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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 05 June

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. नागालैंड के सात विधायकों पर निरर्हता (Disqualification) का संकट

2. मॉब लिंचिंग के विरुद्ध क़ानून

3. TULIP (ट्यूलिप) – शहरी अध्‍ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम

4. स्‍वदेस (SWADES): लौटने वाले नागरिकों का कौशल मानचित्रण

5. ग्लोबल वैक्सीन शिखर सम्‍मेलन (GVS)

6. म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (MLSA)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)

 

प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. साल-भर 60 अभियान (SaalBhar60 campaign)

2. त्रिपोली

3. विश्व पर्यावरण दिवस

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

 नागालैंड के सात विधायकों पर निरर्हता (Disqualification) का संकट

 क्या अध्ययन करें?

प्रारंभिक परीक्षा हेतु: संविधान की 10 वीं अनुसूची की विशेषताएं, बर्खास्तगी, अपवाद तथा निर्णय की न्यायिक समीक्षा।

मुख्य परीक्षा हेतु: दलबदल विरोधी कानून का महत्व, इसके दुरुपयोग से संबंधित चिंताएं तथा पारदर्शिता में सुधार के उपाय।

संदर्भ: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने नागालैंड विधानसभा अध्यक्ष को विपक्षी नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के सात विधायकों के विरुद्ध निरर्हता कार्यवाही को पूर्ण करने तथा छह सप्ताह की समय सीमा में उपयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

मुद्दा क्या है?

नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) ने 24 अप्रैल, 2019 को, अपने सात निलंबित विधायकों के खिलाफ निरर्हता याचिका दायर की थी। NPF ने आरोप लगाया है कि, इन सातो विधायकों ने वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के पार्टी के सामूहिक निर्णय की अवहेलना की।

NPF ने दावा किया कि इन सात विधायकों ने पार्टी की सदस्यता त्याग दी है, जिससे संविधान की 10 वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून- Anti-Defection Law) के प्रावधानों के अंतर्गत निरर्हक (Disqualified) घोषित किया जाए।

इन विधायकों का तर्क है कि कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने हेतु NPF का निर्णय “क्षेत्रीयता के सिद्धांत के खिलाफ” था। इन विधायकों का कहना है कि उन्होंने दूसरे उम्मीदवार का समर्थन किया है। नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) ने 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में अपना कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था।

दलबदल विरोधी कानून क्या है?

संविधान में, 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा एक नयी अनुसूची (दसवीं अनुसूची) जोड़ी गई थी।

  • इसमें सदन के सदस्यों द्वारा एक राजनीतिक दल से दूसरे दल में दल-बदल के आधार पर निरर्हता (Disqualification) के बारे में प्रावधान किया गया है।
  • इसमें सदन के किसी अन्य सदस्य द्वारा दी गयी याचिका पर सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा ‘दल-बदल’ के आधार पर सदस्यों को बर्खास्त किये जा सकने की प्रक्रिया को निर्धारित किया गया है।
  • दल-बदल कानून लागू करने के सभी अधिकार सदन के अध्यक्ष या सभापति को दिए गए हैं एवं उनका निर्णय अंतिम होता है

यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं दोनों पर सामान रूप से लागू होता है।

निरर्हता (Disqualification)

यदि किसी राजनीतिक दल से संबंधित सदन का सदस्य:

  1. स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता त्याग देता है, अथवा
  2. अपनी राजनीतिक पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान करता है, अथवा सभा में मतदान नहीं करता है। हालांकि, यदि सदस्य ने पूर्व अनुमति ले ली है, या इस तरह के मतदान के लिए 15 दिनों के भीतर पार्टी द्वारा उसकी निंदा की जाती है, तो सदस्य को अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।
  3. यदि चुनाव के बाद कोई निर्दलीय उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है।
  4. यदि विधायिका का सदस्य बनने के छह महीने बाद कोई नामित सदस्य किसी पार्टी में शामिल होता है।

कानून के अंतर्गत अपवाद

सदन के सदस्य कुछ परिस्थितियों में निरर्हता के जोखिम के बिना अपने दल को बदल सकते हैं।

