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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. तला-मद्दले (Talamaddale)

सामान्य अध्ययन-II

1. गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक’ (PC&PNDT) नियमों के निलंबन पर चिंताएं

2. सहायक यंत्रों / उपकरणों की खरीद / फिटिंग हेतु विकलांग व्‍यक्तियों को सहायता (ADIP योजना)

3. भारत तथा चीन के परमाणु हथियारों पर SIPRI की रिपोर्ट

सामान्य अध्ययन-III

1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी (GPAI)

2. इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX)

 

सामान्य अध्ययन- IV

1. एक केस स्टडी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. मेलाथियान (Malathion)

2. चर्चित स्थल

3. मैगलानोडोन बैकास्केनके

4. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड

 


 सामान्य अध्ययन-I


  

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

तला-मद्दले (Talamaddale)

संदर्भ: COVID -19 महामारी के दौरान, यक्षगान रंगमंच की एक पारंपरिक कला ‘ताल-मद्दले (Talamaddale)’ का प्रदर्शन वर्चुअल रूप से किया जाने लगा है। 13 जून को इस कला का सोशल मीडिया पर लाइव प्रदर्शन किया गया।

ताल-मद्दले (Talamaddale) के बारे में

ताल मद्दले, दक्षिण भारत के कर्नाटक तथा केरल के करावली एवं मलनाड क्षेत्रों में प्रचलित प्रदर्शन कला का एक प्राचीन रूप है। इसके अंतर्गत ‘संवाद प्रदर्शन’ अथवा वाद-विवाद प्रदर्शन का आयोजन किया जाता है।

इसमें प्रदर्शन का कथानक तथा विषय लोकप्रिय पौराणिक कथाओं से लिया जाता है, परन्तु, प्रदर्शन के दौरान, कलाकार तात्कालिक रूप से हास-परिहास, व्यंग्य तथा दर्शन आदि का प्रयोग करते हैं।

यक्षगान से भिन्नता

यक्षगान प्रदर्शन के विपरीत, पारंपरिक ताल-मद्दले में, ‘कलाकार कोई विशेष वेशभूषा धारण नहीं करते है, तथा प्रदर्शन के दौरान मंच पर एक स्थान पर बैठ कर चुने गए कथानक के आधार पर अपनी वाक् कला का प्रदर्शन करते हैं।

यक्षगान प्रदर्शन तथा ताल-मद्दले में संगीत की समानता होती है। लेकिन, ताल-मद्दले में केवल संवादों का प्रयोग होता है, जबकि यक्षगान प्रदर्शन के दौरान कलाकार विशिष्ट वेश-भूषा धारण करते हैं तथा नृत्य-अभिनय का प्रदर्शन करते हैं।

talamaddale

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ताल-मद्दले (Talamaddale) क्या है?
  2. यह यक्षगान से किस प्रकार भिन्न है?
  3. शास्त्रीय नृत्य क्या होते हैं?

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-II


  

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

‘गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक’ (PC&PNDT) नियमों के निलंबन पर चिंताएं

चर्चा का कारण

उच्चत्तम न्यायालय ने सरकार से COVID-19 महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन के मध्य ‘प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण तथा लिंग चयन’ संबधित नियमों को निलंबित करने के निर्णय संबंधी कारणों को जून के अंत तक स्पष्ट करने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने नियमों के निलंबन संबंधी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

पृष्ठभूमि

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 4 अप्रैल, 2020 को अधिसूचना जारी की गयी थी, जिसमें ‘गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध)’ (Pre-Conception and Pre-natal Diagnostic Techniques (Prohibition of Sex-Selection Rules)- PC&PNDT) नियम 1996 के कुछ प्रावधानों के कार्यान्वयन पर 30 जून 2020 तक रोक लगा दी गयी थी।

अधिसूचना के द्वारा PC&PNDT अधिनियम के नियमों 8, 9(8) और 18ए(6) को निलंबित कर दिया गया है।

