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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. छोलुंग सुकफा (Chaolung Sukapha)

2. वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी

3. रूस का विजय दिवस

 

सामान्य अध्ययन-II

1. भारतीय दंड संहिता की धारा 309

2. पतंजलि द्वारा कोरोनावायरस (Covid-19) उपचार

 

सामान्य अध्ययन-III

1. अंतर्राष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम (ICP)

2. गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर उत्पादों की उत्पत्ति के देश की जानकारी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. युक्ति 2.0 (YUKTI 0)

2. गैया परिकल्पना (Gaia hypothesis)

3. ब्लेज़र (Blazars)

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय:  भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

छोलुंग सुकफा (Chaolung Sukapha)

चर्चा का कारण

हाल ही में, असम के मुख्यमंत्री ने कोलकाता के एक राजनीतिक टिप्पणीकार गर्गा चटर्जी (Garga Chatterjee) को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिन्होंने छोलुंग सुकफा (Chaolung Sukapha) को ‘चीनी आक्रमणकारी’ बताया था।

छोलुंग सुकफा के बारे में

  • छोलुंग सुकफा 13वीं शताब्दी के अहोम साम्राज्य (Ahom kingdom) के संस्थापक थे, जिसने छह शताब्दियों तक असम पर शासन किया था। समकालीन विद्वान छोलुंग सुकफा को बर्मा मूल का बताते हैं।
  • उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘बोर असोम’ (Bor Asom) या ‘ग्रेटर असम’ (Greater Assam) के निर्माता के रूप में जाना जाता है।
  • सुकफा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 1215 ईस्वी में अपने 8 सामंतों तथा लगभग 9,000 अनुयायियों के साथ माउलंग (Maulung) (वर्तमान युन्नान प्रांत, चीन) नामक स्थान को छोड़ दिया तथा असम की ब्रह्मपुत्र घाटी की ओर प्रस्थान किया।
  • चाराइदेव (Charaideo) नामक स्थान पर सुकफा ने अपनी पहली छोटी रियासत की स्थापना की। यहीं से अहोम साम्राज्य के विस्तार का बीज बोया गया।
  • अहोम साम्राज्य के संस्थापकों की अपनी भाषा एवं धर्म था। धीरे-धीरे अहोमों ने हिंदू धर्म एवं असमिया भाषा को स्वीकार कर लिया।
  • सुकफा एवं उसके शासन की याद में असम में प्रत्येक वर्ष 2 दिसंबर को ‘असोम दिवस’ (Asom Divas) ​​मनाया जाता है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. अहोम कौन हैं?
  2. सुकफा, ने किस प्रकार अपने राज्य क्षेत्र का विस्तार किया?
  3. असोम दिवस का महत्व
  4. असम और पड़ोसी राज्यों की भौगोलिक स्थिति
  5. माउलंग (Maulung) की अवस्थिति

मेंस लिंक

छोलुंग सुकफा तथा अहोम समुदाय के लिए उनके योगदान पर एक टिप्पणी लिखिए।

Chaolung_Sukapha

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी

 (Variyamkunnath Kunjahammed Haji)

सन्दर्भ: स्वतंत्रता सेनानी वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी के जीवन पर एक फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। इस फिल्म में मलयालम अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन, वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी की भूमिका निभाएंगे।

वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे?

  • 1870 के दशक में जन्मे, वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी एक बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 20 वीं शताब्दी के आरम्भ में केरल के मालाबार क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था तथा कुछ समय के लिए अपने स्वतंत्र शासन की स्थापना की थी।
  • उनके पिता, मोइद्दीनकुट्टी हाजी को अंग्रेजों के खिलाफ एक विद्रोह में भाग लेने के लिए अपराध में निर्वासित कर अंडमान द्वीप समूह में जेल भेज दिया गया था। इस प्रकार की घटनाओं ने प्रारंभिक जीवन से ही कुंजामहम्मद के अंदर अंग्रेजों के प्रति प्रतिशोध की आग को जलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं।
  • उन्होंने स्थानीय जनता को अंग्रेजों के विरूद्ध एकत्र करने के लिए कला को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
  • उन्होंने अंग्रेजों तथा जमींदारों के अत्याचारों के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और खिलाफत आंदोलन का समर्थन करने का वादा किया।
  • हाजी हिंदू-मुस्लिम एकता की ताकत से अवगत थे तथा उन्होंने धर्मों के लोगों को पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की थी।