  • इस विधान में किसी दल के द्वारा किसी अन्य दल में विलय करने करने की अनुमति है बशर्ते कि उसके कम से कम दो-तिहाई विधायक विलय के पक्ष में हों।
  • ऐसे परिदृश्य में, अन्य दल में विलय का निर्णय लेने वाले सदस्यों तथा मूल दल में रहने वाले सदस्यों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

पीठासीन अधिकारी के निर्णय की न्यायिक समीक्षा

इस विधान के प्रारम्भ में कहा गया है कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन नहीं होगा। उच्चत्तम न्यायालय ने वर्ष 1992 में इस शर्त को खारिज कर दिया तथा इस सन्दर्भ में पीठासीन अधिकारी के निर्णय के विरूद्ध उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में अपील की अनुमति प्रदान की। हालाँकि, जब तक पीठासीन अधिकारी अपना आदेश नहीं देता तब तक कोई भी न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।

दल-बदल विरोधी कानून के लाभ

  1. दल परिवर्तन पर लगाम लगाकर सरकार को स्थिरता प्रदान करता है।
  2. यह विधान सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार संबधित दल तथा दल के लिए मतदान करने वाले नागरिकों के प्रति निष्ठावान बने रहें।
  3. दलगत अनुशासन को बढ़ावा देता है।
  4. दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को आकर्षित किए बिना राजनीतिक दलों के विलय की सुविधा देता है।
  5. राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार को कम करने की संभावना होती है।
  6. दल-बदल करने वाले सदस्यों के खिलाफ दंडात्मक उपायों का प्रावधान करता है।

दल-बदल विरोधी कानून पर समितियां

चुनावी सुधारों पर दिनेश गोस्वामी समिति:

दिनेश गोस्वामी समिति ने कहा कि निरर्हता उन मामलों तक सीमित होनी चाहिए जहाँ:

  • कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है,
  • कोई सदस्य मतदान से परहेज करता है, अथवा विश्वास प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव में पार्टी व्हिप के विपरीत वोट करता है। राजनीतिक दल तभी व्हिप केवल तभी जारी कर सकते है जब सरकार खतरे में हो।

 विधि आयोग (170 वीं रिपोर्ट)

  • इसके अनुसार- ऐसे प्रावधान जो विभाजन और विलय को निरर्हता (Disqualification) से छूट प्रदान करते हैं, समाप्त किये जाने चाहिए।
  • चुनाव पूर्व चुनावी मोर्चो (गोलबंदी) को दलबदल विरोधी कानून के तहत राजनीतिक दलों के रूप में माना जाना चाहिए।
  • इसके अलावा राजनीतिक दलों को व्हिप जारी करने को केवल उन मामलों में सीमित करना चाहिए जब सरकार खतरे में हो।

चुनाव आयोग

दसवीं अनुसूची के अंतर्गत, राष्ट्रपति / राज्यपाल द्वारा निर्णय चुनाव आयोग की बाध्यकारी सलाह पर किए जाने चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दल-बदल विरोधी कानून के संबंध में विभिन्न समितियों और आयोगों के नाम।
  2. समितियां बनाम आयोग।
  3. पीठासीन अधिकारी बनाम न्यायिक समीक्षा का निर्णय।
  4. क्या पीठासीन अधिकारी पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है?

मेंस लिंक:

दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या यह कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिन्दू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मॉब लिंचिंग के विरुद्ध क़ानून

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: उच्चत्तम न्यायालय के दिशानिर्देश तथा इस संबंध में क़ानून।

मुख्य परीक्षा हेतु: आवश्यकता तथा चुनौतियाँ

संदर्भ: सम्पूर्ण पूर्वोत्तर भारत के एक विधिक समूह ने मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) से विशेष रूप से निपटने के लिए एक कानून की मांग की है।

यह मांग मई महीने में एक सप्ताह के अन्दर असम में दो लोगों की हत्या के बाद की गयी है।

लिंचिंग का क्या तात्पर्य है?