  • इन नियमों के निलंबन के परिणामस्वरूप देश में लिंग-चयनात्मक गर्भपातों में वृद्धि होने की सम्भावना है, इस आधार पर सरकार की व्यापक रूप से आलोचना की गयी।
  • इन नियमों के अभाव में, क्लिनिक मालिकों तथा माता-पिता द्वारा चिकित्सा तकनीकों के दुरुपयोग की आशंका है।

PC&PNDT अधिनियम की धारा 9

गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध)’ अधिनियम की धारा 9 (8) का निलंबन विशेष चिंता का विषय है।

नियम 9 (8) के अनुसार: प्रत्येक अल्ट्रासाउंड क्लिनिक, जेनेटिक काउंसलिंग सेंटर, जेनेटिक प्रयोगशाला, जेनेटिक क्लिनिक एंड इमेजिंग सेंटर, संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक सभी पूर्व-गर्भाधान या गर्भावस्था से संबंधित प्रक्रियाओं / तकनीकों / परीक्षणों के संबंध में एक पूरी रिपोर्ट भेजेंगे।

चिंता का कारण: चूंकि चिकित्सा सुविधाएं ‘आवश्यक सेवाओं’ (Essential Services) के अंतर्गत आती हैं और इन सेवाओं को लॉकडाउन से छूट प्रदान की गयी है। इस दौरान यदि क्लिनिक खोला जाता है तथा इसमें परीक्षण किये जाते है तो इन परीक्षणों का एक रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा।  PC&PNDT नियमों के निलंबन से गैर-कानूनी प्रक्रियाओं में वृद्धि हो सकती है।

PC&PNDT अधिनियम के बारे में

गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 को भारत में गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिये लागू किया गया था। भारत में लिंगानुपात वर्ष 1901 में 972 से घटकर वर्ष 1991 में 927 हो गया था।

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भाधान के बाद भ्रूण के लिंग निर्धारण करने वाली तकनीकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना और लिंग आधारित गर्भपात के लिये प्रसव पूर्व निदान तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है।

अधिनियम के अंतर्गत अपराध: गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के अन्‍तर्गत गर्भाधारण पूर्व या बाद लिंग चयन और जन्‍म से पहले कन्‍या भ्रुण हत्‍या के लिए लिंग परीक्षण करना, इसके लिए सहयोग देना व विज्ञापन देना कानूनी अपराध है।

इसके अधिनियम के तहत, किसी भी प्रयोगशाला या केंद्र या क्लिनिक द्वारा भ्रूण के लिंग का निर्धारण करने के उद्देश्य से अल्ट्रासोनोग्राफी सहित कोई परीक्षण करना प्रतिबंधित किया गया है।

अधिनियम के अंतर्गत, सभी नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं, सभी आनुवंशिक परामर्श केंद्रों, आनुवंशिक प्रयोगशालाओं, आनुवंशिक क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों हेतु पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है।

संशोधन

  1. वर्ष 2003 में, लिंग चयन में प्रयुक्त होने वाली तकनीकों के विनियमन में सुधार करने हेतु PC&PNDT अधिनियम में संशोधन किया गया था।
  2. इस संसोधन के तहत, पूर्व गर्भाधान लिंग चयन तथा अल्ट्रासाउंड तकनीको को अधिनियम के दायरे में लाया गया था।
  3. संशोधन के अंतर्गत केंद्रीय पर्यवेक्षी बोर्ड को अधिक शक्तियां प्रदान की गयी तथा राज्य स्तरीय पर्यवेक्षी बोर्डों का गठन किया गया।

अधिनियम की आवश्यकता

  1. भारत में स्त्रियों की स्थिति प्रत्‍यक्ष और परोक्ष रूप से, बालिकाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति को प्रभावित करती हैं। देश के विभिन्‍न भागों में किये गये अध्‍ययनों में कन्‍या शिशु हत्‍या के मामले पाये गये हैं।
  2. गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान-तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम तथा इसके नियमों का उद्देश्य इस सामाजिक बुराई पर प्रतिबंध लगाना तथा इसे समाप्त करना है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. PC&PNDT अधिनियम के तहत किसको प्रतिबंधित किया गया है?
  2. 2003 के संशोधन के अंतर्गत किये गए परिवर्तन
  3. अधिनियम का कार्यान्वयन
  4. अधिनियम के तहत अपराध
  5. अधिनियम के तहत धारा 8 और 9 किससे संबंधित हैं?

