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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 June

 

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. मतदान की गोपनीयता

2. मधेसियों द्वारा नए नेपाली विधान का विरोध

3. मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी वित्तपोषण के प्रतिरोध हेतु यूरेशियन समूह (EAG)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ग़रीब कल्याण रोज़गार अभियान

2. अंतरासस्यन (Intercropping)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कोविफोर क्या है?

2. गोल्डन लंगूर

3. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

4. स्वाभिमान अंचल

5. यूनिसेफ किड पावर

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

मतदान की गोपनीयता (Secrecy of ballot)

चर्चा का कारण

हाल ही में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा मतदान की गोपनीयता पर निर्णय दिया गया है।

  • यह निर्णय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले के विरोध में दाखिल याचिका पर सुनाया गया, जिसमे उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2018 को प्रयागराज जिला पंचायत की बैठक में हुए पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया था।
  • उच्च न्यायालय के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव में कुछ सदस्यों द्वारा मतपत्र की गोपनीयता के नियम का उल्लंघन किया गया था। न्यायालय ने सीसीटीवी फुटेज के आधार यह निष्कर्ष निकाला कि सदस्यों द्वारा मतपत्रों को जानबूझ कर दिखाया गया था।

मतदान की गोपनीयता उच्चत्तम न्यायालय का व्यक्तव्य

  • ‘मतपत्र की गोपनीयता’ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की आधारशिला है। मतदाता की पसंद स्वतंत्र होनी चाहिए और लोकतंत्र में गुप्त मतदान प्रणाली मतदाता की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करती है।
  • वोटर के मतपत्र की गोपनीयता के अधिकार की रक्षा करना क़ानून का नियम है।
  • मतदाता को अपने मत के बारे में बताने के लिए विवश करना भी, मताधिकार के प्रयोग की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
  • मतदान की गोपनीयता का सिद्धांत संवैधानिक लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
  • हालांकि, एक मतदाता स्वेच्छा से गैर-प्रकटीकरण (Non-Disclosure) के विशेषाधिकार को त्याग सकता है। ऐसा करने से मतदाता को कोई नहीं रोक सकता है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार ‘मतदान की गोपनीयता’   

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act– RPA) की धारा 94 में ‘मतदाता को अपनी पसंद के अनुसार मतदान गोपनीयता के विशेषाधिकार’ का प्रावधान किया गया है।

आगे क्या?

शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया है, कि मूल प्रस्ताव पर गुप्त मतदान के माध्यम से पुनः मतदान जिला न्यायाधीश, इलाहाबाद या उनके द्वारा नामित अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, इलाहाबाद की अध्यक्षता में निर्णय की तिथि से दो महीने की अवधि के भीतर जिला न्यायाधीश द्वारा निर्धारित तिथि और समय पर कराया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA) की धारा 94 क्या है?
  2. रिट याचिका क्या है?
  3. फर्स्ट पास्ट द पोस्ट प्रणाली (FPTP) क्या है?
  4. भारत में पंचायत चुनाव से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेंस लिंक:

मतदान की गोपनीयता क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला क्यों कहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

मधेसियों द्वारा नए नेपाली विधान का विरोध

चर्चा का कारण

नेपाल में मौजूदा नागरिकता कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव संसद में पेश किया गया है, जिसका नेपाली विपक्षी पार्टी के नेताओं ने विरोध किया है। इनका कहना है कि, यह परिवर्तन नेपाल के मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को सर्वाधिक प्रभावित करेगा। नेपाल के मैदानी इलाकों को मधेस क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, तथा यहाँ के लोगों की भारत के साथ सीमा पार रिश्तेदारी सामान्य बात है।

हालाँकि, नेपाली सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों को सही ठहराने के लिए भारत के नागरिकता नियमों का हवाला दिया है।

प्रस्तावित परिवर्तन

  • विधेयक में देश के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसके अंतर्गत किसी नेपाली नागरिक से विवाहित एक विदेशी महिला को प्राकृतिक नागरिकता (Naturalised Citizenship) के लिए सात साल तक इंतजार करना होगा।
  • विधेयक में नेपाली नागरिक से विवाहित विदेशी महिला के लिये प्राकृतिक नागरिकता प्राप्त करने तक सात अधिकार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
  • नागरिकता प्रमाण पत्र के न होने पर भी उन्हें किसी भी व्यवसाय तथा चल और अचल संपत्ति बेचने, कारोबार से लाभ कमाने एवं किसी भी प्रकार की संपत्ति के लेनदेन से वंचित नहीं किया जायेगा।

