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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. कीलादी उत्खनन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. रूल ऑफ लॉ इंडेक्स

2. प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना

3. GAFA टैक्स क्या है?

4. ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फ्लुएंज़ा डेटा (GISAID)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में व्यक्तिगत दान हेतु वित्त मंत्रालय की स्वीकृति

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सत्यभामा पोर्टल

 


 सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

कीलादी उत्खनन

(Keeladi excavations)

सन्दर्भ: कीलादी में छठे चरण की खुदाई के दौरान एक बच्चे के कंकाल के अवशेष मिले हैं। यह कंकाल दो टेराकोटा कलशों के बीच दफन पाया गया है।

कीलादी उत्खनन के बारे में

  1. ‘कीलादी’, तमिलनाडु में मदुरै से लगभग 13 किमी. दक्षिण पूर्व में वैगई नदी के किनारे स्थित है। कीलादी में हुई खुदाई से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर पता चलता है, कि तमिलनाडु में संगमकाल के दौरान वैगई नदी के किनारे एक नगरीय सभ्यता की उपस्थिति थी।
  2. खुदाई के दौरान प्राप्त हुए पुरावशेषों से लौह युग (12 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व) तथा प्रारंभिक ऐतिहासिक काल (छठी शताब्दी ईसा पूर्व से चौथी शताब्दी ईसा पूर्व) के मध्य गायब कड़ी को समझने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए है।
  3. साक्षर समाज: उत्खनन में तमिल ब्राह्मी लिपि के बारे में पता चला है। कच्चे तथा पके हुए बर्तनों पर तमिल ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण अक्षरों के प्रमाण मिले हैं। इससे छठी शताब्दी ईसा पूर्व में साक्षरता के स्तर का संकेत मिलता है।
  4. पशुपालन करने वाला कृषि समाज: गाय, बैल, भैंस, भेड़-बकरी, नीलगाय, ब्लैक बक, जंगली सुअर और मोर के कंकालो के अवशेषों यह ज्ञात होता है कि कीलादी समाज में कृषि कार्यों हेतु पशुओं का प्रयोग किया जाता था।
  5. उच्च जीवन स्तर: टूटी-फूटी अवस्था में ऊँची दीवारें, अच्छी तरह से बिछाया गया फर्श, छत पर लगी हुई टाइलें, लोहे की कीलों से जड़े खम्बे तथा कड़ियाँ आदि, संगम काल में उच्च जीवन शैली का प्रमाण देती है।
  6. उत्खनन में प्राप्त वस्तुएं: ईंटो से निर्मित संरचनाएं, टेराकोटा गोले (Terracotta Sphere), टाइल लगी हुई ध्वंस छतें, तांबे की वस्तुओं के टुकड़े, लोहे से निर्मित उपकरण, टेराकोटा निर्मित शतरंज के टुकड़े, कान के गहने, कताई का सामान, मूर्तियाँ, काले और लाल मृद्भांड, तथा खुरदरे मृद्भांडों के टुकड़ों के अतिरिक्त कांच के मनके तथा अर्द्ध कीमती पत्थर आदि वस्तुएं प्राप्त हुई हैं।
  7. उत्खनन में मृद्भांडों पर, तथा खुदाई स्थल पर तथा आसपास की गुफाओं और चट्टानों पर भित्तिचित्रों के चिन्ह पाए गए हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. कीलादी कहाँ स्थित है?
  2. संगम युग क्या है?
  3. उत्खनन स्थल पर प्राप्त हुए अवशेष
  4. संगम काल में व्यापार
  5. प्राचीन भारत में सोने के सिक्कों का उपयोग

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

रूल ऑफ लॉ इंडेक्स (Rule of Law Index)

चर्चा का कारण

हाल ही में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी, जिसमे मांग की गई थी कि न्यायालय, ‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’ में भारत की स्थिति को सुधारने हेतु केंद्र सरकार को विशेषज्ञ कमेटी के गठन करने के लिए निर्देश दे।

याचिकाकर्ता की मांग

याचिका में कहा गया कि एक स्वतंत्र संगठन ‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’ द्वारा तैयार की गयी रूल ऑफ लॉ इंडेक्स- 2020 में शामिल शीर्ष 20 देशों की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं का विशेषज्ञ समितियों को अध्ययन करना चाहिए।