धर्म, जाति, जाति, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, खान-पान, यौन-अभिरुचि, राजनीतिक संबद्धता, जातीयता अथवा किसी अन्य संबंधित आधार पर भीड़ द्वारा नियोजित अथवा तात्कालिक हिंसा या हिंसा भड़काने वाले कृत्यों आदि को मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) कहा जाता है।

इसमें अनियंत्रित भीड़ द्वारा किसी दोषी को उसके किये अपराध के लिये या कभी-कभी मात्र अफवाहों के आधार पर ही बिना अपराध किये भी तत्काल सज़ा दी जाए अथवा उसे पीट-पीट कर मार डाला जाता है।

उच्चत्तम न्यायालय के दिशानिर्देश

  1. लिंचिंग एक ‘पृथक अपराध’ होगा तथा ट्रायल कोर्ट अभियुक्तों को दोषी ठहराए जाने पर अधिकतम सजा का प्रावधान कर मॉब लिंचिंग करने वाली भीड़ के लिए कड़ा उदहारण स्थापित करें।
  2. राज्य सरकारें प्रत्येक ज़िले में मॉब लिंचिंग और हिंसा को रोकने के उपायों के लिये एक सीनियर पुलिस अधिकारी को प्राधिकृत करें।
  3. राज्य सरकारें उन ज़िलों, तहसीलों, गाँवों को चिन्हित करें जहाँ हाल ही में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ हुई हैं।
  4. नोडल अधिकारी मॉब लिंचिंग से संबंधित ज़िला स्तर पर समन्वय के मुद्दों को राज्य के DGP के समक्ष प्रस्तुत करेगें।
  5. प्रत्येक पुलिस अधिकारी सतर्कता (Vigilantism) के भेष में एकत्रित अथवा किसी अन्य प्रकार की भीड़, जो हिंसा-उन्मुख हो सकती है, को तितर-बितर करना सुनिश्चित करेगा।
  6. केंद्र तथा राज्य सरकारों को रेडियो, टेलीविज़न और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह प्रसारित कराना होगा कि किसी भी प्रकार की मॉब लिंचिंग एवं हिंसा की घटना में शामिल होने पर विधि के अनुसार कठोर दंड दिया जा सकता है।
  7. केंद्र और राज्य सरकारें, भीड़-भाड़ और हिंसा के गंभीर परिणामों के बारे में रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित करेंगी।
  8. राज्य पुलिस द्वारा किए गए उपायों के बावजूद, मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएँ होने पर संबंधित पुलिस स्टेशन तुरंत एफआईआर दर्ज करेगा।
  9. राज्य सरकारें मॉब लिंचिंग से प्रभावित व्यक्तियों के लिये क्षतिपूर्ति योजना प्रारंभ करेगी।
  10. यदि कोई पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन का कोई अधिकारी अपने कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहता है, तो यह जानबूझकर की गई लापरवाही माना जाएगा।

समय की मांग

प्रत्येक बार ऑनर किलिंग, घृणा-अपराधों, डायन-हत्या अथवा मॉब लिंचिंग की घटनाओं के होने पर  इन अपराधों से निपटने के लिए विशेष कानून की मांग उठायी जाती हैं। लेकिन, तथ्य यह है कि यह  अपराध हत्याओं के अलावा और कुछ नहीं हैं तथा IPC और सीआरपीसी (CrPC) के तहत मौजूदा प्रावधान ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। इन अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों और प्रवर्तन एजेंसियों को अधिक जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।

इस सन्दर्भ में विभिन्न राज्यों द्वारा किये गए प्रयास

मणिपुर सरकार 2018 में इस संदर्भ में कुछ तार्किक और प्रासंगिक उपबंधो को सम्मिलित करते हुए एक विधेयक पारित किया ।

राजस्थान सरकार द्वारा अगस्त 2019 में लिंचिंग के खिलाफ एक विधेयक पारित किया गया।

पश्चिम बंगाल सरकार ने भी मॉब लिंचिंग के विरूद्ध कठोर प्रावधानों सहित एक विधेयक पेश किया।

केंद्र सरकार क्या कर सकती है?

