Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 04 June

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. ‘राष्ट्र’ के नाम परिवर्तन हेतु याचिका

2. ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) में संशोधन

3. चीन सीमा से सटे क्षेत्रों में सरकार द्वारा बुनियादी अवसंरचना को प्रोत्साहन

4. विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. महिंद्रा लॉजिस्टिक्स द्वारा समलैंगिक समावेशन नीति का आरम्भ

 

 प्राम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम परिवर्तित कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट किया गया

2. अमेरी आइस शेल्फ (Amery Ice Shelf -AIS)

3. भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (PCIM&H) के लिए औषधकोष (Pharmacopoeia) आयोग

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

‘राष्ट्र’ के नाम परिवर्तन हेतु याचिका

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 तथा पहली अनुसूची।

मुख्य परीक्षा हेतु: परिवर्तन की मांग, औचित्य, चुनौतियां तथा आगे की राह।

संदर्भ: उच्चत्तम न्यायालय ने आदेश दिया है कि देश के नाम को ‘इण्डिया’ के स्थान पर आधिकारिक रूप से केवल ‘भारत’ करने की याचिका को एक अभ्यावेदन में परिवर्तित कर केंद्र सरकार के पास उचित निर्णय के लिए प्रेषित कर दिया जाए।

न्यायालय ने कहा है, भारत और इण्डिया, दोनों नाम संविधान में दिए गए हैं। संविधान में इण्डिया को भारत को पहले से ही कहा गया है।”

मुद्दा क्या है?

देश के नाम को ‘इण्डिया’ के स्थान पर केवल ‘भारत’ करने एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था, ‘इण्डिया’ विदेशी मूल का नाम है। इस नाम का स्रोत ग्रीक शब्द ‘इंडिका’ में पाया जा सकता है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन की मांग की गयी है, जिसमें कहा गया है कि “इण्डिया अर्थात भारत  राज्यों का एक संघ होगा”।

याचिकाकर्ता की मांग है कि ‘इण्डिया’ को अनुच्छेद 1 से हटा दिया जाए। यह संशोधन इस देश के नागरिकों की औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति सुनिश्चित करेगा तथा अपनी राष्ट्रीयता पर गर्व की भावना उत्पन्न करेगा। यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा लड़ी गई आजादी की लड़ाई को भी न्यायोचित ठहराएगा।

संविधान सभा ने इस मुद्दे को किस प्रकार हल किया?

डॉ. बी आर अंबेडकर की अध्यक्षता में निर्मित संविधान प्रारूप के अनुच्छेद 1 पर संविधान सभा में बहस की गयी।

‘हम, भारत के लोगों’ द्वारा संविधान के अपनाने से आठ दिन पूर्व, 18 नवंबर, 1949 को एक जोरदार बहस हुई, जिसमे सदस्यों के मध्य तीखे आदान-प्रदान हुए।

  • ‘एच वी कामथ’ ने ‘अंबेडकर समिति’ के संविधान प्रारूप पर आपत्ति जताई जिसमें देश के ‘इण्डिया तथा भारत’ दो नाम सम्मिलित थे।
  • उन्होंने अनुच्छेद 1 में संशोधन करके देश का प्राथमिक नाम ‘भारत’ अथवा वैकल्पिक रूप से ‘हिंद’ किये जाने तथा ‘इण्डिया’ को केवल अंग्रेजी भाषा में नाम के रूप में घोषित किये जाने का प्रस्ताव किया।
  • सेठ गोविंद दास ने कहा, “इण्डिया, अर्थात् भारत” किसी देश के नाम के लिए सुंदर शब्द नहीं हैं। गोविंद दास ने वेदों, महाभारत, पुराणों तथा चीनी यात्री ह्वेन-त्सांग के विवरण का हवाला देते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही देश का मूल नाम ‘भारत’ था, अतः स्वतंत्रता के पश्चात् भी देश का नाम संविधान में ‘इण्डिया’ नहीं रखा जाना चाहिए।
  • उन्होंने महात्मा गांधी का भी उद्धरण देते हुए कहा कि देश ने “भारत माता की जय” का नारा बुलंद करते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी थी, और देश के लिए ‘भारत’ ही एकमात्र स्वीकार्य नाम हो सकता है।
  • ‘भारत’ को देश एकमात्र नाम रख जाने का समर्थन करने वाले अन्य लोगों में आंध्रप्रदेश से के वी राव भी सम्मिलित थे।
  • मद्रास प्रांत के एम ए अयंगर ने अनुच्छेद 1 में देश के लिए ‘भारत’, ‘भारतवर्ष’ तथा ‘हिंदुस्तान’ नामों को विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया।
  • अंत में, राजेंद्र प्रसाद ने संशोधन के लिए मतदान करवाया जिसमे सभी पराजित हो गए। अनुच्छेद 1 “इण्डिया, अर्थात भारत” के रूप में बरकरार रहा। हालांकि, बहस जारी रही है।

