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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 June

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. समायोजित सकल राजस्व (AGR) विवाद

2. विदेशी अधिकरण तथा घोषित विदेशी

3. अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)

 

सामान्य अध्ययन-III 

1. प्रकृति सूचकांक 2020

2. विदेशज़ प्रजातियों के आयात हेतु दिशानिर्देश

3. एशियाई शेरों की गणना

4. सीमा समायोजन कर

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारतीय गौर (Indian Gaur)

2. एंटी-वायरल वायरोब्लाक कपड़ा प्रौद्योगिकी

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

समायोजित सकल राजस्व (AGR) विवाद

संदर्भ: उच्चत्तम न्यायालय ने कहा है कि दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications -DoT) द्वारा शीर्ष न्यायालय के फैसले का दुरूपयोग करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings-PSU) से समायोजित सकल राजस्व (Adjusted Gross Revenue -AGR) हेतु 4 लाख करोड़ रूप की मांग करना पूर्णतयः अस्वीकार्य है।

न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों द्वारा 1.42 लाख करोड़ रुपये की समायोजित सकल राजस्व (AGR)  चुकाने हेतु सरकार के बीस वर्षीय फार्मूला की व्यवहार्यता पर भी सवाल उठाया है।

कोर्ट का अभिकथन

खंडपीठ ने कहा कि 2019 के फैसले को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से बकाया मांगने का आधार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि अक्टूबर 2019 का निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के संबंध में विचार नहीं करता है।

सरकार का पक्ष

सरकार ने न्यायायलय से शपथपत्र दायर करने की अनुमति मागी है, जिसमे वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के लिए समायोजित सकल राजस्व (AGR) में वृद्धि करने के कारणों को स्पष्ट करेगी।

पृष्ठभूमि:

पिछले वर्ष, उच्चत्तम न्यायालय ने दूरसंचार विभाग द्वारा निर्धारित समायोजित सकल राजस्व (AGR) गणना की परिभाषा पर अपना समर्थन दिया था।

शीर्ष न्यायालय के आदेशानुसार दूरसंचार कंपनियों को लगभग 1.47 करोड़ रुपये की बकाया AGR राशि को तत्काल चुकाना था।

समायोजित सकल राजस्व (AGR) क्या होता है?

समायोजित सकल राजस्व (AGR) दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा दूरसंचार ऑपरेटरों से लिया जाने वाले उपयोग तथा लाइसेंस शुल्क है। इसे आवंटित स्पेक्ट्रम के उपयोग शुल्क तथा लाइसेंस शुल्क में विभाजित किया जाता है, जोकि क्रमशः 3-5 प्रतिशत और 8 प्रतिशत के बीच होता है।

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AGR की गणना तथा संबंधित विवाद

दूरसंचार विभाग के अनुसार, AGR की गणना में दूरसंचार कंपनियों द्वारा अर्जित कुल राजस्व के आधार पर की जानी चाहिए – जिसमें गैर-दूरसंचार स्रोतों जैसे जमाराशियों पर ब्याज तथा परिसंपत्तियों की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय भी सम्मिलित होती है। दूसरी ओर, टेलीकॉम कंपनियाँ मात्र दूरसंचार सेवाओं से होने वाली आय वाली आय पर AGR की गणना पर जोर देती हैं।

दूरसंचार क्षेत्र के लिए चुनौतियां

दूरसंचार क्षेत्र की लाभप्रद स्थिति को देखते हुए, AGR विवाद ने बैंकिंग उद्योग में दहशत पैदा कर दी है। अकेले वोडाफोन आइडिया पर 2.2 लाख करोड़ रुपये का बकाया है, जिसका उपयोग उसने वर्षों से बुनियादी अवसंरचना का विस्तार करने तथा स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए किया है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के पास वोडाफोन आइडिया के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये की राशि का ऋण जोखिम  है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. समायोजित सकल राजस्व (AGR) क्या है? इसकी गणना कैसे की जाती है?
  2. इस विवाद पर उच्चत्तम नयायालय का क्या फैसला था?
  3. TRAI की संरचना?
  4. भारत में स्पेक्ट्रम का आवंटन कैसे किया जाता है?