1921 के विद्रोह के कारण

  • वर्ष 1921 में खिलाफत नेता अली मुसलियार तथा अन्य देशवासियों को तिरूरांगडी (Tirurangadi) के अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था, तथा मस्जिद में लूट-पाट की गयी।
  • इस बात की खबर मिलने पर हाजी ने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठाने का फैसला किया और उन्होंने सेना की टुकड़ी तैयार की, जिसमे कुछ सिपाहियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
  • उन्होंने आन्दोलन का स्वरूप धर्मनिरपेक्ष बनाये रखा। लेकिन साथ ही, उन्होंने अंग्रेजों का साथ देने वाले सभी हिंदू तथा मुसलमानों को निशाना बनाया।

विद्रोह का परिणाम

  1. हाजी के नेतृत्व में विद्रोह की आग पूर्ववर्ती मालाबार जिले के एर्नाड (Ernad) तथा वल्लुवानाड (Valluvanad) ताल्लुकों में भड़क उठी। इन स्थानों पर नियुक्त ब्रिटिश अधिकारी तथा उनके स्थानीय वफादार इन इलाकों से भाग गए, जिससे इन क्षेत्रों पर विद्रोहियों का कब्ज़ा हो गया।
  2. अगस्त, 1921 में विद्रोहियों ने इस क्षेत्र को ‘स्वतंत्र राज्य’ तथा वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी को इसका निर्विवाद शासक घोषित कर दिया।
  3. लगभग छह महीने तक, हाजी ने एक समानांतर खिलाफत शासन चलाया। इस स्वतंत्र राज्य का मुख्यालय नीलाम्बुर (Nilambur) में था, तथा इसकी पृथक मुद्रा, पासपोर्ट तथा कराधान व्यवस्था थी।
  4. हाजी के शासनकाल में, अंग्रेजो द्वारा ख़िलाफ़त शासन को नष्ट करने के किसी भी प्रयास को विफल करने के उद्देश्य से एक बड़ी सेना का गठन किया गया था, जिसमे हिंदूओं की महत्वपूर्ण भागीदारी थी।
  5. इस दौरान, बटाईदारों को करों में राहत देते हुए उनके द्वारा जोती जा रही भूमि का स्वामित्व अधिकार दिया गया।

हाजी के शासन का अंत

हाजी का शासन लंबे समय तक नहीं चला। जनवरी 1922 में, अंग्रेजो ने हाजी के विश्वासपात्र मित्र उन्नायन मुसालियार (Unyan Musaliyar) के माध्यम से संधि करने के बहाने से गिरफ्तार कर लिया तथा एक ब्रिटिश न्यायाधीश के समक्ष पेश किया। ब्रिटिश न्यायाधीश ने हाजी को उसके साथियों सहित म्रत्युदंड की सजा सुनाई।

Variyamkunnath_Kunjahammed_Haji

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हाजी कौन था?
  2. 1921 का मालाबार विद्रोह क्या था?
  3. हाजी ने किस प्रकार स्वतंत्र राज्य स्थापित किया?
  4. खिलाफत आंदोलन क्या है?
  5. खिलाफत आंदोलन के परिणाम

मेंस लिंक:

वरियामकुननाथ कुंजामहम्मद हाजी कौन थे? वर्ष 1921 में उन्होंने मालाबार क्षेत्र में किस प्रकार अंग्रेजों का सामना किया ?  विद्रोह के परिणामों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।

रूस का विजय दिवस (victory day)

सन्दर्भ: रूस में 24 जून को विजय दिवस परेड की 75वीं वर्षगांठ  मनायी गयी। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध (1941-1945) में सोवियत संघ को मिली विजय की 75 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गयी।

विजय दिवस का परेड का आयोजन 9 मई को किया जाना था, परन्तुउस समय इसे COVID-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।

विजय दिवस क्या है?

