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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 15 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. ओडिशा का ‘रज-पर्व’ उत्सव

सामान्य अध्ययन-II

1. अमीबायसिस अथवा अमीबा रक्तातिसार

2. धारा 370 की समाप्ति तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव

3. RMIFC तथा EMASOH में नौसेना संपर्क अधिकारी

 

सामान्य अध्ययन-III

1. मसौदा विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. मालाबार ग्लाइडिंग मेंढक

2. कर्नाटक में बंदर पार्क

3. जूनटीथ (Juneteenth) क्या है?

4. आरोग्य पथ

5. कैप्टन अर्जुन

6. पी के मोहंती पैनल

7. अंतर्राष्ट्रीय रंगहीनता जागरूकता दिवस

 


 सामान्य अध्ययन-I


  

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

ओडिशा का ‘रज-पर्व’ उत्सव

सन्दर्भ: ओडिशा में ‘रज-पर्व’ का त्यौहार मनाया जा रहा है।

रज-पर्व को कब और क्यों मनाया जाता है?

ओडिशा में तीन दिनों तक मनाया जाने वाला यह उत्सव, धरती माता (भूमा देवी) तथा महिलाओं के लिए समर्पित है।

रज-पर्व का उत्सव प्रति वर्ष मिथुन संक्रांति से एक दिन पहले से आरम्भ होकर दो दिन बाद तक मनाया जाता है।

त्यौहार की मान्यता

इस पर्व को मनाने के पीछे की मान्यता है, कि भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी (पृथ्वी) को ‘रजस्वला’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उनका मासिक धर्म तीन से चार दिनों तक का होता है।

इस दौरान, ओडिया लोग भूमि की खुदाई से संबंधित किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अथवा जुताई कार्य नहीं करते हैं। इस प्रकार की गतिविधियों को विराम देकर वे धरती माता को सम्मान प्रदान करते हैं, तथा उन्हें रोजाना के कार्यों से विश्राम देते हैं।

रज-पर्व उत्सव की प्रमुख विशेषताएं

रज-पर्व, ओडिशा के प्रमुख त्योहारों में से एक है तथा इसमें महिलाओं के मासिक धर्म को त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

इस पर्व के पहले दिन को ‘पहिलो रजो’, दूसरे दिन को ‘मिथुन संक्रांति’ तथा तीसरे दिन को ‘भूदाहा’ अथवा ‘बासी रजा’ कहा जाता है।

इस उत्सव की तैयारी ‘पहिलो रजो’ से एक दिन पहले से शुरू होती है तथा इसे सजबज़ा कहा जाता है। इस पर्व में अविवाहित कन्याएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। माना जाता है कि वे अच्छे वर की कामना से यह पर्व मनाती हैं।

इस पर्व के दौरान विभिन्न रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है: जैसे, पोदपीठा (Podapitha) जैसे पौष्टिक भोजन का सेवन, नंगे पांव न चलना, पहले दिन का स्नान तथा पेड़ पर रस्सियों का झूला इत्यादि।

त्योहार का समापन वसुमती स्नान अथवा भूमा देवी के स्नान के रूप में होता है जिसे वसुमती गढ़ुआ कहा जाता हैं। महिलायें ‘सिल बट्टा’ के पत्थर की पूजा करती है, जिसे भूमा देवी का प्रतीक माना जात है। वे इसे हल्दी के लेप से स्नान कराती है तथा फूल चढ़ा कर सिन्दूर लगाती हैं।

कृषि-संबंध

राज-पर्व को गर्मी के मौसम के अंत तथा मानसून के आगमन का संकेत भी माना जाता है। इस प्रकार, यह त्यौहार कृषि संबंधित समुदायों तथा अन्य कार्यो से भी जुड़ा हुआ है।

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य संबंधित विषय।

अमीबायसिस अथवा अमीबा रक्तातिसार

सन्दर्भ: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने अमीबायसिस की वजह बने प्रोटोजोआ के खिलाफ नई दवा के अणु विकसित किए हैं।

अमीबायसिस (Amoebiasis) / अमीबा रक्तातिसार (Amoebic Dysentery) क्या है?

