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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 June

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. वित्त आयोग अनुदान तथा अन्य अंतरण

2. अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (IRF) रिपोर्ट

3. सिक्किम-तिब्बत समझौता 1890

 

सामान्य अध्ययन-III

 1. राइट्स इश्यू (Rights Issue)

2. रिज़र्व बैंक द्वारा ऋण एक्सपोज़र की बिक्री हेतु रूपरेखा मसौदा

3. जीन संवर्द्धित (GM) बीज: विवाद तथा बुवाई आंदोलन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. समाचारों मे चर्चित छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण स्थल

2. विश्व प्रत्यायन दिवस (World Accreditation Day-WAD)

3. दौलत बेग ओल्डी (Daulat Beg Oldie-DBO) 

4. ऑपरेशन डेजर्ट चेज़ (Operation Desert Chase)

5. अथिरापिल्ली जल विद्युत परियोजना

6. अपशिष्ट जल निष्कर्षण के आधार पर रेलवे स्टेशनों का वर्गीकरण

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

वित्त आयोग अनुदान तथा अन्य अंतरण

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: वित्त आयोग- गठन, सिफारिशें, अनुदान तथा अनुदान हेतु आधार।

संदर्भ: वित्त मंत्रालय ने कोविद -19 महामारी के दौरान अपने संसाधनों में वृद्धि करने हेतु 14 राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) के रूप में 6,195 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।

सरकार द्वारा, 11 मई 2020 को 14 राज्यों के लिए जारी की गयी दूसरी किस्त 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है। इस राशि से राज्यों को कोरोना महामारी के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।

राज्यों के हिस्से का निर्धारण करते समय 15 वें वित्त आयोग द्वारा उपयोग किये गए मानदंड:

I5 वें वित्त आयोग ने केंद्र और राज्य के मध्य राजस्व बँटवारे हेतु छह प्रमुख मानदंडो का उपयोग किया है, तथा इसमें प्रत्येक को अलग-अलग भारांक दिए गए हैं। यह मानदंड निम्नलिखित है:

  1. आय विस्थापन अथवा आय दूरी को 45%,
  2. वर्ष 2011 की जनसंख्या को 15%,
  3. क्षेत्रफल को 15%,
  4. वन तथा पारिस्थितिकी को 10%,
  5. जनसांख्यिकीय प्रदर्शन को 5%, और
  6. कर प्रयासों के लिए 2.5%।

वित्त आयोग ने, वित्त वर्ष 2020-21 के लिए, राज्यों को कुल 8,55,176 करोड़ रुपये के हस्तांतरण की सिफारिश की है, जो कि विभाजन योग्य राजस्व का 41 प्रतिशत है। यह 14 वें वित्त आयोग द्वारा की गयी सिफारिशों से 1% कम है।

15वें वित्त आयोग द्वारा सिफारिश किये गए अन्य अनुदान

वित्त आयोग के विचारार्थ विषयों के अंतर्गत राज्यों को अंतरित की जाने वाली ‘अनुदान सहायता’ (Grants-In-Aid) के संदर्भ में सिफारिशें देना सम्मिलित होता है।

इनमें निम्नलिखित सहायता अनुदानों को सम्मिलित किया जाता है:

(i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) स्थानीय निकायों को अनुदान, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान।

वित्त आयोग क्या है?

वित्त आयोग, संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है। केंद्र-राज्य के परस्पर वित्तीय संबंधों पर सुझाव देने के उद्देश्य से भारत के राष्ट्रपति द्वारा इसका गठन किया जाता है।

इसका मुख्य दायित्व संघ व राज्यों की वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन करना, उनके बीच करों के बटवारे की संस्तुति करना तथा राज्यों के बीच इन करों के वितरण हेतु सिद्धांतो का निर्धारण करना है।

वित्त आयोग के कर्तव्य तथा दायित्व

वित्त आयोग का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति को निम्नलिखित विषयों के संदर्भ में अपने सुझाव दे:

