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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 08 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. सामाजिक बुलबुले (Social Bubbles)

2. फ़ारस की खाड़ी के तटवर्ती क्षेत्रों में सहयोगी सुरक्षा

3. COVID-19 लड़ाई पर चीन द्वारा श्वेत पत्र जारी

 

सामान्य अध्ययन-III

1 दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC)

2. पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2020

3. छठा सामूहिक विलोपन

4. असम गैस रिसाव।

 

सामान्य अध्ययन-IV

 1. तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा कोविड -19 की ट्रोजन हॉर्स तुलना

 

प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. डेक्कन क्वीन

2. विश्व महासागरीय दिवस

3. जया जेटली टास्क फोर्स

4. विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (WFSD)

5. कोरो-बॉट (Coro-bot)- दुनिया का पहला ‘इंटरनेट-नियंत्रित’ रोबोट

6. स्पंदन अभियान

7. मैग्नेटोकलोरिक पदार्थ (Magnetocaloric Materials)

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

सामाजिक बुलबुले (Social Bubbles)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: तात्पर्य? ‘ट्रैवल बबल’ क्या है?

मुख्य परीक्षा हेतु: महत्व, भारत के लिए प्रासंगिकता तथा चुनौतियां।

चर्चा में क्यों?

संक्रमण मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि के बावजूद कई देशों ने प्रतिबंधों धीरे-धीरे को उठाना शुरू कर दिया है।

कोविद -19 वक्र को समतल बनाए रखने हेतु विशेषज्ञों द्वारा सुझायी गयी ‘सामाजिक दूरी (Social Distancing) रणनीतियों’ के प्रभावी तरीकों में सामाजिक बुलबुले का विचार भी सम्मिलित है।

सामाजिक बुलबुला’ क्या होता हैं?

सामजिक बुलबुले का विचार न्यूजीलैंड के ‘पारिवार बुलबुला’ (Houshold Bubbles) मॉडल पर आधारित है।  इसके अंतर्गत एक विशेष सामाजिक समूह को महामारी के दौरान एक दूसरे से मिलने की अनुमति होती है।

इसमें किसी व्यक्ति के परिवार को अथवा जिन लोगों के साथ वह रहता है, उसे ‘बुलबुला’ कहा जाता है। इस मॉडल में लोगों को देखभाल करने वालों अथवा बच्चों को सम्मिलित करने हेतु अपने बुलबुले को थोड़ा विस्तारित करने की अनुमति दी जा सकती है।

किसी एक ‘बुलबुले’ के लोगों के लिए ही घर में रहना आवश्यक नहीं होता है, परन्तु उनका स्थानीय होना अनिवार्य है।

न्यूजीलैंड ने लॉकडाउन के दौरान इस मॉडल को अपनाया तथा तथा संक्रमण की दर के कम होने पर बुलबुलों के विस्तार की अनुमति दी है तथा प्रतिबंधों में भी शिथिलता प्रदान की है।

इन बुलबुलों के लाभ

यदि बुलबुले के किसी सदस्य में संक्रमण के लक्षण दिखते है, तो संक्रमण के प्रसार को रोकने हेतु पूरा ‘बुलबुला’ स्वयं को पृथक (Quarantine) कर लेता है।

इन बुलबुलो में, पृथक किये लोगों को आपस में सामाजिक संपर्क करने की अनुमति होती है, जिससे वर्तमान सामाजिक प्रतिबंधों के कारण पड़ने वाले सबसे हानिकारक प्रभावों को कम किया का सकता है तथा  संक्रमण श्रंखला के प्रसरण पर भी अंकुश लगता है।

प्रभाविकता

अध्ययनों से पता चला है कि सामाजिक बुलबुले की अवधारणा न्यूजीलैंड में प्रभावी साबित हुई है। इसमें पृथक किये गए, अतिसंवेदनशील लोगों को आवश्यक देखभाल तथा सहायता की सुविधा प्रदान की गयी।

इस तरह की पालिसी, अन्य देशों के लिए भी सामजिक दूरी नियमों के अनुपालन को प्रोत्साहन देने तथा आवश्यक देखभाल एवं सहायता प्रदान करने हेतु प्रभावी नीति हो सकती है।

कार्यस्थलों पर सामाजिक बुलबुलों की प्रासंगिकता

‘सामाजिक बुलबुले’ की अवधारण को नियोक्ताओं द्वारा ‘विभागीय’ अथवा ‘कार्य-इकाई’ बुलबुलों को बनाने के लिए भी लागू किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं के कार्मिकों के लिए, समान कार्मिकों की शिफ्ट का गठन करके संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बुलबुला (bubble) क्या होता है?
  2. यात्रा बनाम सामाजिक बुलबुले (Travel vs Social Bubbles)?
  3. किन देशों में ‘सामाजिक बुलबुला’ को लागू किया गया हैं?
  4. COVID 19 महामारी के वायरस का नाम
  5. विश्व मानचित्र पर न्यूजीलैंड की अवस्थिति

मेंस लिंक:

‘सामाजिक बुलबुले’ क्या होते हैं?  नॉवेल कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 फ़ारस की खाड़ी के तटवर्ती क्षेत्रों में सहयोगी सुरक्षा

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: क्षेत्र, अवस्थिति तथा महत्व, सुरक्षा हेतु चुनौतियां तथा उपाय

फारस की खाड़ी क्षेत्र तथा इसका महत्व

बहरीन, ईरान, इराक, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, फारस की खाड़ी के आठ तटवर्ती देश है।

  • ये देश कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख उत्पादक हैं तथा इसके द्वारा ये देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पेट्रोलियम संसाधन इन देशों की समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • विश्व के अनुमानित कुल तेल भंडार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा, तथा विश्व के अनुमानित कुल प्राकृतिक गैस भंडार का एक तिहाई इस क्षेत्र में स्थित है।
  • यह कारक इस क्षेत्र के भू-राजनीतिक महत्व में वृद्धि करते हैं।
  • समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण भाग फारस की खाड़ी से होकर गुजरता है, जिस कारण इस क्षेत्र में भारी यातायात होता है।

इसके महत्व को देखते हुए, इस क्षेत्र में स्थिरता तथा सुरक्षा हेतु रूपरेखा में निम्नलिखित उपायों का सम्मिलित किया जाना चाहिए:

  1. प्रत्येक तटवर्ती राज्य में शांति और स्थिरता की स्थिति;
  2. खाड़ी के सभी तटवर्ती राज्यों को हाइड्रोकार्बन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने और उन्हें निर्यात करने की स्वतंत्रता;
  3. फारस की खाड़ी के अंतर्राष्ट्रीय जल में वाणिज्यिक नौपरिवहन की स्वतंत्रता;
  4. होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए खाड़ी के जल तक पहुंच और निकास की स्वतंत्रता;
  5. संघर्ष की रोकथाम, जिससे व्यापार तथा नौपरिवहन प्रभावित हो सकता है;
  6. उपरोक्त मुद्दों को बाधित करने वाली परिस्थितियों के उत्पन्न होने की रोकथाम।

 भारत के लिए महत्व

  • फारस की खाड़ी, भौगोलिक निकटता तथा भारत के हितों एवं बढ़ते प्रभाव, दोनों प्रकार से, भारत के विस्तारित पड़ोस का एक अभिन्न अंग है।
  • भारत अपने कुल तेल आयात का 42 प्रतिशत छह खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council -GCC) राज्यों से करता है। भारत के शीर्ष पांच तेल आपूर्तिकर्ताओं में से तीन, फारस की खाड़ी के तटवर्ती देश हैं।
  • भारतीय नागरिक, खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़े प्रवासी समुदाय हैं। लगभग, 6 मिलियन भारतीय खाड़ी क्षेत्र में, विशेषकर, संयुक्त अरब अमीरात तथा सऊदी अरब में काम करते तथा रहते हैं।
  • खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है, वर्ष 2017-18 में दोनों के 104 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ, जो कि पिछले वर्ष के 97 बिलियन डॉलर से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. खाड़ी सहयोग परिषद (GCC क्या है?
  2. मध्य पूर्व के देश?
  3. होर्मुज जलडमरूमध्य?
  4. विश्व के शीर्ष तेल उत्पादक
  5. फारस की खाड़ी- इस क्षेत्र में अवस्थित देश

मेंस लिंक:

भारत और विश्व के लिए फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और शांति क्यों महत्वपूर्ण है। चर्चा कीजिए

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

COVID-19 लड़ाई पर चीन द्वारा श्वेत पत्र जारी

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: अवलोकन तथा मुख्य उल्लेख।

मुख्य परीक्षा हेतु: श्वेत पत्र की प्रासंगिकता, क्या मुद्दा है तथा इससे किस प्रकार निपटा जाना चाहिए?

सन्दर्भ: चीन ने COVID-19 के विरूद्ध देश की लड़ाई पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया है। इस दस्तावेज़ का शीर्षक है: ‘फाइटिंग COVID-19: चाइना इन एक्शन (Fighting COVID-19: China in Action)

श्वेत पत्र का विषय 

श्वेत पत्र में, वायरस के विरुद्ध लड़ाई में चीन द्वारा किये गए रोकथाम, नियंत्रण एवं उपचार के प्रयासों तथा साथ ही वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु किए गए प्रयासों के बारे में बताया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • चीन सरकार ने प्रकोप के प्रारम्भ से सम्पूर्ण देश में यथासंभव लोगों का जीवन बचाने हेतु, कोरोनोवायरस से निपटने के लिए व्यापक, कड़े तथा प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय किए हैं।
  • चीन ने COVID-19 के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए सभी साधनों का पूरा उपयोग किया है।
  • चीन ने कोरोनोवायरस महामारी के दौरान तथा इसके बाद भी वैश्वीकरण एवं बहुपक्षवाद की वकालत जारी रखने का प्रण किया है।
  • इसने विधि द्वारा आवश्यकतानुसार खुले और पारदर्शी तरीके से COVID -19 पर सूचनायें जारी की है।