विजय दिवस, द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तथा वर्ष 1945 में मित्र राष्ट्रों की जीत का प्रतीक है।

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम समय में एडोल्फ हिटलर ने 30 अप्रैल को खुद को गोली मार ली थी।

हिटलर की मौत के पश्चात, जर्मन सैनिकों ने 7 मई को आत्मसमर्पण कर दिया, जिसे अगले दिन औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया, तथा यह 9 मई को प्रभावी हुआ।

अधिकांश यूरोपीय देशों में विजय दिवस 8 मई को मनाया जाता है।

रूस में विजय दिवस को 9 मई को क्यों मनाया जाता है?

इसका कारण यह है, आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर 7 मई को हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके अनुसार 8 मई को बर्लिन समयानुसार 23:01 बजे से लड़ाई बंद हो जायेगी।, चूंकि, मास्को का समय यूरोपीय समय से एक घंटा आगे होता है, अतः युद्धविराम 9 मई को प्रभावी हुआ।

  • आत्मसमर्पण के शुरुआती दस्तावेजों पर फ़्रांस की रीम्स (Reims) में 7 मई को हस्ताक्षर किए गए थे।
  • लेकिन, रूस ने तर्क दिया कि कुछ जर्मन सैनिकों ने रीम्स दस्तावेजों को केवल पश्चिमी देशों के गठबंधन के समक्ष आत्मसमर्पण माना है, तथा इसके बाद भी पूर्वी यूरोप में, विशेषकर प्राग में युद्ध जारी रहा।
  • अतः, सोवियत संघ ने एक अन्य आत्मसमर्पण की मांग की।
  • इसके पश्चात, दूसरा आत्मसमर्पण समारोह देर रात 8 मई को बर्लिन के बाहरी इलाके में स्थित एक किले में हुआ, उस समय मॉस्को में 9 मई की तारीख लग चुकी थी।
  • दोनों दस्तावेजों के अनुसार, जर्मनी के नियंत्रण वाले सभी सैन्य बल 11:01 बजे बर्लिन समय से सभी कार्यवाहियां बंद कर देंगे।

इस प्रकार, सोवियत संघ के अनुसार, जर्मनी के सशस्त्र बलों के प्रमुख ने 9 मई को जोसेफ स्टालिन के प्रतिनिधि के समक्ष व्यक्तिगत रूप से आत्मसमर्पण कर दिया तथा उसी दिन के प्रारम्भिक समय में आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।

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24 जून का महत्व

Covid-19 महामारी के कारण इस वर्ष समारोह को जून के लिए स्थगति कर दिया गया था।

24 जून की तारीख भी रूस के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

  • युद्ध जीतने तथा 9 मई को सोवियत संघ का विजय दिवस होने के बाद, स्टालिन ने 24 जून, 1945 को ग्रेट पैट्रियटिक वॉर (Great Patriotic War) में जर्मनी पर जीत की स्मृति में एक सैन्य परेड का आयोजन करना चाहता था।
  • इसलिए मास्को में पहली विजय दिवस परेड का आयोजन 24 जून को हुआ था।
  • हालांकि, उसके बाद से विजय दिवस परेड का आयोजन प्रतिवर्ष 9 मई को होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. धुरी राष्ट्र तथा मित्र राष्ट्र
  2. WW2 के कारण
  3. WW2 के परिणाम
  4. विश्व में विजय दिवस समारोह की तारीखें अलग-अलग क्यों हैं?
  5. रूस द्वारा 9 मई को विजय दिवस के रूप में क्यों चुना गया?