मधेशियों में नागरिकता अधिनियम में संशोधन से चिंता का कारण

  • मधेशी. हिमालय की तलहटी में स्थित नेपाल के दक्षिण में तराई क्षेत्र के निवासी हैं। नेपाल के इस दक्षिणी इलाके की सीमा बिहार से लगती है।
  • मधेशी, नस्लीय तथा सांस्कृतिक रूप से भारत के बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश के निवासियों से समानता रखते है, तथा सीमा के दोनों ओर परिवारों के बीच अक्सर विवाह संबंध होते हैं।
  • इनका कहना है कि, इस तरह का कानून मधेश क्षेत्र में रहने वालों के लिए दिक्कतें पैदा करेगा क्योंकि इस इलाके में बड़े पैमाने पर भारत में शादियां होती हैं।
  • उनका मानना ​​है कि नागरिकता अधिनियम में संशोधन,समाज और परिवारों में अनिश्चितता और तनाव उत्पन्न करेगा।
  • कुछ आलोचकों ने इन परिवर्तनों को नस्लीय रूप से प्रेरित करार दिया है।

भारत और नेपाल के बीच बदलते संबंध

नेपाल द्वारा नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने का फैसला भारत के साथ नेपाल के साथ संबंधो में बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा सकता है।

हाल ही में, नेपाल ने संविधान संशोधन कर देश का नया मानचित्र घोषित किया है, जिसमे भारत के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों- लिम्पियाधुरा कालापानी और लिपुलेख – को सम्मिलित किया गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. मधेशी लोग कौन हैं?
  2. भारत में तराई क्षेत्र कहाँ है?
  3. भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम का अवलोकन
  4. नेपाल द्वारा नागरिकता अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन
  5. नेपाल और उसके आसपास हिमालय पर्वतश्रेणीयां
  6. मानचित्र पर कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को खोजें

मेंस लिंक:

मधेशी कौन हैं? नेपाल द्वारा नागरिकता कानून में प्रस्तावित परिवर्तनों के बारे में मधेशी क्यों चिंतित हैं?

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी वित्तपोषण के प्रतिरोध हेतु यूरेशियन समूह (EAG)

 (Eurasian Group on Combating Money Laundering and Financing of TerrorismEAG)

संदर्भ: हाल ही में, वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (Financial Action Task Force- FATF) के तत्वावधान में हुई ‘मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी वित्तपोषण के प्रतिरोध हेतु यूरेशियन समूह’ (EAG) की 32वी बैठक में भारत ने भाग लिया।

EAG क्या है?

मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी वित्तपोषण के प्रतिरोध हेतु यूरेशियन समूह (Eurasian Group on Combating Money Laundering and Financing of Terrorism- EAG) एक क्षेत्रीय निकाय है, जिसमें नौ देश सम्मिलित हैं: भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उजबेकिस्तान और बेलारूस।

  • इसकी स्थापना वर्ष 2004 में की गयी थी, तथा यह वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) का एक सहयोगी सदस्य है।
  • इसकी स्थापना 6 अक्टूबर, 2004 को मास्को में आयोजित यूरोप तथा एशिया के छह देशों के एक सम्मलेन में की गयी थी।
  • EAG के संस्थापक सदस्य देश, बेलारूस, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान हैं।
  • वर्ष 2005 में उजबेकिस्तान (2005) तथा वर्ष 2010 में तुर्कमेनिस्तान और भारत को EAG में सम्मिलित किया गया था।
  • मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी वित्तपोषण के प्रतिरोध हेतु यूरेशियन समूह (EAG) समझौते पर जून 2011 में मॉस्को में हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें EAG को एक क्षेत्रीय अंतर सरकारी संगठन का दर्जा प्रदान किया गया।

EAG के प्रमुख कार्य

  1. सदस्य देशों को आतंकी वित्तपोषण (terrorist financing) को रोकने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की 9 विशेष सिफारिशों तथा धन शोधन (Money Laundering) हेतु FATF द्वारा की गयी 40 सिफारिशों को लागू करने में सहायता करना।
  2. मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के उद्देश्य से संयुक्त कार्ययोजनाओं का निर्माण तथा संचालन करना।
  3. FATF की (40-9) सिफारिशों के आधार पर सदस्य-देशों द्वारा जारी कार्यक्रमों का पारस्परिक मूल्यांकन करना।
  4. विशेष अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, निकायों और अन्य इच्छुक देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सहायता कार्यक्रमों का समन्वय करना।
  5. मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. EAG क्या है?
  2. इसकी स्थापना कब हुई और इसके संस्थापक सदस्य कौन हैं?
  3. वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) क्या है?
  4. EAG तथा वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के सदस्य।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: रोजगार संबंधी विषय।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान (Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan)