मेंस लिंक:

वर्तमान में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। टेलीकॉम सेक्टर को बचाने के लिए भारत सरकार को क्या करना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

विदेशी अधिकरण तथा घोषित विदेशी

संदर्भ: ऊच्च्त्तम न्यायालय के आदेशानुसार, सिद्दीकी अली, असम की बराक घाटी में स्थित इकलौते हिरासत केंद्र (Detention Centre) से रिहा होने वाले अंतिम घोषित विदेशी (Declared Foreigner) बन गए हैं।

न्यायालय का निर्देश

इसी वर्ष अप्रैल माह में, कोरोनोवायरस महामारी के दौरान, उच्चत्तम न्यायालय ने दो अथवा दो वर्ष से अधिक समय से असम के हिरासत केद्रों में रह रहे ‘घोषित विदेशियों’ (Declared Foreigners-DFs) को रिहा करने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने इसके लिए व्यक्तिगत बांड राशि को 1 लाख रुपये से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया था।

13 अप्रैल से अब तक 339 ‘घोषित विदेशियों’ को हिरासत केंद्रों से मुक्त जा चुका है।

घोषित विदेशी (Declared Foreigners-DF) कौन है?

‘घोषित विदेशी’ वे व्यक्ति होते हैं, जिन्हें राज्य पुलिस की सीमा शाखा द्वारा अवैध अप्रवासी के रूप में चिन्हित किये जाने पर अपनी नागरिकता का प्रमाण देने में विफल होने पर असम सरकार के 100 ‘विदेशी अधिकरणों’ (Foreigners’ Tribunal- FT) में से किसी एक के द्वारा विदेशी के रूप घोषित किया जाता है।

इन उपायों की आवश्यकता

  • असम के विभिन्न हिरासत केंद्रों में कुल 802 घोषित विदेशियों को रखा गया हैं।
  • इनमे से कुछ व्यक्तियों को अपर्याप्त दस्तावेजों अथवा कानूनी सहायता तथा संसाधनों के अभाव के कारण विदेशी घोषित किया गया है। ये व्यक्ति अपनी भारतीय नागरिकता सिद्ध करने में विफल रहे।
  • इनमे से कुछ व्यक्ति अपने मामले को उच्च न्यायालयों में ले जाने में अक्षम है अथवा इनकी अपीलों को निरस्त कर दिया गया है।
  • वर्ष 2016 से इन घोषित विदेशियों में से 29 व्यक्तियों की विभिन्न बीमारियों के कारण मौत हो चुकी है।

मानव के रूप में, इन व्यक्तियों को जीवित रहने का बुनियादी अधिकार है तथा COVID-19 महामारी के दौरान, निकृष्ट हालात वाले हिरासत केन्द्रों में इनमे से किसी की मृत्यु नहीं होनी चाहिए।

विदेशी अधिकरण क्या है?

केंद्र सरकार द्वारा विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 3 के अंतर्गत विदेशी (अधिकरण) आदेश [Foreigners (Tribunals) Order], 1964 को जारी किया गया था।

संरचना: विदेशी अधिकरण के सदस्यों में, असम न्यायिक सेवा का सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी, न्यायिक अनुभव रखने वाला सिविल सेवक जो सचिव या अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे सेवानिवृत्त नहीं हुआ हो, कम से कम सात वर्ष के वकालत अनुभव सहित 35 वर्ष से कम आयु का अधिवक्ता को सम्मिलित किया जाता है।

विदेशी अधिकरणों की स्थापना कौन कर सकता है?

गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा विदेशियों (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन के पश्चात सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ज़िला मजिस्ट्रेटों को ट्रिब्यूनल स्थापित करने का अधिकार प्रदान किया गया।

इसके पूर्व, ट्रिब्यूनल स्थापित करने की शक्तियाँ केवल केंद्र के पास निहित थीं।

आमतौर पर इस अधिकरणों में दो प्रकार के मामलों को देखा जाता है: सीमा पुलिस द्वारा चिन्हित व्यक्ति तथा मतदाता सूची में “D” अथवा “संदिग्ध” के रूप में दर्ज व्यक्ति।

विदेशी अधिकरणों में अपील का अधिकार

संशोधित आदेश [विदेशी (अधिकरण) संशोधन आदेश 2019] सभी व्यक्तियों को अधिकरणों में अपील करने का अधिकार देता है। इसके पूर्व, किसी संदिग्ध के विरुद्ध केवल राज्य प्रशासन इन अधिकरणों में मामला दायर कर सकता था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवैध प्रवासी (अधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम बनाम विदेशी (अधिकरण) आदेश 1964।
  2. इस आदेश के अंतर्गत प्रमाण का दायित्व
  3. अधिकरण द्वारा हल किये जाने वाले विषय
  4. अधिकरण की संरचना।
  5. अधिकरण तथा न्यायालय में अंतर
  6. NPR vs NRC
  7. असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति।
  8. शरणार्थी बनाम अवैध प्रवासी।
  9. विदेशियों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार तथा अन्य संवैधानिक प्रावधान
  10. मानवाधिकार बनाम मौलिक अधिकार

