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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. रैपिड एंटीजन टेस्ट

2. वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है?

 

सामान्य अध्ययन-III

1. आवास वित्त कंपनियां

2. नासा का गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट

3. विश्व मगरमच्छ दिवस

4. भारत-चीन गलवान घाटी गतिरोध

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पैंगोलिन (Pangolin)

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

रैपिड एंटीजन टेस्ट

(Rapid antigen test)

सन्दर्भ: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने कंटेनमेंट जोन तथा अस्पताल अथवा क्वॉरेंटाइन सेंटरों

में ‘आरटी-पीसीआर टेस्ट’ (RT-PCR test) के साथ ‘स्टैंडर्ड क्यू COVID-19 एजी एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट’ (Standard Q COVID-19 Ag antigen detection test) के उपयोग की सिफारिश की है।

इसका प्रयोग निर्दिष्ट तरीकों से किया जाएगा, तथा केवल दक्षिण कोरियाई कंपनी ‘एस डी बायोसेंसर’ (S D Biosensor) द्वारा निर्मित ‘स्टैंडर्ड क्यू COVID-19 एजी एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट’ किट के उपयोग की अनुमति दी गयी है

एंटीजन (Antigens) क्या होते हैं?

एंटीजन ऐसे बाहरी तत्व होते हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट क्या है?

इस टेस्ट में व्यक्ति की नाक की दोनों तरफ़ से फ्लूइड का फाहे पर सैंपल लिया जाता है। इस सैंपल का परीक्षण करने पर एंटीजन का पता लगता है तथा SARS-CoV-2 वायरस संक्रमण की पहचान की जाती है।

यह टेस्ट को परम्परागत प्रयोगशालाओं से बाहर देखभाल केद्रों पर किया जाता है। इस परीक्षण में परिणाम मात्र 15-30 मिनट के भीतर आ जाता है।

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट, आरटी-पीसीआर टेस्ट से किस प्रकार भिन्न है?

RT-PCR टेस्ट की भांति, रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट भी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी का पता लगाने के बजाय वायरस संक्रमण की जांच के लिए किया जाता है।

दोनों परीक्षणों के मध्य सबसे महत्वपूर्ण अंतर ‘समय’ का होता है।

  • RT-PCR टेस्ट में न्यूनतम 2-5 घंटे लगते हैं।
  • रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट में, संक्रमण के पॉजिटिव अथवा निगेटिव होने का पता लगने की अधिकतम अवधि 30 मिनट होती है

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट के परिणामों की सीमाएँ

  1. ये परीक्षण विशेष रूप से वायरस की पहचान के लिए किया जाते हैं तथा यह मॉलिक्यूलर पीसीआर परीक्षणों (Molecular PCR tests) की तरह संवेदनशील नहीं होते है। इसका अर्थ है कि एंटीजन टेस्ट के पॉजिटिव परिणाम अत्यधिक सटीक होते हैं, परन्तु इन परिणामों के गलत-निगेटिव (False Negatives) होने की संभावना भी अधिक होती है, अतः इन टेस्ट्स से संक्रमण के नकारात्मक परिणाम से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  2. एंटीजन टेस्ट के गलत-निगेटिव (False Negatives) परिणाम के कारण वायरस के संभावित प्रसार को रोकने या उपचार हेतु निर्णय लेने से पहले एंटीजन टेस्ट के निगेटिव परिणामों की पुष्टि के लिए पीसीआर टेस्ट (PCR test) की आवश्यकता होती है।
  3. किसी सैंपल को लेने के बाद इसे एक संग्रह बफर (extraction buffer) में रखा जाता है, जिसमे इसे केवल एक घंटे के लिए स्थिर (stable) किया जा सकता है। अतः एंटीजन टेस्ट्स को चिकित्सीय समायोजन में सैंपल लेने वाली जगह पर किये जाने की आवश्यकता होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RT- PCR, रैपिड एंटीबॉडी तथा रैपिड एंटीजन टेस्ट के मध्य अंतर
  2. एंटीबॉडी क्या होती हैं?
  3. एंटीजन क्या होते हैं?
  4. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली किस प्रकार कार्य करती है?
  5. लिम्फोसाइट्स (lymphocytes) क्या हैं?

मेंस लिंक:

रैपिड एंटीजन परीक्षणों पर एक टिप्पणी लिखिए।

covidtest

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य संबंधी विषय।

वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है?