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के चलते गांवों में लौटने वाले प्रवासी कामगारों को रोजगार और आजीविका हेतु व्यापक अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का शुभारम्भ किया।

प्रमुख विशेषताएं

  • इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य वापस आए प्रवासी श्रमिकों को आजीविका के अवसर प्रदान करके उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करना है।
  • इस अभियान में केवल ग्रामीण श्रमिकों पर ध्यान दिया गया है।
  • 125 दिन का यह अभियान मिशन के रूप में काम करेगा, इसमें 116 जिलों में 25 श्रेणी के कार्यों/ गतिविधियों के कार्यान्वयन पर ध्यान केन्द्रित होगा।
  • इस अभियान के दौरान 50,000 करोड़ रुपये के सार्वजनिक कार्य कराए जायेंगे।
  • इसके माध्यम से 25 सार्वजनिक आधारभूत ढांचागत कार्य और आजीविका के अवसर बढ़ाने से संबंधित कार्यों का कार्यान्वयन किया जाएगा।
  • गाँवों को सामान्य सेवा केंद्रों (Common Service Centres– CCS) और कृषि विज्ञान केंद्रों(Krishin Vigyan Kendras- KVK) के माध्यम से इस कार्यकम से जोड़ा जायेगा।

116districts

योजना का कार्यान्वयन

इस अभियान को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों यथा; ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल व स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़कें, दूरसंचार और कृषि द्वारा समन्वित रूप से कार्यान्वित किया जायेगा।

अभियान के तहत 6 जिलों के चुनाव का कारण

  • ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ के अंतर्गत बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा राज्यों को चुना गया है।
  • COVID-19 लॉकडाउन के बाद, सर्वाधिक प्रवासी श्रमिक इन छह राज्यों में वापस लौटे हैं।
  • इन जिलों से दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों के लाभान्वित होने का अनुमान है।
  • कुल 116 ज़िलों को इस अभियान के लिये चुना गया है, जिसमें 27 आकांक्षी ज़िले (aspirational districts) भी सम्मिलित हैं।

योजना का महत्व

इन अभियान के अंतर्गत प्रदान किये गए रोजगार अवसरों से श्रमिकों की क्षमता तथा कौशल का उचित उपयोग हो सकेगा।

इस अभियान में, आधुनिक सुविधाओं, जैसे कि इंटरनेट कनेक्टिविटी, ऑप्टिक फाइबर केबलों को बिछाने, गांवों में इंटरनेट की गति बढ़ाने के लिए सम्मिलित किया गया है, ताकि गांवों में बच्चे शहरी बच्चों की तरह पढ़ाई कर सकें।

प्रीलिम्स लिंक

  1. योजना के तहत शामिल राज्य
  2. आकांक्षी ज़िले (aspirational districts) क्या हैं?
  3. योजना के अंतर्गत कार्यों के प्रकार
  4. सामान्य सेवा केंद्रों (CCS) क्या हैं?
  5. योजना के कार्यान्वयन में शामिल विभिन्न मंत्रालय

मेंस लिंक

योजना की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ।

अंतरासस्यन (अंतर-फसली)

(Intercropping)

चर्चा का कारण

केरल सरकार, बागानी कृषि क्षेत्र संबंधी विशिष्ट कानूनों में संशोधन करने की योजना बना रही है। इसके माध्यम से नकदी फसलों, जैसे चाय, कॉफी, इलायची और रबर के साथ खाद्य फसलों के अंतरासस्यन (Intercropping) की अनुमति प्रदान की जायेगी।

इसके लिए, केरल भूमि सुधार अधिनियम, केरल अनुदान और पट्टे (अधिकारों का संशोधन) अधिनियम और केरल भूमि उपयोग नियम में संसोधन की आवश्यकता होगी।

आवश्यकता

  • खाद्य आयात हेतु पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता समाप्त करने के लिए।
  • बड़े उत्पादकों द्वारा संभावित खाद्य संरक्षणवाद से बचाव करने हेतु बागानी फसलों के साथ कृषि खाद्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने हेतु।

