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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. सिविल सेवा बोर्ड (CSB)

2. चीन के साथ व्यापार प्रतिबंधो से भारत पर प्रभाव

3. रूस-भारत-चीन समूह (RIC)

4. उइगर मानवाधिकार अमेरिकी विधेयक

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वन नेशन वन राशन कार्ड।

 

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. डेक्सामेथासोन क्या है?

2. जगन्नाथ रथ यात्रा

3. कोडुमनाल

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

सिविल सेवा बोर्ड

(Civil Services Board)

सन्दर्भ: पंजाब सरकार द्वारा राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के स्थानांतरण तथा नियुक्तियों पर निर्णय लेने हेतु तीन सदस्यीय सिविल सेवा बोर्ड का गठन किया गया है।

पंजाब सरकार के इस कदम का विरोध

इस अधिसूचना में आईएएस अधिकारियों को निश्चित कार्यकाल प्रदान किया गया है, जिससे राज्य के कुछ नेता सहमत नहीं है।

  1. इसका कारण है, कि इनके अनुसार आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण राज्य का विशेषाधिकार है।
  2. इनका कहना है कि, निश्चित कार्यकाल से कार्यात्मक और प्रशासनिक समस्याएं पैदा होंगी तथा इससे राज्य सरकार के अधिकार और अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण भी होगा।
  3. निश्चित कार्यकाल के नियम तथा मुख्य सचिव के बोर्ड को स्थानांतरण हेतु सिफारिशों की जांच की शक्ति प्रदान किये जाने से, नेताओं के प्रभाव में कमी आयेगी और सारी शक्तियां मुख्य सचिव प्राप्त हो जायेंगी

सरकार का पक्ष

  1. सरकार का कहना है कि, यदि अधिकारियों को निश्चित कार्यकाल प्रदान किया जाता है तो वे बेहतर प्रशासन दे पाएंगे।
  2. अधिकारी सुरक्षित महसूस करेंगे तथा राजनीतिक नेताओं को खुश करने के बजाय नियमों का सख्ती से पालन करेंगे।
  3. प्रत्येक अधिकारी को अपनी नयी नियुक्ति पर व्यवस्थित होने में लगभग 3-6 महीने का समय लगता है। यदि अधिकारी को दो साल का कार्यकाल दिया जाता है तो लोगों को बेहतर सेवायें प्रदान करने में सफल होगा।

सिविल सेवा बोर्ड क्या है?

नौकरशाही को राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग करने तथा राजनीतिक अधिकारियों द्वारा बार-बार स्थानांतरण को समाप्त करने हेतु, वर्ष 2013 में उच्चत्तम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को नौकरशाहों के स्थानांतरण तथा नियुक्ति पर विचार करने के लिए ‘सिविल सेवा बोर्ड’ गठित करने का निर्देश दिया था।

नियमानुसार, सभी राज्यों में नौकरशाहों के स्थानांतरण तथा नियुक्ति पर निर्णय लेने हेतु ‘सिविल सेवा बोर्ड’ होना चाहिए।

सिविल सेवा बोर्ड के कार्य

  • बोर्ड को सिविल सेवक के निर्धारित कार्यकाल के पूरा होने से पहले उसके स्थानांतरण पर निर्णय लेने हेतु अधिदेशित किया गया है।
  • नियमों के अनुसार, प्रतिवर्ष 1 जनवरी को सिविल सेवा बोर्ड, केंद्र सरकार के लिए उनके द्वारा आयोजित की गयी बैठकों के बारे में एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

गठन

राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) सिविल सेवा बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं।

  1. वरिष्ठ अतिरिक्त मुख्य सचिव या राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष, वित्तीय आयुक्त अथवा अन्य समकक्ष अधिकारी इसके सदस्य होते है।
  2. इसके अतिरिक्त, बोर्ड के अन्य सदस्य के रूप में प्रधान सचिव (Principal Secretary) अथवा कार्मिक विभाग के सचिव सम्मिलित होते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिविल सेवा बोर्ड क्या है?
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. कितने राज्यों में सिविल सेवा बोर्डों की स्थापना की गयी है?