  • सुप्रीमकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, केंद्र उन डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान कर सकती है, जो मॉब लिंचिंग के पीड़ितों का इलाज करने में देरी करते है तथा पुलिस के भय अथवा किसी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रहित होकर झूठी रिपोर्ट तैयार करते हैं।
  • पीड़ितों के लिए क्षतिपूर्ति योजना के तहत, पीड़ितों को भुगतान की जाने वाली राशि अपराध-कर्ताओं से वसूल की जानी चाहिए तथा लिंचिंग किये जाने वाले स्थानों पर सामूहिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
  • कानूनों को तैयार करते समय, केंद्र सरकार उन राजनीतिक नेताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए भी प्रावधान करे जो भीड़ को लिंचिग करने के लिए उकसाने के दोषी पाए गए हों।
  • मणिपुर सरकार द्वारा अधिनियमित कानून में कर्तव्य से विचलन के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार के क़ानून को केंद्रीय कानूनों में सम्मिलित किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रावधान पुलिस अधिकारियों को पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्रवाई करने के लिए रोका जा सकेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मॉब लिंचिंग के विरुद्ध किन राज्यों कानून पारित किये हैं?
  2. आईपीसी के तहत मॉब लिंचिंग के खिलाफ कौन से प्रावधान उपलब्ध हैं?

मेंस लिंक:

मॉब लिंचिंग भारत में एक अक्सर होने वाली घटना बन गई है जो धार्मिक और जातिगत अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए नफरत व हिंसा को बढ़ा रही है। इसके कारक- कारणों को समझाएं तथा  इससे निपटने के तरीके सुझाइए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

TULIP (ट्यूलिप) – शहरी अध्‍ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: मुख्य विशेषताएं तथा महत्व।

संदर्भ: देश भर के सभी शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Body-ULB) एवं स्मार्ट शहरों में नए स्नातकों को प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने हेतु ‘TULIP (ट्यूलिप) – शहरी अध्‍ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम’ (TULIP – Urban Learning Internship Program) का आरम्भ किया गया है।

वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2020-21 के बजट के अंतर्गत ‘आकांक्षापूर्ण भारत (Aspirational India) की घोषणा के अनुरूप TULIP की कल्पना की गई है।

प्रमुख विशेषताऐं

  1. TULIP शहरी क्षेत्र में नए स्नातकों को अनुभवात्मक सीखने के अवसर प्रदान करने का एक कार्यक्रम है।
  2. भारत के स्नातकों के बाज़ार मूल्‍य को बढ़ाने में मदद करेगा और शहरी नियोजन, परिवहन इंजीनियरिंग, पर्यावरण, नगरपालिका वित्त आदि जैसे विविध क्षेत्रों में एक संभावित प्रतिभा पूल बनाने में मदद करेगा।
  3. यह भारत की शहरी चुनौतियों के समाधान के लिए सह-निर्माण में युवाओं को जोड़ने के साथ नए विचारों और ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देगा।
  4. यह पहल वर्ष 2025 तक MHRD और AICTE के 1 करोड़ सफल इंटर्नशिप के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम की आवश्यकता तथा महत्व

  • इस तरह के कार्यक्रम से भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा लेने में मदद मिलेगी, क्योंकि आने वाले वर्षों में यह दुनिया की काम करने वाली उम्र की सबसे बड़ी आबादी होगी।
  • भारत में तकनीकी स्नातकों का पर्याप्त पूल है, जिनको उनके पेशेवर विकास के लिए वास्तविक दुनिया की परियोजना कार्यान्वयन और नियोजन तक पहुंचाना आवश्यक है।
  • सामान्य शिक्षा समाज में मौजूद उपयोगी ज्ञान की गहराई को नहीं दर्शा सकती है। शिक्षा को, ‘अध्‍ययन से कार्य’ के स्थान पर ‘कार्य से अध्‍ययन’ के रूप में नये सिरे से कल्‍पना करने की आवश्यकता है।
  • इस प्रकार TULIP भारत के शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Body-ULB) एवं स्मार्ट शहरों के कामकाज में नयी ऊर्जा तथा विचारों के साथ-साथ सीखने के अनुभव के साथ इंटर्नशिप प्रदान करने के दोहरे लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ।

स्‍वदेस (SWADES): लौटने वाले नागरिकों का कौशल मानचित्रण 

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: मुख्य विशेषताएं और SWADES का महत्व