मेंस लिंक:

देश में अवैध गैर-प्रवासियों से निपटने के लिए कानूनों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए। विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन क्यों किया गया?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)

संदर्भ: “क्या अमेरिकी सैन्य बलों में अफगानिस्तान में युद्ध अपराध किए है अथवा नहीं?”, इसकी जांच अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court -ICC) द्वारा की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया है, जिसके अंतर्गत उपरोक्त जांच में सम्मिलित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रतिबंधो को मंजूरी दी गयी है।

  • इस आदेश द्वारा सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट को जांच में सम्मिलित ICC कर्मचारियों की अमेरिका स्थित संपत्ति को ब्लॉक करने के लिए अधिकृत किया गया है।
  • इस आदेश में जांच में सम्मिलित व्यक्तियों के अमेरिका में प्रवेश को भी प्रतिबंधित किया गया है।

विवाद का विषय

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) अभियोजक फाट्यु बेंसौडा (Fatou Bensouda) वर्ष 2003 तथा 2014 के मध्य अफगानिस्तान में किए गए संभावित युद्ध अपराधों की जांच करना चाहती हैं, इसमें तालिबान द्वारा नागरिकों की कथित सामूहिक हत्याएं, अफगान अधिकारियों द्वारा कैदियों को दी गयी यातनाएं तथा कुछ हद तक अमेरिकी गुप्तचर संगठन सीआईए तथा अमेरिकी सैन्य बलों की जांच सम्मिलित है।

ICC ने अभियोजन पक्ष की प्रारंभिक जांच के पश्चात अफगानिस्तान में संभावित युद्ध अपराधों की जांच हेतु उचित आधार पाया तथा वर्ष 2017 में इन मामलों की जांच करने का निर्णय लिया। इन मामलों में की जांच अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के अधिकार क्षेत्र अंतर्गत आती है।

अमेरिकी विरोध का कारण

हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा युद्ध अपराधों, नरसंहार तथा मानवता के खिलाफ अपराधों के विरुद्ध सुनवाई करने पर ‘ट्रम्प’ द्वारा बार-बार हमले किये गए हैं। ट्रम्प का कहना है, ICC केवल उस स्थिति में सुनवाई कर सकता है, जब कोई सदस्य देश अपराधों के विरूद्ध कार्यवाही करने में असमर्थ हो अथवा कार्यवाही करने का अनिच्छुक हो।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका कभी भी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य नहीं रहा।

 ICC के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court -ICC) हेग, नीदरलैंड में स्थित है। यह नरसंहार, युद्ध अपराधों तथा मानवता के खिलाफ अपराधों के अभियोजन के लिए अंतिम न्यायालय है।

ICC पहला स्थायी, संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है, जिसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय समुदायों से संबधित गंभीर अपराधों को करने वाले अपराधियों पर मुकदमा चलाने तथा उन्हें सजा देने के लिए की गयी है।

ICC की स्थापना ‘रोम क़ानून’ (Rome Statute) के अंतर्गत की गयी, जो 1 जुलाई 2002 से प्रभावी हुई।

फंडिंग (Funding): न्यायालय का खर्च मुख्य रूप से सदस्य देशों द्वारा उठाया जाता है, परन्तु इसे सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, निजी व्यक्तियों, निगमों तथा अन्य संस्थाओं से स्वैच्छिक योगदान भी प्राप्त होता है।

संरचना और मतदान शक्ति

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के प्रबंधन, विधायी निकाय तथा सदस्य सभा में प्रत्येक सदस्य राज्य का एक प्रतिनिधि शामिल होता है।

  • प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के लिए “हर संभव प्रयास” किया जाता है। किसी विषय पर सर्वसम्मति नहीं होने पर वोटिंग द्वारा निर्णय किया जाता है।
  • ICC में एक अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्ष होते है, इनका चुनाव सदस्यों द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।