यह बृहदान्त्र (colon) में अमीबा ‘एन्टामोइबा हिस्टोलिटिका’ (Entamoeba histolytica) द्वारा होने वाला एक परजीवी संक्रमण है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंटामोइबा हिस्टोलिटिका मनुष्यों में परजीवी बीमारी के कारण रुग्णता (अस्वस्थता) और मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है।

यह प्रोटोजोआ प्रकृति में अवायवीय या कम हवा में जीवित रहने वाला है, जो ऑक्सीजन की अधिकता में जीवित नहीं रह सकता है।

हालांकि, संक्रमण के दौरान यह मानव शरीर के अंदर ऑक्सीजन की तेज वृद्धि का सामना करता है।

यह जीव ऑक्सीजन की अधिकता से उत्पन्न तनाव का मुकाबला करने के लिए बड़ी मात्रा में सिस्टीन का निर्माण करता है।

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रोग का प्रसार

यह बीमारी, अधपका भोजन करने, दूषित पानी पाने अथवा दूषित पानी में धोये गए फलों अथवा सब्जियों को खाने से फैलती है।

लक्षण

  1. पेट में दर्द
  2. जठरांत्र (Gastrointestinal): मल में रक्त, दस्त अथवा पेट फूलना
  3. थकान, बुखार या भूख न लगना
  4. वजन कम होना

उपचार

स्वयं देखभाल तथा प्रोटोजोआ- प्रतिरोधी (antiparasitics) दवाइयां।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रोटोजोआ क्या है?
  2. अवायवीय प्रोटोजोआ क्या होते है?
  3. अमीबायसिस के कारण?
  4. लक्षण?
  5. सिस्टीन (cysteine) क्या है?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

धारा 370 की समाप्ति तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव

सन्दर्भ: एक प्रभावशाली चीनी थिंक-टैंक, ‘चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्परेरी इंटरनेशनल रिलेशंस (CICIR) – ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (the Line of Actual Control- LAC) पर वर्तमान तनाव को पिछले वर्ष भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने तथा जम्मू और कश्मीर के दर्जे में किये गए परिवर्तन से जोड़ा है।

CICIR का वक्तव्य

CICIR ने भारत के इस कदम को चीन तथा पाकिस्तान के लिए एक संयुक्त चुनौती के रूप में बताया है। इसका कहना है कि भारत सरकार के इस कदम ने “पाकिस्तान तथा चीन की संप्रभुता को चुनौती दी है“।

इसके अनुसार इस कदम ने “भारत-पाकिस्तान संबंधों तथा चीन-भारत संबंधों को और अधिक जटिल बना दिया है।”

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पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष, धारा 370 की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार द्वारा एक नया मानचित्र जारी किया गया।

चीन ने आरोप लगाया है, कि भारत द्वारा जारी किये गए मानचित्र पर नए क्षेत्रों को सामिलित किया गया है। इसमें झिंजियांग (Xinjiang) तथा तिब्बत के स्थानीय अधिकार क्षेत्रों में आने वाली भूमि को लद्दाख संघ शासित प्रदेश के अंतर्गत  दर्शाया है।

और, इस कारण चीन कश्मीर विवाद में उतरने पर विवश हो गया तथा भारत के इस कदम ने  चीन और पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर जवाबी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया है जिससे चीन और भारत के मध्य सीमा विवाद को हल करने हेतु कठिनाई में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है।

वर्तमान स्थिति

हाल ही में, लद्दाख में विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के कारण भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया है। इस तनाव को कम करने तथा स्थिति नियंत्रण हेतु विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. विवादित क्षेत्र
  2. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) क्या है?
  3. LAC तथा नियंत्रण रेखा (LOC) में अंतर?
  4. भारत तथा चीन के मध्य महत्वपूर्ण दर्रे
  5. अनुच्छेद 370 क्या है? जम्मू-कश्मीर के स्थिति में परिवर्तन?