संशोधन के प्रभाव

केरल में 8 लाख हेक्टेयर में बगानी फसलों का उत्पादन किया जाता है। संबंधित कानूनों में संशोधन के पश्चात अंतरासस्यन (Intercropping) के लिए लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो जाएगी।

  • प्रस्तावित संशोधन के अंतर्गत बागानी कृषि के साथ डेयरी और पोल्ट्री फार्मिंग की अभी अनुमति दी जायेगी।
  • यह संशोधन, विषैले कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों और पानी के उपयोग को कम करके उच्च उपज वाली खाद्य फसलों में निवेश को प्रेरित करेगा।

प्रस्तावित योजना

केरल कृषि विश्वविद्यालय ने केरल को 23 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया है।

  • इसके अनुसार, मन्नार जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्थित चाय बागान, संतरे, सेब, एवोकैडो, अंगूर तथा सर्दियों में उगायी जाने वाली सब्जियां आदि के अंतरासस्यन (Intercropping) के लिए उपयुक्त है।
  • रबर उत्पादक क्षेत्रों में, पेड़ों के बीच में फैले छोटे भूखंडों में रामबुतान (rambutan), मैंगोस्टीन (mangosteen) और अन्य उष्णकटिबंधीय फलों की खेती की जा सकती है।
  • चाय, कॉफी और इलायची के बागानों में छायादार वृक्षों के रूप में कटहल के पेड़ लगाने का भी सुझाव दिया गया है।

अंतरासस्यन (Intercropping) क्या है?

किसी खेत में एक साथ दो अथवा दो से अधिक फसलों की खेती को अंतर-फसली या अंतरासस्यन (Intercropping) कहते है।

इसका मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिक संसाधनों का उपयोग करते हुए किसी कृषि भूमि से अधिक उपज प्राप्त करना होता है।

अंतरासस्यन हेतु विभिन्न पद्यतियां

  1. मिश्रित अंतरासस्यन (Mixed intercropping) – बिना किसी पंक्ति व्यवस्था के, अव्यवस्थित तरीके से दो या अधिक फसलों को लगाया जाता है।
  2. पंक्ति अंतरासस्यन (Row intercropping)- दो या दो से अधिक फसलों को अलग-अलग पंक्तियों में लगाया जाता है।
  3. क्रमिक अंतरासस्यन (Relay intercropping) – दो या दो से अधिक फसलों को एक ही समय में उनके फसल-चक्र के अनुसार उगाया जाता है। इसमें पहली फसल के उग आने के पश्चात, परन्तु, उसकी कटाई से पहले दूसरी फसल को बोया जाता है।
  4. पट्टी अंतरासस्यन (Strip intercropping) – इसमें अलग-अलग पट्टियों में एक साथ दो या अधिक फसलें उगायी जाती हैं।

अंतरासस्यन के लाभ

  • एकल फसलों की तुलना में प्रकाश, पानी और अन्य पोषक संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग
  • इसमें छायादार फसलों का प्रभावी प्रबंधन होता है, क्योंकि मिश्रित फसल में कीटनाशकों का प्रयोग कम करना पड़ता है।
  • प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक उपज प्रदान होती है।
  • फलीदार (leguminous) फसलों के अंतरासस्यन से मृदा उर्वरता में सुधार, अर्थात नाइट्रोजन फिक्सिंग।
  • मृदा कटाव पर रोक।
  • मृदा सतह से कम वाष्पीकरण।

अंतरासस्यन के दोष

  • अंतरासस्यन हमेशा यांत्रिक कृषि प्रणालीयों के अनुकूल नहीं होती है।
  • इसमें फसलों पर अधिक ध्यान देना पड़ता है, तथा इसके लिए विशेषज्ञ प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
  • रोपण, निराई और कटाई में अधिक समय लगता है, जिससे श्रम-लागत में वृद्धि होती है।
  • अंतरासस्यन प्रणाली में फसलों के रोपण, खेती, खाद, छिड़काव और कटाई की अग्रिम योजना बनानी पड़ती है।

प्रीलिम्स लिंक

  1. विभिन्न फसल पैटर्न
  2. चाय और कॉफी के लिए जलवायु की स्थिति
  3. अंतरासस्यन के प्रकार
  4. लाभ तथा दोष
  5. शून्य बजट प्राकृतिक खेती क्या है?

मेंस लिंक:

अंतरासस्यन की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 कोविफोर (Covifor) क्या है?