मेंस लिंक:

PC&PNDT अधिनियम की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सहायक यंत्रों / उपकरणों की खरीद / फिटिंग हेतु विकलांग व्‍यक्तियों को सहायता (ADIP योजना)

(Assistance to Disabled persons for purchasing/fitting of aids/appliances- ADIP)

चर्चा का कारण

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पंजाब के फिरोजपुर में ADIP योजना के तहत पहली बार वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दिव्यांगजनों को सहायक यंत्रों व उपकरणों का वितरण किया गया है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत ALIMCO द्वारा ADIP योजना के तहत लॉकडाउन के बाद आयोजित किया गया यह पहला कैंप है।

ADIP योजना के बारे में

ADIP योजना का आरम्भ ‘सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय’ द्वारा किया गया है।

उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य विकलांगों के टिकाऊ, परिष्कृत और वैज्ञानिक रूप से निर्मित, आधुनिक, मानक सहायता और उपकरणों की खरीद में जरूरतमंद विकलांगों की सहायता करना है जो विकलांगों के प्रभाव को कम करके, उनकी आर्थिक, और आर्थिक क्षमता को बढ़ाकर उनके शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास को बढ़ावा दे सकते हैं।

कार्यान्वयन: इस योजना का कार्यान्वयन गैर-सरकारी संघटनों (NGOs), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय संस्थानों तथा ALIMCO (कृत्रिम अंगों का निर्माण करने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम- PSU) जैसी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।

पात्रता

निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने वाले विकलांग व्यक्ति प्राधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ADIP योजना के तहत सहायता के लिए पात्र होंगे:

  1. किसी भी उम्र का भारतीय नागरिक होना चाहिए
  2. 40% अथवा अधिक विकलांगता का प्रमाण पत्र
  3. 20000 रु. प्रति माह से कम आय
  4. आश्रितों के मामले में, माता-पिता / अभिभावकों की आय 20,000 रुपये प्रति माह से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  5. ऐसे व्यक्ति जिन्हें पिछले 3 वर्षों के दौरान सरकार, स्थानीय निकायों और गैर-सरकारी संगठनों से सहायता प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह सीमा 1 वर्ष होगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ALIMCO क्या है?
  2. ADIP योजना का कार्यान्वयन?
  3. पात्रता
  4. यह योजना राष्ट्रीय वयोश्री योजना से किस प्रकार भिन्न है?

मेंस लिंक:

दिव्यांग व्यक्तियों हेतु सहायक यंत्रों / उपकरणों की खरीद / फिटिंग के लिए विकलांग व्‍यक्तियों को सहायता योजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

भारत तथा चीन के परमाणु हथियारों पर SIPRI की रिपोर्ट

सन्दर्भ: हाल ही में ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (Stockholm International Peace Research Institute- SIPRI) द्वारा एक नई ईयरबुक जारी की गयी है।

इस ईयरबुक में “आयुध, निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति” का आकलन किया गया है।

SIPRI क्या है

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) 1966 में स्थापित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है, जो युद्ध तथा संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, हथियार नियंत्रण तथा निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में शोध- कार्य करती है।

स्टॉकहोम स्थित आय संस्था नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और इच्छुक लोगों को आँकड़ों का विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराती है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