मेंस लिंक:

क्या धारा 370 की समाप्ति भारत तथा चीन के मध्य सीमा तनाव वृद्धि का कारण है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

RMIFC तथा EMASOH में नौसेना संपर्क अधिकारी

सन्दर्भ: भारत, समुद्री अधिकार-क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness-MDA) को बढ़ाने हेतु क्षेत्रीय समुद्री सूचना संलयन केंद्र (Regional Maritime Information Fusion Centre- RMIFC) तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में यूरोपीय समुद्री निगरानी पहल (European maritime surveillance initiative in the Strait of HormuzEMASOH) में नौसेना संपर्क अधिकारियों को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है।

क्षेत्रीय समुद्री सूचना संलयन केंद्र (RMIFC)

RMFIC हिंद महासागर आयोग (Indian Ocean Commission- IOC) के तत्वावधान में कार्य करता है। भारत, जापान तथा संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को मार्च 2020 में RMFIC में पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया है।

RMFIC का मुख्यालय मेडागास्कर में स्थित है।

इसकी स्थापना समुद्री गतिविधियों पर निगरानी के माध्यम से समुद्री अधिकार-क्षेत्र जागरूकता (MDA) में वृद्धि करने तथा सूचना साझाकरण तथा विनिमय को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से की गयी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में यूरोपीय समुद्री निगरानी पहल (EMASOH)

EMASOH का मुख्यालय अबू धाबी में फ्रांसीसी नौसैनिक अड्डे पर स्थित है। यह बेल्जियम, डेनमार्क, नीदरलैंड तथा फ्रांस की संयुक्त पहल है।

इसका उद्देश्य “समुद्री गतिविधियों की निगरानी करना तथा फारस की खाड़ी एवं होर्मुज जलडमरूमध्य में नौपरिवहन की स्वतंत्रता का दायित्व लेना है।”

इसका का आरम्भ फरवरी 2020 में फ्रांस के नेतृत्व में किया गया था।

भारत के लिए इसका महत्व

इससे भारत के गुरुग्राम स्थित ‘हिंद महासागर क्षेत्र’ हेतु सूचना संलयन केंद्र [Information Fusion Centre for Indian Ocean Region (IFC-IOR)] तथा अन्य IFCs के मध्य संबंधो में वृद्धि होगी तथा IFC-IOR, ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र’ (IOR) में सभी समुद्री डेटा भंडार का निर्माण करेगा।

अतिरिक्त जानकारी

हिंद महासागर आयोग (Indian Ocean Commission IOC)

हिंद महासागर आयोग की स्थापना वर्ष 1982 में की गयी थी। इसका मुख्यालय एबेने (Ebene) मॉरिशस में अवस्थित है। यह एक अंतर-सरकारी संगठन है।

IOC में पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित पाँच छोटे द्वीप समूह शामिल हैं: कोमोरोस, मेडागास्कर, मॉरीशस, रियूनियन (फ्राँस के नियंत्रण में) और सेशल्स।

भारत को IOC में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है। भारत के अतिरिक्त IOC के अन्य चार पर्यवेक्षक- चीन, यूरोपीय यूनियन, माल्टा तथा इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ ला फ्रांसोफोनी (OIF) हैं।

IOC पश्चिमी हिंद महासागर के द्वीपीय राष्ट्रों को सामूहिक रूप से कार्य करने हेतु मंच प्रदान करता है।

हिंद महासागर क्षेत्र हेतु सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR)

IFC-IOR को भारतीय नौसेना द्वारा दिसंबर 2018 को हरियाणा के गुरुग्राम में सूचना प्रबंधन और विश्लेषण केंद्र (IMAC) में स्थापित किया गया था।

इसका उद्देश्य हिन्द महासागर क्षेत्र में विभिन्न देशों के साथ समुद्री सुरक्षा के लिए कार्य करना है।

फ्रांस IFC-IOR में संपर्क अधिकारी (Liaison OfficerLO) को तैनात करने वाला पहला देश बन गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. हिंद महासागर आयोग (IOC) क्या है?
  2. इसकी स्थापना कब और कैसे हुई?
  3. सदस्य और पर्यवेक्षक कौन हैं?
  4. फ्रांस इसमें किस प्रकार शामिल है?
  5. IFC- IOR क्या है?
  6. RMIFC क्या है?
  7. EMASOH की स्थापना किसने की?
  8. फारस की खाड़ी तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य की अवस्थिति

मेंस लिंक:

हिंद महासागर आयोग में पर्यवेक्षक की स्थिति भारत को अपने रणनीतिक उद्देश्यों को सुरक्षित करने में किस प्रकार सहायक होगी? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा।

मसौदा विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020

चर्चा में क्यों?