मेंस लिंक:

रूस द्वारा मनाया गए विजय दिवस पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय:  सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भारतीय दंड संहिता की धारा 309  (Sec 309 IPC)

संदर्भ:

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट, 2019 के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र में भारत की आत्महत्या दर सर्वाधिक है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आत्महत्या दर प्रति 100,000 लोगों पर 16.5 आत्महत्या है।
  • विश्व में तीसरी सर्वाधिक महिला आत्महत्या दर (14.7) भारत की है।

वर्ष 2017 में भारत में आत्महत्या को गैर-अपराधिक कृत्य घोषित किया गया था, परन्तु, भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code- IPC) की धारा 309 अभी समाप्त नहीं हुई है।

IPC की धारा 309 के अंतर्गत किसे अपराधी घोषित किया जा सकता है?

भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अनुसार, जो भी कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा, उसे अपराधी घोषित कर निर्धारित सजा से दण्डित किया जाएगा।

धारा 309 के अनुसार, आत्महत्या करने का प्रयत्न, एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

सजा – एक वर्ष सादा कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।

इस क़ानून को 19 वीं शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह कानून उस समय की सोच को दर्शाता है, जब हत्या अथवा आत्महत्या का प्रयास राज्य तथा ही धर्म के खिलाफ अपराध माना जाता था।

क्या इस क़ानून को निरस्त किया गया है?

नहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 309 अभी तक लागू है।

हालांकि संसद द्वारा मानसिक स्वास्थ्य विधेयक (Mental Health Care Bill- MHCA), 2017 को पारित किया गया, जो जुलाई 2018 से प्रभावी हुआ है।

MHCA ने IPC की धारा 309 के उपयोग की गुंजाइश को काफी कम कर दिया है – और आत्महत्या को केवल एक अपवाद के रूप में दंडनीय बनाने का प्रयास किया है।

MHCA की धारा 115 (1) के अनुसार: “भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के बावजूद, यदि कोई भी व्यक्ति आत्महत्या करता है, जब तक साबित न हो जाए, उसे अवसाद ग्रस्त समझा जाएगा तथा उपरोक्त क़ानून के तहत अभियुक्त नहीं होगा और न ही दण्डित किया जायेगा”।

सरकार की भूमिका तथा जिम्मेदारी

MHCA की धारा 115 (2) के अनुसार, “उपयुक्त सरकार का कर्तव्य होगा कि, वह आत्महत्या का प्रयास करने वाले अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को उचित देखभाल, पुनर्सुधार तथा उपचार प्रदान करे ताकि आत्महत्या के प्रयास की पुनरावृत्ति के खतरे को कम किया जा सके“।

धारा 309 से संबंधित विषय तथा चिंताएँ

  1. इस धारा के उपयोग, पीड़ित व्यक्ति को महत्वपूर्ण समय (golden hour) में इलाज से वंचित कर सकता है, क्योंकि “मेडिको-लीगल केस” होने के कारण अस्पताल को, उपचार शुरू करने हेतु पुलिस की अनुमति की आवश्यकता होती है।
  2. बेईमान अस्पताल अधिकारियों द्वारा इस स्थिति का दुरुपयोग की संभावना होती है, वे पुलिस को न करके मामले को “बंद” करने के लिए अतिरिक्त शुल्क की मांग कर सकते हैं; भ्रष्ट पुलिस कर्मियों द्वारा भी इसी तरह की जबरन वसूली किये जाने की संभावना रहती है।
  3. पहले से ही अवसाद ग्रस्त व्यक्ति तथा उसके संबंधियों के लिए उनकी वर्तमान समस्याओं के अतिरिक्त आघात और उत्पीड़न झेलना पड़ सकता है।

धारा 309 को जारी रखने के पक्ष में तर्क

ऐसे कई मामले देखे गए है, कि जब लोग सरकारी दफ्तरों में अपनी मांगों के पूरा न होने पर आत्महत्या की धमकी देते है। इन मामलों में, जब पुलिस को संदेह होता है कि, यह व्यक्ति वास्तव मी आत्महत्या करने का इरादा नहीं रखता है, बल्कि आत्महत्या की धमकी को गलत तरीके से सिस्टम पर दबाव बनाने अथवा ब्लैकमेल करने के लिए कर रहा है। ऐसी घटनाओं के दौरान इस धारा का प्रयोग आवश्यक हो जाता है।