याचिका में वैकल्पिक उपाय के रूप में विधि आयोग को इस सूचकांक में शामिल शीर्ष 20 देशों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करके भारत की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के उपायों के बारे में सुझाव देने की मांग की गयी है।

याचिका दायर करने का कारण

हाल ही में, ‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’ (World Justice Project) द्वारा जारी ‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’ (Rule of Law Index)– 2020 में भारत को 69 वीं रैंकिंग प्रदान की गयी है।

  • इस सूचकांक में भारत को कभी भी शीर्ष 50 देशों के मध्य स्थान नहीं मिला है, इसके बाद भी विभिन्न सरकारों द्वारा भारत की अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार करने हेतु आवश्यक कदम नहीं उठाये गये।
  • रूल ऑफ़ लॉ इंडेक्स में, शासकीय खुलापन, मौलिक अधिकार, दीवानी और फौजदारी न्याय व्यवस्था तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश, नियमों के प्रवर्तन जैसे आठ मापदंडो पर भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
  • इसके अतिरिक्त, विधि का खराब शासन, जीवन, स्वतंत्रता, आर्थिक न्याय, बंधुत्व, व्यक्तिगत गरिमा तथा राष्ट्रीय एकीकरण पर हानिकारक प्रभाव डालता है।
  • विधि का खराब शासन, संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों को भी अवमानना करता है।

न्यायालय का वक्तव्य

यह न्यायालय के लिये उचित मामला नहीं है। इस संबंध में उचित कार्रवाई के लिये सरकार को प्रतिवेदन दिया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि याचिका को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रतिवेदन के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। याचिका में की मांगों को उचित पाए जाने पर सरकार छह माह के भीतर उचित निर्णय ले सकती है।

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‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’ क्या है?

यह सूचकांक एक स्वतंत्र संगठन ‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’ द्वारा प्रतिवर्ष जारी किया जाता है।

यह एक मात्रात्मक मूल्यांकन उपकरण है। सूचकांक विभिन्न मापदंडों के आधार पर किसी देश में विधि के शासन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है।

इस सूचकांक में विश्व के 128 देशों को शामिल किया गया है।

देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

सूचकांक आठ मापदंडो के आधार पर देशों को रैंकिंग प्रदान करता है :

  1. सरकारी शक्तियों पर दबाव,
  2. भ्रष्टाचार पर अंकुश,
  3. शासकीय खुलापन,
  4. मौलिक अधिकार,
  5. व्यवस्था एवं सुरक्षा,
  6. नियामों का प्रवर्तन,
  7. सिविल न्याय,
  8. आपराधिक न्याय।

‘विधि का शासन’ किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?

‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’, विधि के शासन को निम्नलिखित चार सार्वभौमिक सिद्धांत के आधार पर पारिभाषित करता हैं:

  1. सरकार, इसके अधिकारी तथा प्रतिनधि, विधि के अधीन उत्तरदायी हों।
  2. देश में बनाये गए क़ानून स्पष्ट, प्रचारित, स्थिर और निष्पक्ष हों तथा व्यक्तियों तथा संपति की सुरक्षा करने सहित मूल अधिकारों की रक्षा करते हों।
  3. कानूनों को अधिनियमित करने, प्रशासित करने तथा लागू करने की प्रक्रिया, सुलभ, दक्ष और निष्पक्ष हो।
  4. न्याय को सक्षम, नीतिपरक, निष्पक्ष तथा स्वतंत्र प्रतिनिधियों दवारा प्रदान किया जाता हो, तथा सभी समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व हो।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’ कौन जारी करता है?
  2. रैंकिंग प्रदान करने वाले मापदंड
  3. ‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’- 2020 शीर्ष 10 देश तथा सबसे कम रैंकिंग वाले 10 देश
  4. याचिका क्या होती है?
  5. अनुच्छेद 32

मेंस लिंक:

‘रूल ऑफ लॉ इंडेक्स’ पर एक टिप्पणी लिखिए। भारत इसमें बेहतर प्रदर्शन कैसे कर सकता है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना

(PM Svanidhi)

संदर्भ: रेहड़ी-पटरी वालों (Street Vendors) के लिए विशेष लघु-ऋण (माइक्रो क्रेडिट) सुविधा- प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) प्रदान करने हेतु सिडबी (SIDBI) को  कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में शामिल करने हेतु ‘आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय’ और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India- SIDBI) के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

SIDBI की भूमिका

सिडबी, पीएम स्वनिधि योजना को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में लागू करेगा।

