HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
भारतीय संविधान के अंतर्गत भारतीय राज्य को पंथनिरपेक्ष घोषित किया गया है। इस प्रावधान को लागू करने के निम्नलिखित में कौन से उद्देश्य है?
- यह सुनिश्चित करना कि एक ही धार्मिक समुदाय के कुछ सदस्य का अन्य सदस्यों पर प्रभुत्व स्थापित न हो सके।
- यह सुनिश्चित करना कि एक धार्मिक समुदाय का दूसरे धार्मिक समुदाय पर प्रभुत्व स्थापित न हो सके।
- यह सुनिश्चित करना कि राज्य द्वारा किसी धर्म विशेष को अपनाया न जा सके।
- यह सुनिश्चित करना कि राज्य व्यक्तियों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन न कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: d
भारतीय संविधान यह प्रावधान करता है कि भारतीय राज्य पंथनिरपेक्ष होना चाहिए।
संविधान के अनुसार, केवल एक पंथनिरपेक्ष राज्य निम्नलिखित को सुनिश्चित कर अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकता है:
- एक धार्मिक समुदाय का दूसरे धार्मिक समुदाय पर प्रभुत्व स्थापित न हों।
- एक ही धार्मिक समुदाय के कुछ सदस्य का अन्य सदस्यों पर प्रभुत्व स्थापित न हों।
- राज्य द्वारा किसी विशेष धर्म को लागू न किया जाए और व्यक्तियों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन न किया जा सके।
उपर्युक्त प्रभुत्व को रोकने के लिए भारतीय राज्य विभिन्न तरीकों से कार्य करता है। प्रथम, यह धर्म से स्वयं को पृथक रखता है। भारतीय राज्य किसी धार्मिक समूह द्वारा शासित नहीं है और न ही यह किसी एक धर्म का समर्थन करता है।
Incorrect
उत्तर: d
भारतीय संविधान यह प्रावधान करता है कि भारतीय राज्य पंथनिरपेक्ष होना चाहिए।
संविधान के अनुसार, केवल एक पंथनिरपेक्ष राज्य निम्नलिखित को सुनिश्चित कर अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकता है:
- एक धार्मिक समुदाय का दूसरे धार्मिक समुदाय पर प्रभुत्व स्थापित न हों।
- एक ही धार्मिक समुदाय के कुछ सदस्य का अन्य सदस्यों पर प्रभुत्व स्थापित न हों।
- राज्य द्वारा किसी विशेष धर्म को लागू न किया जाए और व्यक्तियों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन न किया जा सके।
उपर्युक्त प्रभुत्व को रोकने के लिए भारतीय राज्य विभिन्न तरीकों से कार्य करता है। प्रथम, यह धर्म से स्वयं को पृथक रखता है। भारतीय राज्य किसी धार्मिक समूह द्वारा शासित नहीं है और न ही यह किसी एक धर्म का समर्थन करता है।
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Question 2 of 5
2. Question
निम्नलिखित में से कौन–सा/से ‘प्रत्यक्ष लोकतंत्र’ का स्वरूप है/हैं?
- ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णय।
- किसी राज्य की विधान सभा द्वारा लिए गए निर्णय।
- एक निगम के निदेशक मंडल में लिए गए निर्णय।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Correct
उत्तर: d)
- निदेशक मंडल में प्रत्यक्ष प्रतिनिधि या नामनिर्देशित सदस्य शामिल होते हैं। इसलिए यह अप्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक उदाहरण है। यही तथ्य किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में भी लागू होता है।
- ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक उदाहरण है, जहाँ लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्णय लिए जाते हैं।
Incorrect
उत्तर: d)
- निदेशक मंडल में प्रत्यक्ष प्रतिनिधि या नामनिर्देशित सदस्य शामिल होते हैं। इसलिए यह अप्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक उदाहरण है। यही तथ्य किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में भी लागू होता है।
- ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक उदाहरण है, जहाँ लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्णय लिए जाते हैं।
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Question 3 of 5
3. Question
प्राय: समाचारों में चर्चित भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 142’ निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
Correct
उत्तर: b
अनुच्छेद 142, उच्चतम न्यायालय को पक्षकारों को “पूर्ण न्याय (complete justice)” प्रदान करने हेतु विशिष्ट शक्ति प्रदान करता है। जहां कई बार कानून या संविधि समाधान प्रदान करने में असमर्थ होते हैं, तो न्यायालय द्वारा उस विवाद के संबंध एक ऐसा समाधान प्रस्तुत किया जाता है जो दोनों पक्षकारों के लिए लाभकारी होता है।
Incorrect
उत्तर: b
अनुच्छेद 142, उच्चतम न्यायालय को पक्षकारों को “पूर्ण न्याय (complete justice)” प्रदान करने हेतु विशिष्ट शक्ति प्रदान करता है। जहां कई बार कानून या संविधि समाधान प्रदान करने में असमर्थ होते हैं, तो न्यायालय द्वारा उस विवाद के संबंध एक ऐसा समाधान प्रस्तुत किया जाता है जो दोनों पक्षकारों के लिए लाभकारी होता है।
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Question 4 of 5
4. Question
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक सरकारी प्रस्ताव द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी।
- मानवाधिकार उल्लंघन संबधित शिकायतों की जांच हेतु आयोग के पास स्वयं के जांच कर्मचारी होते है।
- आयोग को मानव अधिकारों के उल्लंघनकर्ताओं को दंडित करने की शक्ति प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: c
- भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( National Human Rights Commission: NHRC) को “मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993” द्वारा वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। NHRC मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए उत्तरदायी है, जिसे अधिनियम द्वारा अग्रलिखित रूप में परिभाषित किया गया है – “संविधान द्वारा प्रत्याभूत या अंतर्राष्ट्रीय नियमों में समाविष्ट और भारत में प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित अधिकार।”
- मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच करने के लिए आयोग के पास पुलिस महानिदेशक के नेतृत्व में स्वयं के जांच कर्मचारी होते हैं।
- अधिनियम के तहत शिकायतों की जांच करते समय, आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत मुकदमा चलाने की दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होती हैं।
- इसे मानव अधिकारों के उल्लंघन करने वालों को दंडित करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं होती है। साथ ही, इसे किसी भी प्रकार की मौद्रिक साहयता प्रदान करने की शक्ति भी प्राप्त नहीं होती है।
Incorrect
उत्तर: c
- भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( National Human Rights Commission: NHRC) को “मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993” द्वारा वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। NHRC मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए उत्तरदायी है, जिसे अधिनियम द्वारा अग्रलिखित रूप में परिभाषित किया गया है – “संविधान द्वारा प्रत्याभूत या अंतर्राष्ट्रीय नियमों में समाविष्ट और भारत में प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा से संबंधित अधिकार।”
- मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच करने के लिए आयोग के पास पुलिस महानिदेशक के नेतृत्व में स्वयं के जांच कर्मचारी होते हैं।
- अधिनियम के तहत शिकायतों की जांच करते समय, आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत मुकदमा चलाने की दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होती हैं।
- इसे मानव अधिकारों के उल्लंघन करने वालों को दंडित करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं होती है। साथ ही, इसे किसी भी प्रकार की मौद्रिक साहयता प्रदान करने की शक्ति भी प्राप्त नहीं होती है।
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Question 5 of 5
5. Question
‘दोहरी क्षति’ (Double Jeopardy) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसका अर्थ है, कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा।
- संविधान एक ही अपराध के लिए दोहरे दंड को प्रतिबंधित करता है।
- दोहरी क्षति के विरुद्ध आंशिक सुरक्षा प्राप्त करना एक मूल अधिकार है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
- अनुच्छेद 20 (2) के तहत यह प्रावधान किया गया है कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा। इसे दोहरी क्षति का सिद्धांत (Doctrine of Double Jeopardy) कहा जाता है।
- इस अनुच्छेद का उद्देश्य उत्पीड़न (जो क्रमिक आपराधिक कार्यवाही के लिए होना चाहिए) से संरक्षण प्रदान करना है, जहां व्यक्ति द्वारा केवल एक ही अपराध किया गया है।
- संविधान समान अपराध के लिए दोहरी सजा को प्रतिबंधित करता है। इस प्रकार के अपराध के लिए दोषसिद्धि, अन्य अपराध के लिए क्रमिक ट्रायल और दोषसिद्धि को प्रतिबंधित नहीं करती है।
- भारतीय संविधान में, अनुच्छेद 20 (2) के तहत दोहरी क्षति से सरंक्षण के प्रावधान को सम्मलित किया गया है और यह अधिकार भारतीय संविधान के मूल अधिकारों में से एक है।
- भारत के उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है यदि अभियुक्त को अभियोजन के लिए अवैध अनुमोदन के आधार पर, ट्रायल आरंभ होने से पूर्व ही किसी आपराधिक मामले से मुक्त कर दिया जाता है तो उस स्थिति में दोहरी क्षति का सिद्धांत लागू नहीं होगा।
Incorrect
उत्तर: d)
- अनुच्छेद 20 (2) के तहत यह प्रावधान किया गया है कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा। इसे दोहरी क्षति का सिद्धांत (Doctrine of Double Jeopardy) कहा जाता है।
- इस अनुच्छेद का उद्देश्य उत्पीड़न (जो क्रमिक आपराधिक कार्यवाही के लिए होना चाहिए) से संरक्षण प्रदान करना है, जहां व्यक्ति द्वारा केवल एक ही अपराध किया गया है।
- संविधान समान अपराध के लिए दोहरी सजा को प्रतिबंधित करता है। इस प्रकार के अपराध के लिए दोषसिद्धि, अन्य अपराध के लिए क्रमिक ट्रायल और दोषसिद्धि को प्रतिबंधित नहीं करती है।
- भारतीय संविधान में, अनुच्छेद 20 (2) के तहत दोहरी क्षति से सरंक्षण के प्रावधान को सम्मलित किया गया है और यह अधिकार भारतीय संविधान के मूल अधिकारों में से एक है।
- भारत के उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है यदि अभियुक्त को अभियोजन के लिए अवैध अनुमोदन के आधार पर, ट्रायल आरंभ होने से पूर्व ही किसी आपराधिक मामले से मुक्त कर दिया जाता है तो उस स्थिति में दोहरी क्षति का सिद्धांत लागू नहीं होगा।








