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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 09 June

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अस्थायी सदस्यता के लिए तैयार भारत

 

सामान्य अध्ययन-III

1. चावल का सीधा बीजारोपण (Direct Seeding of Rice- DSR)

2. आर्थिक बहाली के आकार

3. विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि तथा इसका महत्व

 

प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पृथक परिवहन हेतु हवाई रेस्क्यू पॉड (ARPIT)

2. केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT)

3. कोविड बीप (COVID BEEP) ऐप

4. नैमिषा (NAIMISHA)-2020

5. गैरसैंण, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी

6. ऑनलाइन कचरा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अस्थायी सदस्यता के लिए तैयार भारत

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद- संरचना, उद्देश्य तथा कार्य

मुख्य परीक्षा हेतु: UNSC की भूमिका एवं महत्व, सुधारों की आवश्यकता, भारत को स्थायी सदस्यता क्यों दी जानी चाहिए?

संदर्भ: भारत आठवीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य बनने के लिए तैयार है।

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 17 जून को दस गैर-स्थायी सदस्यों में से पांच का चुनाव किया जाएगा।

भारत एशिया-प्रशांत समूह से एकमात्र उम्मीदवार है तथा परिषद में एक दशक के बाद एक जनवरी 2021 से  सम्मिलित होगा।

गैर-स्थायी सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता हैं?

प्रत्येक वर्ष, संयुक्त राष्ट्र महासभा कुल 10 अस्थायी सदस्यों में से पाँच गैर-स्थायी सदस्यों का दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुनाव करती है।

सीटों का वितरण: ये 10 सीटें विभिन्न क्षेत्रों में निम्न प्रकार से वितरित की जाती हैं:

अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए पांच;

पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए एक;

लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के लिए दो;

पश्चिमी यूरोपीय तथा अन्य देशों के लिए दो।

अफ्रीका और एशिया के लिए निर्धारित पांच सीटों में से तीन सीटें अफ्रीका के लिए तथा दो सीटें एशिया के लिए प्रदान की जाती हैं; इन दोनों समूहों में परस्पर एक अनौपचारिक सहमति से एक सीट अरब देशों के लिए आरक्षित है। अफ्रीका तथा एशिया प्रशांत समूह, प्रति दो वर्ष में बारी-बारी से एक अरब उम्मीदवार प्रस्तुत करते हैं।

निर्वाचन:

सम संख्या वाले वर्ष से आरम्भ होने वाले अस्थायी सदस्यता के कार्यकाल के लिए चुनावों में दो अफ्रीकी सदस्य तथा पूर्वी यूरोप, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन क्षेत्र से एक-एक सदस्य चुने जाते हैं।

विषम संख्या वाले वर्षों में शुरू होने वाले अस्थायी सदस्यता के कार्यकाल के लिए चुनावों में दो पश्चिमी यूरोपीय तथा एशिया-प्रशांत, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन से एक-एक सदस्य को चुना जाता है।

आवश्यक मत

भले ही कोई देश ‘सबसे उपयुक्त’ उम्मीदवार हो तथा उसे अपने समूह द्वारा समर्थन प्राप्त हो, उसे महासभा सत्र में उपस्थित व मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों का मत पाना अनिवार्य है (महासभा के कुल 193 सदस्यों में से न्यूनतम 129 सदस्यों का मत)।

अस्थायी सीटों के चुनाव कई दौरों तक चल सकते हैं। वर्ष 1975 में, भारत और पाकिस्तान के मध्य आठ राउंड तक मुकाबला चला था। उस वर्ष पाकिस्तान ने सदस्यता हासिल की थी। वर्ष 1996 में, भारत जापान से चुनाव में पराजित हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बारे में

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के कायम रखने के लिए उत्तरदायी है। इसका गठन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1945 में हुआ था।

इसकी शक्तियों में शांति अभियानों का योगदान, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना तथा सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से सैन्य कार्रवाई करना शामिल है। यह सदस्य देशों पर बाध्यकारी प्रस्ताव जारी करने का अधिकार वाला संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र निकाय है।

स्थायी सदस्य: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पंद्रह सदस्य होते हैं। रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका– सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के रूप में कार्य करते हैं। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार होता है।

इन स्थायी सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य देशों को दो साल के लिये अस्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में शामिल किया जाता है।

