Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 06 June

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. मानव रहित विमान प्रणाली नियम, 2020

2. ‘तबलीगी गतिविधियां’ अब ‘विशिष्ट वीजा उल्लंघन’ है

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भुगतान मूलभूत सुविधा विकास निधि (PIDF)

2. लाइडर (LiDAR)- लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग

3. नगर वन योजना

4. रूस के आर्कटिक क्षेत्र में तेल रिसाव

5. चक्रवात अम्फन का सुंदरवन पर प्रभाव

6. गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम

  

प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC)

2. पेट्रापोल (Petrapole)

3. ‘आईकोमिट’ (#iCommit) अभियान

4. स्वस्थ एवं ऊर्जा कुशल भवन पहल

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मानव रहित विमान प्रणाली नियम, 2020

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: नियमों का अवलोकन तथा महत्व

संदर्भ: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मानव रहित विमान प्रणाली (Unmanned Aircraft System UAS) नियम, 2020 अधिसूचित किए हैं।

इन नियमों को ‘मानव रहित विमान प्रणाली’ अथवा ‘ड्रोन’ के उत्पादन, आयात, व्यापार, स्वामित्व तथा संचालन को विनियमित करने हेतु जारी किया गया हैं। यह नियम UAS अथवा ‘ड्रोन’ के व्यवसायिक उपयोग हेतु एक रूपरेखा भी निर्मित करेंगे।

अवलोकन (Overview)

ड्रोन की बिक्री कौन कर सकता है? केवल अधिकृत संस्थाएँ।

ड्रोन का स्वामित्व तथा संचालन: नागरिक उड्डयन महानिदेशक द्वारा अधिकृत संस्थाएँ।

अनुमति: ड्रोन को उड़ाने हेतु ऑनलाइन परमिट लेना आवश्यक है तथा उड़ान के पश्चात विवरण साझा करना अनिवार्य है।

प्रयोजनीयता (Applicability): निर्धारित मानदंड सभी ड्रोनों पर लागू होते हैं।

अपवाद: 250 ग्राम या उससे कम भार वाले नैनो ड्रोन बगैर ‘ड्रोन पायलट लाइसेंस’ के परिचालित किए जा सकते हैं।

बीमा: भारत में, तृतीय पक्ष वैध बीमा पॉलिसी के बिना किसी भी मानव रहित विमान (unmanned aircraft -UA) प्रणाली का परिचालन नहीं किया जा सकता है।

नियम संख्या 36 और 38: मंत्रालय के ड्राफ्ट में नियम संख्या 36 और 38 में कहा गया है कि नागर विमानन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation-DGCA) के महानिदेशक की अनुमति के बगैर मानव रहित विमान (UA) कोई भी भार नहीं ले जा सकेगा।

बगैर अनुमति के किसी भी व्यक्ति द्वारा ‘मानव रहित विमान प्रणाली (UAS)’ से कोई भी सामग्री गिरायी अथवा प्रक्षेपित नहीं की जा सकती है।

पात्रता: ड्रोन के स्वामित्व तथा उपयोग हेतु व्यक्ति की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।

कंपनियों के मामले में, कंपनी के व्यवसाय का मुख्य स्थान भारत में होना चाहिए तथा कंपनी के चेयरमैन एवं कम से कम दो तिहाई निदेशक भारतीय नागरिक होने चाहिए।

इसके अतिरिक्त, ड्रोन परिचालन करने वाले व्यवसायों का स्वामित्व तथा नियंत्रण प्रभावी रूप से भारतीय नागरिकों के पास  होना चाहिए।

नियमों की आवश्यकता

ड्रोन का वाणिज्यिक, सुरक्षा, कानून और व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और निगरानी कार्यों में व्यापक उपयोग किया जाता है, जिससे श्रम-बल की मांग तथा लागत में कमी आती है। सरकार का उद्देश्य ड्रोन के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

इसके अतिरिक्त, इन नियमों का ड्राफ्ट ऐसे समय में जारी किया गया है जब कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) ने मानव हस्तक्षेप तथा लागत को कम करने में तकनीकी भूमिका के महत्व को रेखांकित किया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किस प्रकार के ड्रोन को परमिट की आवश्यकता नहीं है?
  2. ड्रोन का स्वामित्व तथा परिचालन कौन कर सकता है?
  3. परमिट देने के लिए कौन प्राधिकृत है?
  4. नियम 36 और 38 क्या हैं?
  5. क्या तृतीय पक्ष बीमा पॉलिसी आवश्यक है?