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आलोचना

  • यह संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार करने में सक्षम नहीं है इसके लिए ICC को सदस्य राज्यों पर निर्भर होना पड़ता है।
  • ICC के आलोचकों का तर्क है कि आईसीसी अभियोजक तथा न्यायाधीशों के अधिकार पर अपर्याप्त नियंत्रण और संतुलन हैं एवं अभियोगों के राजनीतिकरण होने के विरुद्ध अपर्याप्त प्रावधान है।
  • ICC पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता है और पश्चिमी साम्राज्यवाद का एक उपकरण होने के नाते, समृद्ध तथा शक्तिशाली देशों द्वारा किए गए अपराधों की अनदेखी करता है तथा छोटे और कमजोर देशों के नेताओं को दंडित करता है।
  • ICC कई मामलों को राज्य सहयोग के बिना सफलतापूर्वक नहीं हल कर सकता है, इससे कई समस्याएं उत्पन्न होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ICJ और ICC के मध्य अंतर
  2. इन संगठनों की भौगोलिक स्थिति
  3. यूएस और तालिबान के मध्य दोहा समझौता
  4. रोम क़ानून क्या है?
  5. अफगानिस्तान की अवस्थिति
  6. अमेरिकी तालिबान शांति समझौता

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 प्रकृति सूचकांक 2020

संदर्भ: हाल ही में, वर्ष 2020 के लिए प्रकृति सूचकांक रेटिंग जारी की गई है।

प्रकृति सूचकांक क्या है?

प्रकृति सूचकांक (Nature Index) स्वतंत्र रूप से चयनित 82 उच्च गुणवत्ता वाले विज्ञान पत्रिकाओं के समूह में प्रकाशित शोध लेखों से संबंधित जानकारी का एक डेटाबेस है। यह शोध लेखक की संबद्धताओं तथा संस्थागत संबंधों का विवरण प्रदान करता है।

  • इस डेटाबेस को नेचर रिसर्च द्वारा संकलित किया गया है।
  • यह सूचकांक उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान परिणाम तथा संस्थागत, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग संबधो के बारे में बताता है।
  • यह प्राकृतिक और भौतिक विज्ञान में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के संकेतक के रूप में कार्य करता है।

प्रकृति सूचकांक मैट्रिक्स

  • यह सूचकांक अनुसंधान परिणाम तथा सहकार्यता के बारे में कई मैट्रिक्स प्रदान करता है।
  • इनमें शोध गणना, भिन्नात्मक गणना तथा बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय सह्कार्यता स्कोर सम्मिलित होता है।

भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तीन स्वायत्तशासी संस्थानों शीर्ष 30 भारतीय संस्थानों के बीच अपनी जगह बनाई है।
  • इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS), कोलकाता 7वें स्थान पर, जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साईटिफिक रिसर्च (JNCASR), बंगलुरु 14वें स्थान पर एवं एस एन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, कोलकाता 30वें स्थान पर हैं।
  • वैश्विक रूप से शीर्ष आंके गए भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) 160वें स्थान पर है तथा भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बंगलुरु 184वें स्थान पर है।

वैश्विक संस्थाएँ

इस सूचकांक में शीर्ष पांच स्थान संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और जापान को प्राप्त हुए हैं।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण संबंधी विषय।

विदेशज़ प्रजातियों के आयात हेतु दिशानिर्देश

संदर्भ: हाल ही में केंद्र सरकार ने विदेशज़ जानवरों के आयात को विनियमित करने के संबंध में एक एडवाइज़री जारी की है।

वर्तमान में COVID-19 महामारी ने ‘वन्यजीवों के अवैध व्यापार तथा ज़ूनोटिक रोगों के प्रसार’ संबंधित वैश्विक चिंताओं को उजागर किया है। इसी संदर्भ में भारत सरकार द्वारा यह कदम उठाया गया है।

‘विदेशज़ जीवित प्रजातियाँ’ क्या हैं?