प्रस्तावित सुधार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाँच प्रमुख मुद्दों पर सुधार किया जाना प्रस्तावित है:

  1. सदस्यता की श्रेणियां।
  2. पाँच स्थायी सदस्यों द्वारा प्राप्त वीटो पावर का प्रश्न
  3. क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व
  4. सुरक्षा परिषद के आकार का विस्तार प्रक्रियात्मक सुधार
  5. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद व संयुक्त राष्ट्र महासभा के बीच संबंध

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNSC के स्थायी सदस्यों के नाम?
  2. गैर-स्थायी सदस्य किस प्रकार चुने जाते हैं?
  3. UNSC में मतदान की शक्तियां
  4. गैर स्थायी सीटों का वितरण
  5. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद vs संयुक्त राष्ट्र महासभा

मेंस लिंक:

भारत को UNSC में स्थायी सदस्यता क्यों दी जानी चाहिए। चर्चा कीजिए

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


  

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ;

चावल का सीधा बीजारोपण (Direct Seeding of Rice- DSR)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परिक्षा हेतु: DSR – महत्व, आवश्यकता तथा सीमाएं

संदर्भ: पंजाब सरकार ने COVID-19 के कारण हुए कृषि-मजदूरों के विपरीत प्रवासन (Reverse Migration) के कारण श्रमिकों की कमी के मद्देनजर इस वर्ष धान की परंपरागत रोपाई के स्थान पर चावल का सीधा बीजारोपण (Direct Seeding of Rice- DSR) तकनीक अपनाने का निर्णय है।

डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) क्या है?

इसके तहत ट्रैक्टर द्वारा संचालित मशीनों की मदद से खेत में पूर्व अंकुरित बीज़ों की बुआई की जाती है।

डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस’ के तहत नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस विधि के तहत किसानों को बीज़ों की बुआई से पूर्व जमीन को समतल तथा एक बार सिंचाई करनी होती है।

यह पारंपरिक विधि से किस प्रकार भिन्न है?

धान की परंपरागत रोपाई के तहत सबसे पहले किसानों द्वारा नर्सरी तैयार कर धान के बीज की बुआई की जाती है। नर्सरी, संपूर्ण खेत का 5-10% क्षेत्र में तैयार की जाती है।

25-35 दिनों के पश्चात् इन धान के छोटे-छोटे पौधों को नर्सरी से हटाकर कर पूरे खेत में बुआई की जाती है।

डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) के लाभ

पानी की बचत: DSR के तहत पहली सिंचाई (पूर्व बुवाई रौनी के अतिरिक्त) बुवाई के 21 दिन बाद करना आवश्यक है। परंपरागत रोपाई विधि में पहले तीन हफ्तों तक खेत को जलमग्न रखने के लिए लगभग रोजाना पानी देना होता है।

कम संख्या में मज़दूरों की आवश्यकता: DSR के तहत एक एकड़ धान की रोपाई करने के लिए लगभग तीन मजदूरों की आवश्यकता होती है।

खरपतवार- नाशक लागत में कमी: इस विधि के अंतर्गत खरपतवार- नाशक की लागत 2,000 रुपये प्रति एकड़ से अधिक नहीं होती है।

मीथेन उत्सर्जन में कमी: रोपाई विधि के विपरीत DSR में खेत को जलमग्न रखने की कम आवश्यकता होती है तथा मृदा की भी कम जुताई की जाती है, परिणामस्वरूप मीथेन उत्सर्जन में कमी होती है।

सीमाएं:

  • खरपतवार-नाशकों की अनुपलब्धता।
  • DSR विधि के तहत धान की रोपाई में प्रति एकड़ 8-10 किग्रा. बीज की आवश्यकता होती है, जबकि पारंपरिक रोपाई में मात्र 4-5 किग्रा. बीज की ही आवश्यकता होती है।
  • बुआई से पूर्व जमीन को समतल करने की आवश्यकता के कारण प्रति एकड़ अतिरिक्त खर्च में वृद्धि होती है।
  • बुवाई निर्धारित समय पर करने की आवश्यकता होती है ताकि मानसून की बारिश आने से पहले पौधे ठीक से बाहर आ जाएं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. खरपतवार-नाशक क्या होते हैं?
  2. भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य
  3. चावल के लिए उपयुक्त जलवायु परिस्थितियाँ
  4. MSP की घोषणा कौन करता है?
  5. हरित क्रांति क्या है?