(Vaccine Nationalism)

सन्दर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका अब तक दो बार इस बात के संकेत दे चुका है कि, वह COVID-19 वैक्सीन की खुराकों के प्राथमिक उपयोग को सुनिश्चित करेगा। भारत और रूस सहित अन्य देशों ने इसी तरह का रवैया अपनाया है। घरेलू बाजारों के इस प्राथमिकता-करण (prioritisation of domestic markets) को वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism) के रूप में जाना जाता है।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

वैक्सीन राष्ट्रवाद में कोई देश किसी वैक्सीन की खुराक को अन्य देशों को उपलब्ध कराने से पहले अपने देश के नागरिकों या निवासियों के लिए सुरक्षित कर लेता है।

इसमें सरकार तथा वैक्सीन निर्माता के मध्य खरीद-पूर्व समझौता किया जाता है।

अतीत में इसका उपयोग

वैक्सीन राष्ट्रवाद नयी अवधारणा नहीं है। वर्ष 2009 में फ़ैली H1N1फ्लू महामारी के आरंभिक चरणों में विश्व के धनी देशों द्वारा H1N1 वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीद-पूर्व समझौते किये गए थे।

  • उस समय, यह अनुमान लगाया गया था कि, अच्छी परिस्थितियों में, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की अधिकतम दो बिलियन खुराकों का उत्पादन किया जा सकता है।
  • अमेरिका ने समझौता करके अकेले 600,000 खुराक खरीदने का अधिकार प्राप्त कर लिया। इस वैक्सीन के लिए खरीद-पूर्व समझौता करने वाले सभी देश विकसित अर्थव्यवस्थायें थे।

संबंधित चिंताएँ

  • वैक्सीन राष्ट्रवाद, किसी बीमारी की वैक्सीन हेतु सभी देशों की समान पहुंच के लिए हानिकारक है।
  • यह अल्प संसाधनों तथा मोल-भाव की शक्ति न रखने वाले देशों के लिए अधिक नुकसान पहुंचाता है।
  • यह विश्व के दक्षिणी भागों में आबादी को समय पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य-वस्तुओं की पहुंच से वंचित करता है।
  • वैक्सीन राष्ट्रवाद, चरमावस्था में, विकासशील देशों की उच्च-जोखिम आबादी के स्थान पर धनी देशों में सामान्य-जोखिम वाली आबादी को वैक्सीन उपलब्ध करता है।

आगे की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान टीकों के समान वितरण हेतु फ्रेमवर्क तैयार किये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए इन संस्थाओं को आने वाली किसी महामारी से पहले वैश्विक स्तर पर समझौता वार्ताओं का समन्वय करना चाहिए।

समानता के लिए, वैक्सीन की खरीदने की क्षमता तथा वैश्विक आबादी की वैक्सीन तक पहुच, दोनों अपरिहार्य होते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है?
  2. COVID 19 रोग के उपचार में किन दवाओं का उपयोग किया जा रहा है?
  3. SARS- COV 2 का पता लगाने के लिए विभिन्न परीक्षण।
  4. H1N1 क्या है?

मेंस लिंक:

वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है? इससे संबंधित चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


 सामान्य अध्ययन-III


   

विषय: समावेशी विकास और संबंधित विषय।

आवास वित्त कंपनियां

(Housing Finance Companies)

सन्दर्भ: हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए कड़े मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं।

प्रस्तावित मानदंड

  1. हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) के लिए शुद्ध परिसंपत्तियों का कम से कम 50% ‘अर्हक संपत्ति’ की प्रकृति में होना चाहिए, जिनमें से कम से कम 75% को व्यक्तिगत आवास ऋण के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।
  2. ऐसे HFC जो मानदंड को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें NBFC- निवेश और क्रेडिट कंपनियों (NBFC-ICCs) के रूप में माना जाएगा और इसके लिए HFC से NBFC-ICC में पंजीकरण हेतु रूपांतरण प्रमाणपत्र के लिए RBI से संपर्क करना होगा।
  3. वे NBFC-ICCs जो HFC के रूप में बने रहना चाहते हैं, उन्हें अपनी कुल संपत्ति का 75% व्यक्तिगत आवास ऋण प्रदान करने हेतु निर्धारित रोडमैप का पालन करना होगा।
  4. इसके लिए 31 मार्च 2022 तक 60%, 31 मार्च 2023 तक 70% और 31 मार्च 2024 तक 75% का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  5. RBI ने न्यूनतम शुद्ध स्वामित्व फंड (Minimum Net-Owned Fund- NOF) की राशि 10 करोड़ रु. से बढाकर 20 करोड़ रु करने का भी प्रस्ताव किया है।

अर्हक परिसंपत्ति (Qualifying Assets) क्या हैं?