संदर्भ:  भारत सरकार द्वारा वंदे भारत मिशन के तहत लौटने वाले नागरिकों का कौशल मानचित्रण करने के लिए एक नई पहल स्‍वदेस (SWADES Skilled Workers Arrival Database for Employment Support) शुरू की गयी है।

प्रमुख विशेषताऐं

  1. यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
  2. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation -NSDC) परियोजना के कार्यान्वयन का सहयोग कर रहा है।
  3. इसका उद्देश्य भारतीय और विदेशी कम्‍पनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिए उनके कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है।
  4. एकत्रित जानकारी को देश में नियोजन के उपयुक्त अवसरों के लिए कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा।

 कार्यान्वयन

लौटने वाले नागरिकों को एक ऑनलाइन SWADES कौशल कार्ड भरना आवश्यक है।

यह कार्ड राज्य सरकारों, उद्योग संघों और नियोक्ताओं सहित प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के जरिये रोजगार के उपयुक्त अवसरों के साथ लौटने वाले नागरिकों को प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करेगा।

आवश्यकता तथा महत्व

दुनिया भर में COVID-19 के फैलने से हजारों श्रमिकों पर जबरदस्‍त आर्थिक प्रभाव पड़ा है तथा वैश्विक स्तर पर सैकड़ों कंपनियां बंद हो रही हैं।

भारत सरकार के वंदे भारत मिशनके माध्यम से देश लौटने वाले हमारे अनेक नागरिक अपने भविष्य के रोजगार के अवसरों को लेकर अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं।

इस पहल से वापस लौटने वाले कार्य बल को उनके कौशल के अनुसार नियोजन में मदद मिलेगी।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) क्या है?
  2. राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन क्या है?
  3. SWADES का कार्यान्वयन?
  4. वंदे भारत मिशन क्या है?

स्रोत: पीआइबी

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

ग्लोबल वैक्सीन शिखर सम्‍मेलन (GVS)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: GVS तथा GAVI के बारे में।

मुख्य परीक्षा हेतु: गठबंधन का महत्व।

संदर्भ: भारतीय प्रधान मंत्री ने हाल ही में ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा आयोजित वर्चुअल ग्लोबल वैक्सीन शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। इस सम्मलेन में 50 से अधिक देशों – व्यापारिक नेताओं, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, नागरिक समाज, सरकारी मंत्रियों, राष्ट्राध्यक्षों और देश के नेताओं द्वारा भाग लिया गया।

इस शिखर सम्मेलन द्वारा वैश्विक वैक्सीन गठबंधन गावी (GAVI) को लगभग £ 7 बिलियन का योगदान प्राप्त हुआ। भारत ने GAVI को 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया है।

पृष्ठभूमि

इस वर्चुअल शिखर सम्मेलन का आयोजन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा कोरोनोवायरस से बचाव के लिए संभावित वैक्सीन हेतु किये गए फास्ट-ट्रैक परीक्षणों के मद्देनजर किया गया। इस आयोजन से ब्रिटेन को विश्व के सबसे गरीब देशों में अगले पांच वर्षो के लिए संक्रामक रोगों के खिलाफ 300 मिलियन से अधिक बच्चों को टीकाकरण के लिए आवश्यक धन जुटाने में सहयोग की उम्मीद है।

GAVI क्या है?

2000 में गठित किया गया, GAVI– वैश्विक वैक्सीन गठबंधन, एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो विश्व के गरीब देशों के बच्चों हेतु नए तथा अप्रयुक्त टीकों को उपलब्ध कराने के समान लक्ष्यों वाले सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को एक साथ लाता है। .