मेंस लिंक:

डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

आर्थिक बहाली के आकार

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: आर्थिक बहाली के प्रकार तथा विशेषताएं

मुख्य परीक्षा हेतु: भारतीय परिदृश्य तथा आर्थिक बहाली का आदर्श तरीका

संदर्भ: अधिकांश अर्थशास्त्रीयों का मत हैं कि चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में संकुचन होगा।

  • अर्थशास्त्रीयों की राय में भिन्नता संकुचन की सीमा के संबंध में है।
  • संकुचन सीमा ‘4% से 14%’ की नकारात्मक कमी के मध्य हो सकती है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अर्थव्यवस्था इस वर्ष निम्नतम स्तर तक पहुचेगी तथा आगामी वित्त वर्ष (2021-22) से अर्थव्यवस्था में सुधार होना प्रारंभ हो जाएगा।

भारत के लिए आर्थिक बहाली का आदर्श आकार क्या होना चाहिए?

कोविड संकट के साथ-साथ अपर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहनों के कारण अर्थव्यवस्था में उत्पन्न कमजोरी को देखते हुए, भारत में अर्थव्यवस्था के ‘दीर्घ U-आकार’ रिकवरी स्थिति मे पहुचने की संभावना है।

आकार (Shapes)

जेड-आकार की बहाली (Z-shaped recovery) सबसे आशावादी परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था में गिरने के बाद तेजी से वृद्धि होती है। Z- शेप चार्ट, सामान्य पृवत्ति में आने से पहले अर्थव्यवस्था में पूर्व स्थिति पर तेजी से पहुचने का प्रयास दर्शाता है (जैसे, लॉकडाउन हटाए जाने के बाद भरपाई में की गयी खरीददारी)।

Z-Shaped_Recovery

V-आकार की बहाली में अर्थव्यवस्था तीव्रता से पूर्व स्थिति को प्राप्त करती है और सामान्य विकास की प्रवृत्ति-रेखा पर वापस आ जाती है।

V-Shaped_Recovery

U-आकार की बहाली में ऐसा परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था, गिरने, संघर्ष करने और कुछ अवधि के लिए कम विकास दर के बाद, धीरे-धीरे सामान्य स्तर तक वृद्धि करती है।

U-Shaped_Recovery

W-आकार की बहाली जोखिम युक्त होती है – इसमें विकास दर में कमी तथा वृद्धि होती है, तथा फिर गिरती है और पुनः वृद्धि करती है, इस प्रकार, इसमें डब्ल्यू-आकार का चार्ट बनता है।

w-Shaped_Recovery

L- आकार की रिकवरी सबसे खराब स्थिति होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद विकास निम्न स्तर पर रुक जाता है और लंबे समय तक ठीक नहीं होता है।

L-Shaped_Recovery

J-आकार की बहाली में कुछ हद तक अवास्तविक परिदृश्य होता है, इसमें निम्न स्तर पर पहुचने के बाद तीव्रता से सामान्य स्तर से आगे तक वृद्धि की प्रवृत्ति होती हैं।

other_shapes

अन्य आकार

स्वूश (Swoosh)– आकार की बहाली, V- आकार तथा U- आकार रिकवरी के मध्य में नाइके लोगो (Nike logo) के आकार के समान होती है। इसमें गिरने के बाद, अर्थव्यवस्था में  विकास दर शीघ्रता से ठीक होने लगती है, परन्तु, बाधाओं के कर्ण फिर धीमी हो जाती है।

उलटे वर्गमूल के आकार की बहाली (Inverted square root shaped recovery, में अर्थव्यवस्था में निम्न स्तर पर पहुचने के बाद पुनः उछाल हो सकता है, इसके पश्चात, विकास दर धीमी हो जाती है तथा एक कदम और लुढ़क जाती है।

उत्तरदायी कारक

आर्थिक बहाली का आकार जीडीपी की गति तथा दिशा दोनों से निर्धारित किया जाता है। यह वित्तीय और मौद्रिक उपायों, उपभोक्ता आय आदि कई कारकों पर निर्भर करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऊपर उल्लिखित विभिन्न वक्रों का अवलोकन करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि तथा इसका महत्व

क्या अध्ययन करें?