यह सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises- CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन भी करेगा।

सिडबी, एक विशिष्ट रूप से निर्मित और एकीकृत आईटी प्लेटफ़ॉर्म विकसित करेगा, जो शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies- ULBs), ऋण प्रदाता संस्थानों, डिजिटल भुगतान संग्राहकों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय करेगा।

योजना के प्रमुख बिंदु

  1. यह 50 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को 10,000 रु. तक का सस्ता ऋण प्रदान करने हेतु एक विशेष माइक्रो-क्रेडिट सुविधा योजना है। इसके अंतर्गत 24 मार्च को या उससे पहले कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा
  2. यह योजना मार्च 2022 तक वैध है।
  3. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) इस योजना के कार्यान्वयन हेतु तकनीकी भागीदार है।
  4. सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन करेगा।

योजना के अंतर्गत ऋण

  • इस योजना के तहतस्ट्रीट वेंडर्स 10 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण ले सकते हैं जिसे एक वर्ष की अवधि में मासिक किश्तों में चुकाने होंगे।
  • समय पर / जल्दी ऋण चुकाने पर 7 प्रतिशत की सालाना ब्याज सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में त्रिमासिक आधार पर जमा कर दी जाएगी।
  • ऋण के शीघ्र पुनर्भुगतान पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

पात्रता

इस योजना के अंतर्गत शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों के आस-पास सड़क पर माल बेचने वाले विक्रेताओं,सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वाले, फल-सब्जी, लॉन्ड्री, सैलून, पान की दुकान तथा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा।

 योजना की आवश्यकता

  • लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों तथा सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वालों के जीवन तथा उनकी आजीविका को विशेष रूप से प्रभावित हुई है।
  • स्ट्रीट वेंडर आमतौर पर अनौपचारिक स्रोतों से बहुत अधिक ब्याज दरों पर ऋण लेकर छोटी पूंजी लगाकर कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त, लॉकडाउन के दौरान अपनी बचत तथा लागत पूंजी का समाप्त हो जाने के कारण पुनः रोजगार आरंभ करने का संकट इनके सामने है।
  • अतः, व्यापार को फिर से शुरू करने में मदद करने के लिए स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक बैंकिंग स्रोतों के माध्यम से कार्यशील पूंजी के लिए सस्ती क्रेडिट प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना की वैधता
  2. कौन लागू करता है?
  3. योजना के तहत पात्रता?
  4. ब्याज की दर?
  5. SIDBI क्या है?

मेंस लिंक:

पीएम स्वनिधि (PM SVANIDHI) योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

GAFA टैक्स क्या है?

चर्चा का कारण

डिजिटल व्यवसाय के दिग्गजों के लिए वैश्विक कर प्रणाली को दुरस्त करने के उद्देश्य से चल रही वार्ता से संयुक्त राज्य अमेरिका कथित तौर अलग हो गया है। इसके साथ, फ्रांस ने अब तथाकथित GAFA कर पर “गतिरोध” की पुष्टि कर दी है।

चिंता का विषय

फ्रांस के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, इटली तथा अन्य देशों ने सबसे बड़ी डिजिटल कंपनियों पर कर लगा चुके है।

अमेरिकी अधिकारीयों ने यूरोपीय देशों से असहमति जताते हुए कहा है कि, यह कदम अमेरिकी फर्मों के प्रति भेदभावपूर्ण है। अमेरिका का कहना है कि, नए कर-प्रावधानों के लिए वर्तमान अन्तराष्ट्रीय कर नियमों के व्यापक रूप से पुनर्गठन की आवश्यकता है।

अब, अमेरिका ने कर संबधी वार्ता से अपने को अलग कर लिया है, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापार विवाद के पुनः भड़कने की संभावना उत्पन्न हो गयी है।

पृष्ठभूमि

जनवरी में, 137 देशों द्वारा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (Organisation for Economic Co-operation and Development, OECD) के तत्वावधान में, वर्ष 2020 के अंत तक बहुराष्ट्रीय प्रोद्योगिकी कंपनियों पर कर लगाने के लिए एक समझौते पर बातचीत करने पर सहमति व्यक्त की गयी थी।

फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन ने OECD के लिए एक निष्पक्ष डिजिटल कर प्रणाली पर अपनी सहमति भेज दी है।

अतिरिक्त जानकारी

 GAFA टैक्स क्या है?