मेंस लिंक:

‘मानव रहित विमान प्रणाली’ अथवा ‘ड्रोन’ हेतु नियमों की आवश्यकता तथा महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘तबलीगी गतिविधियां’ अब ‘विशिष्ट वीजा उल्लंघन’ है।

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: नए दिशानिर्देशों का अवलोकन तथा निहितार्थ।

संदर्भ: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नए संशोधनों के अंतर्गत, ‘तबलीगी गतिविधियों में संलिप्तता’ को विशिष्ट वीजा उल्लंघन के रूप में सम्मिलित किया है।

संशोधनों का अवलोकन

नए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत, ‘भारतीय वीजा से संबंधित सामान्य नीति दिशानिर्देशों’ में एक नई श्रेणी ‘तबलीगी गतिविधियों में संलिप्त होने पर प्रतिबंध’ जोड़ी गयी है।

दिशानिर्देशों में ऑनलाइन अथवा विदेशों में भारतीय मिशनो दवारा दिए जाने वाले वीजा हेतु 24 श्रेणियों तथा विभिन्न शर्तों का विवरण दिया गया है।

संरक्षित क्षेत्रों में भ्रमण करने, दो वर्षो से अधिक समय तक देश में ठहरने तथा वीजा उल्लंघन संबंधी मामलों में 500 डॉलर का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार:

  1. किसी भी प्रकार का भारतीय वीजा प्राप्त विदेशी नागरिक तथा ‘भारत के समुद्रपारीय नागरिक (Overseas Citizens of India-OCI) कार्डधारकों को तबलीगी गतिविधियों में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  2. धार्मिक स्थलों पर जाने तथा सामान्य धार्मिक गतिविधियों, जैसे धार्मिक प्रवचनों में समीलित होने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
  3. हालांकि, धार्मिक विचारधाराओं का प्रचार करना, धार्मिक स्थानों पर भाषण देना, धार्मिक विचारों से संबंधित ऑडियो या विजुअल प्रदर्शन / पैम्फ़लेट के वितरण, धर्मांतरण, आदि की अनुमति नहीं दी जायेगी।

मुद्दा क्या है?

गृह मंत्रालय, विदेशी नागरिकों को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति देने हेतु नोडल एजेंसी है।

गृह मंत्रालय ने, मार्च 2020 में दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ (केंद्र) में तबलीगी जमात में भाग लेने वाले 960 विदेशियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

ब्लैकलिस्ट किये गए किसी विदेशी नागरिक को भारत आने हेतु किसी भी भारतीय मिशन से वीजा नहीं मिल सकता है।

तबलीगी जमात क्या है?

तबलीगी जमात की स्थापना वर्ष 1926 में, एक देवबंदी इस्माईल विद्वान द्वारा मेवात, भारत में की गयी थी। तबलीगी जमात (Society of Preachers) मुस्लिम मज़हब के ‘शुद्धिकरण’ पर केंद्रित है। इसका विस्तार विश्व के 150 देशों में है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तबलीगी जमात क्या है?
  2. भारत द्वारा जारी विभिन्न प्रकार के वीजा?
  3. वीजा जारीकर्ता प्राधिकरण?
  4. भारत में विदेशी नागरिकों को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति देने हेतु नोडल एजेंसी।

मेंस लिंक:

तबलीगी जमात पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

भुगतान मूलभूत सुविधा विकास निधि (PIDF)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: PIDF की मुख्य विशेषताएं।