मेंस लिंक:

सिविल सेवा बोर्डों के कार्यों और उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन के साथ व्यापार प्रतिबंधो से भारत पर प्रभाव

सन्दर्भ: भारत सरकार चीन के साथ सीमा विवाद के प्रत्युत्तर में भारत-चीन के मध्य व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है। भारत की जनता में ‘चीनी वस्तुओं का बाहिष्कार कर चीन को सबक सिखाने’ का विचार जोर पकड रहा है।

परन्तु, वैश्विक व्यापार में चीन की प्रमुखता तथा भारत की अल्प भागीदारी को देखते हुए, व्यापार प्रतिबंध लगाने से चीन पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा, अपितु, इससे भारतीय उपभोक्ता तथा  व्यवसाय प्रतिकूल रूप से प्रभावित होंगे।

प्रमुख क्षेत्रों में चीन की भागीदारी

  1. स्मार्टफोन: कुल बाजार: 2 लाख करोड़ रुपये; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 72%।
  2. दूरसंचार उपकरण: कुल बाजार: 12,000 करोड़ रुपये; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 25%।
  3. वाहनों के पुर्जे: कुल बाजार: 1 लाख करोड़; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 26%।
  4. इंटरनेट एप्स: कुल बाजार: 0 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 66%।
  5. सौर ऊर्जा: कुल बाजार: 37,916 मेगावाट; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 90%।
  6. इस्पात: चीनी उत्पादों का हिस्सा: 18-20%।
  7. फार्मा: बाजार का आकार: 5 लाख करोड़; चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी: 60%।

‘चीन का बाहिष्कार’ कब संभव हो सकता है?

चीन का बाहिष्कार करने के लिए, भारत और चीन के बीच आर्थिक अंतर कम किये जाने की आवश्यकता है। आर्थिक विषमता को कम होने पर, दोनों देशों के मध्य गतिरोध की स्थिति में भारतीय जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, भारत, चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर सकता है तथा ‘आत्म-निर्भर भारत’ बनने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

चीन उत्पादों के सस्ता होने कारण

  1. सस्ते श्रम की उपलब्धता: चीनी उत्पादों के सस्ते होने के प्रमुख कारकों में से एक है।
  2. कम दामों में कच्चे माल की आपूर्ति: कच्चा माल किसी उत्पाद की कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। चूंकि चीनी कंपनियां थोक उत्पादन के लिए थोक खरीद में निवेश करती हैं, इससे उत्पादन लागत में महत्वपूर्ण कमी होती है।
  3. दक्ष व्यापार माहौल: एक कुशल वपापार तंत्र में आपूर्तिकर्ता, कल-पुर्जों के निर्माता, वितरक, सरकारी एजेंसियों तथा ग्राहकों का एक नेटवर्क सम्मिलित होता है। यह सभी उत्पादन प्रक्रिया में होने वाली दिक्कतों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
  4. व्यवसाय हेतु ऋणों की सुलभता: उद्योगों तथा व्यवसायों, विशेष रूप से बड़े उद्योगों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध होता है, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में व्यवसायों को अधिक वित्तीय क्षमता प्राप्त होती है।
  5. चीनी कारखानों की स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण संरक्षण कानूनों की अवहेलना के लिए आलोचना की जाती है।
  6. चीन में मूल्य वर्धित कर (Value Added TaxVAT) प्रणाली प्रचलित है। तथा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर जीरो प्रतिशत वैट लगता है।

भारत में चीनी उत्पादों का बहिष्कारआंदोलन क्यों मुश्किल है?

व्यापार घाटा: वितीय वर्ष 2018-19 में, भारत का चीन को कुल 16.7 बिलियन डॉलर का निर्यात किया गया, जबकि चीन से कुल आयात 70.3 बिलियन डॉलर था। परिणामस्वरूप कुल व्यापार घाटा 53.6 बिलियन डॉलर था।

चीनी निवेश वाली निजी भारतीय कंपनियां: वर्ष 2015 से 2019 के बीच चीन से कुल 1.8 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) किया गया। चीनी प्रोद्योगिकी निवेशकों ने भारतीय स्टार्ट-अप्स में अनुमानित $ 4 बिलियन का निवेश किया है।

भारतीय डिजिटल बाजार में चीन का दबदबा: भारतीय डिजिटल बाजार में चीनी निवेश वाले ऐप्स का बड़ा हिस्सा है, गेटवे हाउस रिपोर्ट के अनुसार, iOS और गूगल प्ले, दोनों प्लेटफ़ॉर्मस पर डाउनलोड की जाने वाली ऐप्स में 50% चीनी निवेश वाली ऐप्स होती है।

वर्तमान में छोटे भारतीय व्यवसाय महामारी के कारण अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में चीनी आयातों पर प्रतिबंध से सभी छोटे व्यवसायों को नुकसान पहुंचेगा।

आगे की राह

अनुमानों के अनुसार, कुल चीनी आयात का लगभग एक तिहाई हिस्सा साधारण तकनीकी वस्तुओं का होता है। इन वस्तुओं का उत्पादन पहले भारतीयों द्वारा किया जाता था, तथा अभी भी कम मात्रा में भारतीय इनका निर्माण कर रहे है।