GAFA टैक्स, का नामकरण Google, Apple, Facebook, तथा Amazon कंपनियों के नाम को  मिलाकर किया गया है। यह विश्व की बड़ी प्रौद्योगिकी तथा इंटरनेट कंपनियों पर लगाया जाने वाला एक प्रस्तावित डिजिटल कर है। फ्रांस, ने डिजिटल कंपनियों द्वारा देश में अर्जित कुल राजस्व पर 3% GAFA टैक्स लगाने का निर्णय लिया है।

डिजिटल कंपनियों पर अलग कर लगाने के पीछे तर्क

  1. वर्तमान कर विधान परम्परागत व्यापार मॉडल को ध्यान में रखते हुए तैयार किये गए थे, जो कि, ऑनलाइन सेवाओं को विनियमित करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  2. प्रौद्योगिकी कंपनियां, पारंपरिक व्यवसायों से भिन्न होती हैं। डिजिटल कंपनियों के व्यवसाय पर कराधान कठिन होता है क्योंकि सामान्यतः जिस अर्थव्यवस्था में ये व्यवसाय कर रही होती हैं वहाँ पर इनकी भौतिक रूप से उपस्थिति नहीं होती है।
  3. कई कंपनियों द्वारा स्थापित की गयी जटिल कॉरपोरेट संरचना प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं से भारी राजस्व लाभ अर्जित करती हैं, परन्तु टैक्स से बचने के लिए अपने लाभ को कम टैक्स वाले स्थानों पर स्थानांतरित कर देती है, इससे इन देशों को प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी होती है।
  4. यूरोपीय देशों में विशेष रूप से तथाकथित GAFA – Google, Apple, Facebook और Amazon – कम्पनियाँ टैक्स नियमों का गलत तरीके से इस्तेमाल करती हैं। ये कंपनिया यूरोपीय देशों से अर्जित लाभ को अन्यत्र टैक्स-हैवन देशों में घोषित करती है, जिससे यूरोपीय देशों को वित्तीय हानि पहुचती है।

 भारत में डिजिटल टैक्स

 भारत में 560 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, तथा यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन उपयोगकर्ता है। अतः इसके कर राजस्व आधार के दृष्टिकोण से, डिजिटल व्यवसायों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हालांकि, अन्य देशों के समान भारत में भी माजूदा कर-विधान  पारंपरिक व्यापार मॉडल के लिए अनुकूल है, इसलिए नए व्यवसायिक प्रारूपों के अनुसार, भारत में भी कर-विधानों के पुनर्गठन की आवश्यकता है।

हाल ही में किये गए संशोधन

कुछ समय पूर्व भारतीय कराधान में, डिजिटल माध्यमों से अर्जित आय को उचित कर-प्रणाली के अंतर्गत लाने हेतु दो महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए गए – 

  1. इक्विलाइजेशन लेवी (Equalization Levy)
  • भारत ने पहली बार वर्ष 2016 में समतुल्य लेवी लागू की थी। वर्तमान में यह डिजिटल विज्ञापन से संबंधित कार्य करने वाली कंपनियों के एक छोटे समूह पर लागू है।
  • इस प्रावधान में नया संशोधन 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी हुआ है, इसके अंतर्गत, कर आधार को ऑनलाइन विज्ञापन से बढाकर लगभग सभी ऑनलाइन वाणिज्य गतिविधियों तक विस्तृत कर दिया गया है। 
  1. महत्त्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति मॉडल की अवधारणा

(Significant Economic Presence Model- SEP)

SEP का उद्देश्य, विदेशों में स्थिति, परन्तु, भारत में व्यवसाय करने वाली कंपनिओं को देश के कर- दायरे में लाना है।

भारत सरकार द्वारा अपनाए गए मानदंड के अनुसार एक अनिवासी कंपनी या व्यवसाय को निम्न स्थितियों में अंतर्गत भारत में SEP के अंतर्गत माना जाता है:

  • यदि भारत के भीतर अनिवासी कंपनी या व्यवसाय द्वारा किये गए लेनदेन के माध्यम से उसे निर्धारित की गई राशि से अधिक राजस्व प्राप्त होता है।
  • यदि गैर-निवासी व्यवस्थित रूप से और लगातार भारत में डिजिटल माध्यमों से व्यापार करता है;
  • यदि गैर-निवासी डिजिटल माध्यम से भारत में उपयोगकर्त्ताओं के साथ संबंध स्थापित करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OECD – उद्देश्य, सदस्य और पात्रता
  2. GAFA टैक्स क्या है?
  3. किन यूरोपीय देशों ने बड़ी डिजिटल फर्मों पर GAFA टैक्स लगाया है?
  4. इक्विलाइजेशन लेवी क्या है?
  5. “महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति” (SEP) अवधारणा की प्रयोज्यता।