विदेशज जीवित प्रजातियां (Exotic live species), वे जीव तथा पौधे होते हैं, जिनको, अधिकांशतः मनुष्यों द्वारा इनके मूल स्थान से अन्यत्र स्थानों पर ले जाया जाता है।

भारत में भारी मांग वाले विदेशज जीवों में बॉल पाइथन (Ball python), स्कारलेट मैकॉ (Scarlet Macaw), समुद्री कछुए, सुग ग्लाइडर (Petaurus breviceps), अफ्रीकन बंदर (marmoset) और भूरे अफ्रीकी तोते, आदि सम्मिलित हैं।

विदेशज़ प्रजातियों की सूची

एडवाइजरी के अनुसार, ‘विदेशज जीवित प्रजातियां’ (Exotic live species) के अंतर्गत ‘वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora- CITES) की परिशिष्ट I, II तथा III में अधिसूचित लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में शामिल किया गया है, परन्तु ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972‘ (Wild Life (Protection) Act, 1972) के तहत अधिसूचित प्रजातियों को शामिल नहीं किया गया है।

विनियमन की आवश्यकता

भारत में विदेशज जानवरों के आयात को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत नियमित किया गया है, परन्तु वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा लंबे समय से भारत में विदेशज जानवरों के संबंध में कड़े कानूनों तथा दिशानिर्देशों की मांग की जा रही है।

  • भारत में कई नागरिक ‘वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के अंतर्गत अधिसूचित विदेशज जानवरों को पालतू के रूप में रखते हैं।
  • राज्य अथवा केंद्रीय स्तर पर ऐसी प्रजातियों से संबंधित कोई एकीकृत सूचना प्रणाली उपलब्ध नहीं है।
  • इसके अलावा, अक्सर इन दस्तावेजों की लंबी प्रक्रिया तथा जांच से बचने के लिए इस प्रजातियों को देश में अवैध रूप से तस्करी की जाती है।

नए दिशानिर्देश

  1. पर्यावरण मंत्रालय आगामी छह महीनों में स्वैच्छिक प्रकटीकरण के माध्यम से ऐसी प्रजातियों को पालने वालों से जानकारी एकत्र करेगा।
  2. इन प्रजातियों के स्टॉक, इनकी संतति तथा इनके आयात एवं विनिमय हेतु पंजीकरण किया जायेगा।
  3. 6 महीने की अवधि के भीतर मालिकों द्वारा विदेशज प्रजातियों के प्रकटीकरण किए जाने पर किसी दस्तावेज की आवश्यक नहीं होगी।
  4. 6 महीने की अवधि के इस संबंध में किये गए किसी भी प्रकटीकरण पर घोषणाकर्ता को मौजूदा कानूनों और विनियमों के तहत आवश्यक कार्यवाहियों का पालन करना आवश्यक होगा।
  5. किसी भी विदेशज़ जानवर का आयात करने से पूर्व व्यक्ति को DGFT से लाइसेंस प्राप्ति के लिये एक आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
  6. आयातक को आवेदन के साथ संबंधित राज्य के ‘मुख्य वन्यजीव वार्डन’ को ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) भी संलग्न करना होगा।

निहितार्थ तथा महत्व

  • यह दिशा-निर्देश विदेशज प्रजातियों के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगे तथा इन प्रजातियों के मालिकों को उचित पशु चिकित्सा देखभाल, आवास और प्रजातियों की भलाई के अन्य पहलुओं के बारे में मार्गदर्शन करेगे।
  • नयी एडवाइज़री इन जानवरों के व्यापार का उचित विनियमन करने में मदद करेगी।
  • विदेशज जानवरों के डेटाबेस से ज़ूनोटिक रोगों के नियंत्रण और प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

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चुनौतियाँ

अनेक वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है एडवाइज़री में सभी संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

  • इसमें आक्रामक प्रजातियों (Invasive Species) के माध्यम से ज़ूनोटिक रोगों के प्रसार पर ध्यान नहीं दिया गया था।
  • नयी एडवाइजरी के दायरे को केवल उन प्रजातियों में शामिल किया गया है जो CITES के अंतर्गत आती हैं, यह एडवाइजरी के दायरे को सीमित करती हैं।
  • भारत में विदेशज़ प्रजातियों के घरेलू व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है। व्यापार की जाने वाली अनेक प्रजातियों यथा ‘शुगर ग्लाइडर्स’ (Sugar Gliders) मकई सर्प (Corn Snakes) को CITES के तहत सूचीबद्ध नहीं है।
  • वन्यजीवों की ‘कैप्टिव ब्रीडिंग’ (Captive Breeding) के संबंध में रखरखाव मानकों का एडवाइज़री में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

cites

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विदेशज प्रजातियां क्या हैं- एडवाइजरी में दी गयी परिभाषा?
  2. CITES क्या है?
  3. CITES के तहत प्रजातियों का वर्गीकरण?
  4. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम क्या है?
  5. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, नई विदेशी प्रजातियों का आयात करते समय क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
  6. राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन

मेंस लिंक:

देश में विदेशज प्रजातियों के आयात के लिए हाल ही में जारी किये गए दिशा-निर्देशों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण संबंधी विषय।

एशियाई शेरों की गणना

संदर्भ: हाल ही में, गुजरात सरकार द्वारा एशियाई शेरों की गणना की गयी तथा उसका विवरण जारी किया गया है।

शेरों की गणना

भारत में प्रति पांच वर्षो में शेरों की गणना की जाती है। इस वर्ष लॉकडाउन के कारण गणना में देरी हुई।

पहली शेर गणना वर्ष 1936 में जूनागढ़ के नवाब द्वारा कराई गई थी; वर्ष 1965 से, वन विभाग नियमित रूप से प्रति पांच वर्ष में शेरों की गणना कर रहा है।

प्रमुख आंकड़े

  • देश में शेरों की आबादी में 28% की वृद्धि हुई है।
  • गिर क्षेत्र में बाघों की कुल अनुमानित 674 है। वर्ष 2015 में इनकी संख्या 523 थी।
  • भौगोलिक रूप से, वितरण क्षेत्र या फैलाव 36 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वर्तमान में एशियाई शेरों का प्रवास क्षेत्रफल वर्ष 2015 के 22,000 वर्ग किमी. से बढ़कर 30,000 वर्ग किमी. हो गया है।
  • एशियाई शेर सौराष्ट्र के संरक्षित क्षेत्रों और कृषि-चारागाह क्षेत्रों में पाए जाते है, तथा नौ जिलों में विस्तृत है।

आबादी में लगातार वृद्धि के प्रमुख कारक

पिछले कई वर्षों से, गुजरात में शेरों की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

  1. सामुदायिक भागीदारी
  2. प्रौद्योगिकी पर जोर
  3. वन्यजीव स्वास्थ्य सेवा
  4. उचित आवास प्रबंधन
  5. मानव-शेर संघर्ष को कम करने हेतु उठाये गए कदम

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इस वर्ष जनगणना कैसे की गई? यह पिछली जनगणना से किस प्रकार भिन्न है?

कम भागीदारी: प्रति वर्ष, राज्य वन विभाग गैर सरकारी संगठनों, विशेषज्ञों और वन्यजीव उत्साही लोगों को पारदर्शिता तथा जनशक्ति की आवश्यकता हेतु जनगणना में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है। परन्तु इस बार, जंगल के अंदर अधिक लोगों को भेजने की सलाह नहीं दी गई, क्योंकि न्यूयॉर्क में ब्रोंक्स चिड़ियाघर में एक मनुष्य द्वारा शेर में कोरोनवायरस के संक्रमण का मामला दर्ज किया गया था।

अतः, इस वर्ष एशियाई शेरों की संख्या का अनुमान, जनगणना से नहीं, बल्कि ‘पूनम अवलोकन’ (Poonam Avlokan) नामक एक निगरानी प्रक्रिया के माध्यम से लगाया गया था।

इसे किस प्रकार संपन्न किया गया?

  • पूनम अवलोकन, प्रत्येक माह में पूर्णिमा (Full Moon) की तिथि को आयोजित किया जाने वाला एक कार्यक्रम है।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2014 में वन विभाग की गई थी।
  • इसके अंतर्गत वन विभाग के अधिकारी तथा क्षेत्रीय कर्मचारी 24 घंटे के दौरान अपने कार्यक्षेत्र में शेरों की संख्या और उनकी अवस्थिति के आँकड़े दर्ज़ करते हैं।
  • पिछली जनगणना के विपरीत, जिसमें लगभग 2000 प्रतिभागी सम्मिलित थे, इस जनगणना में लगभग 1400 कर्मचारी और कुछ विशेषज्ञों को सम्मिलित किया गया था।

ब्लॉक काउंटिंग (Block counting) विधि क्या है?