यदि धारा 309 को निरस्त किया जाता है, तो इस तरह की परेशानी पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं होगा।

समय की मांग

IPC की धारा 309 को इस ढंग से पुनः परिभाषित किया जा सकता है कि इसका इसका उपयोग कानून और व्यवस्था बनाये रखने में किया जा सके तथा साथ ही इसे वास्तविक मानसिक तनाव व समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सके।

उच्चत्तम न्यायालय तथा विधि आयोग के फैसले

ज्ञान कौर बनाम पंजाब राज्य,1996 के मामले में, सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने धारा 309 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।

वर्ष 1971 में, विधि आयोग ने अपनी 42 वीं रिपोर्ट में आईपीसी की धारा 309 को निरस्त करने की सिफारिश की थी। राज्य सभा द्वारा आईपीसी (संशोधन) विधेयक, 1978 पारित कर दिया गया था, परन्तु, लोकसभा द्वारा पारित किया जाने से पहले संसद भंग हो गई तथा विधेयक व्यपगत हो गया।

वर्ष 2008 में, विधि आयोग ने अपनी 210 वीं रिपोर्ट में कहा कि आत्महत्या के प्रयास करने वाले व्यक्ति के लिए चिकित्सा और मनोरोग देखभाल की जरूरत होती है, न कि सजा की।

मार्च 2011 में, सुप्रीम कोर्ट ने भी संसद से इस धारा को हटाने की व्यवहार्यता पर विचार करने की सिफारिश की थी।

उद्धरण (Quote)

प्रसिद्ध समाजशास्त्री एमिल दुर्खीम (Emile Durkheim) की प्रसिद्ध अवधारणा है कि आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारकों का परिणाम नहीं होती है, अपितु इनमे सामाजिक कारकों का भी योगदान होता हैं‘।

decriminalizing

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IPC की धारा 309 के अंतर्गत किसे अपराधी घोषित किया जा सकता है?
  2. मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम (MHCA), 2017 के प्रमुख प्रावधान
  3. विधि आयोग- संविधान और रचना
  4. MHCA की धारा 115 (1)

मेंस लिंक:

हाल के वर्षों में, आत्महत्या संबंधी मामलों ने चिंताजनक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। भारत में  उच्च आत्महत्या मृत्यु दर के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा भारत इस चुनौती का सामना किस प्रकार कर है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष।

 पतंजलि द्वारा कोरोनावायरस (Covid-19) उपचार

संदर्भ: हाल ही में, योग गुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने Covid-19 को ठीक करने वाली पहली आयुर्वेदिक दवा के निर्माण का दावा किया है।

दवा के बारे में

रामदेव ने दावा किया है कि Covid-19 से संक्रमित व्यक्तियों पर नैदानिक परीक्षण (clinical trials) के दौरान कोरोनिल टैबलेट´(Coronil tablet), स्वसारी वटी’ (Swasari Vati) तथा ‘अणु तेल’ (Anu Taila) ने ‘शत प्रतिशत अनुकूल परिणाम’ दिखाए हैं।

वर्तमान स्थिति

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कथित दवा के बारे में विवरण मांगा है तथा पतंजलि और रामदेव को इस तरह के दावा करने से रोकने का निर्देश दिया है।

संबंधित आयुर्वेदिक दवा विनिर्माता कंपनी को सूचित किया गया है कि आयुर्वेदिक औषधियों सहित दवाओं के ऐसे विज्ञापन ‘औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम’ [Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act] 1954 के प्रावधानों तथा उसके नियमों एवं  तथा कोविड महामारी के दौरान केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत विनियमित हैं।

 औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954

  • इसके अंतर्गत, जादुई गुण होने का दावा करने वाली दवाओं और उपचार के विज्ञापनों को प्रतिबंधित किया गया है तथा इसे संज्ञेय अपराध घोषित करता है।
  • इसमें पहली बार अपराध करने पर 6 महीने की कैद अथवा जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। अपराध की पुनरावृत्ति होने पर सजा की अवधि एक वर्ष तक हो सकती है।
  • किसी कंपनी के दोषी होने पर, कंपनी के सभी सदस्यों को दोषी माना जाएगा।

कानून के अंतर्गत प्रतिवंधित दवाएं तथा उपचार

  1. महिलाओं के गर्भपात तथा गर्भधारण को रोकने से संबंधित
  2. यौन-सुख क्षमता में वृद्धि संबंधी
  3. मासिक-धर्म विकारों के सुधार संबंधी
  4. अनुसूची में उल्लिखित किसी बीमारी या स्थिति के इलाज, निदान या रोकथाम संबंधी

परिभाषा

इस अधिनियम में ‘जादुई उपचार’ (magic remedy) को किसी भी ताबीज, मंत्र, ताबीज या किसी अन्य वस्तु के रूप में परिभाषित किया गया है, जो यह दावा करता कि इसमें मनुष्य या जानवर की किसी बीमारी का इलाज, निदान या शमन करने हेतु चमत्कारी शक्तियां विद्यमान हैं।

आलोचनाएँ

इस कानून को शायद ही कभी लागू किया जाता है तथा जादुई उपचार संबंधी कई उत्पाद जनता के लिए आसानी से उपलब्ध हैं।

इस कानून को अब काफी पुराना माना जाता है क्योंकि इसकी सूची में शामिल 14 रोग अब इलाज योग्य हैं, तथा एड्स जैसे नए रोग इसकी सूची में सम्मिलित नहीं हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जादुई उपचार’ की परिभाषा
  2. उक्त कानून के तहत क्या प्रतिबंधित है?
  3. कानून के तहत प्रस्तावित दंड

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

अंतर्राष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम (ICP) (International Comparison Program ICP)

संदर्भ: विश्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम (ICP) के तहत संदर्भ वर्ष 2017 के लिए नई क्रय शक्ति समानताएं (Purchasing Power Parities- PPPs) जारी की हैं जो विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं में जीवन की लागत में अंतरों को समायोजित करती है।

वैश्विक रूप 176 अर्थव्यवस्थाओं ने ICP के 2017 चक्र में भाग लिया है।

ICP क्या है?

अंतरराष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम (International Comparison Program- ICP) संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग (UN Statistical CommissionUNSC) के दिशानिर्देशों के अंतर्गत विश्व की सबसे बड़ी डाटा-संग्रह पहल है।

  • इसका लक्ष्य, सभी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तुलना किए जाने हेतु आर्थिक गतिविधियों के उपायों को रूपांतरित करने के लिए महत्वपूर्ण, ‘क्रय शक्ति समता’ (Purchasing Power ParitiesPPPs) का निर्माण करना है।
  • PPP के साथ-साथ, ICP ‘मूल्य स्तर सूचकांकों’ (Price Level IndicesPLI) और जीडीपी व्यय (GDP expenditure) के अन्य क्षेत्रीय तुलना योग्य समुच्चयों का भी निर्माण करता है।
  • अगला ICP ‘संदर्भ वर्ष 2021’ के लिए आयोजित किया जायेगा।

भारत और ICP

  • भारत ने 1970 में इसकी शुरूआत से लगभग सभी ICP दौरों में भाग लिया है।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय भारत के लिए राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजंसी (National Implementing AgencyNIA) है जिसके पास राष्ट्रीय ICP कार्यकलापों के योजना निर्माण, समन्वयन तथा कार्यान्वयन की जिम्मेदारी है।
  • भारत को ICP 2017 चक्र के लिए स्टैटिक्स आस्ट्रिया के साथ-साथ ICP गवर्निंग बोर्ड का सह अध्यक्ष बनने का गौरव भी हासिल रहा है।