सदस्य: GAVI, विकासशील देशों और अनुदान देने वाली सरकारों, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, विश्व बैंक, औद्योगिक और विकासशील देशों के वैक्सीन उद्यमियों, अनुसंधान और तकनीकी एजेंसियों, नागरिक समाज, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और अन्य निजी समाज-सेवी व्यक्तियों को एक मंच पर एकत्र करता है।

gavi

मुख्य गतिविधियां

  1. GAVI, गरीब देशों में टीकाकरण की पहुंच बढ़ाकर, बच्चों के जीवन बचाने तथा लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के मिशन का संचालन करता है।
  2. यह प्रदर्शन तथा परिणामों पर ध्यान केंद्रित करके संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (Millennium Development Goals) को प्राप्त करने में योगदान देता है।
  3. इसके सहयोगी स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकारण हेतु टीके तथा बौद्धिक संसाधनों के लिए धन उपलब्ध कराते हैं।
  4. वे संवहनीय तरीके से टीकाकरण तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान करने हेतु स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमताओं को सशक्त बनाने में भी योगदान करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GAVI के सदस्य?
  2. GAVI में सबसे बड़ा योगदानकर्ता?
  3. हाल ही में वैश्विक वैक्सीन शिखर सम्मेलन का आयोजन किसने किया?
  4. भारत ने GAVI को कितनी राशि के अनुदान का वायदा किया है?
  5. वैक्सीन क्या है?
  6. विभिन्न प्रकार के टीके क्या हैं?

मेंस लिंक:

GAVI के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआइबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (MLSA)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: MLSA का अवलोकन तथा विशेषताएं।

मुख्य परीक्षा हेतु: समझौते के महत्व और निहितार्थ।

संदर्भ: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने ‘म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट’ (Mutual Logistics Support Agreement MLSA), एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की सैन्य आधारों (Military Bases) के उपयोग की अनुमति प्रदान करेगा।

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन के मध्य वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर सहमति हुई।

MLSA क्या है?

यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य सामग्रियों के उपयोग की सुविधा प्रदान करेगा, जटिल संयुक्त सैन्य अभ्यास की अनुमति देगा तथा दोनों राष्ट्रों के सुरक्षा बलों के मध्य समन्वय को बेहतर बनाएगा।

यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य रसद के उपयोग की अनुमति देगा, जिसके अंतर्गत दोंनों देशों के सैनिक आपस में भोजन, पानी और पेट्रोलियम (ईधन) जैसी सुविधाओं का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

यह समझौता संयुक्त सैन्य अभ्यास, शांति अभियानों, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों, अधिसूचित सैन्य तैनाती तथा अन्य किसी प्रकार की बाह्य स्थिति के उत्पन्न होने पर उपयोगी होगा।

महत्व

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया की सीमित नौसैनिक क्षमताओं के प्रकाश में MLSA काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • सामान्यतः, संसाधनों की कमी किसी देश की समुद्र में शक्ति प्रदर्शन की क्षमता पर गंभीर सीमाएं लगाती है, तथा अपनी सामुद्रिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा हेतु अन्य कारको पर निर्भर होना पड़ता है।
  • इसलिए, देश अपनी परियोजनाओ को अपने निकटवर्ती समुद्री जल में स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के मामले में, इस तरह की सीमा उनकी महत्वाकांक्षाओं से मेल नहीं खाती है; तथा यह इनके लिए चीन के आक्रामक दृष्टिकोण को देखते हुए गैर-लाभकारी स्थिति में पंहुचा देती है।
  • इस कारण से, MLSA काफी महत्व रखता है।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: मुख्य निष्कर्ष

मुख्य परीक्षा हेतु: चुनौतियाँ तथा सरकार द्वारा किये गए प्रयास

PLFS क्या है?

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey- PLFS) भारत का पहला कंप्यूटर-आधारित सर्वेक्षण है, जिसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme ImplementationMoSPI) द्वारा जारी किया जाता है PLFS प्रमुख रोजगार एवं बेरोजगारी संकेतकों जैसे श्रम बल की भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगार बेरोजगारों और बेरोजगारी की दर का आंकलन करता है। यह आंकलन ग्रामीण परिवारों में वार्षिक तथा शहरी परिवारों के लिए तिमाही आधार पर किये जाते है।

PLFS शिक्षित और बेरोजगार लोगों को भी विवरण देता है, जिसका उपयोग युवाओं को कौशल प्रदान कर रोजगारपरक बनाने के लिए किया जा सकता है।

इस सर्वेक्षण को वर्ष 2017 में शुरू किया गया था। मंत्रालय ने मई 2019 में सर्वेक्षण की पहली वार्षिक रिपोर्ट (जुलाई 2017-जून 2018) जारी की है। जिसमे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को कवर किया गया है।