  1. संघ एवं राज्यों के मध्य करों की शुद्ध प्राप्तियों को कैसे वितरित किया जाए एवं राज्यों के बीच ऐसे आगमों का आवंटन कैसे किया जाए;
  2. भारत की संचित निधि में से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासित करने वाले सिद्धांतों के बारे में;
  3. राज्य के वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए किसी राज्य की संचित निधि के संवर्धन के लिए आवश्यक अध्युपायों के बारे में;
  4. सुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को निर्दिष्ट किए गए किसी अन्य विषय के बारे में, राष्ट्रपति को सिफारिश करे ।

वित्त आयोग का गठन

वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम,1951 तथा वित्त आयोग (वेतन एवं भत्ते) नियम, 1951 में निहित प्रावधानों के अनुसार, इसका अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जो सार्वजनिक तथा लोक मामलों का जानकार हो। तथा, अन्य चार सदस्यों के लिए उन व्यक्तियों में से चुना जाता है, जो

  • उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की अर्हता प्राप्त हो;
  • सरकार के वित्त तथा खातों का विशेष ज्ञान रखते हो;
  • उन्हें प्रशासन व वित्तीय मामलों में व्यापक अनुभव हो;
  • अर्थशास्त्र का विशिष्ट ज्ञान रखते हो।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वित्त आयोग – संरचना।
  2. वित्त आयोग के कार्य।
  3. वित्त आयोग का गठन तथा सदस्यों की नियुक्ति।
  4. वित्त आयोग अनुदान के प्रकार।
  5. 15 वें वित्त आयोग द्वारा उपयोग की गयी विधि।

मेंस लिंक:

भारत के संविधान में उल्लिखित वित्त आयोग की संरचना तथा कार्यों का विवरण दीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (IRF) रिपोर्ट

क्या अध्ययन करें?

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: USCIRF के बारे में, मुख्य टिप्पणियों, भारत पर प्रभाव तथा भारत की प्रतिक्रिया।

संदर्भ: हाल ही में, अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (United States Commission on International Religious Freedom-USCIRF) रिपोर्ट जारी की है।

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट क्या है?

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (United States Commission on International Religious Freedom-USCIRF) द्वारा अमेरिकी कांग्रेस में पेश की जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट के रूप में भी जाना जाता है।

इस रिपोर्ट में, धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति, धार्मिक विश्वास तथा समुदायों की प्रथाओं का उल्लंघन करने वाले सरकारी नीतियों, धार्मिक संप्रदायों तथा धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाली अमेरिकी नीतियों का विवरण दिया जाता है।

इस रिपोर्ट में विश्व में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का सर्वेक्षण भी सम्मिलित होता है। 

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का अवलोकन

  • रिपोर्ट में, ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (Citizenship Amendment Act), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तथा जम्मू और कश्मीर की स्थितियों से संबंधित मुद्दों को केंद्र में रखा गया है।
  • इसमें, मॉब लिंचिंग तथा धर्मांतरण विरोधी कानूनों एवं संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गयी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न, मॉब लिंचिंग तथा सांप्रदायिक हिंसा संबंधित मामलों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नकारा अथवा अनदेखा किया गया।
  • इस रिपोर्ट में ‘गाय सतर्कता’ (Cow Vigilantism) तथा अन्य प्रकार की सामूहिक हिंसा की घटनाओं का विवरण दिया गया है।
  • रिपोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाबरी मस्जिद फैसले वर्ष 2018 में सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली कुछ महिलाओं के लिए प्रतिबंधो के हटने के पश्चात् भी होने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दिया गया है।

प्रभाव तथा निहितार्थ

रिपोर्ट में विभिन्न मुद्दों पर भारत तथा अमेरिकी संबंधो को रेखांकित किया गया है।

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अप्रैल माह में, सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट से भारत को ‘कंट्रीज़ ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ (प्रमुख चिंता वाले देशों) (Countries of Particular Concern-CPC) की श्रेणी में सूचीबद्ध करने की सिफारिश की थी। ‘सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट’ USCIRF की सिफारिश को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि ट्रम्प प्रशासन, “धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा भारतीय सरकारी एजेंसियों की परिसंपत्तियों को फ्रीज करे तथा विशिष्ट धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों का हवाला देकर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए।”