वैश्विक स्थिति

  • सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) स्तर पर प्रति डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की क्रय शक्ति समानताएं (PPPs) 2017 में 20.65 है, जो 2011 में 15.55 थी।
  • भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के साथ विनिमय दर समान वर्ष की इसी अवधि के 46.67 के मुकाबले अब 65.12 है।
  • इसके तदनुरूप बाजार विनिमय दर का PPP का अनुपात-मूल्य स्तर सूचकांक (PLI) का उपयोग भारत की अर्थव्यवस्था की कीमत के स्तरों की तुलना के लिए किया जाता है जो 2011 के 42.99 की तुलना में 2017 में 47.55 है।

भारत की स्थिति

  1. 2017 में, भारत ने तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी वैश्विक स्थिति को बनाये रखा तथा इसे मजबूत बनाया। PPP के लिहाज से भारत का सकल घरेलू उत्पाद, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.7 प्रतिशत (वैश्विक रूप से कुल 119,547 बिलियन अमेरिकी डॉलर में से 8,051 बिलियन अमेरिकी डॉलर) था।
  2. चीन और अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का क्रमशः 16.4 प्रतिशत तथा16.3 प्रतिशत था
  3. भारत वैश्विक वास्तविक एकल उपभोग एवं वैश्विक सकल पूंजी निर्माण में अपने PPP आधारित हिस्से के लिहाज से भी तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

क्षेत्रीय स्थिति: एशिया-प्रशांत क्षेत्र

  1. 2017 में, भारत ने विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी क्षेत्रीय स्थिति बनाये रखी जो पीपीपी के लिहाज से क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 20.83 प्रतिशत था।
  2. भारत क्षेत्रीय वास्तविक एकल उपभोग एवं क्षेत्रीय सकल पूंजी निर्माण में अपने पीपीपी आधारित हिस्से के लिहाज से भी दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
  3. चीन 50.76% (पहले) और इंडोनेशिया 7.49% (तीसरे) पर था।
  4. एशिया प्रशांत क्षेत्र में 22 प्रतिभागी देशों के बीच सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर प्रति हांगकांग डॉलर भारतीय रुपये की क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) अब 2017 में 3.43 है।
  5. भारतीय रुपये से हांगकांग डॉलर की विनिमय दर इसी अवधि की तुलना में 6.00 से बढ़कर अब 8.36 है।

क्रय शक्ति समता’ (Purchasing Power Parities- PPP) क्या है?

यह वह दर होती है, जिस पर एक देश की मुद्रा को अन्य देश में समान मात्रा में वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने के लिए दूसरे देश की मुद्रा में परिवर्तित किया जाता है।

यह अंतर्राष्ट्रीय विनिमय का एक सिद्धांत है। क्रय शक्ति समता के आधार पर किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार का पता लगाया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ICP क्या है? इसका संचालन कौन करता है?
  2. आईसीपी 2017 चक्र के लिए आईसीपी गवर्निंग बोर्ड के सह अध्यक्ष
  3. संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग (UNSC) – रचना और कार्य
  4. पीपीपी क्या है?
  5. PLI क्या है?
  6. वैश्विक तथा क्षेत्रीय स्तर पर भारत का प्रदर्शन

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय तुलना कार्यक्रम में वर्ष 2017 में भारत के प्रदर्शन पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर उत्पादों की उत्पत्ति के देश की जानकारी  (Country of Origin in GeM platform)

संदर्भ: हाल ही में, सरकार द्वारा, ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्म निर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए विक्रेताओं द्वारा GeM में कुछ परिवर्तन किये गए हैं।

इसमें सम्मिलित है:

  1. विक्रेताओं के लिए GeM पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करने के समय वे उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है।
  2. जिन विक्रेताओं ने GeM पर इस नए फीचर के लागू होने से पूर्व अपने उत्पादों को पहले ही अपलोड कर लिया है, उन्हें, नियमित रूप से उत्पत्ति के देश का अद्यतन करना होगा।
  3. GeM ने उत्पादों में स्थानीय सामग्री की प्रतिशतता का संकेत देने के लिए भी एक प्रावधान किया गया है।
  4. GeM पोर्टल पर ‘मेक इंन इंडिया‘ फिल्टर सक्षम बना दिया गया है। खरीदार केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद कर सकता है जो कम से कम 50 प्रतिशत के स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरी करते हैं।