परिभाषाएं

श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): यह कुल जनसंख्या में श्रम बल (जो काम कर रहे है, काम की तलाश कर रहे हैं अथवा काम के लिए उपलब्ध हैं) का प्रतिशत होता है।

कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) कुल जनसँख्या में नियोजित लोगों का प्रतिशत होता है।

बेरोजगारी दर, कुल श्रम बल में बेरोजगार लोगों का प्रतिशत होती है।

बेरोजगार: जो व्यक्ति जो कार्य मांगने के बाद भी पिछले सात दिनों में एक घंटे भी काम पाने में असमर्थ रहता है, बेरोजगार माना जाता है।

मुख्य निष्कर्ष

  • इस सर्वेक्षण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 की अवधि के दौरान श्रम बल भागीदारी दर में 37.5 प्रतिशत के साथ मामूली सुधार हुआ है, जो कि 2017-18 में 36.9 प्रतिशत था।
  • वर्ष 2018-19 में भारत की बेरोज़गारी दर में कमी आई है, जहाँ एक ओर वर्ष 2017-18 में यह 6.1 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2018-19 में यह घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई।
  • कार्यरत जनसंख्या अनुपात में वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 35.3 प्रतिशत हो गया, जबकि 2017-18 में यह 34.7 प्रतिशत था।
  • शहरी बेरोजगारी दर ने 2018-19 की अवधि में 7.8 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत  हो गयी है तथा ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दर 5.3 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो गई।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के बीच बेरोज़गारी दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • समीक्षाधीन अवधि के दौरान शहरी और ग्रामीण भारत में महिला भागीदारी दर में सुधार हुआ है।

चुनौतियां

वित्तीय वर्ष 2019-20 में बेरोजगारी दर में गिरावट की प्रवृत्ति को रोकना; Covid-19 के संक्रमण को रोकने के लिए मार्च से जून के मध्य देशव्यापी लॉकडाउन जारी रहा, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में रोजगार की हानि हुई है।

सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (Center For Monitoring Indian Economy-CMIE) के मासिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी की दर जून 2019 में 7.87 प्रतिशत से बढ़कर मई 2020 में 23.48 प्रतिशत हो गई है।

प्रीलिम्स लिंक:

शहरी क्षेत्रों व ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर व इसमें परिवर्तन संबंधी आकड़ों का अध्ययन।

मेंस लिंक:

भारत में बेरोजगारी की स्थिति तथा इस पर राजनीतिक संवाद का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


साल-भर 60 अभियान (SaalBhar60 campaign)

रिधिमा पांडे द्वारा इस अभियान का हरिद्वार में आरम्भ किया गया।

इस अभियान में सरकार से शहरों में PM2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर सुनिश्चित करने के उपाय करने की मांग की जा रही है,  जो कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board -CPCB) द्वारा 24 घंटे के लिए निर्धारित सुरक्षित सीमा है।

त्रिपोली

त्रिपोली लीबिया की राजधानी तथा सबसे बड़ा शहर है।

यह लीबिया के उत्तर-पश्चिम में रेगिस्तान के किनारे भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित है। इसके नज़दीक समुद्र में चार द्वीपों का एक समूह भी है। त्रिपोली शहर अल-मीना की बंदरगाह से जुड़ा हुआ है।

चर्चा में क्यों?

लीबिया का UN- समर्थित सरकार ने त्रिपोली को हफ्तार उग्रवादियों से (Militias Of Haftar) से वापस  लेने की घोषणा की है।

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विश्व पर्यावरण दिवस

प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है।

5 जून क्यों?

5 जून 1972 को स्वीडन के स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

इसका आयोजन प्रत्येक वर्ष ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UNEP) द्वारा किया जाता है। हर वर्ष अलग- अलग देश विश्व पर्यावरण दिवस की मेज़बानी करते हैं।

2020 में इसकी मेज़बानी कोलंबिया एवं जर्मनी साथ मिलकर कर रहे हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस 2020 की थीम ‘जैव विविधता’ (Biodiversity) है।