मुख्य परीक्षा हेतु: PIDF की आवश्यकता तथा महत्व, भारत में डिजिटल अवसंरचना हेतु चुनौतियां।

संदर्भ: सम्पूर्ण भारत में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने हेतु, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), 500 करोड़ रुपये की राशि से एक भुगतान मूलभूत सुविधा विकास निधि (Payments Infrastructure Development Fund(PIDF) स्थापित कर रहा है।

PIDF के बारे में:

उद्देश्य: इस निधि का गठन टियर -3 से टियर -6 केन्द्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में पॉइंट ऑफ़ सेल (Point of Sale -PoS) मूलभूत सुविधा (भौतिक और डिजिटल माध्यम दोनों) स्थापित करने हेतु अधिग्राहकों (acquirers) को प्रोत्साहित करने हेतु किया गया है।

फंड में योगदान: भारतीय रिज़र्व बैंक PIDF को ₹250 करोड़ का प्रारम्भिक योगदान देगा, जोकि कुल राशि का आधा हिस्सा होगा। शेष आधा हिस्सा कार्ड जारी करने वाले बैंकों और देश में परिचालित कार्ड नेटवर्कों द्वारा वहन किया जाएगा।

प्रबंधन: PIDF एक सलाहकार समिति द्वारा अभिशासित किया जाएगा तथा इसका प्रबंधन और प्रशासन रिज़र्व बैंक द्वारा किया जाएगा।

आवश्यकता एवं महत्व

हाल के वर्षों में देश में बैंक खातों, मोबाइल फोन, कार्ड आदि जैसे विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है।

भुगतान प्रणाली के डिजिटलीकरण को और अधिक प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए पूरे देश में और अधिकतर अल्पसेवित (under-served) क्षेत्रों में स्वीकृत मूलभूत सुविधा ढांचे को प्रोत्साहन देना आवश्यक है।

यह फंड भारत में भुगतान एवं निपटान प्रणाली पर विज़न दस्तावेज (Vision Document on Payment and Settlement Systems) 2019-2021 में प्रस्तावित उपायों के अनुरूप है।

पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) अवसंरचना की क्षमता में वृद्धि से समय के साथ नकदी की मांग में कमी होने की संभावना है। वर्ष 2021 तक लगभग 5 मिलियन कार्यशील पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) स्थापित किये जायेंगे।

स्वीकृति विकास निधि

भारतीय रिज़र्व बैंक ने, पिछले वर्ष, इसी प्रकार एक स्वीकृति विकास निधि (Acceptance Development Fund) स्थापित करने का प्रस्ताव किया था।

इस फंड का उपयोग देश भर में विशेष रूप से टियर III और टियर VI शहरों में स्वाइप मशीनों जैसी कार्ड स्वीकृति अवसंरचना के विकास को सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PIDF- योगदान, प्रबंधन एवं उद्देश्य।
  2. RBI – गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर- कार्यकाल और नियुक्ति।
  3. पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) उपकरण क्या हैं?
  4. भारत में ATM नेटवर्क का प्रबंधन कौन करता है?
  5. अवसर लागत (opportunity cost) क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

लाइडर (LiDAR)लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: यह क्या है? यह किस प्रकार कार्य करता है? अनुप्रयोग तथा क्षमता।

संदर्भ: पुरातत्वविद् वैश्विक महामारी के दौरान अपने शोध को जारी रखने हेतु LiDAR डेटा का उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक के प्रयोग से, पुरातत्वविद् लेज़र प्रकाश का उपयोग करके उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रों को बनाते हैं।

लाइडर (LiDAR) क्या है?