भारत और उसके पड़ोसी

  1. परमाणु हथियार रखने वाले सभी देशों ने अपने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण जारी रखा है। पिछले एक वर्ष की अवधि में भारत और चीन ने अपने परमाणु हथियारों में वृद्धि की है।
  2. चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण कर रहा है, तथा इसके परमाणु शस्त्रागार में वर्ष 2019 में 290 वारहेड थे जिनकी संख्या वर्ष 2020 में बढ़कर 320 हो चुकी है।
  3. चीन पहली बार एक तथाकथित न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) विकसित कर रहा है, जो जल, थल और वायु तीनों जगहों से परमाणु हमला करने में सक्षम होगी।
  4. भारत के परमाणु शस्त्रागार में वर्ष 2019 में 130-140 वारहेड थे, जिनकी संख्या वर्ष 2020 में 150 हो गयी है।
  5. पाकिस्तान भी अपने परमाणु अस्त्रों के आकार तथा विविधता में वृद्धि कर रहा है। इसके परमाणु अस्त्रों की संख्या वर्ष 2020 में 160 हो चुकी है।
  6. भारत की तुलना में, चीन तथा पाकिस्तान, दोनों देशों के पास बड़े परमाणु शस्त्रागार हैं।

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वैश्विक परिदृश्य

  1. नौ परमाणु शस्त्र संपन्न देशों- अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया- के पास संयुक्त रूप से वर्ष 2020 के आरम्भ में लगभग 13,400 परमाणु अस्त्र थे। पिछले एक वर्ष की अवधि संयुक्त रूप से इन परमाणु अस्त्रों की संख्या में कमी हुई है।
  2. परमाणु हथियारों की कुल संख्या में कमी का मुख्य कारण रूस और अमेरिका द्वारा पुराने परमाणु हथियारों को नष्ट करना था। रूस और अमेरिका के पास कुल वैश्विक परमाणु हथियारों के 90% से अधिक का भण्डार है।
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा रूस के अतिरिक्त अन्य परमाणु-सशस्त्र देशों के परमाणु शस्त्रागार काफी छोटे है, लेकिन इन सभी देशों द्वारा नयी हथियार प्रणालियों को विकसित किया जा रहा है।

समय की आवश्यकता

अमेरिका और रूस द्वारा ‘नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (Strategic Arms Reduction Treaty-START), 2010 के तहत अपने परमाणु शस्त्रागार को कम किया गया है। इस संधि की समाप्ति फरवरी 2021 में हो रही है, जिसे दोनों देशों द्वारा विस्तारित किये जाने की आवश्यकता है।

START संधि पर गतिरोध तथा सोवियत-यू.एस. के मध्य वर्ष 1987 में घोषित ‘मध्यम दूरी तथा कम दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइल उन्मूलन संधि (INF संधि) का 2019 में समापन हो गया। इस महत्वपूर्ण संधि का अंत, रूस और अमेरिका के मध्य द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण समझौतों के युग की समाप्ति का संकेत है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. SIPRI क्या है?
  2. दुनिया में कितने परमाणु हथियार संपन्न राज्य हैं?
  3. वर्ष 2020 में परमाणु शस्त्र भण्डार
  4. न्यू START संधि क्या है?
  5. पिछले वर्ष किन देशों ने परमाणु वारहेड कम किए हैं?
  6. न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) क्या है?

मेंस लिंक:

SIPRI ईयरबुक, 2020 के नवीनतम निष्कर्षों पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


   

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी (GPAI)

चर्चा का कारण

भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial IntelligenceAI) के जिम्‍मेदार और मानव-केंद्रित विकास तथा उपयोग में सहायता करने हेतु ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Global Partnership on Artificial Intelligence- GPAI) में संस्‍थापक सदस्‍य के तौर पर सम्मिलित हो गया है।

GPAI क्या है?