मेंस लिंक:

GAFA टैक्स क्या है? इसे किन देशों द्वारा लगाया गया है? इसके महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फ्लुएंज़ा डेटा Global Initiative on Sharing All Influenza Data (GISAID)

 चर्चा का कारण

हाल ही में चीन ने बीजिंग में फैलने वाली महामारी के कारक कोरोनोवायरस का जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) डेटा जारी किया है। चीन द्वारा यह डेटा WHO और GISAID के साथ साझा किया गया है।

डेटा के निष्कर्ष

  1. चीन की राजधानी के सबसे बड़े थोक खाद्य बाजार से संबंधित वायरस की एक नस्ल में तथा यूरोप में पाए गए वायरस की एक नस्ल में समानता मिलती है।
  2. दो क्षेत्रों, बीजिंग और पड़ोसी प्रांत हेबै (Hebei) में लगातार पांच दिनों तक स्थानीय रूप से संक्रमण को दर्ज किया गया था।

पृष्ठभूमि

पिछले सप्ताह शिनफैडी (Xinfadi) बाजार में फैले प्रकोप के बाद से बीजिंग में 183 पुष्ट मामलों को देखा गया है तथा इसके नियंत्रण की स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है।

जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) क्या है?

जीनोमिक अनुक्रमण एक ऐसी तकनीक है जो हमें DNA या RNA के भीतर पाए जाने वाले आनुवंशिक विवरण को पढ़ने और व्याख्या करने की अनुमति प्रदान करती है। इसके तहत डीएनए अणु के भीतर न्यूक्लियोटाइड के सटीक क्रम का पता लगाया जाता है।

COVID-19 के जीनोमिक अनुक्रम को समझना क्यों महत्वपूर्ण है?

SARS-CoV2 जीनोम, में लगभग 30,000 आधार-युग्म होते हैं। जिनमे से प्रत्येक एक न्यूक्लियोटाइड से जुड़ा होता है। इसके अंतर्गत डीएनए में मौज़ूद चारों तत्त्वों- एडानीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C) और थायामीन (T) के क्रम का पता लगाया जाता है।

न्यूक्लियोटाइड्स के विशिष्ट संयोजन वाली इस लंबी श्रंखला को जीनोम अनुक्रम कहा जाता है, तथा इससे विशिष्ट रूप से वायरस की पहचान की जाती है।

COVID-19 संक्रमित मरीज के सैंपल के वायरस जीनोम अनुक्रम को देखने पर शोधकर्ताओं को वायरस के फैलने की प्रकिया के बारे पता चलता है। अब तक, पूरे विश्व में 1,000 से अधिक COVID-19 जीनोम अनुक्रम प्रकाशित हो चुके हैं।

अतः जीनोमिक अनुक्रमण आवश्यक है क्योंकि:

  1. यह वैश्विक स्तर पर वायरस के संचरण मार्ग को ट्रैक करने में मदद करता है।
  2. यह वायरस के फ़ैलने तथा अनुकूलित होने की गति को निर्धारित कर सकता है।
  3. यह उपचार के लक्ष्यों की पहचान करता है।
  4. सह-संक्रमण की भूमिका को समझने के लिए यह आवश्यक होता है।

GISAID क्या है?

GISAID, प्लेटफ़ॉर्म की स्थापना वर्ष 2008 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) के 61वे सम्मलेन के दौरान की गयी थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विभिन्न देशों हेतु जीनोम संबंधी डेटा साझा करने के लिये एक सार्वजनिक मंच है।

GISAID इन्फ्लूएंजा वायरस तथा COVID-19 के लिए जिम्मेदार नोवेल कोरोनावायरस के जीनोमिक डेटा प्राथमिक स्रोत है। एकत्रित डेटा में इन्फ्लुएंज़ा वायरस अनुक्रम, उनसे संबंधित नैदानिक और महामारी संबंधी डेटा, भौगोलिक और साथ ही प्रजाति-विशेष डेटा भी शामिल है।