भारत में जानवरों की गणना करने हेतु इस पद्धति का उपयोग किया जाता है।

इस पद्धति में, जनगणना प्रगणक किसी दिए गए ब्लॉक में जल स्थलों पर तैनात किये जाते हैं तथा उस क्षेत्र में उपस्थित शेरों की संख्या का अनुमान लगते है। गर्मियों के दौरान, शेर 24 घंटों में कम से कम एक बार पानी पीने इन स्थलों पर आते है, इसी आधार पर इनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है।

इस पद्धति में कई सीमाएं अंतर्निहित हैं। इसलिए, कैमरा ट्रैपिंग तथा शरीर पर स्थायी चिन्हों के आधार पर शेरों की पहचान, जानवरों के शिकार पैटर्न, आदि नए तरीकों को अपनाया की आवश्यकता है।

अनुमानों पर चिंता

कुछ विशेषज्ञ शेरों की अनुमानित संख्या के बारे में आश्वस्त नहीं हैं। इनका कहना है कि यह संख्या भ्रामक हो सकती है। इसके निम्नलिखित कारण है:

  1. 2015 की जनगणना के ठीक एक महीने पश्चात् अमरेली में एक तीव्र बाढ़ में 12 शेर मारे गए।
  2. वर्ष 2018 में कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (CDV) और बेबियोसिस (babesiosis) के प्रकोप में दो दर्जन से अधिक शेर मारे गए ।
  3. इस साल गर्मियों में एक बेबियोसिस के प्रकोप की भी सूचना थी और लगभग दो दर्जन शेरों के मारे जाने की सूचना है।

शेरों को दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता क्यों है?

वर्तमान में एशियाई शेर केवल गुजरात तक ही सीमित हैं। कोई एक महामारी इस पूरी आबादी को मिटा सकती है तथा इससे यह प्रजाति विलुप्त हो सकती हैं। अतः, अन्य राज्यों में नए क्षेत्रों में इस प्रजाति का प्रसार अच्छा विचार हो सकता है।

अतिरिक्त जानकारी

एशियाई शेर संरक्षण परियोजना: केंद्र और गुजरात राज्य सरकार द्वारा इस साल फरवरी में घोषित की गई। इस संरक्षण परियोजना के प्रमुख पहलुओं में “निवास सुधार” उपायों को शामिल करना, पानी के अधिक स्रोतों को उपलब्ध कराना, एक वन्यजीव अपराध प्रकोष्ठ बनाना और ग्रेटर गिर क्षेत्र के लिए एक टास्क फोर्स का गठन सम्मिलित है।

शेरों का पुनर्वास: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञ समिति के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य को प्रजातियो के प्रजनन तथा पालन हेतु सबसे उपयुक्त माना गया था, लेकिन प्रस्ताव पर कोई प्रगति नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अप्रैल 2013 में SC ने गुजरात से मध्य प्रदेश में कुछ शेरों के स्थानांतरण का आदेश दिया था।

एशियाई शेरों के बारे में: IUCN रेड लिस्ट के तहत ‘संकटग्रस्त‘ (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध।

इनकी आबादी भारत में गुजरात राज्य तक ही सीमित है।

वन्यजीवो से संबंधित संवैधानिक प्रावधान: वर्ष 1976 में किये गए 42 वें संशोधन में निर्देशक सिद्धांतों में वन्यजीवों और वनों की सुरक्षा संबंधी प्रावधान सम्मिलित किये गए। इसमें संविधान की सातवीं अनुसूची (अनुच्छेद 246) के अंतर्गत वनों और जंगली जानवरों के संरक्षण को समवर्ती सूची में शामिल किया गया ।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एशियाई शेर बनाम अफ्रीकी शेर- संरक्षण स्थिति तथा वितरण
  2. पहली शेर गणना कब आयोजित की गई थी?
  3. पूनम अवलोकन क्या है?
  4. शेरों के पुनर्वास पर SC का फैसला क्या था?
  5. एशियाई शेर संरक्षण परियोजना क्या है?
  6. भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत वन्यजीव।
  7. सीडीवी (CDV) क्या है?
  8. बेबियोसिस क्या है?
  9. वन के बारे में।

मेंस लिंक:

एशियाई शेर संरक्षण परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय:  सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

सीमा समायोजन कर

संदर्भ: नीति आयोग के एक सदस्य द्वारा घरेलू उद्योगों को एक समान व्यापार स्तर प्रदान करने के लिये आयात पर ‘सीमा समायोजन कर’ (Border Adjustment Tax- BAT) लगाने का समर्थन किया गया है।

यह सुझाव संयुक्त राज्य अमेरिका-चीन के मध्य चल रहे व्यापार तनाव को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, इस व्यापार तनाव की COVID-19 महामारी के बाद भी जारी रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

सीमा समायोजन कर (BAT) क्या है?