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार के अनुसार, USCIRF की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है तथा भारत के खिलाफ टिप्पणी करना कोई नई बात नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को खंडित करते हुए भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी संस्था द्वारा दखलंदाज़ी को लेकर सवाल उठाया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. USCIRF क्या है?
  2. प्रमुख चिंता वाले देश (Countries of Particular Concern-CPC) क्या है?
  3. नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (Citizenship Amendment Act) क्या है?
  4. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) क्या है?
  5. भारत के किस राज्य में NRC लागू है?

 मेंस लिंक:

राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में भारतीय राजनीति कितनी सफल रही है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 सिक्किम-तिब्बत समझौता, 1890

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: भारत तथा चीन के मध्य सीमा विवाद, संबंधित समझौते तथा आगे की राह।

संदर्भ: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के एक क्षेत्र में पिछले महीने के दौरान सिक्किम के ‘नाकु ला’ (Naku La) में भारतीय तथा चीनी सैनिकों के मध्य हुई झड़पों तथा जारी गतिरोध ने 1890 में हुए ऐतिहासिक सिक्किम-तिब्बत समझौते को केंद्र में ला दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है, इस समझौते के अनुसार, नाकू ला भारत का हिस्सा है। इसके अलावा, 1975 में सिक्किम के भारत में विलय से पहले, चीन ने भी आधिकारिक रूप से इस सीमांकन को स्वीकार किया गया था।

सिक्किम-तिब्बत समझौता, 1890 क्या है?

इस समझौते को ब्रिटेन तथा चीनी साम्राजय द्वारा औपचारिक रूप दिया गया था।

वर्ष 1890 में हुए कलकत्ता सम्मलेन में इस संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे। इस संधि के आठ अनुच्छेदों में से, अनुच्छेद 1 अत्याधिक महत्वपूर्ण है।

अनुच्छेद (1) के अनुसार, यह सहमति हुई थी कि सिक्किम तथा तिब्बत की सीमा, तीस्ता तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा सिक्किम में होने वाले जल प्रवाह तथा तिब्बत के मोंछु तथा अन्य उत्तरी नदियों में होने वाले जल प्रवाह को अलग करने वाली पर्वत-श्रेणियां होगी।

यह सीमा रेखा, भूटान सीमा पर स्थित माउंट गिपमोची (Gipmochi) से शुरू होकर उपर्युक्त जल-विभाजन का अनुसरण करते हए नेपाल सीमा तक विस्तृत है।

तथापि, तिब्बत 1890 की संधि की वैधता को मान्यता देने से इनकार करता है तथा इसके प्रावधानों को लागू करने से मना कर दिया है।

वर्ष 1904 में ल्हासा (Lhasa) में ब्रिटेन और तिब्बत के बीच एक समझौते के पर हस्ताक्षर किए गए थे।

इस समझौते के अनुसार, तिब्बत 1890 की संधि को स्वीकार करने तथा संधि के अनुच्छेद (1) में परिभाषित सिक्किम और तिब्बत के बीच सीमा को मान्यता देने के लिए सहमत हो गया।

27 अप्रैल, 1906 को पेकिंग (Peking) में ब्रिटेन और चीन के बीच एक अन्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने ब्रिटेन तथा तिब्बत के मध्य हुई 1904 की संधि की पुष्टि की गयी।

dokala

प्रीलिम्स लिंक:

मानचित्र पर खोजें:

  1. नाथू ला
  2. जालेप ला
  3. डोकलाम (Doklam)
  • सिक्किम-तिब्बत समझौता, 1890 का अनुच्छेद 1

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

राइट्स इश्यू (Rights Issue)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: अर्थ, विशेषताएं, तुलना एवं महत्व।

चर्चा का कारण

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महिंद्रा फाइनेंस, टाटा पावर, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस समेत कई कंपनियों द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान राइट्स इश्यू के माध्यम से लगभग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि जुटाने की योजना बनाई गयी है।

राइट्स इश्यू (Rights Issue) क्या है?