विवाद क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तथा कई अन्य देशों के नेताओं ने चीन पर घातक बीमारी के बारे में सूचना देने में पारदर्शी नहीं होने का आरोप लगाया है, जिसके परिणामस्वरूप विश्व में बड़े पैमाने पर मानव जीवन की हानि हुई है तथा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।

हाल ही में, जेनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की निर्णय लेने वाली संस्था ‘विश्व स्वास्थ्य सभा’ (World Health Assembly WHA), ने वायरस उत्पत्ति की जांच के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। चीन द्वारा भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया गया।

प्रभाव

कोरोनोवायरस ने 68 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है तथा विश्व भर में लगभग 4 लाख लोगों की म्रत्यु हुई है।

अमेरिका में सर्वाधिक, 1.9 मिलियन से अधिक संक्रमित तथा 1,09,000 से अधिक मौतें हुई है, तथा यह कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित देश है। जबकि, चीन में संक्रमित मामलों की कुल संख्या 84,177 है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था, कोरोनोवायरस के प्रकोप से पहले ही धीमी अवस्था में थी, वर्ष 2020 में “गंभीर मंदी” से ग्रस्त हो चुकी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानचित्र पर वुहान की अवस्थिति का पता लगाएँ?
  1. कोरोनावायरस किन प्रकारों से मानव-जीवन को प्रभावित करता है?
  2. सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) – उद्देश्य तथा स्थायी सदस्य
  3. दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में अवस्थित देश
  4. ताइवान और हांगकांग की अवस्थिति खोजें

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: संहिता का अवलोकन

मुख्य परीक्षा हेतु: महत्व तथा संबधित विषय।

संदर्भ: सरकार ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy CodeIBC) में संशोधन करने हेतु एक अध्यादेश लागू किया है, जिसके तहत COVID-19 महामारी के दौरान 25 मार्च से आगामी कम से कम छह महीने तक नई दिवाला कार्यवाहियां (insolvency proceedings) शुरू नहीं की जाएगी।

25 मार्च, 2020 को, (COVID -19 संक्रमणों पर अंकुश लगाने हेतु देशव्यापी लॉकडाउन के लागू होने के दिन) अथवा या उसके बाद होने वाले किसी भी डिफ़ॉल्ट के लिए इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी। इस संबंध में, आगामी छह महीने अथवा इससे आगे की किसी अवधि के लिए, परन्तु निर्धारित तारीख से एक वर्ष से अधिक नहीं, अधिसूचित किया जा सकता है।

संहिता की धारा 7, 9 और 10 के निलंबन का आधार

  1. महामारी के कारण व्यापार हेतु अनिश्चितता तथा तनाव उत्पन्न हुआ है।
  2. राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने सामान्य व्यावसायिक कार्यों को बाधित करने में भूमिका निभाई है।

इस निलंबन से विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा कॉरपोरेट देनदारों के विरूद्ध दिवालिया कार्यवाही की मांग पर भी रोक लगेगी तथा यह निलंबन कॉरपोरेट देनदारों को ऋण पुनर्गठन के लिए सेल्फ-फाइलिंग से भी रोकेगा।

पृष्ठभूमि

दिवाला और दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) 2016 की धारा 7, 9 और 10 के अंतर्गत फाइनेंसियल क्रेडिटर्स, ऑपरेशनल क्रेडिटर्स तथा और खुद कॉर्पोरेट देनदारों द्वारा इन्साल्वन्सी-फाइलिंग की अनुमति दी गई है।

निहितार्थ

अध्यादेश का उद्देश्य कॉर्पोरेट देनदारों को राहत प्रदान करना है, परन्तु, दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के अंतर्गत प्रावधानों को निलंबित करने से बिना निपटारे के देयताओं में वृद्धि होगी।

संशोधन में किये गए कुछ प्रावधानों से अवांछित परिणाम हो सकते हैं तथा विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful Defaulters) और धोखेबाज प्रमोटरों द्वारा छूट (leeway) के दुरुपयोग की संभावना बढेगी।

संहिता की धारा 10 को निलंबित करने से कर्ज के दुष्चक्र में फंसे व्यवसायों द्वारा कर्ज मुक्त होने के प्रयासों के लिए निराशा होगी।

दिवाला और दिवालियापन क्या है?

दरअसल, कंपनी या साझेदारी फर्म व्यवसाय में नुकसान के चलते कभी भी दिवालिया हो सकती हैं और यदि कोई इकाई दिवालिया होती है तो इसका तात्पर्य यह है कि वह अपने संसाधनों के आधार पर अपने ऋणों को चुका पाने में असमर्थ है।

दिवाला (इन्सॉल्वेंसी) एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमे कोई व्यक्ति अथवा कंपनियां अपना बकाया ऋण नहीं चुका पाती हैं।

दिवालियापन (Bankruptcy) एक ऐसी स्थिति होती है, जिसके तहत सक्षम न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति या अन्य संस्था को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है, तथा ऋण-दाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए इसके निपटान के लिए उपयुक्त आदेश जारी किये जाते हैं। यह किसी व्यक्ति अथवा इकाई द्वारा ‘ऋण भुगतान करने में असमर्थता’ की कानूनी घोषणा होती है।

दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC)  के बारे में

IBC को वर्ष 2016 में अधिनियमित किया गया था, इसका उद्देश्य विफल व्यवसायों से संबधित निपटान कार्यवाहियों में तीव्रता लाना तथा आर्थिक सुधारों को प्रोत्साहन देना था।

यह संहिता, सभी वर्गों के ऋण-दाताओं तथा ऋण-कर्ताओं के लिए इन्सॉल्वेंसी- निपटान हेतु, मौजूदा विधायी ढांचे के प्रावधानों को समेकित कर, एक मंच प्रदान करती है।

इस संहिता में निर्धारित किया गया है किसी तनावग्रस्त कंपनी से संबंधित निपटान- प्रक्रिया को अधिकतम 270 दिनों में पूरा किया जायेगा ।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) कब लागू होता है?

इसी वर्ष मार्च में, सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव के कारण छोटे और मझोले उद्यमों के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को रोकने के लिए, आईबीसी के तहत दिवाला प्रक्रिया शुरू करने हेतु न्यूनतम डिफॉल्ट की रकम सीमा को 1 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है।

दिवाला प्रकिया निस्तारण सुविधा के लिए संहिता के अंतर्गत गठित संस्थाएं

‘दिवाला पेशेवर’ (Insolvency Professionals): लाइसेंस प्राप्त दिवाला पेशेवरों का एक विशेष कैडर बनाया जाना प्रस्तावित किया गया है। ये पेशेवर निस्तारण प्रक्रिया का प्रबंधन करेंगे, देनदार की संपत्ति का प्रबंधन करेंगे, और लेनदारों को निर्णय लेने में सहायता करने हेतु जानकारी प्रदान करेंगे।

‘पेशेवर दिवाला एजेंसियां’ (Insolvency Professional Agencies): दिवाला पेशेवरों को दिवाला पेशेवर एजेंसियों के साथ पंजीकृत किया जाएगा। एजेंसियां ​​इन्सॉल्वेंसी पेशेवरों को प्रमाणित करने और उनके प्रदर्शन के लिए आचार संहिता लागू करने के लिए परीक्षाएं आयोजित करती हैं।

सूचना सुविधाएँ (Information Utilities): लेनदार, अपने ऋण की वित्तीय जानकरी की रिपोर्ट करेंगे। इस तरह की जानकारी में ऋण,  देयताओं तथा डिफ़ॉल्ट के रिकॉर्ड सम्मिलित होंगे।

निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating authorities): कंपनियों के लिए निस्तारण प्रक्रिया की कार्यवाही पर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा न्यायनिर्णय किया जायेगा; तथा व्यक्तियों के लिए न्यायनिर्णय ऋण वसूली अधिकरण (DRT) द्वारा किया जायेगा।

दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (Insolvency and Bankruptcy Board): यह बोर्ड, संहिता के अंतर्गत इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स, इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल एजेंसियों और सूचना सुविधाएँ को विनियमित करेगा। बोर्ड में भारतीय रिज़र्व बैंक, वित्त, कॉर्पोरेट मामलों तथा कानून मंत्रालय के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दिवाला और दिवालियापन क्या है?
  2. IBC कोड के तहत स्थापित विभिन्न संस्थाएं
  3. राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT)- संरचना तथा कार्य
  4. ऋण वसूली न्यायाधिकरण क्या हैं?
  5. IBC की धारा 7, 9 और 10

मेंस लिंक:

दिवाला प्रक्रिया कार्यवाहीयों के निलंबन से कोविद -19 के प्रकोप से प्रभावित कंपनियों को किस प्रकार सहायता मिलेगी। चर्चा कीजिए

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2020

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: EPI मापदंड, रैंकिंग और प्रक्रिया

मुख्य परीक्षा हेतु: महत्व, भारत का प्रदर्शन तथा सुझाए गए उपाय।

संदर्भ: हाल ही में, द्विवार्षिक ‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ (Environment Performance Index- EPI) का 12 वां संस्करण जारी किया गया है।

सूचकांक के बारे में

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक, पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमता से संबंधित 11 श्रेणियों तथा 32 प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर 180 देशों की रैंकिंग करता है।

यह सूचकांक देशों की नीतियों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का आंकलन करने की एक विधि है।

सूचकांक वर्ष 2002 में पहली बार प्रकाशित पायलट पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक से विकसित किया गया था, तथा इसे संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों में निर्धारित पर्यावरण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निर्मित किया गया था।

‘पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक’ विश्व के विभिन्न देशों की सतत् स्थिति का आकलन विभिन्न प्रदर्शन आँकड़ों के आधार पर करता है।

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक से पहले, वर्ष 1999 से 2005 के मध्य पर्यावरण स्थिरता सूचकांक (ESI) का प्रकाशन किया जाता था। पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक, येल विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल लॉ एंड पॉलिसी’ तथा कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर इंटरनेशनल अर्थ साइंस इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ द्वारा विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum- WEF) के सहयोग से तैयार किया जाता है।