  1. इन वस्तुओं के आयात को निश्चित रूप से हतोत्साहित किया जा सकता है, और स्थानीय उत्पादों और ब्रांडों द्वारा फिर से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
  2. इसके अलावा, मांग में कमी आने कारण सुस्त पडी छोटी और मझोली कंपनियों के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रयास किये जा सकते हैं।
  3. यदि MSME क्षेत्र गति पकड़ लेता है तो, समग्र विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
  4. घरेलू बिक्री में वृद्धि होने के साथ भारतीय अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगे, तथा वे अपने उत्पादों के निर्यातकों के रूप में उभर सकते हैं, और चीन के साथ विश्व स्तर पर मुकाबला कर सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत और चीन के बीच विवादित सीमा क्षेत्र
  2. व्यापार घाटा क्या है?
  3. भारत और चीन द्विपक्षीय व्यापार
  4. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्या होता है?
  5. FDI तथा FPI में अंतर

मेंस लिंक:

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार करने से देश पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

रूस-भारत-चीन समूह

]Russia-India-China (RIC) Grouping]

चर्चा का कारण

भारत 23 जून को होने वाली ‘रूस-भारत-चीन समूह’ की वर्चुअल बैठक में भाग लेगा।

मंत्रिस्तरीय वार्ता में सम्मिलित होने के भारतीय निर्णय ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LAC) पर तनाव कम करने हेतु एक रास्ता खोला है। रूसी राजनयिक स्रोतों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव की स्थिति पर ‘रचनात्मक संवाद’ का समर्थन करने का संकेत दिया है।

RIC क्या है?

रूस-भारत-चीन समूह (Russia-India-China- RIC) की परिकल्पना वर्ष 1998 में तत्कालीन रूसी विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमकोव (Yevgeny Primakov) द्वारा की गई थी।

इस समूह की स्थापना का उद्देश्य “अमेरिका द्वारा निर्देशित विदेश नीति को समाप्त करना“, तथा भारत के साथ पुराने संबंधों को नवीनीकृत करना और चीन के साथ नई दोस्ती को बढ़ावा देना था।

RIC समूह का महत्व तथा क्षमताएं

RIC देशों का, संयुक्त रूप से क्षेत्रफल वैश्विक भू-भाग के 19 प्रतिशत से अधिक है तथा संयुक्त रूप से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 33 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

इस समूह के तीनों देश परमाणु शक्ति संपन्न है तथा इसके दो देश, रूस और चीन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के स्थायी सदस्य हैं, जबकि भारत UNSC की सदस्यता के लिए प्रयासरत है।

ये तीनो देश एक नयी वैश्विक आर्थिक संरचना के निर्माण में योगदान करने में सक्षम हैं। यह समूह आपदा राहत और मानवीय सहायता हेतु एक साथ काम कर सकता है।

भारत के लिए RIC का महत्व

  1. रूस-भारत-चीन (RIC), शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organisation- SCO) के आधार का निर्माण करते है।
  2. भारत, भू-सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थिति में अवस्थित है।
  3. सागरीय और महाद्वीपीय, दोनों क्षेत्रों में चीन के आधिपत्य को चुनौती देने हेतु भारत के लिए यह समूह काफी महत्वपूर्ण है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RIC समूह क्या है?
  2. विश्व व्यापार संगठन- स्थापना और उद्देश्य
  3. G20 क्या है?
  4. पेरिस समझौता क्या है?

मेंस लिंक:

RIC समूह के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

उइगर मानवाधिकार अमेरिकी विधेयक

(U.S. Uighur rights Bill)

सन्दर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के उइगर मुसलमानों के दमन पर प्रतिबंध लगाने के लिए बने कानून पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रमुख बिंदु

इस विधेयक में चीन के शिनजियांग प्रांत (Xinjiang Province) में उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के दमन के लिए उत्तरदायी लोगों के विरूद्ध प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार शिनजियांग प्रांत में स्थित शिविरों में लगभग दस लाख से अधिक मुसलमानों को हिरासत में रखा गया है।

विधेयक में, शिनजियांग कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव, चेन क्वांगो (Chen Quanguo) को उइगरों के खिलाफ “मानव अधिकारों के उल्लंघन” के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

विधेयक में, शिनजियांग क्षेत्र में काम करने वाली अमेरिकी कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके उत्पादों में बलात श्रम द्वारा द्वारा निर्मित करवाई गयी सामग्री का उपयोग नहीं किया जाए।

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि शिनजियांग क्षेत्र में स्थित शिविरों में दस लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को हिरासत में रखा गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चीनी अधिकारियों पर मुसलमानों को यातना देने, दुर्व्यवहार करने तथा उनकी संस्कृति और उनके धर्म को जड़ से मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

उइगर (Uighur) कौन हैं?