राइट्स इश्यू किसी शेयर धारक को कंपनी में उसके मौजूदा शेयर के अनुपात में और बाज़ार की तुलना में कम मूल्य पर जारी किये जाते हैं। इसके अंतर्गत कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी में अतिरिक्त शेयर खरीदने का अधिकार प्रदान करती है।

  • सामान्यतः कंपनियां अपने शेयरों को राइट्स इश्यू के माध्यम से बाजार मूल्य से कम कीमतों पर जारी करती है।
  • कंपनियों द्वारा ऋण में वृद्धि किये बिना पूंजी जुटाने के लिये राइट्स इश्यू का प्रयोग किया जाता है।
  • शेयरधारकों को कंपनी द्वारा राइट्स इश्यू के तहत दिये गए शेयरों को खरीदने की बाध्यता नहीं होती है।

कंपनियां वर्तमान में राइट्स इश्यू का उपयोग क्यों कर रही हैं?

राइट्स इश्यू जारी करने हेतु शेयरधारकों की बैठक आवश्यक नहीं होती है तथा केवल निदेशक मंडल का अनुमोदन पर्याप्त होता है।

इसलिए, इस उपकरण से पूंजी जुटाने में कम समय लगता है जो कि मौजूदा परिस्थितियों में पूंजी जुटाने के अन्य माध्यमो की तुलना में बहुत अनुकूल है।

इस प्रकार राइट्स इश्यू पूंजी जुटाने का एक अधिक प्रभावी तथा कुशल तंत्र है।

कोविद –19 के मद्देनजर सेबी (SEBI) द्वारा कौन सी अस्थायी छूटें प्रदान की गई हैं?

सेबी ने फास्ट ट्रैक राइट्स इश्यू के लिए सार्वजनिक शेयरधारिता की औसत बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) की सीमा को 250 करोड़ रुपये से घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया है।

सेबी ने न्यूनतम सदस्यता (minimum subscription) आवश्यकता को भी 90 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया है।

इसके अलावा, राइट्स इश्यू के माध्यम से 25 करोड़ रुपये तक की धनराशि जुटाने वाली (पूर्व में सीमा 10 करोड़ रुपये थी) सूचीबद्ध संस्थाओं को सेबी के पास ड्राफ्ट ऑफर डाक्यूमेंट्स जमा करने की आवश्यकता नहीं है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) – संरचना तथा महत्वपूर्ण कार्य।
  2. ‘राइट्स इश्यू’ क्या होते है?
  3. इनका लाभ कौन उठा सकता है?
  4. यह पारंपरिक शेयरों से किस प्रकार भिन्न है?

 स्रोत: द हिंदू

 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

रिज़र्व बैंक द्वारा ऋण एक्सपोज़र की बिक्री हेतु रूपरेखा मसौदा

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: ऋणों की बिक्री क्या है?

मुख्य परीक्षा हेतु: नवीनतम रूपरेखा की प्रासंगिकता तथा महत्व।

संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘ऋण एक्सपोज़र की बिक्री के लिए व्यापक रूपरेखा मसौदा’ (Draft Comprehensive Framework for Sale of Loan Exposures) जारी किया है।

इसका उद्देश्य बैंक ऋणों के लिए एक मजबूत द्वितीयक बाजार का निर्माण करना है। यह बैंक ऋणों की बिक्री के लिए उचित कीमतों की खोज सुनिश्चित करेगा तथा बाजार में आसन्न तनाव की स्थिति बनने पर एक संकेतक के रूप में कार्य करेगा।

ऋण बिक्री क्या हैं?