वर्ष 2010 में जर्मनी EpiFlu ™ डेटाबेस तथा GISAID मंच का आधिकारिक संचालक बनाया गया था। वर्ष 2013 में यूरोपीय आयोग द्वारा GISAID को एक अनुसंधान संगठन और प्रीमेडिक संघ (PREDEMICS consortium) में भागीदार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है।

भूमिका

GISAID मंच द्वारा एकत्रित डेटा शोधकर्त्ताओं को वायरस के विकास, उसके प्रसार और अंततः महामारी बनने की संभावना को समझने में मदद करता है। यह पहल GISAID मंच पर डेटा की सभी सहयोगियों के लिए निशुल्क तथा स्वतंत्र पहुच सुनिश्चित करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जीनोमिक अनुक्रम क्या है?
  2. यह किस प्रकार कार्य करता है?
  3. RNA vs DNA
  4. GISAID को कौन प्रशासित करता है।

मेंस लिंक:

जीनोम अनुक्रमण क्या है? यह COVID 19 के प्रसार को रोकने में किस प्रकार मदद करता है?

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में व्यक्तिगत दान हेतु वित्त मंत्रालय की स्वीकृति

सन्दर्भ: वित्त मंत्रालय ने आम जनता तथा संस्थाओं द्वारा सीधे राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (National Disaster Relief FundNDRF) में दान करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

महत्व तथा निहितार्थ

वित्त मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) में सीधे दान करने की अनुमति देना काफी महत्वपूर्ण है, क्योकि हाल ही में कई लोगों द्वारा PM CARES फंड अथवा प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में भेजे गए दान के बारे कई सवाल किये गए। इसके साथ ही, इन दोनों कोषों को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं’ घोषित कर दिया गया है।

राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के बारे में

NDRF की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 के अंतर्गत की गई थी।

  • इस कोष का गठन किसी संकटपूर्ण आपदा स्थिति में ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास के लिए व्यय को पूरा करने के लिए’ किया गया है। इसका प्रबंधन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
  • इस कोष के द्वारा गंभीर प्रकृति की आपदाओं के मामले में तत्काल राहत प्रदान करने हेतु राज्यों के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response FundsSDRF) के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • NDRF को भारत सरकार के “लोक लेखा” में “ब्याज रहित आरक्षित निधि” के अंतर्गत रखा गया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) NDRF के खातों का ऑडिट करते हैं।

प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) क्या है?

पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने के लिए जनवरी, 1948 में तत्कालीन प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अपील पर जनता के अंशदान से प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (Prime Minister’s National Relief FundPMNRF) की स्थापना की गई थी।

  • प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की धनराशि का इस्तेमाल अब प्रमुखतया बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों तथा बड़ी दुर्घटनाओं एवं दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए किया जाता है।
  • इसके अलावा, हृदय शल्य-चिकित्सा, गुर्दा प्रत्यारोपण, कैंसर आदि के उपचार के लिए भी इस कोष से सहायता दी जाती है।

प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में स्वीकार किए जाने वाले अंशदान के प्रकार

  • प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में किसी व्यक्ति और संस्था से केवल स्वैच्छिक अंशदान ही स्वीकार किए जाते हैं।
  • सरकार के बजट स्रोतों से अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बैलेंस शीट्स से मिलने वाले अंशदान स्वीकार नहीं किए जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NDRF- स्थापना, वित्त पोषण और प्रबंधन
  2. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 क्या है?
  3. PMNRF क्या है?
  4. PMCARES क्या है?
  5. “लोक लेखा” क्या है?
  6. सार्वजनिक प्राधिकरण कौन होते है?

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 सत्यभामा पोर्टल 

  • खान मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया।
  • सत्यभामा पोर्टल पूरा नाम (खनन उन्नति में आत्मनिर्भर भारत के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी योजना) [SATYABHAMA (Science and Technology Yojana for Aatmanirbhar Bharat in Mining Advancement)] है।
  • इस पोर्टल की डिजाइन, विकास एवं कार्यान्वयन माइंस इंफॉर्मेटिक्स डिवीजन के नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा किया गया है।
  • सत्यभामा पोर्टल परियोजनाओं की निगरानी एवं फंडों/अनुदान के उपयोग के साथ साथ परियोजना प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुति में सक्षम बनाता है।
  • शोधकर्ता पोर्टल में इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट एवं अंतिम तकनीकी रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

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