GPAI, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदारीपूर्ण विकास और मानवाधिकारों, समावेशन, विविधता, नवाचार और आर्थिक विकास में उपयोग का मार्गदर्शन करने पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय और बहु-हितधारक पहल है।

यह प्रतिभागी देशों के अनुभव और विविधता का उपयोग करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों की बेहतर समझ विकसित करने का अपने किस्‍म का पहला प्रयास भी है।

GPAI को पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) में स्थित सचिवालय तथा मॉन्ट्रियल और पेरिस स्थित सहित दो विशेषज्ञता केंद्रों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।

संस्थापक सदस्य

भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, स्लोवेनिया, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।

कार्यप्रणाली

इस पहल के तहत AI से संबंधित प्राथमिकताओं पर अत्याधुनिक अनुसंधान और अनुप्रयुक्त गतिविधियों की सहायता करते हुए AI के संबंध में सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई को पाटने की कोशिश की जाएगी।

GPAI, एआई के जिम्मेदारीपूर्ण विकास को बढ़ावा देने के लिए साझेदारों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से उद्योग, नागरिक समाज, सरकारों और शिक्षाविदों के प्रमुख विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा।

यह ऐसी कार्यप्रणालियां भी विकसित करेगा, जिनसे यह दर्शाया जा सके कि कोविड-19 के मौजूदा वैश्विक संकट से बेहतर ढंग से निपटने के लिए AI का लाभ किस प्रकार उठाया जा सकता है।

भारत के लिए महत्व

GPAI में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल होने से भारत समावेशी विकास के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग के अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक विकास में सक्रिय रूप से भाग लेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्या है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो कंप्यूटर को इंसानों की तरह बनाने से संबंधित है। AI मशीनों की सोचने, विचार करने, सीखने, समस्या हल करने और निर्णय जैसे संज्ञानात्मक कार्यों को करने की क्षमता को बताती है।

AI_and_opportunities

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्या है?
  2. GPAI क्या है? उद्देश्य?
  3. संस्थापक सदस्य
  4. GPAI का सचिवालय?
  5. OECD, उद्देश्य और सदस्य

मेंस लिंक:

GPAI के उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा।

इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX)

यह क्या है?

इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) पहला राष्‍ट्रव्यापी ऑनलाइन वितरण-आधारित गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है।

  • IGX प्राकृतिक गैस के वितरण के लिए एक डिलीवरी- आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होगा।
  • इंडियन गैस एक्सचेंज को भारत के ऊर्जा बाजार प्लेटफॉर्म के पूर्ण स्वामित्व वाले IEX की अनुषंगी के तौर पर शामिल किया गया है।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म ग्राहकों को निर्बाध ट्रेडिंग अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तरह से वेब-आधारित इंटरफ़ेस के साथ स्वचालित है।

IGX की कार्यविधि

  • IGX एक डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म है जिस पर प्राकृतिक गैस के खरीदारों और विक्रेताओं को स्पॉट मार्केट (spot market) तथा फॉरवर्ड मार्केट (forward market) में व्यापार की अनुमति दी जायेगी।
  • आरम्भ में प्राकृतिक गैस के तीन मुख्य केन्द्रों- गुजरात के हजीरा तथा दाहेज एवं आंध्र प्रदेश के काकीनाडा को IGX डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ा जायेगा।
  • आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (Liquified Natural Gas- LNG) का पुनः गैसीकरण (Regassified) किया जायेगा और IGX के माध्यम से बेंचा जायेगा।

क्या घरेलू उत्पादित प्राकृतिक गैस भी एक्सचेंज में खरीदी और बेची जाएगी?