LiDAR एक लाइट डिटेक्शन ऐंड रेंजिंग तकनीक है। इस सुदूर संवेदन तकनीक में दूरी के मापन के लिए लक्ष्य पर लेसर प्रकाश डाला जाता है तथा परावर्तित प्रकाश का विश्लेषण किया जाता है।

इस तकनीक के जरिए दुर्गम पहाड़ी इलाकों की सड़क निर्माण में सर्वेक्षण का काम किया जाता है। इसमें स्पंदित प्रकाश को – हवाई माध्यम से एकत्र किये गए अन्य डेटा के साथ मिलाकर पृथ्वी की सटीक त्रिविमीय सूचना तथा इसकी सतह की विशेषताओं के बारे पता किया जाता है।

सर्वेक्षण के पश्चात डिजिटल चित्रों के जरिए दुर्गम इलाकों की सड़क संरचना का एकदम सही अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे जमीन की बनावट, सतह की ऊंचाई, पेड़-पौधों के फैलाव और क्षेत्रफल का सही अनुमान लगाकर मदद ली जा सकती है।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

LiDAR उपकरण में मुख्य रूप से एक लेजर, एक स्कैनर और एक विशेष जीपीएस रिसीवर होता है।

सामान्यतः हवाई जहाज तथा हेलीकॉप्टर का प्रयोग विस्तृत क्षेत्रों का LiDAR डेटा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

LiDAR तकनीक का एक साधारण सिद्धांत है – पृथ्वी की सतह पर स्थित किसी वस्तु पर लेजर प्रकाश डालना तथा परावर्तित प्रकाश के LiDAR स्रोत पर लौटने के समय की गणना करना।

प्रकाश की गति (लगभग 186,000 मील प्रति सेकंड) की तीव्रता के कारण LiDAR तकनीक के माध्यम से सटीक दूरी को मापने की प्रक्रिया काफी तीव्र होती है।

lidar

चुनौतियां

  • LiDAR तकनीक कोहरे, बारिश, बर्फ और धूल भरे मौसम में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है।
  • इसमें शीशे की दीवार अथवा दरवाजे का पता लगाने में परेशानी होती है, इसी कारण से स्मार्टफोन निर्माता और स्व-चालित कार निर्माता द्वतीयक कैमरों और सेंसर के साथ-साथ LiDAR तकनीक का प्रयोग करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  • GPS क्या है?
  • भारत सहित विभिन्न देशों के स्थान आधारित नेविगेशन सेवाएं।
  • यह किस प्रकार कार्य करता है?
  • LiDAR के अनुप्रयोग।
  • लेजर क्या है

मेंस लिंक:

LiDAR प्रौद्योगिकी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

नगर वन योजना

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: योजना की मुख्य विशेषताएं तथा महत्व।

संदर्भ: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ‘नगर वन’ (City Forest) योजना का आरम्भ किया।

नगर वन योजना के बारे में

  • इस योजना में शहरी वानिकी पर बल दिया गया है।
  • इस योजना के तहत, आगामी पांच वर्षों में सम्पूर्ण देश में लगभग 200 शहरी वन विकसित किए जायेंगे।
  • यह योजना राज्यों को शहरी पारिस्थितिक तंत्र का प्रबंधन करने का अवसर प्रदान करेगी।

शहरी वानिकी क्यों?

पारंपरिक रूप से जैव विविधता संरक्षण को दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने के लिए आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। शहरी वन इस अंतर को मिटाने का सबसे अच्छा तरीका है।

सुरक्षा की आवश्यकता

भारत जंतुओं और पौधों की कई प्रजातियों से समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है और जैव-विविधता से युक्‍त 35 वैश्विक हॉटस्पॉट्स में से 4 हॉटस्पॉट्स भारत में स्थित है, जिनमें अनेक स्थानिक प्रजातियां पायी जाती है। हालांकि बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाला है, जिससे जैव विविधता की लगातार क्षति हो रही है। जैव विविधता इस ग्रह पर सभी जीवन रूपों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है तथा विभिन्न पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करने हेतु आवश्यक है।

स्रोत: पीआइबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

रूस के आर्कटिक क्षेत्र में तेल रिसाव

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: घटना क्षेत्र तथा पर्यावरण एवं जैव विविधता पर प्रभाव।

चर्चा में क्यों?