प्रस्तावित विधेयक के विरोध में कुछ राज्यों द्वारा अपनी चिंताएं व्यक्त की गयी हैं। इन राज्यों में, पश्चिम बंगाल, पंजाब, पुडुचेरी, केरल, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सम्मिलित हैं।

इन राज्यों ने मसौदा विधेयक को “सहकारी संघवाद की भावना” का उल्लंघन बताया है। चूंकि, बिजली संविधान के अंतर्गत समवर्ती सूची का विषय है, अतः इन्होने विधेयक पर राज्यों से परामर्श करने में विफलता का केंद्र पर आरोप लगाया है।

 विधेयक में विवादास्पद उपबंध

विधेयक में सब्सिडी को समाप्त किये जाने का प्रावधान किया गया है। किसानों सहित सभी उपभोक्ताओं को टैरिफ का भुगतान करना होगा। सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से उपभोक्ताओं के खाते में भेजा जायेगा।

इस उपबंध के संबंध में राज्यों की चिंताएं:

  • इसका अर्थ होगा कि उपभोक्ताओं के विद्युत् शुल्क के के रूप में एक बड़ी राशि का भुगतान करना होगा, जबकि सब्सिडी की प्राप्ति बाद में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से होगी।
  • इससे शुल्क भुगतान में देरी होगी तथा परिणामस्वरूप जुर्माना आरोपित किये जायेंगे तथा कनेक्शनों में कटौती होगी।

इस मसौदे में राज्यों को शुल्क निर्धारित करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है, तथा इसका दायित्व केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकरण को सौपा गया है। यह भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसके द्वारा केंद्र सरकार मनमाने ढंग से टैरिफ को बढ़ा सकती है।

मसौदे के एक अन्य प्रावधान के अंतर्गत राज्य की बिजली कंपनियों के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित अक्षय ऊर्जा का न्यूनतम प्रतिशत क्रय करना अनिवार्य किया गया है।

  • यह प्रावधान कम-नकद पूंजी वाली पॉवर फर्मों के लिए हानिकारक होगा।

अतिरिक्त जानकारी

वर्तमान में, विद्युत अधिनियम, 2003 द्वारा बिजली के उत्पादन, वितरण, प्रसारण, व्यापार और उपयोग के संबंध में कानूनों को विनियमित किया जाता है।

देश में कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस अधिनियम के कुछ प्रावधान पुराने तथा प्रचलन से बाहर हो चुके हैं, तथा इनको अपडेट करने की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार ने देश के विद्युत क्षेत्र में बड़े सुधार करने के उद्देश्य से ‘विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020’ को पेश किया गया था।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

नीति संशोधन

नवीकरणीय ऊर्जा: यह केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के परामर्श से “अक्षय स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए” एक राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा नीति तैयार करने और अधिसूचित करने की शक्ति प्रदान करता है।

सीमा पार व्यापार: केंद्र सरकार को विद्युत् के सीमा पार व्यापार की अनुमति देने तथा सुविधा देने हेतु नियमों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (Electricity Contract Enforcement Authority) का गठन: मसौदे में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ‘केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

इस प्राधिकरण के पास विद्युत उत्पादन और वितरण से जुड़ी हुई कंपनियों के बीच बिजली की खरीद, बिक्री या हस्तांतरण से संबंधित अनुबंधों की लागू करने के लिये दीवानी अदालत के बराबर अधिकार होंगे।

कार्यात्मक संशोधन

भुगतान सुरक्षा: मसौदे में ऐसे तंत्र का प्रस्तावित किया गया है जिसमे “संबधित पार्टियों दवारा पर्याप्त भुगतान सुरक्षा पर सहमत हुए बगैर किसी पार्टी को विद्युत् की आपूर्ति नहीं की जायेगी”।