BAT एक ऐसा कर है जो बाहर से आयातित सामान पर बंदरगाह पर लेवी शुल्क के अलावा लगाया जाता है।

सीमा समायोजन कर, एक राजकोषीय उपाय है जिसे ‘कर गंतव्य सिद्धांत’ (Destination Principle of Taxation) के अनुसार वस्तुओं या सेवाओं पर लगाया जाता है।

सामान्यत: BAT अपने क्षेत्राधिकार के भीतर उत्पादों या सेवाओं की आपूर्ति करने वाली विदेशी और घरेलू कंपनियों के लिये ‘प्रतिस्पर्धा की समान स्थिति’ को प्रोत्साहन देता है।

आवश्यकता

भारतीय उद्योगों द्वारा हमेशा घरेलू सामानों पर बिजली शुल्क, मंडी कर, स्वच्छ ऊर्जा उपकर और रॉयल्टी जैसे विभिन्न करों के बारे में शिकायतें की जाती रही हैं जो घरेलू रूप से उत्पादित वस्तुओं पर वसूल किये जाते हैं क्योंकि ये कर उत्पाद में अंतर्निहित होते हैं।

परन्तु, कई प्रकार के आयातित सामान अपने संबंधित देश में इस तरह की लेवी के साथ लोड नहीं किये जाते हैं जिससे भारतीय बाजार में ऐसे उत्पादों को मूल्य लाभ मिलता है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रीलिम्स के लिए तथ्य:


 भारतीय गौर (Indian Gaur)

संदर्भ: फरवरी में नीलगिरी वन प्रभाग में किए गए भारतीय गौर के पहले जनसंख्या आकलन अभ्यास से पता चला है कि लगभग 2,000 से अधिक भारतीय गौर 300 वर्ग किलोमीटर की सीमा में वास करते हैं।

संकट: नीलगिरी वन प्रभाग में हर साल औसतन 60 गौर की मौत हो जाती हैं, इनमें से कई मानव आवास के करीब होने वाली दुर्घटनाओं की शिकार हो जाते हैं।

भारतीय गौर के बारे में

  • गौर, (Bos gaurus), जिसे भारतीय बाइसन भी कहा जाता है, सबसे बड़ी विलुप्त बोवाइनों में से एक है।
  • मूल रूप से यह दक्षिण एशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया मे पाया जाने वाला गोजातीय पशु है।
  • भारतीय गौर, 1986 से IUCN रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध है।

 वितरण: भारत में, 1990 के दशक के मध्य में जनसंख्या 12,000-22,000 थी। दक्षिणी भारत में पश्चिमी घाट और उनकी संलग्न पहाड़ियाँ, विशेष रूप से वायनाड – नागरहोल – मुदुमलाई – बांदीपुर परिसर, गौर का प्रमुख निवास स्थल हैं।

Bandipur complex

एंटी-वायरल वायरोब्लाक कपड़ा प्रौद्योगिकी (Anti-viral Viroblock textile technology)

संदर्भ:  प्रमुख वस्त्र निर्माणक कंपनी अरविंद लिमिटेड ने अपने कपड़े और परिधान उत्पादों के लिए एक एंटी-वायरल कपड़ा प्रौद्योगिकी शुरू करने की घोषणा की है।

महत्व: अनुसंधानों से पता चलता है कि कपड़ों पर वायरस और बैक्टीरिया 2 दिन तक एक्टिव रह सकते हैं। अरविंद लिमिटेड का दावा है कि HeiQ Viroblock प्रक्रिया से प्रोसेस्ड कपड़े वायरस को रोकते हैं और कॉन्टैक्ट में आने पर उसे खत्म कर देते हैं। इससे कपड़ों के जरिए वायरस फैलने की संभावना कम हो जाती है।

HeiQ Viroblock क्या है?

HeiQ Viroblock NPJ03, एक कुशल स्विस टेक्सटाइल तकनीक है जिसे कपड़ा निर्माण प्रक्रिया के अंतिम चरण में कपड़े में मिलाया जाता है। यह उन्नत चांदी और वेसिकल प्रौद्योगिकी का एक विशेष संयोजन है।

  • यह COVID-19 वायरस के स्रोत SARS-CoV-2 के विरूद्ध प्रभावी साबित हुआ है
  • HeiQ Viroblock केवल 30 मिनट में वायरस का 99% खात्मा कर देती है।
  • यह मेडिकल फेस मास्क से लेकर सभी प्रकार के फाइबर के लिए उपयुक्त है।