RBI ने ‘अर्हक परिसंपत्तियों’ को किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के लिए ऋण के रूप में परिभाषित किया है, जिसमे सहकारी समितियों, नई आवासीय इकाइयों के निर्माण / खरीद के लिए ऋण, मौजूदा आवास इकाइयों के नवीनीकरण के लिए व्यक्तियों को ऋण, आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए बिल्डरों को ऋण को सम्मिलित किया गया है।

विनियामक निरीक्षण

  • एक आवास वित्त कंपनी को RBI के नियमों के तहत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Financial Company- NBFC) माना जाता है।
  • यदि किसी कंपनी की वित्तीय परिसंपत्तियां उसकी कुल परिसंपत्तियों के 50% से अधिक होती है तथा वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय, उसकी सकल आय के 50% से अधिक होती है, तो, उस कंपनी को NBFC के रूप में माना जाता है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: अंतरिक्ष संबधी विषयों में जागरूकता।

नासा का गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट

(NASA’s Gateway Lunar Orbit outpost)

सन्दर्भ: हाल ही में नासा द्वारा एजेंसी के गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट हेतु आरंभिक चालक-दल मॉड्यूल के लिए अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया है।

187 मिलियन डॉलर का यह अनुबंध, नोर्थरोप ग्रुम्मान स्पेस (Northrop Grumman Space) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘ऑर्बिटल साइंस कॉरपोरेशन ऑफ डलेस’ (Orbital Science Corporation of Dulles) वर्जीनिया’ को प्रदान किया गया है।

अनुबंध का विषय

नासा ने गेटवे के सहयोग हेतु हैबिटेशन एंड लोजिस्टिक्स आउटपोस्ट- हेलो (Habitation And Logistics Outpost- HALO) को डिजाइन करने के लिए यह अनुबंध जारी किया है। HALO नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम (Artemis Program) का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2024 तक पहली बार किसी महिला को चंद्रमा पर भेजना है।

HALO, उन दाबयुक्त निवास-स्थानों (Pressurised Living Quarters) को संदर्भित करता है जहाँ अंतरिक्ष यात्री गेटवे की यात्रा के दौरान अपना समय बिताएंगे।

ये क्वार्टर आकार में एक छोटे अपार्टमेंट के सामान होंगे और नासा के ओरियन अंतरिक्ष (Orion Spacecraft) यान में संवर्धित लाइफ सपोर्ट प्रदान करेंगे।

नासा का गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट क्या है?

गेटवे (Gateway) एक छोटा सा अंतरिक्ष यान है जो चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चंद्रमा पर ले जाएगा तथा बाद में इसको मंगल अभियानों के लिए प्रयोग किया जायेगा।

यह पृथ्वी से लगभग 250,000 मील की दूरी पर स्थित अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक अस्थायी कार्यालय तथा निवास-स्थान के रूप में कार्य करेगा।

इस अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए क्वार्टर, विज्ञान और अनुसंधान के लिए प्रयोगशालाएं तथा आने वाले अंतरिक्ष यानों के लिए डॉकिंग पोर्ट (docking ports) होंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (International Space Station- ISS) की तुलना में, गेटवे बहुत छोटा है।

गेटवे के निर्माण में कितना समय लगेगा?

नासा ने गेटवे के निर्माण को वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, इस अंतरिक्ष यान पर निर्माण कार्य पहले से ही चल रहा है।

नासा ने 2022 तक अंतरिक्ष यान हेतु ऊर्जा तथा प्रणोदन तैयार करने की योजना बनाई है।

आर्टेमिस क्या है?