नहीं। प्राकृतिक रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत सरकार द्वारा तय की जाती है। इसे गैस एक्सचेंज पर नहीं बेचा जाएगा।

आवश्यकता

पिछले दो वित्तीय वर्षों से प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन कम हो रहा है। इसका कारण प्राकृतिक गैस के वर्तमान स्रोतों की उत्पादकता में कमी होना बताया गया है।

वर्तमान में घरेलू रूप से उत्पादित प्राकृतिक गैस का उत्पादन देश की प्राकृतिक गैस की खपत के आधे से भी कम है।

देश में प्राकृतिक गैस की खपत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (Liquified Natural Gas- LNG) के आयात से पूरा किया जाएगा। इस संदर्भ में भारत सरकार द्वारा  ऊर्जा की टोकरी में प्राकृतिक गैस के अनुपात को वर्ष 2018 के 6.2% से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 15% करने का निर्णय लिया है।

लाभ

  • इससे राष्ट्र को प्राकृतिक गैस के मुक्त बाजार मूल्य निर्धारण की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद मिलेगी। बाजार संचालित मूल्य निर्धारण प्रणाली होने से इंडिया गैस एक्सचेंज (IGX) गैस के लिए मुक्त बाजार साकार करने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाएगा।
  • यह विविध स्रोतों से गैस के उत्पादन और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से एलएनजी के आयात से लेकर पारदर्शी मूल्य व्‍यवस्‍था तक पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को पूर्ण करेगा।

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस उपलब्ध जीवाश्म इधनों में सबसे स्वच्छ जीवाश्म ईंधन होती है।

इसका उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक और अन्य व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण कार्बनिक रसायनों के निर्माण में फीडस्टॉक के रूप में किया जाता है तथा साथ ही बिजली उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में, औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयों में हीटिंग के लिए उपयोग किया जाता है।

प्राकृतिक गैस का उपयोग घरों में खाना पकाने तथा परिवहन ईंधन के लिए भी किया जाता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. IGX पर क्या कारोबार किया जाता है?
  2. IEX क्या है?
  3. प्राकृतिक गैस क्या है?
  4. इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
  5. इसे स्वच्छ ईंधन क्यों कहा जाता है?

मेंस लिंक:

इंडियन गैस एक्सचेंज (IGX) की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-IV


  प्रश्नपत्र 4 हेतु केस स्टडी

ओडिशा में एक महिला द्वारा पेंशन के लिए 100 साल की मां को खाट पर लेकर बैंक पहुचने के बाद शाखा प्रबंधक को निलंबित किया गया।

 घटनाक्रम

यह घटना ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के एक गांव में हुई थी।

नौ जून को देई उत्कल ग्रामीण बैंक की स्थानीय शाखा में अपनी बीमार मां लेबे बघेल के खाते से 1500 रुपए निकालने के लिए गई।

पेंशन राशि निकालने के लिए खाताधारक को देखकर सत्यापन करने की आवश्यकता होने पर पुन्जमती देवी को अपनी 100 वर्षीय मां को बिठाकर चारपाई खींचकर बैंक जाना पड़ा।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद सामने आई। वीडियो में नौपारा जिले के बड़गांव की 60 वर्षीय पुंजिमती देई एक चारपाई खींचते दिख रही हैं, जिस पर उनकी बूढ़ी मां लेटी हैं।

स्थिति को कैसे संभाला गया?

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया और उत्कल ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष से अनुरोध किया गया कि वे उचित जांच के बाद कड़ी कार्रवाई करें।

पूछताछ के आधार पर, बैंक प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है।

बैंक का पक्ष

  • बैंक ने स्पष्ट किया है, बैंक में काम ज्यादा था, इसलिए बैंक प्रबंधन उसी दिन महिला के घर नहीं जा सके थे। बैंक में केवल दो कर्मचारी- शाखा प्रबंधक और कैशियर हैं।
  • बैंक प्रबंधक ने अगले दिन घर आकर सत्यापन करने का आश्वासन दिया था।
  • इसके बावजूद महिला अपनी मां को बैंक लेकर पहुंच गई।

बैंक के अध्यक्ष का कहना है कि शाखा प्रबंधक का महिला को परेशान करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन वह उनके साथ बेहतर तरीके से समन्वय स्थापित कर सकते थे और स्थिति को ठीक से समझा सकते थे।