यह COVID 19 के उपचार के लिए एक एंटीवायरल रेमेडिसविर (Antiviral Remdesivir) है।

भारतीय औषधि महानियंत्रक’ (Drug Controller General of India- DGCI) ने हाल ही में दवा कंपनी हेटेरो (Hetero) को इस नई दवा को लॉन्च करने के लिए अपनी मंजूरी प्रदान की है।

इसके अलावा, COVID 19 के उपचार के लिए भारतीय बाजार में ग्लेनमार्क द्वारा फैबीफ्लू (Fabiflu) नाम से दवा लांच की गयी है।

गोल्डन लंगूर (Golden Langurs)

चर्चा का कारण

प्राइमेटोलॉजिस्टों (Primatologists) के अध्ययन के अनुसार, गोल्डन लंगूरों में, मादा के पेट में भ्रूण हत्या तथा शिशु हत्या की प्रवृत्ति देखी गयी है।

इस प्रजाति में नया नर गोल्डन लंगूर, मादा लंगूर का जबरन गर्भपात करवा देता है तथा प्रायः स्तनपान कराने वाली मादा के बच्चे को मार डालता है। नया नर लंगूर, मादा के पुराने लंगूर द्वारा गर्भ धारण करने पर, मादा के पेट पर गर्भपात होने तक लात या घूँसा मारता रहता है।

अन्य चिंताएँ

जंगलों के कटाव तथा बिजली के तारों आदि के कारण सुनहरे लंगूरों के प्रजनन के संकट में वृद्धि हुई है।

सुनहरे लंगूरों के संबंध में मुख्य तथ्य

  • यह भारत में वैज्ञानिक समुदाय द्वारा हाल ही में खोजे गए प्राइमेट्स में से एक है।
  • निवास स्थान: अर्ध सदाबहार और मिश्रित पर्णपाती वन।
  • यह पश्चिमी असम और भारत-भूटान की सीमा से सटे इलाकों में पाया जाता है।

संरक्षण स्थिति

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) के अधीन में अनुसूची I की प्रजाति है।
  • वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) की परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है।
  • IUCN की लाल सूची में इस प्रजाति को संकटापन्न (Endangered) की श्रेणी में रखा गया है।

आबादी

  • वर्ष 2019 में, भूटान द्वारा गोल्डन लंगूरों की आबादी में वर्ष 2009 की गणना से 62% की गिरावट दर्ज की गयी।
  • COVID-19 लॉकडाउन के कारण इस वर्ष गोल्डन लंगूरों की गणना पूरी नहीं हो की जा सकी है।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day)

प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है।

वर्ष 2020 के लिये अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम: ‘स्वास्थ्य के लिये योग- घर पर योग’ (Yoga for Health-Yoga at Home)  

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का यह छठा वैश्विकआयोजन है। वैश्विक स्तर पर वर्ष 2015 में सर्वप्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया था।

पृष्ठभूमि

11 दिसंबर 2014 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ के 69 वें सत्र के दौरान एक प्रस्ताव पारित करके 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस/विश्व योग दिवस के रूप में घोषित किया गया था।

स्वाभिमान अंचल (Swabhiman Anchal)

  • स्वाभिमान अंचल को ओडिशा के मलकानगिरी जिले में कट-ऑफ क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, यह माओवादी गतिविधियों का प्रमुख क्षेत्र था।
  • यह क्षेत्र तीन तरफ से नदियों के पानी से तथा दूसरी ओर दुर्गम इलाके से घिरा हुआ है।
  • ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के माओवादी शरण लेने के लिए स्वाभिमान अंचल में भाग जाते थे।

चर्चा का कारण

ओडिशा पुलिस इस क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रही है।

यूनिसेफ किड पावर (UNICEF Kid Power)

चर्चा का कारण

यूनिसेफ किड पॉवर ‘ने बच्चों के लिए 13 योग स्ट्रेच और पोज़ सूचीबद्ध किए हैं।

यह क्या है?

  • यूनिसेफ किड पावर UNICEF USA का एक कार्यक्रम है जो बच्चों को अपनी दैनिक गतिविधियों को वास्तविक दुनिया के प्रभाव से जोड़कर जीवन बचाने की शक्ति देता है।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ मिलकर की गयी थी। इसमें बच्चों की गतिविधियां ट्रैक करने के लिए बैंड बनाये जाते है।
  • ये बैंड बच्चों के फिटनेस ट्रैकर ब्रेसलेट के रूप में कार्य करते हैं जो स्मार्टफोन ऐप से जुड़े होते हैं।

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