भारत एवं इसके पड़ोसी देशों का प्रदर्शन

  • EPI- 2020 में भारत ने 168 वाँ स्थान प्राप्त किया है तथा इसका स्कोर 27.6 है।
  • EPI- 2018 में भारत का 177वाँ स्थान था इसका स्कोर 57 (100 में से) था।
  • भारत का पर्यावरणीय स्वास्थ्य संबंधी सभी पांच प्रमुख मापदंडों, वायु गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पेयजल, भारी धातु, अपशिष्ट प्रबंधन में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय औसत से नीचे स्कोर किया है।
  • भारत का जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं से संबंधित मापदंडों पर भी स्कोर दक्षिण एशिया के औसत स्कोर से कम रहा है।
  • दक्षिण एशियाई देशों में, भारत ’जलवायु परिवर्तन’ पर पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान (रैंक 106) पर रहा।
  • सूचकांक में भारत से पीछे रहने वाले मात्र 11 देश है – बुरुंडी, हैती, चाड, सोलोमन द्वीप, मेडागास्कर, गिनी, कोटे डी आइवर, सिएरा लियोन, अफगानिस्तान, म्यांमार और लाइबेरिया।
  • अफगानिस्तान के अतिरिक्त सभी दक्षिण एशियाई देश EPI रैंकिंग में भारत से आगे हैं।

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भारत के लिए सुझाव

  • भारत द्वारा सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय संवहनीयता प्रयासों को दोगुना किये जाने की आवश्यकता है।
  • देश के लिए हवा तथा पानी की गुणवत्ता, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण संवहनीयता संबधी मुद्दों को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

वैश्विक प्रदर्शन:

  • पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक 2020 में डेनमार्क शीर्ष स्थान पर रहा, उसके पश्चात सूची में लक्जमबर्ग एवं स्विटजरलैंड ने स्थान प्राप्त किया। यूनाइटेड किंगडम चौथे स्थान पर रहा।
  • अमेरिका पर्यावरणीय प्रदर्शन के मामले में अन्य औद्योगिक देशों से बहुत पीछे है तथा विश्व में 24 वें स्थान पर है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

छठा सामूहिक विलोपन (mass extinction)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: सामूहिक विलोपन और इसके कारण

मुख्य परिक्षा हेतु: छठा सामूहिक विलोपन को कैसे रोका जाए?

सन्दर्भ: नए शोध के अनुसार, वर्तमान में जारी छठा सामूहिक विलोपन सभ्यता के सतात्य के लिए सबसे गंभीर पर्यावरणीय खतरों में से एक हो सकता है।

यह शोध ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (PNAS) यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

प्रजातियों का सामूहिक विलोपन क्या है?

सामूहिक विलोपन (mass extinction) की घटना का संबंध प्रजातियों के विलुप्त होने की दर से है, इसमें एक छोटे सी भू-गार्भिक अवधि में पृथ्वी की तीन-चौथाई से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त हो जाती हैं।

अब तक पृथ्वी के सम्पूर्ण इतिहास में, पांच बार सामोहिक विलोपन की घटनाये हूँ चुकी हैं।

कारण और प्रभाव

पिछले 450 मिलियन वर्षों में हुई पांच सामूहिक विलोपन की घटनाएं पूर्व में उपस्थित पौधों, जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की 70-95 प्रतिशत प्रजातियों के विनाश का कारण बनीं।

इन विलोपन की घटनाओ के कारण पर्यावरण में हुए ‘विनाशकारी परिवर्तन’ जैसे, ज्वालामुखी विस्फोट, समुद्री ऑक्सीजन की कमी अथवा क्षुद्रग्रह के साथ टकराव आदि माने जाते है।

प्रत्येक विलोपन के बाद, प्रजातियों को फिर उत्पन्न होने में लाखों साल का समय लगा।

छठा सामूहिक विलोपन क्या है?

वर्तमान में जारी, छठे सामूहिक विलोपन को एंथ्रोपोसीन (Anthropocene) विलोपन के रूप में जाना जाता है।

शोधकर्ताओं ने इसे ‘सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्या’ के रूप में व्यक्त किया है क्योंकि इस विलोपन प्रजातियों का हानि स्थायी होगी।

इसके लिए मानव क्यों उत्तरदायी है?