आर्टेमिस (ARTEMIS) का पूर्ण रूप – “Acceleration, Reconnection, Turbulence and Electrodynamics of the Moon’s Interaction with the Sun” है।

यह NASA का अगला चंद्रमा मिशन है।

ग्रीक (यूनानी) पौराणिक कथाओं में आर्टेमिस अपोलो की जुड़वाँ बहन तथा चंद्रमा की देवी थी।

उद्देश्य: इसका उद्देश्य सूर्य के विकरण के चंद्रमा की चट्टानी सतह पर टकराने से होने वाले प्रभाव को मापना है। चंद्रमा की सतह पर विकरण से सुरक्षा के लिए कोई भी चुंबकीय क्षेत्र नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आर्टेमिस क्या है?
  2. आर्टेमिस का महत्व।
  3. ओरियन स्पेसक्राफ्ट क्या है?
  4. गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट क्या है?
  5. यह अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) से किस प्रकार भिन्न है?
  6. चंद्रमा और मंगल पर जाने वाले नासा मिशन।

मेंस लिंक:

गेटवे लूनर ऑर्बिट आउटपोस्ट के महत्व पर चर्चा कीजिए।

gateway

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण संबंधी विषय।

विश्व मगरमच्छ दिवस

(World Crocodile Day)

प्रतिवर्ष 17 जून को मनाया जाता है।

यह दुनिया भर में संकटग्रस्त (Endangered) मगरमच्छों और घड़ियालों की स्थिति को उजागर करने हेतु एक वैश्विक जागरूकता अभियान है।

भारत में मगरमच्छ की तीन प्रजातियां पाई जाती है:

  1. ‘मगर’ अथवा दलदली मगरमच्छ (Crocodylus palustris)
  2. खारे पानी का मगरमच्छ (Crocodylus porosus)
  3. घड़ियाल (Gavialis gangeticus)

विवरण:

‘मगर’ अथवा दलदली मगरमच्छ

  • ‘मगर’ को भारतीय मगरमच्छ या दलदल मगरमच्छ भी कहा जाता है। यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है।
  • इसे IUCN द्वारा असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • ‘मगर’ मुख्य रूप से मीठे पानी में पाए जाने वाली प्रजाति है तथा यह झीलों, नदियों और दलदल में पाई जाती है।

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घड़ियाल

  • घड़ियाल या मछली खाने वाला मगरमच्छ भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है।
  • इसे IUCN द्वारा घोर-संकटग्रस्त (Critically Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • इसकी आबादी राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, सोन नदी अभयारण्य, उड़ीसा के सतकोसिया अभयारण्य तथा महानदी के वर्षावन बायोम में पायी जाती है।

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खारे पानी के मगरमच्छ

यह सभी जीवित सरीसृपों में सबसे बड़ा है। यह IUCN द्वारा संकटमुक्त (Least Concern) के रूप में सूचीबद्ध है। यह भारत के पूर्वी तट पर पाया जाता है।

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भारत में मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम

घड़ियाल और खारे पानी के मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम को पहली बार 1975 में ओडिशा में लागू किया गया था। इसके बाद में ‘मगर’ संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था।

ओडिशा में भारतीय मगरमच्छों की तीनों प्रजातियां पायी जाती है। मगरमच्छ संरक्षण परियोजना के लिए धन और तकनीकी सहायता भारत सरकार के माध्यम से UNDP/ FAO द्वारा प्रदान की गयी।

बौला परियोजना डाँगमाल, (‘BAULA’ PROJECT AT DANGAMAL):  उड़िया भाषा में ‘खारे पानी के मगरमच्छ’ ‘बौला (BAULA)’ कहा जाता है। डाँगमाल, भितरकनिका अभयारण्य में स्थित है।

रामतीर्थ मगर परियोजना (Mugger Project at Ramatirtha): यह परियोजना ओडिशा के रामतीर्थ केंद्र में संचालित है, यहाँ पर मगर का संरक्षण किया जाता है।

टीकरपाड़ा, ओडिशा में घड़ियाल परियोजना

नंदनकानन, ओडिशा में मगरमच्छ प्रजनन केंद्र

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में मगरमच्छों के प्रकार तथा उनकी संरक्षण स्थिति
  2. भारत में मगरमच्छों की मूल प्रजातियां?
  3. निवास
  4. संरक्षण क्षेत्र और कार्यक्रम
  5. तीनों प्रजातियों के बीच अंतर

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन

भारत-चीन गलवान घाटी गतिरोध

(India China Galwan Valley standoff)

सन्दर्भ: एक तरफ भारत और चीन सैन्य-स्तरीय वार्ता और व्यवस्था नियंत्रण में व्यस्त है, वही दूसरी ओर दोनों पक्षों की सेना के सैनिकों के बीच हिंसक मुठभेड़ हो रही है।