रूस के आर्कटिक क्षेत्र में एक पॉवर प्लांट से 20 हजार टन डीजल के रिसाव के बाद स्थानीय नदी का रंग सफेद से लाल हो गया है। घटना की भयावहता को देखते हुए रूस ने आपातकाल की घोषणा कर दी है।

घटना कहां हुई?

पॉवर प्लांट से तेल बहकर अंबरनाया नदी (Ambarnaya river) में मिल गया है। यह नदी पर्यावरणीय संवेदनशील आर्कटिक महासागर में प्रवाहित होने वाले नेटवर्क का एक भाग है।

रूस के क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र (Krasnoyarsk Region) में आपातकालीन उपायों की घोषणा की गयी है, यह क्षेत्र विशाल और छिटपुट आबादी वाले साइबेरियाई प्रायद्वीप में स्थित है। पॉवर प्लांट मास्को से लगभग 3000 किमी उत्तर-पूर्व में क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के नॉरिल्स्क शहर (Norilsk city) के पास स्थित है।

रिसाव कैसे हुआ?

नॉरिल्स्क में थर्मोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost) पर निर्मित है। पर्माफ्रॉस्ट, हाल के वर्षो में जलवायु परिवर्तन के कारण दुर्बल  हुआ है। इस कारण प्लांट के ईधन टैंक को सँभालने वाले खंभे नीचे धंस गए, परिणामस्वरूप 29 मई को तेल रिसाव होना शुरू हो गया।

रिपोर्टों में कहा गया है कि लगभग 20,000 टन डीजल तेल अंबरनया नदी में छोड़ा जा चुका है, जो अब तक इसकी सतह पर 12 किलोमीटर की दूरी बह चुका है।

रूस दवारा उठाये गए कदम

  1. घटना की जांच के आदेश दे दिए गए है।
  2. बूम अवरोधों (Boom obstacles) को नदी में स्थापित किया गया था, लेकिन वे उथले पानी के कारण तेल को नियंत्रित करने में असमर्थ रहे।
  3. आपराधिक कार्यवाहियों को शुरू किया गया है पॉवर प्लांट के प्रमुख को हिरासत में लिया गया है।
  4. आपातकाल की घोषणा के अंतर्गत स्थिति नियंत्रण हेतु अतिरिक्त बलों तथा संघीय संसाधनों को लगाया जायेगा।

नुकसान की संभावित सीमा

  • पर्यावरणविदों ने कहा है कि नदी के उथले पानी, इसकी दूरस्थ अवस्थिति तथा तेल रिसाव की मात्रा को देखते हुए नदी को साफ करना मुश्किल होगा।
  • तेल रिसाव की मात्रा के सन्दर्भ में आधुनिक रूस के इतिहास में यह दूसरा सबसे बड़ा तेल रिसाव है।
  • आर्कटिक जलमार्ग को नुकसान कम से कम 6 बिलियन रूबल ($ 76 मिलियन से अधिक) हो सकता है।
  • रिसाव नियंत्रण के लिए प्रयुक्त की गयी बूई (Buoys) प्रदूषण के मात्र एक छोटे हिस्से को रोकने में सहायक होंगी और लगभग पूरा डीजल ईंधन पर्यावरण को दूषित करेगा।

kera_sea

तेल रिसाव का पर्माफ्रॉस्ट पर प्रभाव

लगातार या दो से अधिक वर्षों तक जमी रहने वाली सतह को पर्माफ्रॉस्ट माना जाता है।

एक अध्ययन के अनुसार, पर्माफ्रॉस्ट, चट्टान, मिट्टी, अवसाद तथा बर्फ से मिलकर बनी होती है। कुछ पर्माफ्रॉस्ट सैकड़ों तथा हजारों वर्षों से जमे हुए हैं।

नोरिल्स्क, पर्माफ्रॉस्ट सतह पर निर्मित है तथा जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ के पिघलने से इसके अस्तित्व के लिए संकट उत्पन्न हो गया है।