उइगर मुस्लिम चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में निवास करने वाले अल्पसंख्यक हैं। शिनजियांग प्रांत में इनकी जनसंख्या तकरीबन 40 प्रतिशत है।

उइगर, चीन की तुलना में तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से करीबी नृजातीय संबंधों का दावा करते हैं।

चीन उइगरों को क्यों निशाना बना रहा है?

शिनजियांग तकनीकी रूप से चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। शिनजियांग, चीन का सबसे बड़ा क्षेत्र है तथा खनिजों से समृद्ध है इसके साथ ही इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।

  1. पिछले कुछ दशकों में, शिनजियांग प्रांत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, इसके साथ ही बड़ी संख्या में बहुसंख्यक हान चीनी (Han Chinese) इस क्षेत्र में आकर बस गए तथा बेहतर नौकरियों पर कब्जा कर लिया है। हान चीनीयों ने उइगरों के लिए आजीविका तथा पहचान के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है।
  2. इन्ही कारणों से, छिटपुट हिंसा की शुरुआत हुई तथा वर्ष 2009 में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में 200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हान चीनी थे। तब से कई अन्य हिंसक घटनाएं हुई हैं।
  3. बीजिंग का कहना है कि उइगर समुदाय एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहता है और, उइगरों के तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से सांस्कृतिक संबंधों के कारण, चीनी नेताओं को डर है कि पाकिस्तान जैसी जगहों पर अवस्थित उग्रवादी तत्व शिनजियांग में अलगाववादी आंदोलन को समर्थन दे सकते हैं।
  4. इसलिए, चीन की नीति पूरे समुदाय को संदिग्ध मानने तथा उइगरों की अलग पहचान को समाप्त करने हेतु एक व्यवस्थित परियोजना के आरम्भ करने की प्रतीत होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. शिनजियांग कहाँ है?
  3. हान चीनी कौन हैं?

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय।

एक देश-एक राशन कार्ड योजना

(One Nation, One Ration CardONORC) Scheme

सन्दर्भ: खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग इस वर्ष के अंत तक वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के तहत शेष सभी 14 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करने हेतु सभी आवश्यक प्रबंध कर रहा है।

योजना के बारे में

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत लाभार्थी विशेषकर प्रवासी देश के किसी भी भाग में, अपनी पसंद की सार्वजानिक वितरण प्रणाली दुकान से खाद्यान्न प्राप्त करने में सक्षम हो होंगे।

लाभ: इस योजना के लागू होने पर कोई भी गरीब व्यक्ति, एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करने पर खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने से वंचित नहीं होगा।

इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों से लाभ उठाने के लिये एक से अधिक राशन कार्ड रखने वाले व्यक्तियों पर रोक लगाना है।

महत्व: यह योजना लाभार्थियों को स्वतंत्रता प्रदान करेगी, क्योंकि वे किसी एक सार्वजानिक वितरण प्रणाली (PDS) दुकान से बंधे नहीं होंगे तथा दुकान मालिकों पर इनकी निर्भरता भी कम होगी। इस योजना के लागू होने पर PDS संबधित भ्रष्टाचार के मामलों पर अंकुश भी लगेगा।

योजना की मुख्य विशेषताएं

  1. गरीब प्रवासी श्रमिक देश के किसी भी राशन की दुकान से रियायती चावल और गेहूं खरीद सकेंगे, लेकिन इसके लिए उनके राशन कार्डों को आधार से जुड़ा होना चाहिए।
  2. इस योजना के अंतर्गत प्रवासी केवल केंद्र द्वारा समर्थित सब्सिडी के लिए पात्र होंगे। जिसके तहत सब्सिडी प्राप्त अन्य सामग्री के अतिरिक्त्त, 3 रु. / किग्रा चावल तथा 2 रु. / किग्रा गेहूं प्रदान किया जाता है।
  3. इस योजना में किसी अन्य राज्य में संबंधित राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी शामिल नहीं होती है।

एक राष्ट्र, एक राशन कार्डका मानक प्रारूप

विभिन्न राज्यों द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रारूप को ध्यान में रखते हुए राशन कार्ड के लिए एक मानक प्रारूप तैयार किया गया है।