प्रीलिम्स के लिए: विदेशी मुद्रा भंडार के घटक

मेन्स के लिए: विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि – कारण, महत्व तथा उपयोग

संदर्भ: महामारी के दौरान, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हो रही है तथा इसके शीघ्र ही 500 बिलियन डॉलर तक पहुचने की संभावना है।

मई माह में, विदेशी मुद्रा भंडार 12.4 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 493.48 बिलियन डॉलर (लगभग 37.30 लाख करोड़ रुपये) के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मार्च 1991 में विदेशी मुद्रा भंडार का स्तर 5.8 बिलियन डॉलर था। इसमें तब से 8,400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा यह 493.48 बिलियन डॉलर के वर्तमान स्तर तक पहुँच गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) क्या होता हैं?

विदेशी मुद्रा भंडार, स्वर्ण, विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing RightsSDR) और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (पूंजी बाजार, FDI तथा बाहरी वाणिज्यिक ऋण) के रूप में भारत द्वारा संचित और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित बाह्य संपत्तियां होती हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व

  1. आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार का विभिन्न उद्दश्यों में उपयोग किया जाता है, जैसे, यह राष्ट्रीय या संघीय करेंसी के मूल्य निर्धारण में सहयोग करता है, मौद्रिक नीतियों तथा विनिमय दरों के निर्धारण तथा साख नियंत्रण में सहायक होता है।
  2. यह विदेशी मुद्रा तरलता के माध्यम से संकट के समय झटकों को अवशोषित करने अथवा ऋण प्राप्ति अभिगम्यता में कमी होने पर, बाह्य भेद्यता को सीमित करता है।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि के कारण

भारतीय स्टॉक और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (foreign direct investments -FDIs) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा निवेश में वृद्धि।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से तेल आयात मूल्य में कमी आई है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

विदेशी विप्रेषण में महत्वपूर्ण गिरावट हुई है। अप्रैल माह में 61 प्रतिशत की गिरावट होकर 12.87 बिलियन डॉलर तक पहुच गयी है।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का महत्व

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से, ऐसे समय में जब, वर्ष 2020-21 में आर्थिक विकास में 1.5 प्रतिशत तक का संकुचन होना संभावित है, सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक को भारत के बाहरी और आंतरिक वित्तीय मामलो के प्रबंधन में काफी सहायता मिलेगी।

यह आर्थिक स्तर पर किसी भी संकट की स्थिति में एक महत्वपूर्ण सहायक है तथा देश के आयात कीमतों को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति मजबूत हुई है।

विदेशी मुद्रा भंडार से बाजार में साख स्तर में वृद्धि होगी, इससे बाजार में यह सन्देश भी जाता है कि देश अपने बाहरी दायित्वों को पूरा करने में सक्षम है। यह भंडार विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं और बाहरी ऋण दायित्वों को पूरा करने में सरकार की सहायता करता है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार कहाँ रखे जाते हैं?

RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत करेंसी, जारीकर्ताओं तथा अन्य उपकरणों के विस्तृत मानदंडो के अंतर्गत स्वर्ण तथा विभिन्न विदेशी परिसंपत्तियों के भंडार हेतु व्यापक वैधानिक अवसंरचना का प्रावधान किया गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार का 64 प्रतिशत हिस्सा बाहरी देशों, मुख्य रूप से अमेरिका के ट्रेजरी बिलों के रूप में रखा जाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार का 28 प्रतिशत विदेशी केंद्रीय बैंकों में जमा होता है।

भण्डार का 7.4 प्रतिशत विदेशों की वाणिज्यिक बैंकों में जमा होता है।

मार्च 2020 तक भारत में 653.01 टन स्वर्ण भंडार था, जिसमें 360.71 टन स्वर्ण विदेशों में बैंक ऑफ इंग्लैंड तथा बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास रखा हुआ है, जबकि शेष स्वर्ण को स्थानीय स्तर पर रखा गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विदेशी मुद्रा भंडार के घटक?
  2. इसका प्रबंधन कौन करता है?
  3. क्या आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार पर लाभ अर्जित करता है?
  4. पिछले दशक के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार की प्रवृत्ति

मेंस लिंक:

विदेशी मुद्रा भंडार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना लाभप्रद है। चर्चा कीजिए