ऋण बिक्री का उपयोग ऋणदाताओं द्वारा कई प्रकार से किया जा सकता है: ऋण के पुनर्संयोजन करने हेतु अथवा तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के निपटान हेतु साधन के रूप में ऋणदाताओं द्वारा ऋण बिक्री का सहारा लिया जाता है।

ड्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं

  1. मानक परिसंपत्तियों की ऋणदाताओं द्वारा समर्पण-पत्र (assignment), नवीनता (novation) अथवा ऋण भागीदारी अनुबंध के माध्यम से बिक्री करने की अनुमति होगी।
  2. तनावग्रस्त संपत्तियों को केवल समर्पण-पत्र या नवीनता (novation) के माध्यम से बेचने की अनुमति होगी। इन संपत्तियों को वैधानिक या नियामक ढांचे द्वारा ऋण जोखिम पर लेने की अनुमति प्राप्त किसी भी इकाई को बेचा जा सकता है।
  3. ड्राफ्ट में परिसंपत्ति पुनर्निमाण कंपनी (Asset Reconstruction Companies-ARC) द्वारा गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की खरीद हेतु मानदंडो का निर्धारण किया गया है।
  4. ड्राफ्ट में ऋणदाताओं द्वारा ऋण बिक्री के लिए न्यूनतम प्रतिधारण आवश्यकता (Minimum Retention Requirement -MRR) की आवश्यकता को दूर करने का प्रस्ताव है।

प्रासंगिकता

  • ये दिशा-निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, सभी वित्तीय संस्थानों, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों और छोटे वित्त बैंकों पर लागू होंगे।
  • यह दिशा-निर्देश सभी प्रकार की ऋण बिक्री पर लागू होंगे, जिसमें ऋण बिक्री से लेकर विशेष प्रयोजन इकाईयों को प्रतिभूतिकरण के उद्देश्य से ऋण बिक्री सम्मिलित है।

इन दिशानिर्देशों का महत्व

बैंक ऋणों के लिए एक गतिशील द्वितीयक बाजार क्रेडिट जोखिम से सुरक्षा सुनिश्चित करेगी तथा यह दिशा-निर्देश बाजार में बैंक ऋणों से संबंधित आसन्न तनाव की स्थिति होने पर एक प्रमुख संकेतक के रूप में उपयोगी होंगे।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

जीन संवर्द्धित (GM) बीज: विवाद तथा बुवाई आंदोलन

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक तथा मुख्य परीक्षा हेतु: जीन संवर्द्धित (GM): अर्थ, उदाहरण, भारत में स्वीकृत फसलें, महत्व तथा चिंताएँ।

संदर्भ: चालू खरीफ फसलों के सीजन में, किसान मक्का, सोयाबीन, सरसों बैगन और एचटी कॉटन आदि फसलों बुवाई के लिए गैर-प्रमाणित जीन संवर्द्धित (Genetically Modified-GM) बीजों का उपयोग करेंगे।

इसलिए, इस संबंध में, एक किसान संघ- शेतकरी संगठन – ने जीन संवर्द्धित (GM) बीजों के उपयोग के लिए नए सिरे से आंदोलन हेतु योजना की घोषणा की है।

आंदोलन का कारण

  • शेतकरी संगठन ने घोषणा की है कि इस वर्ष वे पूरे महाराष्ट्र में मक्का, एचटी बीटी कपास, सोयाबीन और बैगन जैसी अप्रमाणित जीएम फसलों की बड़े पैमाने पर बुआई करेंगे।
  • इस प्रकार की फसलें उगाने वाले किसान अपने खेतों में फसल की जीएम प्रकृति के विवरण का बोर्ड लगाएंगे।
  • यह कार्यक्रम खेतों में नवीनतम तकनीक की शुरुआत की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करेगा।

जीन संवर्द्धित (Genetically Modified-GM) बीज क्या होते हैं?

