Indian National Space Promotion and Authorization Centre)

प्रमुख बिंदु:

  • नवसृजित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन तथा प्रमाणीकरण केंद्र (IN-SPACe) भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने हेतु निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए समान अवसर उपलब्ध करायेगा।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) मूल निकाय के रूप में कार्य करेगा तथा नए मिशन के बारे निर्णय लेगा।
  • इसके साथ, निजी कंपनियों को उपग्रहों, प्रक्षेपणों और अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं में समान अवसर प्रदान किया जाएगा।
  • निजी क्षेत्र के लिए, ग्रहों के अन्वेषण हेतु भविष्य की परियोजनाओं पर कार्य करने तथा बाह्य अंतरिक्ष की यात्रा का मार्ग खुलेगा।

महत्व तथा अपेक्षित परिणाम

भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में उन्नत क्षमताओं वाले चंद देशों में एक है।

  • इन सुधारों से क्षेत्र को नई ऊर्जा तथा गतिशीलता प्राप्त होगी जिससे देश को अंतरिक्ष गतिविधियों के अगले चरण में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
  • इससे न केवल इस क्षेत्र में तेजी आएगी बल्कि भारतीय उद्योग विश्व की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
  • इसके साथ ही प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े पैमान पर रोजगार की संभावनाएं हैं और भारत एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस बन रहा है।
  • ये सुधार इसरो को अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, नई प्रौद्योगिकियों, खोज मिशनों तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों पर अधिक फोकस करने में सक्षम बनायेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ISRO- स्थापना और ISRO निदेशक की नियुक्ति कैसे की जाती है?
  2. न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के बारे में
  3. डेमो 2 (Demo 2) मिशन क्या है?

मेंस लिंक:

भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू किए गए ऐतिहासिक सुधारों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


स्किल्स बिल्ड रिगनाइट

(Skills Build Reignite)

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) तथा IBM ने साझेदारी में मुफ्त डिजिटल अध्‍ययन प्लेटफॉर्म “स्किल्स बिल्ड रिगनाइट” की शुरूआत की है। इसका उद्देश्य नौकरी चाहने वाले अधिक लोगों तक पहुंचना तथा भारत में व्‍यवसाय करने वालो को नये संसाधन उपलब्ध कराना है।

  • स्किलबिल्‍ड रिइग्‍नाइट नौकरी चाहने वालों और उद्यमियों को, उनके करियर और व्यवसायों में परिवर्तन करके उनमें नयापन लाने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए ऑनलाइन पाठ्यक्रम और परामर्श देने संबंधी सहायता प्रदान करते हैं।
  • नौकरी चाहने वाले, निजी व्यवसाय मालिक, उद्यमी और सीखने की आकांक्षा रखने वाला कोई भी व्यक्ति अब बिना किसी लागत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स और सुरक्षा जैसे विषयों पर नये कौशल और अतिरिक्‍त कौशल का अध्‍ययन कर सकता है।
  • इसमें उद्यमियों के लिए व्यक्तिगत कोचिंग प्रदान की जाती है, तथा कोविड-19 महामारी से बाहर निकलने के प्रयास में छोटे व्यवसायों को स्थापित करने या फिर से इन्‍हें शुरू करने में सहायता प्रदान की जाती है।

 आषाढ़ी बीज, कच्छी नववर्ष

  • आषाढ़ी बीज (Ashadhi Bij) हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ मास (जून – जुलाई) के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन होता है।
  • गुजरात के कच्छ क्षेत्र के लोग इस दिन अपने कच्छी नववर्ष का उत्सव मनाते हैं।
  • यह दिन कच्छ, गुजरात में बारिश की शुरुआत से संबंधित होता है।

कुशीनगर हवाई अड्डा

उत्तरप्रदेश में स्थित कुशीनगर हवाई अड्डा को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषित किया गया है।

  • कुशीनगर एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल है, जहां गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
  • कुशीनगर आसपास के परिवेश में कई अन्य बौद्ध स्थलों जैसे श्रावस्ती (238 किमी), कपिलवस्तु (190 किमी) और लुम्बिनी (195 किमी) से जुड़ा है, जो इसे अनुयायियों और आगंतुकों दोनों के लिए समान रूप से आर्कषण का केन्द्र बनाता है।
  • कुशीनगर पहले से ही भारत और नेपाल में फैले बौद्ध सर्किट तीर्थयात्रा के लिए प्रतीक स्थल के रूप में कार्य करता है।

kushinagar

म्यांमार में श्वे तेल एवं गैस परियोजना

 (Shwe oil & gas project in Myanmar)

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) द्वारा म्यांमार में श्वे तेल और गैस परियोजना के विकास के लिए 121.27 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दे दी है।

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) दक्षिण कोरिया, भारत तथा म्यांमार की कंपनियों के एक संकाय के हिस्से के रूप में 2002 से ही म्यांमार में श्वे परियोजना के उत्खनन एवं विकास से जुड़ी हुई है।

महत्व:

पड़ोसी देशों में तेल एवं गैस उत्खनन तथा विकास परियोजनाओं में भारतीय पीएसयू की भागीदारी भारत की पूर्व की ओर देखो नीति के साथ जुड़ने तथा निकटतम पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सेतुओं का विकास करने की भारत की कोशिशों का एक हिस्सा है।

burma


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