बैंक ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए खेद जताया। इस घटना से बैंक की छवि प्रभावित हुई है, इसलिए शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया।

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स्रोत: द हिन्दू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


  मेलाथियान (Malathion)

यह एक कीटनाशक है जिसका कृषि, आवासीय भूनिर्माण, सार्वजनिक मनोरंजन क्षेत्रों और मच्छर मारने जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य कीट नियंत्रण कार्यक्रमों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

चर्चा का कारण

एचआईएल इंडिया लिमिटेड (HIL India Ltd.) द्वारा ईरान को टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम हेतु 25 मीट्रिक टन मेलाथियान 95% ULV कीटनाशक की आपूर्ति की गयी है।

आवश्यकता

खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation- FAO) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में टिड्डियों का संकट बढ़ रहा है। इससे आने वाले महीनों में भारत में फसल को नुकसान पहुँचने की आशंका है। भारत सरकार ने टिड्डी समस्या के समाधान के लिए इसके प्रजनन स्थल पर निपटने हेतु पहल की है तथा समन्वित प्रयासों के लिए ईरान से संपर्क किया है।

चर्चित स्थल

संदर्भ: पर्यटन मंत्रालय के देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला के 32वें सत्र में ‘हिमालय में ट्रेकिंग- जादुई अनुभव’ शीर्षक से भारतीय हिमालय पर्वत श्रेणी में पर्यटन की क्षमता को उजागर किया गया है।

स्थल

  1. कुआरी दर्रा (उत्तराखंड): इस ट्रेक की खोज लॉर्ड कर्जन ने की थी और इसे कर्जन ट्रेल के नाम से भी जाना जाता है।
  2. ब्रह्मा ताल (उत्तराखंड): यह कटक के बीच में एक छिपी हुई एकान्तिक झील है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान ब्रह्मा ने ध्यान किया था।
  3. फोटोक्सर लद्दाख का एक सुरम्य गाँव है। यह लिंगशेड- पदुम ट्रेक (जिसे द ग्रेट ज़ांस्कर ट्रेक के रूप में भी जाना जाता है) का हिस्सा है।
  4. रूपकुंड (उत्तराखंड): यह एक ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियल झील है। यह त्रिशूल पर्वत की गोद में स्थित है।

(नोट: कृपया मानचित्र पर इन स्थलों को खोजें तथा महत्वपूर्ण नदियों, राष्ट्रीय उद्यानों और महत्व के स्थानों की तलाश करें।)

मैगलानोडोन बैकास्केनके

(Magallanodon baikashkenke)

सन्दर्भ: चिली और अर्जेंटीना के शोधकर्ताओं ने गोंडवानथेरिया (Gondwanatheria) के वंश की विलुप्त प्रजाति के दांतों की खोज की है।

Magallanodon

यह खोज पेटागोनिया मरुस्थल में की गयी। इस प्रजाति का नाम मैगलानोडोन बैकास्केनके है।

प्रमुख तथ्य

  • यह चिली में खोजा गया सबसे पुराना स्तनपायी जीव है।
  • यह छोटे स्तनपायी जीव क्रेटेशियस युग के अंतिम दौर में दक्षिणी पैटागोनिया में डायनासोर, मगरमच्छ, कछुए और पक्षियों के साथ रहते थे।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) का गठन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के तहत किया गया था।

  • इसका उद्देश्य, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से संबंधित निर्दिष्ट गतिविधियों से संबंधित उपभोक्ताओं और संस्थाओं के हितों की रक्षा करना तथा प्रतिस्पर्धी बाजारों को बढ़ावा देना है।
  • अधिनियम में, बोर्ड को, शोधन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विपणन और पेट्रोलियम की बिक्री, पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को छोड़कर देश के सभी भागों में पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस की निर्बाध और पर्याप्त आपूर्ति विनियमित करना सुनिश्चित करने के लिए विनियमित करने का भी अधिदेश दिया गया है।

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