डीजल रिसाव का स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अंबरनाया नदी प्यासिनो झील (Pyasino lake) से होकर बहती है तथा पाइसीना (Pyasina) नदी इसे आर्कटिक महासागर में स्थित ‘कारा सागर’ (Kara sea) से जोड़ती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानचित्र पर निम्नलिखित स्थलों का पता लगाएँ:
    • प्यासिनो झील (Pyasino lake)
    • ‘कारा सागर’ (Kara sea)
    • अंबरनाया नदी
  1. आर्कटिक वृत्त में स्थित देश
  2. आर्कटिक परिषद
  3. अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग कमीशन

मेंस लिंक:

रूस के आर्कटिक क्षेत्र में तेल रिसाव पर्यावरण की चिंता का कारण बन गया है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

चक्रवात अम्फन का सुंदरवन पर प्रभाव

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: सुंदरबन के बारे में, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात, चक्रवातों के प्रभाव।

मुख्य परीक्षा हेतु: सुंदरवन का महत्व, आगे के उपाय।

संदर्भ: भारत और बांग्लादेश में पिछले महीने आया शक्तिशाली चक्रवात सुंदरबन डेल्टा के विशाल मैंग्रोव वनों से होकर गुजरा।

चर्चा में क्यों?

चक्रवात का सुंदरबन में निवास करने वाले जीव-जंतुओं पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। इस तूफ़ान से सुंदरबन का लगभग 28% हिस्सा नष्ट हो गया है।

वृहद स्तर पर वृक्षारोपण करने के बाद भी मैंग्रोव को पुनः बहाल करने में वर्षों का समय लग सकता हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चक्रवात के दौरान मैंग्रोव हवा की तेज गति को कम करते हैं तथा तूफ़ान के कारण उत्पन्न हुई लहरों को भी रोकते है।

सुंदरवन पर चक्रवात का प्रभाव

20 मई को चक्रवात अम्फान (Amphan) के कारण भारी वर्षा तथा भयंकर तूफान, जिसमे हवाओं की गति 170 किलोमीटर (105 मील) प्रति घंटे से 190 किलोमीटर प्रति घंटे (118 मील प्रति घंटे) थी, ने सुंदरबन में भयानक तबाही का प्रदर्शन किया।

इस क्षेत्र में लगभग 4.5 मिलियन लोगों का जीवन संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा हुआ है। खेती, मछली पकड़ना, शहद इकट्ठा करना और पर्यटन के कुछ रोजगार के अवसर इन लोगो को उपलब्ध हैं। परन्तु, जलवायु परिवर्तन इस क्षेत्र के निवासियों के जीवन को दुष्कर बना रहा है।

चक्रवात अम्फान ने बाघों को मानव बस्तियों में घुसने से रोकने के लिए बनायी गयी 100 किलोमीटर (62-मील) लम्बी नायलॉन की बाड़ को भी नष्ट कर दिया।

चक्रवात के कारण तटबंधों का टूटने से स्थलीय भाग में खारे पानी का प्रवाह होने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर सबसे स्थाई प्रभाव पड़ेगा।

COVID 19 महामारी का प्रभाव

कोरोनोवायरस, चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए किये जा रहे राहत कार्य को जटिल बना रहा है। चक्रवात के दौरान, ग्रामीण भीड़-भाड़ वाले तूफान-आश्रय केन्द्रों में एकत्रित हो गए, जिस कारण वायरस के फैलने का खतरा बढ़ गया है। तूफान के बाद से राज्य में वायरस से संक्रमित मामलों की संख्या बढ़कर 5,500 से अधिक हो गई है।