GeM के बारे में

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का एक अत्याधुनिक राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद मंच है। इसमें बोनाफाइड विक्रेताओं को होने वाली प्रवेश बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है तथा कई प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं सहित एक जीवंत ई-मार्केटप्लेस बनाया जाता है।

उद्देश्य: GeM का उद्देश्य सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, दक्षता और गति को बढ़ाना है।

GeM सुविधाएं

  1. व्यक्तियों हेतु आम उपयोग की वस्तुओं / सेवाओं की निर्धारित श्रेणियों के उत्पादों की सूची।
  2. उचित मूल्य निर्धारण के आधार पर देखने, आंकने, तुलना करने तथा खरीदने की सुविधा।
  3. अधिकाँश उपयोगी वस्तुओं की बाजार में खरीद।
  4. आवश्यकता होने पर, वस्तुओं व सेवाओं की ऑनलाइन खरीद।
  5. पारदर्शिता तथा खरीदने में आसानी।
  6. रिवर्स ऑक्शन / ई-बिडिंग का उपयोग।
  7. विक्रेता रेटिंग प्रणाली।

GeM के लाभ

  1. पारदर्शिता को बढ़ावा
  2. दक्षता में वृद्धि
  3. विश्वासयुक्त और सुरक्षित
  4. सरकार को बचत

gem

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 युक्ति 2.0 (YUKTI 2.0)

मानव संसाधन मंत्रालय ने, उच्च शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक क्षमता और इनक्यूबेटेड स्टार्टअप से संबंधित सूचनाओं को व्यवस्थित करने में सहायता प्रदान करने के लिए ‘युक्ति 2.0’ पहल की शुरुआत की है।

  • युक्ति का पूरा नाम (Young India combating COVID with Knowledge, Technology and InnovationYUKTI) है।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल तैयार किया है।
  • इस पोर्टल के माध्यम से मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अपनी प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए उचित सहायता मिल रही है।

गैया परिकल्पना (Gaia hypothesis)

जेम्स लवलॉक द्वारा प्रस्तुत गैया परिकल्पना एक पारिस्थितिक सिद्धांत है, इसके अनुसार, सभी जीवित प्राणीयों तथा भौतिक संसार के मध्य एक जटिल अंतःक्रियात्मक प्रणाली होती है जिससे परस्पर संतुलन बना रहता है।

जेम्स लवलॉक की ‘गैया परिकल्पना’ ने एकीकृत प्रणाली के रूप में पृथ्वी की प्रकृति के सन्दर्भ में पारंपरिक सोच को चुनौती दी है।

इनका मानना है कि, पृथ्वी एक जीवित जीव की तरह काम करती है – यह जीवन एक स्व-विनियमन प्रणाली का हिस्सा है, जो ग्रह को जीवन के लिए एक उपयुक्त आवास के रूप में बनाए रखने के लिए भौतिक और रासायनिक वातावरण में हेरफेर करता है।

 ब्लेज़र (Blazars)

ब्लेज़र ब्रह्मांड में सबसे चमकदार और ऊर्जावान वस्तुओं में से एक है। इनकी ऊर्जा व चमक का कारण महाकाय ब्लैकहोल द्वारा ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।

  • एक अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि इनसे गामा-किरणें उत्सर्जित होती हैं।
  • सबसे दूरस्थ ब्लेज़र, ब्रहमांड की उत्पत्ति के 1.4 बिलियन साल बाद से प्रकाश का उत्सर्जन कर रहा है।
  • ब्लेज़र सभी सक्रिय आकाशगंगाओं के समान होते हैं, जो एक केंद्रीय विशालकाय ब्लैक होल की ओर आने वाले सभी पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

Blazars


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