मानव अपनी बढ़ती संख्या के कारण कि कई जीवित प्रजातियों के लिए एक ‘अभूतपूर्व खतरा’ है।

प्रजातियों का क्षति, मानव पूर्वजों द्वारा 11,000 वर्ष पूर्व कृषि का विकास करने के पश्चात से जारी है। उस समय से मानव आबादी लगभग 1 मिलियन से 7.7 बिलियन तक बढ़ गई है।

होने वाले परिवर्तन

  • पिछली सदी में 400 से अधिक कशेरुकी प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।
  • बड़े स्तनधारियों की 177 प्रजातियों में से, पिछले 100 वर्षों में अधिकांश प्रजातियों के भौगोलिक वास स्थान का 80 प्रतिशत से अधिक नष्ट हो चुका है तथा 27,000 से अधिक कशेरुक प्रजातियों में से 32 प्रतिशत की आबादी में गिरावट हुई है।
  • वर्तमान में लुप्तप्राय या विलुप्त होने की कगार पर पहुच चुकी कई प्रजातियों को वैध तथा अवैध वन्यजीव व्यापार द्वारा नष्ट किया जा रहा है।
  • स्तनधारियों की कई प्रजातियां, जैसे, चीता, शेर और जिराफ, जो एक या दो दशक पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित थीं, वे अब लुप्तप्राय हो चुकी हैं।

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संवेदनशील क्षेत्र

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में प्रजातियों में सर्वाधिक गिरावट देखी गई है। दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में, बड़े आकार की स्तनधारी प्रजातियां अपनी ऐतिहासिक सीमा की चौथाई से अधिक संख्या में नष्ट हो चुकी है।

समशीतोष्ण क्षेत्रों में में भी कुछ प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। हमारे ग्रह पर पाए जाने वाले आधे से अधिक जीव विलुप्त हो चुके हैं, यह पृथ्वी के इतिहास में सबसे बड़ी जैविक विविधता विशाल क्षरण हैं।

प्रजातियां के विलुप्त होने पर पर प्रभाव

फसल परागण तथा जल शोधन आदि प्रक्रियाओं नष्ट होने के रूप में प्रत्यक्ष प्रभाव दिखते है।

यदि किसी प्रजाति का पारिस्थितिक तंत्र में कोई एक विशिष्ट कार्य होता है, तो उसका विलोपन खाद्य श्रृंखला को प्रभावित करके अन्य प्रजातियों के लिए संकट पैदा कर सकता है।

आनुवंशिक और सांस्कृतिक परिवर्तनशीलता से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन से विलोपन के प्रभाव आगामी दशकों में और हानिकारक हो जाएंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सामूहिक विलोपन क्या है?
  2. पूर्व में हुए विलोपन के लिए उत्तरदायी कारक
  3. छठा सामूहिक विलोपन के लिए उत्तरदायी कारक

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

असम गैस रिसाव

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परिक्षा हेतु: प्राकृतिक गैस, रिसाव का स्थान तथा आसपास के क्षेत्र

मुख्य परीक्षा हेतु: रिसाव का प्रभाव, कारण तथा स्थिति नियंत्रण के तरीके

क्या घटित हुआ?

27 मई की सुबह से, असम में गैस के कुएं से प्राकृतिक गैस का लगातार बहाव हो रहा है।

राजधानी गुवाहाटी से करीब 450 किलोमीटर दूर तिनसुकिया के बाघजान गांव में स्थित ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के प्लांट में विस्फोट (ब्लोआउट) होने के पश्चात् इस कुएं से प्राकृतिक गैस का रिसाव शुरू हुआ।

रिसाव

गैस का वर्तमान निर्वहन 4,200 PSI के दबाव पर 90,000 SCMD है। जबकि सामान्य उत्पादन दबाव 2,700 PSI होता है।

विस्फोट (Blowouts) क्यों होते हैं?

कुएँ में दाब संतुलन के गडबडाने से ‘किक’ अथवा दाब में परिवर्तन होता है। यदि इन्हें तत्काल नियंत्रित नहीं किया जाता, तो ‘किक’ अचानक विस्फोट में बदल सकता है।

ब्लोआउट्स के पीछे कई संभावित कारण होते हैं, यथा; ध्यान की कमी, खराब कारीगरी, खराब रखरखाव, जीर्णता, विवर्तनिक कारक आदि।

नियंत्रित करना में कठिनाइयाँ

ब्लोआउट्स का नियंत्रण दो चीजों पर निर्भर करता है: जलाशय का आकार तथा दाब जिस पर गैस / तेल का प्रवाह होता है।

जलाशय को विशेष रूप से नियंत्रित करना मुश्किल होता है क्योंकि यह एक गैस कुआँ होता है जिसमे  किसी भी समय आग पकड़ने का खतरा रहता है।

नियंत्रण के लिए उपाय

अधिकांश ब्लोआउट स्वतः ही शांत हो जाते हैं परन्तु इसमें कई महीने का समय लग सकता हैं। किसी ब्लोआउट को नियंत्रित करने के लिए, सर्वप्रथम पानी से पंप किया जाता है, ताकि गैस दवारा आग पकड़ने का जोखिम न रहे।

आस-पास पर प्रभाव

लगभग 2,500-3,000 ग्रामीणों के 1,610 परिवारों को राहत शिविरों में भेजा गया है। नदी डॉल्फिन, तथा अन्य प्रकार की मछलियों को भारी क्षति पहुची है।

बाघजान गांव के पास से गुजरने वाली डिब्रू नदी के पानी पर भी गैस रिसाव के कारण काफी असर पड़ा है।

पैरामेडिकल स्टाफ तथा एम्बुलेंस की तैनाती की गयी है, स्थानीय लोगों को आंखों में जलन, सिरदर्द आदि जैसे लक्षणों की शिकायत प्राप्त हुई है।