सुंदरवन के बारे में

  1. सुंदरवन के अंतर्गत बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर गंगा और ब्रह्मपुत्र के डेल्टा में सैकड़ों द्वीप और नदियों, सहायक नदियों का एक नेटवर्क शामिल है, तथा यह भारत और बांग्लादेश में विस्तृत हैं।
  2. डेल्टा के दक्षिण-पश्चिमी भाग पर स्थित, भारतीय सुंदरबन, देश के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक है।
  3. 3 भारत में सुंदरबन 27 वां रामसर स्थल है तथा 4,23,000 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में विस्तृत देश में सबसे बड़ी संरक्षित आर्द्रभूमि है।
  4. भारतीय सुंदरवन, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है तथा रॉयल बंगाल टाइगर का वास-स्थल है।
  5. यह जंगली मुर्गी, विशाल छिपकली, चित्तीदार हिरण, जंगली सूअर, मगरमच्छ आदि जैसे कई अन्य वन्य पशुओं का भी प्राकृतिक निवास स्थान है। साइबेरियाई बतख खानाबदोश मौसम के दौरान यहां आते हैं। सुंदरबन विलुप्तप्राय प्रजातियों जैसे बटागुर बसका, किंग क्रैब और ऑलिव रिडल कछुए का भी निवास स्थान है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सुंदरवन कहाँ है?
  2. मैंग्रोव क्या हैं?
  3. क्षेत्रों में वनस्पति और जीव
  4. चक्रवात का नामकरण कैसे किया जाता है?
  5. बंगाल की खडी क्षेत्र में हाल के चक्रवात

मेंस लिंक:

भारत में मैंग्रोव पर चक्रवात अम्फान के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

 

विषय: विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।

गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: अधिनियम के प्रमुख प्रावधान, संशोधन तथा हाल में किये गए परिवर्तन।

मुख्य परीक्षा हेतु: कानून का महत्व तथा आलोचनाएँ।

संदर्भ: पुलिस ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित एक मामले के संबंध में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत, ‘पिंजरा तोड़’ समूह से संबंधित देवांगना कालिता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के बारे में:

1967 में पारित, गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम [Unlawful Activities (Prevention) Act-UAPA] का उद्देश्य भारत में गैरकानूनी गतिविधि समूहों की प्रभावी रोकथाम करना है।

यह अधिनियम केंद्र सरकार को पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, जिसके द्वारा यदि केंद्र किसी गतिविधि को गैरकानूनी घोषित कर सकता है।

इसके अंतर्गत अधिकतम दंड के रूप में मृत्युदंड तथा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।

UAPA के तहत, भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों को आरोपित किया जा सकता है। यह अधिनियम भारतीय और विदेशी अपराधियों पर सामान रूप से लागू होता है, भले ही अपराध भारत के बाहर विदेशी भूमि पर किया गया हो।

UAPA के तहत, जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बाद अधिकतम 180 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर सकती है और अदालत को सूचित करने के बाद इस अवधि को और आगे बढ़ाया जा सकता है।

संशोधन तथा परिवर्तन

2004 के संशोधन के द्वारा आतंकवादी गतिविधियों के लिए संगठनों पर प्रतिबंध लगाने हेतु अपराधों की सूची में “आतंकवादी अधिनियम” जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत 34 संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

वर्ष 2004 तक, “गैरकानूनी” गतिविधियों को किसी क्षेत्र के अलगाव तथा उस पर गैर-कानूनी अधिकार से संबंधित अपराधों  के लिए संदर्भित किया जाता था।

अगस्त में, संसद ने अधिनियम में प्रदत्त कुछ आधारों पर व्यक्तियों को आतंकवादी के रूप में नामित करने हेतु गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 को मंजूरी दी गयी।

  • यह संशोधन राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को ऐसी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देता है जो उसके द्वारा की जा रही जाँच में आतंकवाद से होने वाली आय से बनी हो।
  • यह अधिनियम राज्य में डीएसपी अथवा एसीपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के अतिरिक्त आतंकवाद के मामलों की जांच करने हेतु NIA के इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देता है।

UAPA की आलोचना

इस कानून का अक्सर दुरुपयोग होता है।

राजनीतिक विरोधियों तथा सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने बाले नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।

2019 के संशोधन से जांच एजेंसियों को अनियंत्रित अधिकार दिए गए है।

यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है, क्योंकि ‘पुलिस’ भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत एक राज्य का विषय है।

क्या करने की आवश्यकता है?