आयोगों / प्राधिकारियों के लिए सदस्यों की सिफारिश करने के लिए चयन समिति का गठन: केंद्र सरकार ने विद्युत अधिनियम के तहत विभिन्न प्राधिकरणों, जैसे विद्युत के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, राज्य विद्युत नियामक आयोग आदि में नियुक्तियां करने के लिए एक आम चयन समिति का प्रस्ताव किया है।

चयन समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। ऊर्जा मंत्रालय के सचिव, दो राज्य सरकारों के मुख्य सचिव (रोटेशन द्वारा चयनित) चयन समिति के सदस्य होंगे।

अनुदान की अनिवार्यता: सब्सिडी का लाभ उपभोक्ता को सीधे उनके खाते में भेजा जाएगा तथा विद्युत् वितरण करने वाली कंपनियां आयोग द्वारा निर्धारित टैरिफ के अनुसार उपभोक्ताओं से शुल्क वसूल करेंगी। इसके अलावा, टैरिफ नीतियों, सरचार्ज और क्रॉस सब्सिडी को उत्तरोत्तर कम किया जाएगा।

फ्रेंचाइजी और उप- वितरण लाइसेंस: केंद्र सरकार ने इस मसौदे में राज्यों में विद्युत वितरण कंपनियों को किसी क्षेत्र विशेष में विद्युत् वितरण के लिये फ्रेंचाइजी और उप- वितरण कंपनियों को जोड़ने का अधिकार देने का प्रस्ताव किया है।

अपीलीय न्यायाधिकरण की शक्तियों का संवर्द्धन:  इस मसौदे में अध्यक्ष के अतिरिक्त अपीलीय न्यायाधिकरण की क्षमता को 7 सदस्यों तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। जिससे मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु कई पीठों की स्थापना की जा सके, साथ ही न्यायाधिकरण के फैसलों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये इसे और अधिक सशक्त बनाने का प्रस्ताव भी  किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रस्तावित विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ECEA)की संरचना
  2. ECEA के प्रमुख कार्य
  3. DISCOMS किस प्रकार कार्य करती हैं?
  4. नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर क्या है?
  5. अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) की संरचना और कार्य
  6. मसौदे के प्रमुख प्रावधान

मेंस लिंक:

मसौदा विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020 की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 मालाबार ग्लाइडिंग मेंढक

(Malabar gliding frog)

चर्चा में क्यों?

मालाबार ग्लाइडिंग मेंढक को हाल ही में केरल राज्य के कोड़ेनचेरी (Kozhencherry) के पास पुल्लाद में देखा गया था।

प्रमुख बिंदु:

वैज्ञानिक नाम: राकोफोरस मैलाबेरिकस (Rhacophorus malabaricus)

विशेषताएं: इसका शरीर लगभग 10 सेंटीमीटर लंबा होता है, इसकी बारीक तराशी हुई त्वचा होती है, उसके त्वचा का रंग हल्का हरा होता है। इसके पेट और पैर 4 इंच लंबे होते हैं और वो हल्के पीले रंग के होते हैं।

इसके पैरों की उंगलियों के बीच एक नारंगी और लाल रंग का धागे के समान जाला होता है, जो कि उन्हें पेड़ों या दीवारों पर खींचने में मदद करती है।

दुर्लभ मालाबार ग्लाइडिंग मेंढक, जो केवल देश के पश्चिमी घाटों में पाया जाता है।

संकट: वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, विकासात्मक गतिविधियाँ, जहरीले रसायन।

IUCN संरक्षण की स्थिति: संकटमुक्त (Least Concern)

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कर्नाटक में बंदर पार्क

कर्नाटक सरकार शारावती बैकवाटर क्षेत्र में स्थित निर्जन द्वीपों पर बंदर पार्क स्थापित करने की योजना बना रही है।

आवश्यकता: हाल ही में, बंदरों द्वारा मलनाड क्षेत्र में कृषि और वृक्षारोपण फसलों पर हमला किया गया, इसके विरोध में किसानों द्वारा कई प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इस योजना पर विचार किया है।

इस संकट के समाधान के रूप में, राज्य सरकार ने पार्क की स्थापना के लिए वर्ष 2020-21 के बजट में 6.25 करोड़ की राशि आवंटित की गयी थी।

हिमाचल प्रदेश में, बंदर समस्या को हल करने के लिए अत्याधुनिक बंदर नसबंदी और पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है।

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जूनटीथ (Juneteenth) क्या है?