जीएम फसल उन फसलों को कहा जाता है जिनके जीन को वैज्ञानिक तरीके से रूपांतरित किया जाता है। जेनेटिक इजीनियरिंग के ज़रिये किसी भी जीव या पौधे के जीन को अन्य पौधों में डालकर एक नई फसल प्रजाति विकसित की जाती है।

जेनेटिक इंजीनियरिंग का उद्देश्य वांछित प्रभाव प्राप्त करने के लिए बीजों में एक एलियन जीन की शुरुआत करके आनुवांशिक अवरोध को समाप्त करना है। एलियन जीन, पौधे, जीव अथवा मृदा के सूक्ष्म जीवाणु से भी हो सकते है।

उदाहरण

  1. बीटी कपास, भारत में अनुमति दी जाने वाली एकमात्र जीएम फसल में बेसिलस थुरिंगिनेसिस (Bacillus thuringiensis -BT), एक मृदा सूक्ष्मजीव के दो विदेशी जीन होते हैं, यह फसल को पिंक बोलवॉर्म (pink bollworm) कीट को नष्ट करने के लिए विषाक्त प्रोटीन विकसित करते है।
  2. एचटी बीटी कपास (Ht Bt cotton) को एक अन्य मृदा-जीव के जीन से संकरण तैयार किया जाता है, यह पौधे को सामान्य हर्बिसाइड ग्लाइफोसेट का प्रतिरोध करने की क्षमता प्रदान करता है।
  3. बीटी बैंगन में, जीन पौधे को फल और प्ररोह बेधक (shoot borer) से प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
  4. DMH-11 सरसों में, जीन संवर्द्धन फसल में पार-परागण की अनुमति देता है।

भारत में जीन संवर्द्धित फसलों की वैधानिक कानूनी स्थिति

भारत में, जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee -GEAC) जीएम फसलों की वाणिज्यिक खेती की अनुमति देने के लिए शीर्ष निकाय है।

GEAC क्षेत्र परीक्षण प्रयोगों सहित पर्यावरण में आनुवंशिक रूप से संवर्द्धित किये गए जीवों और उत्पादों को जारी करने संबंधी प्रस्तावों की मंज़ूरी के लिये भी उत्तरदायी है।

जुर्माना: अप्रमाणित GM संस्करण का उपयोग करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1989 के अंतर्गत 5 साल की जेल तथा 1 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है।

किसान जीएम फसलों को क्यों महत्व दे रहे हैं?

कम लागत: किसानों द्वारा बीटी कपास के उगाने पर तथा ग्लाइफोसेट का उपयोग करने पर खरपतवार-नाशक की लागत काफी कम हो जाती है।

बीटी बैंगन के संबंध में भी कीटनाशक-लागत कम हो जाने से उत्पादन लागत में कमी हो जाती है।

चिंताएं

पर्यावरणविदों का तर्क है कि जीएम फसलों के लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाना बाकी है तथा अभी इन्हें व्यावसायिक रूप से अनुमति नही दी जानी चाहिए। इनका मानना है, कि जीन संवर्धन से फसलों में किये गए परिवर्तन लंबे समय में मनुष्यों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 समाचारों मे चर्चित छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण स्थल

प्रसंग: पर्यटन मंत्रालय देखो अपना देश श्रृंखला के अंतर्गत 30वें वेबीनार में ‘छत्‍तीसगढ़ का छिपा खजाना’ लाया है।

चर्चा में:

कर्कभाट – बड़े पत्‍थर वाला (मेगालिथिक) दफन स्थल।

दिपाडीह– 7वीं शताब्दी का मंदिर परिसर संभवतः छत्तीसगढ़ का सबसे अच्छा रखा गया पुरातात्विक रहस्य है।

घोटुल- यह शिक्षा की एक प्राचीन जनजातीय प्रणाली है और साथ ही इसकी अपनी लाट पादरी व्‍यवस्‍था के साथ अपनी परिसर व्‍यवस्‍था है।

सोनाबाई- छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध सजावट कार्यों को इसकी जड़ें मिलीं जब सोनाबाई ने अपने बेटे दरोगा राम को सुलाने के लिए उसके लिए छोटे खिलौने बनाए।