सरकार के आलोचकों को चुप कराने के लिए आतंकवाद-रोधी कानूनों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

आतंकवादियों के रूप में व्यक्तियों को अभिहित करने तथा निष्पक्षता के साथ मामलों की जांच प्रक्रिया का पर्यवेक्षण के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए।

कानून के अंतर्गत मध्यस्थता की न्यायिक समीक्षा के माध्यम से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गैरकानूनी गतिविधि की परिभाषा।
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां।
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा बदलाव लाया गया।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC)

ECGC पूर्ण रूप से सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, इसकी स्थापना वर्ष 1957 में क्रेडिट बीमा सेवाएं प्रदान करके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए की गयी थी।

ECGC ने निर्यातकों की उधार पात्रता में वृद्धि करने की दृष्टि से बैंकों की गारण्टी प्रदान करता है, ताकि वे अपने बैंकरों से अच्छी व अधिक सुविधायें प्राप्त कर सकें।

गारंटी द्वारा बैंकों को यह आश्वासन दिया जाता है कि यदि निर्यातक बैंक के प्रति अपनी देयताओं की पूर्ति करने में असमर्थ रहता है तथा जिसके फलस्वरूप बैंक को हानि उठानी पड़ती है तो ECGC बैंक को हुई हानि के बड़े अंश की भरपाई करेगा ।

यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

पेट्रापोल (Petrapole)

यह भारत और बांग्लादेश मध्य पेट्रापोल-बेनापोल सीमा चौकी पर भारतीय ओर का बिंदु है। यह  पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में बोंगावं (Bongaon) के निकट बांग्लादेश-भारत सीमा पर स्थित है।

  • पेट्रापोल सीमा दक्षिण बंगाल में एकमात्र स्थलीय पोर्ट है। यह एशिया का सबसे बड़ा स्थलीय सीमा शुल्क स्टेशन भी है।
  • इस स्थलीय पोर्ट से भारत और बांग्लादेश के मध्य लगभग 60 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार होता है।

wagah_borders

आईकोमिट’ (#iCommit) अभियान

इस अभियान कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लॉन्च किया गया।

  • #iCommit अभियान एक ऊर्जा प्रत्यास्थ भविष्य के निर्माण के विचार के आसपास केंद्रित है।
  • यह भविष्य में एक मजबूत और लचीली ऊर्जा प्रणाली कायम करने के लिए स्थायित्व कायम करने का स्पष्ट आह्वानहै
  • यह पहल, विद्युत् मंत्रालय के ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (Energy Efficiency Services Limited EESL) द्वारा संचालित है।
  • ‘आईकोमिट’ पहल से सरकारों, कंपनियों और बहुपक्षीय और द्विपक्षीय संगठनों, थिंक टैंक और व्यक्तियों आदि को एकजुट किया जा रहा है।

‘स्वस्थ और ऊर्जा कुशल भवन’ पहल

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) के द्वारा यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स (USAID) के MAITREE कार्यक्रम की साझेदारी में’  ‘स्वस्थ और ऊर्जा कुशल भवन’ पहल (Healthy and Energy Efficient Buildings Initiative) का आरम्भ किया गया।

  • ऊर्जा दक्षता के लिए बाजार एकीकरण और परिवर्तन कार्यक्रम (The Market Integration and Transformation Program for Energy Efficiency MAITREE) के अंतर्गत शुरू की गयी यह पहल ऊर्जा मंत्रालय तथा USAID के मध्य यूएस-भारत द्विपक्षीय साझेदारी का एक हिस्सा है।
  • इसका उद्देश्य लागत प्रभावी ऊर्जा को अपनाना है।