  • जूनटीथ (Juneteenth), जून (June) तथा उन्नीस (Nineteenth) से मिलकर बना एक मिश्रशब्द है।
  • 19 जून के देश में देश में दास प्रथा को खत्म करने खिलाफ आजादी मनाई जाती है। इस हॉलीडे को जूनटीथ (Juneteenth) नाम दिया गया है। अमेरिका में इस इस दिन पर संघीय अवकाश घोषित नहीं है,परन्तु इसे 45 से अधिक अमेरिकी राज्यों में राज्य अवकाश के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • इसे मुक्ति दिवस या जयंती स्वतंत्रता दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
  • 19 जून, 1865 को, मेजर जनरल गॉर्डन ग्रेंजर, टेक्सास के गैल्वेस्टोन पहुंचे और गृह युद्ध और दासता दोनों की समाप्ति की घोषणा की।
  • तब से, जुनेहिथ अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रतीकात्मक दिन बन गया है।

आरोग्य पथ (AarogyaPath)

यह CSIR का नेशनल हेल्थकेयर सप्लाई चेन पोर्टल है जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक समय पर उपलब्धता प्रदान करना है।

इसे हाल ही में, कोविद -19 महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों को सेवा प्रदान करने हेतु लॉन्च किया गया था।

कैप्टन अर्जुन

केंद्रीय रेलवे के तहत रेलवे सुरक्षा बल, पुणे ने स्क्रीनिंग और निगरानी को तेज करने के लिए एक रोबोट ‘CAPTAIN ARJUN’ को लांच किया है।

यह रोबोट यात्रियों की ट्रेन में सवार होते समय जाँच करेगा तथा असामाजिक तत्वों पर नजर रखेगा।

यह मोशन सेंसर, एक PTZ कैमरा और एक डोम (Dome) कैमरा से लैस है। ये कैमरे संदिग्ध और असामाजिक गतिविधि को ट्रैक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं।

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पी के मोहंती पैनल

इस पैनल का गठन RBI द्वारा किया गया है।

उद्देश्य: निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व के दिशानिर्देशों की समीक्षा करना।

विचारणीय विषय

  • निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व पर मौजूदा विनियमन और दिशानिर्देशों की जांच करना।
  • बैंकों के नियंत्रण तथा स्वामित्व संकेंद्रण के समाधान हेतु उपयुक्त मानदंड सुझाना।
  • बैंकिंग लाइसेंस हेतु आवेदन करने के लिए व्यक्तियों की पात्रता मानदंड की समीक्षा करना।

अंतर्राष्ट्रीय रंगहीनता जागरूकता दिवस (International Albinism Awareness Day)

अंतर्राष्ट्रीय एल्बिनिज़्म (रंगहीनता) जागरूकता दिवस को प्रतिवर्ष हर साल 13 जून को मनाया जाता है।

इसका उद्देश्य एल्बिनिज़्म के बारे में लोगों में जागरूक करने और ऐल्बिनिज़म से पीड़ित लोगों के मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

अंतर्राष्ट्रीय एल्बिनिज़्म जागरूकता दिवस 2020 थीम: Made To Shine’.

रंगहीनता (Albinism)- यह मेलेनिन के उत्पादन में शामिल एंजाइम के अभाव या दोष की वजह से त्वचा, बाल और आँखों में रंजक या रंग के संपूर्ण या आंशिक अभाव द्वारा चिह्नित किया जाने वाला एक जन्मजात विकार है। अल्बिनिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर त्वचा कैंसर और गंभीर दृष्टि दोष की संभावना बढ़ जाती है।

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