विश्व प्रत्यायन दिवस (World Accreditation DayWAD)

WAD प्रत्येक वर्ष 9 जून को व्यापार एवं अर्थव्यवस्था में प्रत्यायन की भूमिका को रेखांकित करने एवं बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।

WAD 2020 की थीम: ‘प्रत्यायन: खाद्य सुरक्षा में सुधार लाना‘ (Accreditation: Improving Food Safety) है।

विश्व प्रत्यायन दिवस की स्थापना संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय प्रत्यायन फोरम (International Accreditation Forum-IAF) तथा अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रत्यायन सहयोग (International Laboratory Accreditation Cooperation -ILAC) की गयी थी।

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दौलत बेग ओल्डी (Daulat Beg Oldie-DBO)

DBO लद्दाख में भारतीय क्षेत्र का सबसे उत्तरी इलाका है, जिसे सैन्य शब्दाबली में सब-सेक्टर- नार्थ के नाम से जाना जाता है।

यहाँ पर विश्व की सबसे ऊंची हवाई पट्टी स्थित है, जिसका निर्माण 1962 के युद्ध के दौरान किया गया था, इसके पश्चात वर्ष 2008 तक यह प्रयोग में नहीं थी। भारतीय वायु सेना (IAF) ने इसे LAC क्षेत्र में एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (ALG) में से एक के रूप में पुनर्जीवित किया है।

DBO अक्साई चिन में LAC से 10 किमी से कम दूरी पर स्थित है।

चर्चा में क्यों?

255 किलोमीटर लंबे दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) ऑल वेदर रोड के निर्माण को LAC  पर भारतीय सेना और  चीनी सेना के बीच गतिरोध के पीछे तत्काल कारण बताया जाता है।

BRO द्वारा निर्मित, सड़क LAC के समानांतर है और लेह को DBO से जोड़ती है।

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ऑपरेशन डेजर्ट चेज़ (Operation Desert Chase)

इस ऑपरेशन को वर्ष 2019 में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) द्वारा शुरू किए गया था,

इस ऑपरेशन का उद्देश्य भारतीय सेना से संबधित जानकारी को विदेशो को देने वाले गिरोहों को पकड़ना था। जून 2020 में दो अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ इसका समापन कर दिया गया। दोनों को आधिकारिक राज अधिनियम, 1923 की प्रासंगिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।

चर्चा में क्यों?

इस ऑपरेशन के तहत, राजस्थान पुलिस ने मिलिट्री इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर जयपुर में दो नागरिक रक्षा कर्मचारियों को गिरफ्तार किया, जो वे पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील जानकारी दे रहे थे।

अथिरापिल्ली जल विद्युत परियोजना

संदर्भ: केरल सरकार ने प्रस्तावित अथिरापल्ली जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए राज्य बिजली बोर्ड के लिए एक नया अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया है।

प्रमुख तथ्य

  • इस परियोजना में 163 मेगावाट की स्थापित क्षमता होगी।
  • परियोजना के तहत, केरल में चलाकुडी नदी पर एक बांध का निर्माण प्रस्तावित है।
  • चालकुडी नदी पेरियार नदी की एक सहायक नदी है और इसका उद्गम तमिलनाडु के अनामलाई क्षेत्र में हुआ है।

अपशिष्ट जल निष्कर्षण के आधार पर रेलवे स्टेशनों का वर्गीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board- CPCB) लाल, नारंगी और हरे रंग की श्रेणियों के अंतर्गत अपशिष्ट जल की मात्रा के आधार पर रेलवे स्टेशनों का वर्गीकरण करेगा।

लाल: प्रति दिन 100 किलो लीटर या उससे अधिक के बराबर अपशिष्ट जल उत्पन्न करने वाले रेलवे स्टेशन।

नारंगी: प्रति दिन 10 किलो लीटर से अधिक लेकिन 100 किलो लीटर से कम।

हरा: प्रति दिन 10 किलो लीटर से कम अपशिष्ट जल उत्पादन।