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 पृथक परिवहन हेतु हवाई रेस्क्यू पॉड (ARPIT)

हाल ही में, भारतीय वायु सेना द्वारा पृथक परिवहन हेतु हवाई रेस्क्यू पॉड (Airborne Rescue Pod for Isolated Transportation- ARPIT) डिजाइन, विकसित और निर्मित किए गए हैं।

रेस्क्यू पॉड का उपयोग देश भर में  दूरदराज तथा उच्च तुंगता वाले क्षेत्रों से संक्रामक रोगों से ग्रस्त  गंभीर रोगियों के परिवहन के लिए किया जाता है।

  • इसमें रोगी को देखने के लिए पारदर्शी तथा और टिकाऊ उच्च गुणवत्ता वाले प्लास्टिक शीट लगाई गयी है, जो उपलब्ध मॉडलों की तुलना में अधिक बेहतर है।
  • ARPIT में ‘हाई-एफिशिएंसी पार्टिकुलेट एयर’ (HEPA) H-13 क्लास फिल्टर का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली चिकित्सा निगरानी उपकरणों के साथ रोगी को वेंटिलेशन की सुविधा भी देती है।

HEPA

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT)

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (Central Administrative Tribunal- CAT) की स्थापना भारतीय संसद द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के अंतर्गत की गई थी। इस प्राधिकरण को भारत के संविधान के 42 वें संशोधन द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 323 ए के अंतर्गत स्थापित किया गया।

इसके क्षेत्राधिकार में केंद्र सरकार या केंद्र शासित प्रदेश या भारत सरकार के अंतर्गत किसी स्थानीय या अन्य सरकार या केंद्र के स्वामित्व व नियंत्रण वाले निगमों के कार्मिकों के सेवा संबंधी मामले आते है।

संरचना: न्यायाधिकरण में एक अध्यक्ष तथा 65 सदस्य होते हैं, जिनमे से 33 सदस्य (अध्यक्ष सहित) न्यायिक पृष्ठभूमि तथा शेष प्रशासनिक पृष्ठभूमि से  होते हैं।  इसके अध्यक्ष सामान्यतः उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होते है।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों और लद्दाख के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की 18 वीं बेंच का उद्घाटन किया गया।

कोविड बीप (COVID BEEP) ऐप

यह COVID 19 से संक्रमित मरीजों के लिए वायरलेस शारीरिक मापदंडों की पहली स्वदेशी निगरानी प्रणाली है।

इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैदराबाद और परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है।

कोविड बीप का पूरा नाम (Continuous Oxygenation and Vital Information Detection Biomed ECIL ESIC Pod) है।

नैमिषा (NAIMISHA)-2020

हाल ही में राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय  ने ग्रीष्मकालीन कला कार्यक्रम ‘ऑनलाइन नैमिषा-2020’ का आयोजन करने की घोषणा की है।

  • इस ऑनलाइन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को कलाकारों के साथ अभ्यास करने और उनसे सीखने का अवसर प्राप्त होता है।
  • इस कार्यक्रम में चित्रकला कार्यशाला, मूर्तिकला कार्यशाला, प्रिंटमेकिंग और इन्द्रजाल – द मैजिक ऑफ आर्ट (स्वतंत्रता को समझने के लिए अंतःविषय रचनात्मक कार्यशाला) पर ऑनलाइन कार्यशाला सत्र आयोजित किये जायेंगे।

गैरसैंण, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी

चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को औपचारिक रूप से उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में घोषित किया गया है।

  • इसे प्रशासन की एक आदर्श सीट के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • राज्य की शीतकालीन राजधानी देहरादून में स्थित है।

ऑनलाइन कचरा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म

इसे आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया है। यह देश में अपनी तरह का पहला प्लेटफॉर्म है।

  • इस प्लेटफॉर्म के उपकरणों की मदद से अधिकारियों को खतरनाक कचरे के मूवमेंट की रीयल टाइम निगरानी करने में मदद मिलेगी।
  • इस प्लेटफॉर्म को आंध्रप्रदेश पर्यावरण प्रबंधन निगम (APEMC) द्वारा संचालित किया जाएगा।
  • APEMC उद्योगों से प्राप्त कचरे को सुव्यवस्थित, प्रबंधित और वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटान करेगा।

 


Insights Current Affairs Analysis (ICAN) by IAS Topper