  1. राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है। इसमें स्थानीय भाषा के अतिरिक्त, अन्य भाषा के रूप में हिंदी अथवा अंग्रेजी को सम्मिलित किया जा सकता है।
  2. राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे।
  3. इसके अतिरिक्त, राशन कार्ड में परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए यूनिक मेंबर आईडी बनाने के लिए राशन कार्ड नंबर के साथ दो अंक जोड़े जायेंगे।

 चुनौतियां

भ्रष्टाचार की सम्भावना: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिये हर राज्य के अपने नियम हैं। यदि ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना लागू की जाती है, तो यह योजना पहले से ही दूषित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देगी।

इस योजना से आम आदमी के लिए संकट बढ़ेगा और बिचौलिये और भ्रष्ट पीडीएस दुकान मालिक उनका शोषण करेंगे।

तमिलनाडु ने केंद्र के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इसके अवांछनीय परिणाम होंगे तथा यह संघवाद के विरुद्ध है।

आगे की राह

  1. प्रवासी श्रमिकों की उत्पादकता, रहने की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए वर्तमान प्रवासी संकट को एक राष्ट्रीय प्रवास नीति विकसित करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
  2. इसके साथ ही, सरकार ONORC योजना को तेजी से लागू करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए क्योंकि भारत में आम आदमियों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं के धीमी गति से कार्यान्वयन को लेकर आलोचना की जाती है।
  3. ONORC में स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीडीएस क्या है?
  2. NFSA क्या है? पात्रता? लाभ?
  3. उचित मूल्य की दुकानें (fair price shops) कैसे स्थापित की जाती हैं?
  4. राशनकार्ड का प्रस्तावित प्रारूप।

मेंस लिंक:

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 डेक्सामिथासोन क्या है?

(Dexamethasone)

  1. यह एक एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) दवा है, इसका उपयोग आमतौर पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक करने में किया जाता है। गठिया, अस्थमा सहित अन्य स्थितियों में सूजन को कम करने के लिये भी इसका उपयोग किया जाता है।
  2. डेक्सामेथासोन, सूजन पैदा करने वाले तथा सफेद रक्त कोशिकाओं के कार्यों को प्रभावित करके प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर करने वाले रसायनों के निर्माण को रोकता है।

चर्चा का कारण

शोधकर्त्ताओं के अनुसार,  COVID-19 मरीज़ों पर ‘डेक्सामेथासोन’ (Dexamethasone) दवा के उपयोग से गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों की मृत्यु दर में एक तिहाई तक की कमी हुई है।

जगन्नाथ रथ यात्रा

  1. इसे रथों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। रथ यात्रा उत्सव ‘पुरी’ के भगवान जगन्नाथ के सम्मान में मनाया जाता है।
  2. यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन देवी सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र को समर्पित है।
  3. इस त्योहार के दौरान मंदिर के तीनो देवता – जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र – तीन अलग-अलग रथों में यात्रा करते हैं। इन रथों को क्रमशः नंदीघोष, तलध्वज तथा देवदलन कहा जाता है।
  4. तीनों देवताओं के लिए हर साल नए रथों का निर्माण किया जाता है। प्रत्येक रथ में चार लकड़ी के घोड़े जुड़े होते हैं।

चर्चा का कारण

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा के पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 23 जून से निर्धारित वार्षिक रथ यात्रा पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर हम इस साल की रथ यात्रा की अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।

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कोडुमनाल (Kodumanal)

  1. कोडुमानल तमिलनाडु के इरोड जिले में स्थित एक गाँव है। यह कावेरी की सहायक नदी नॉयल नदी (Noyyal River) के उत्तरी तट पर स्थित है।
  2. यह कभी एक समृद्ध व्यापार शहर था, जिसे कोडुमानम के नाम से जाना जाता था। इसका विवरण संगम साहित्य के पितृरूपथु (Patittrupathu) में मिलता है।
  3. इसने 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 1 शताब्दी ईसा पूर्व तक एक व्यापार-सह-औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित था।
  4. यह स्थान तमिलनाडु के राज्य पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।

चर्चा का कारण

कोडुमनाल में चल रहे उत्खनन के दौरान निम्नलिखित चीजें प्राप्त हुई हैं:

तीन-कक्षीय समाधि  के बाहर और वृताकार टीले के अंदर 10 घड़े तथा कटोरे रखे मिले हैं। इससे दफनाने की यह प्रणाली महापाषाण संस्कृति में प्रचलित थी।

खुदाई में प्राप्त अन्य सामग्री: जानवरों की खोपड़ी, संभवतः भेड़िया या कुत्ते की; कीमती पत्थर; तांबा गलाने की इकाइयाँ; मिट्टी के बर्तन।


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