इसके निकट ही बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा अधिसूचित मगुरी-मोटापुंग वेटलैंड (Maguri-Motapung wetland)-एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र अवस्थित है।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान पर प्रभाव

यह स्थान डिब्रू-साइखोवा नेशनल पार्क से 900 मीटर की हवाई दूरी पर स्थित है।

इस राष्ट्रीय उद्यान में लगभग वनस्पतियों की 36 प्रजातियाँ और जीवों की 400 प्रजातियाँ दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियाँ पायी जाती हैं।

डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क समेत संवेदनशील वेटलैंड है जहां लुप्तप्राय प्रजातियों के पक्षी प्रवास के लिए आते हैं।

यह राष्ट्रीय उद्यान प्रवासी पक्षियों और जंगली घोड़ों [Feral Horse] के लिए जाना जाता है।

यह इको-सेंसिटिव ज़ोन है, जहां. गांव वालों का कहना है कि उन्हें गैस की महक आ रही है और इस उद्यान में कई जगहों पर तेल फैल चुका है.

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस उपलब्ध जीवाश्म इधनों में सबसे स्वच्छ जीवाश्म ईंधन होती है।

इसका उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक और अन्य व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण कार्बनिक रसायनों के निर्माण में फीडस्टॉक के रूप में किया जाता है तथा साथ ही बिजली उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में, औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयों में हीटिंग के लिए उपयोग किया जाता है।

प्राकृतिक गैस का उपयोग घरों में खाना पकाने तथा परिवहन ईंधन के लिए भी किया जाता है।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-IV


 तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा कोविड –19 की ट्रोजन हॉर्स तुलना

संदर्भ: हाल ही में, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कोरोनोवायरस परीक्षण दर कम होने पर राज्य सरकार की आलोचना की। उच्च न्यायालय के अनुसार बड़ी संख्या में परीक्षण नहीं करना ट्रोजन हॉर्स को आमंत्रित करने जैसा है।

तात्पर्य

रूपक के रूप में प्रयुक्त, “ट्रोजन हॉर्स” शब्द किसी व्यक्ति अथवा वस्तु को संदर्भित करता है अंदर से हमला करने के लिए किसी लक्ष्य को गुमराह करता है।

ट्रोजन का उदाहरण प्राचीन ग्रीक की कहानी से लिया गया है।

ट्रोजन युद्ध के बारे में

ट्रोजन युद्ध, प्राचीन ग्रीक के राज्य ’स्पार्टा’ तथा ‘ट्रॉय’ के मध्य लड़ा गया था। ट्रॉय आधुनिक तुर्की के पश्चिमे किनारे पर स्थित था। युद्ध का के कारण के रूप में, स्पार्टा की रानी के ट्रॉय के राजकुमार के साथ चले जाने को बताया जाता है।

कुछ संस्करणों के अनुसार, हेलेन को ट्रोजन द्वारा अपहरण कर लिया गया था।

हेलेन के पति, स्पार्टन के राजा मेनेलौस ने अपने भाई एगेमेमोन, माइसेने के राजा (एक अन्य यूनानी राज्य) के साथ, हेलन को बचाने के लिए ट्रॉय पर आक्रमण किया।

यूनानियों ने एजियन सागर को पार किया और ट्रॉय की घेराबंदी की और हेलेन की वापसी की मांग की।

10 से अधिक वर्षों तक एक खूनी लड़ाई हुई, जिसके बाद यूनानियों ने अपने स्थान से पीछे हटने का दिखावा किया, परन्तु एक बड़े लकड़ी के घोड़े को छोड़ दिया, जिसके अंदर उनके कुछ सैनिक ट्रॉय के द्वार पर छिप गए।

बिना सोचे-समझे ट्रोजन लोगों ने लकड़ी के घोड़े अपने शहर में उपहार के तौर पर रख लिया। रात के समय, ओडीसियस के नेतृत्व में ग्रीक सैनिकों ने घोड़े से बाहर निकल कर अंदर से शहर के द्वार खोल दिए, जिसके पश्चात ग्रीक सेना ट्रॉय में प्रवेश कर गयी तथा ट्रॉय को पराजित कर दिया।

 उच्च न्यायालय का ट्रोजन हॉर्स संदर्भ

उच्च न्यायालय ने ट्रोजन हॉर्स की तुलना कोरोनोवायरस वाहक से की है।

ट्रॉय की कहानी के समान, हम कोरोनोवायरस वाहक से बातचीत कर सकते हैं, उन्हें आमंत्रित कर सकते हैं और कुछ भी संदेह नहीं होता है। इससे पहले कि हम जान पाते, वायरस से संक्रमित हो चुके होते हैं।

चूंकि, जब तक किसी व्यक्ति में वायरस के लक्षण नहीं दिखते है, तब तक बिना परीक्षण के यह जान पाना मुश्किल होता है कि व्यक्ति कोरोनोवायरस वाहक अथवा नहीं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य:

1998 में, UNESCO ने ट्रोजन अवशेषों को तुर्की के हिसारलिक (Hisarlik) में विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


डेक्कन क्वीन

यह मुंबई और पुणे के बीच चलती है।

इसका 1 जून 1930 को परिचालन आरम्भ किया गया था।

इस ट्रेन में भारत की पहली सुपरफास्ट ट्रेन तथा पहली लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक-हॉल्ट वाली ट्रेन है। यह पहली ट्रेन जिसमें ‘केवल- महिला’ डिब्बा लगाया गया।

इसको मध्य रेलवे के, ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) द्वारा शुरू किया गया था। यह क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण शहरों के मध्य शुरू की गई पहली डीलक्स ट्रेन थी, और इसका नाम पुणे के नाम पर रखा गया – जिसे “क्वीन ऑफ डेक्कन” के रूप में भी जाना जाता है।

 विश्व महासागरीय दिवस

इसे 8 जून, 2020 को मनाया गया।

विषय (Theme): “संवहनीय महासागर हेतु नवाचार (Innovation for a Sustainable Ocean)।”

इस अवधारणा को मूल रूप से 1992 में कनाडा के इंटरनेशनल सेंटर फॉर ओशन डेवलपमेंट (ICOD) और ओशन इंस्टीट्यूट ऑफ कनाडा (OIC) द्वारा अर्थ समिट – यूनाइटेड कॉन्फ्रेंस ऑन एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (UNCED) में रियो डी जनेरियो, ब्राजील में प्रस्तावित किया गया था।

2008 में विश्व महासागरीय दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई थी।

जया जेटली टास्क फोर्स

महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित।

मातृत्व की आयु, मातृ मृत्यु दर कम करने तथा पोषण स्तर में सुधार से संबंधित मुद्दों की जांच करने हेतु गठित।

  • जया जेटली द्वारा निर्देशित और यह 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
  • टास्क फोर्स के जनादेश में गर्भावस्था, जन्म और उसके बाद के दौरान स्वास्थ्य, चिकित्सा देखभाल और माँ और नवजात / शिशु / बच्चे की पोषण स्थिति तथा विवाह और मातृत्व की उम्र के सहसंबंध की जांच सम्मिलित है।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (WFSD)

दूसरा विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (WFSD) 7 जून 2020 को मनाया गया।

थीम: “खाद्य सुरक्षा, सभी का दायित्व” (Food safety, everyone’s business)।

WFSD को पहली बार 2019 में, “द फ्यूचर ऑफ फूड सेफ्टी” के अंतर्गत अदिस अबाबा सम्मेलन तथा जेनेवा फोरम 2019 में किए गए खाद्य सुरक्षा पर प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए मनाया गया था।

कोरो-बॉट (Coro-bot)- दुनिया का पहला इंटरनेट-नियंत्रितरोबोट

ठाणे के इंजीनियर ने विशेष रूप से COVID-19 रोगियों का इलाज करने वाले अस्पतालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस विशेष ‘इंटरनेट-नियंत्रित’ रोबोट का निर्माण किया है।

नर्स, वार्ड स्टाफ या अन्य देखभाल करने वाले लोगों के बगैर या रोबोट कोरोना के रोगियों के लिए भोजन, पानी, पेय पदार्थ, दवायें तथा कुछ अच्छी सलाहें भी देता है।

इसका डोम्बिवली के प्रतीक तिरोडकर ने डिजाइन तथा निर्माण किया है।

स्पंदन अभियान

छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस कर्मियों में आत्महत्या तथा सहयोगियों की हत्या घटनाओं को रोकने के लिए स्पंदन अभियान शुरू किया है।

  • अभियान के तहत, छत्तीसगढ़ सरकार से जुड़े पुलिस अधीक्षक प्रत्येक शुक्रवार को अपने जिलों में परेड शुरू करेंगे। परेड के बाद कर्मियों की शिकायतों का समाधान किया जायेगा। साथ ही, अभियान में अवसादग्रस्त अधिकारियों का चिकित्सा उपचार और परामर्श अनिवार्य किया गया है।
  • अभियान के अंतर्गत सभी जिला मुख्यालयों पर पुलिस कर्मियों के लिए योग कक्षाओं की व्यवस्था भी करेगा। इन कक्षाओं के संचालन के लिए स्थानीय योग शिक्षकों का सहयोग मांगा गया है।
  • साथ ही, पुलिस अधिकारियों को नियमित अंतराल में पुलिस कर्मियों की शिकायतों का निवारण करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे नियमित रूप से पुलिस थानों का दौरा करें तथा मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था करें।

मैग्नेटोकलोरिक पदार्थ (Magnetocaloric Materials)

यह वे पदार्थ होते हैं, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र के प्रयोग करने तथा हटाने से पदार्थ गर्म या ठंडा  हो जाता है।

चर्चा में क्यों?

इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (ARCI) के वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ-पृथ्वी-आधारित मैग्नेटोकलोरिक पदार्थ विकसित किया है जिसे प्रभावी रूप से कैंसर के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।