हाल ही में, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और भारतीय सेना के मध्य आपस में मुठभेड़ हुई, जिसमे दोनों ओर से पत्थरों, चाकुओं और धारदार हथियारों से प्राणघातक हमले किये गए।

यह घटना पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में स्थित गलवान घाटी में हुई।

पृष्ठभूमि

भारत और चीन के बीच करीब 3,440 किमी (2,100 मील) से अधिक लंबी सीमा है, जिस पर कुछ स्थानों पर दोनों देश एक दूसरे पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाते है।

पिछले एक महीने से, भारतीय और चीनी सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा के तीन स्थानों, गलवान नदी घाटी, हॉट स्प्रिंग्स एरिया, तथा पैंगोंग झील, पर तनावपूर्ण स्थिति में भिड़ी हुई हैं।

 गलवान नदी घाटी (Galwan River ValleyGRV) का सामरिक महत्व

गलवान घाटी क्षेत्र लद्दाख़ और अक्साई चीन के मध्य भारत-चीन सीमा के निकट है। इसी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा अक्साई चीन को भारत से विभाजित करती है।

अक्साई चीन घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग क्षेत्र से लेकर भारत के लद्दाख़ क्षेत्र तक फैली हुई है, और यही कारण इसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

अक्साई चिन भारत-चीन के मध्य विवादित क्षेत्र है, जिस पर भारत द्वारा दावा किया जाता है, वर्तमान में यह चीन द्वारा नियंत्रित है।

इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का कारण

भारत लेह से काराकोरम पास को जोड़ने वाला 255 किलोमीटर लंबा दार्बुक-श्योक- दौलत बेग ओल्डी (DS-DBO road) रोड का निर्माण रहा है।

यह सड़क श्योक नदी के समानांतर है तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक संचार के लिए बहुत  महत्वपूर्ण है।

इसलिए, चीनी इस क्षेत्र पर नियंत्रण करना चाहते है, क्योंकि उन्हें डर है कि भारत इस नदी घाटी का उपयोग करके अक्साई चिन पठार पर चीन के अधिकार को समाप्त कर सकता है।

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आगे की राह

चीन, सभी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर यथास्थिति को चुनौती देते हुए आक्रामक होने की नीति अपना रहा है। चीन की इस नीति के कई उदहारण दक्षिण चीन सागर में देखे जा सकते है।

भारत सरकार के लिए, भारत-चीन सीमा विवाद पर, दक्षता पूर्वक कूटनीति से काम लेने का समय है। भारत और चीन को वार्ता से सीमा पर तनाव कम किये जाने तथा मतभेदों को दूर करने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानचित्र पर-भारत और चीन, पाकिस्तान और नेपाल के बीच विवादित क्षेत्रों को खोजें
  2. गलवान घाटी की स्थिति
  3. श्योक नदी
  4. सिंधु नदी की सहायक नदियाँ और उनकी उत्पत्ति
  5. नाकु ला तथा नाथू ला कहाँ स्थित है?
  6. DS- DBO रोड क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पैंगोलिन (Pangolin)

चर्चा का कारण

चीन ने पैंगोलिन को उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान की है तथा इस संकटग्रस्त स्तनपायी जीव के शल्कों को अपनी परंपरागत दवाओं की सूची से हटाया दिया है।

प्रमुख तथ्य

पैंगोलिन, पृथ्वी पर पाया जाने वाला एकमात्र सशल्क स्तनपायी जीव है।

CITES के अनुसार, पैंगोलिन ऐसा स्तनपायी जीव है जिसकी खाने और पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल के लिए सबसे अधिक अवैध तस्करी होती है।

दुनिया भर में पायी जाने वाली पैंगोलिन की आठ प्रजातियों में से दो भारत में पाई जाती हैं।

ये प्रजातियाँ है: चीनी पैंगोलिन तथा इन्डियन पैंगोलिन, ये अधिकतर पूर्वोत्तर भारत में पाए जाती हैं।

संरक्षण स्थिति

  1. IUCN की रेड लिस्ट में चीनी पैंगोलिन को “गंभीर रूप से संकटग्रस्त (critically endangered)” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  2. भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) को “संकटग्रस्त (endangered)” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) के तहत एक परिशिष्ट I श्रेणी में सूचीवद्ध संरक्षित जीव है।

Pangolin

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