संविधान क्या कहता है?

संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार, भारत के राज्य क्षेत्र में ‘राज्यों के क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेश और कोई भी क्षेत्र जिसे अधिगृहीत किया जा सकता है, सम्मिलित होंगे।

प्रथम अनुसूची में राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों के नामों का विवरण दिया गया है। इस अनुसूची में राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों को चार वर्गों – भाग A, भाग B, भाग C और भाग D में बांटा गया था।

वर्ष 1956 में संविधान के सातवें संशोधन में भाग A तथा भाग B राज्यों के बीच अंतर को समाप्त कर दिया गया। इसके पश्चात राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 1 क्या है?
  2. राज्यों का संघ क्या है?
  3. भारत के राज्य क्षेत्र में कौन से क्षेत्र सम्मिलित है?
  4. राज्यों के नाम में कौन परिवर्तन कर सकता है तथा इसकी प्रक्रिया क्या है?

मेंस लिंक:

भारतीय संविधान की अनुसूची 1 पर एक टिप्पणी लिखें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) में संशोधन

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: अधिनियम की मुख्य विशेषताएं।

मुख्य परीक्षा हेतु: अधिनियम की आवश्यकता तथा महत्व, सुधारों की आवश्यकता।

संदर्भ: केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम (Essential Commodities Act-ECA)’ में ऐतिहासिक संशोधन को मंजूरी दे दी है।

प्रस्तावित संशोधनों के अंतर्गत अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसे आवश्यक वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर रखा गया है।

संशोधन से लाभ

  • इससे निजी निवेशक अपने व्यावसायिक कार्यों में अत्यधिक विनियामक हस्तक्षेप की आशंका से मुक्‍त हो जाएंगे।
  • उत्‍पादन, भंडारण, ढुलाई, वितरण तथा आपूर्ति की आजादी से व्‍यापक स्‍तर पर उत्‍पादन करना संभव होगा और इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में निजी/प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा।
  • इससे कोल्‍ड स्‍टोरेज में निवेश बढ़ाने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (सप्‍लाई चेन) के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।

आवश्यक वस्तु अधिनियम क्या है?

आवश्यक वस्तु अधिनियम वर्ष 1955 में अधिनियमित किया गया था।

इस अधिनियम का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं अथवा उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा उनकी जमाखोरी एवं कालाबाज़ारी को रोकना था।

अधिनियम के अंतर्गत आवश्यक वस्तुओं की सूची में ड्रग्स, उर्वरक, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद सम्मिलित हैं।

आवश्यकता होने पर केंद्र सरकार इस सूची में नई वस्तुओं को शामिल कर सकता है तथा स्थिति में सुधार होने पर उन्हें सूची से हटा सकती है।

सरकार, अधिनियम के तहत, किसी भी पैकेज्ड उत्पाद की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय कर सकती है तथा इसे “आवश्यक वस्तु” घोषित कर सकती है।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

  1. किसी निश्चित वस्तु की आपूर्ति कम होने तथा उसकी कीमत में वृद्धि होने पर, केंद्र सरकार निर्दिष्ट अवधि के लिए उस वस्तु की भंडारण-सीमा को अधिसूचित कर सकता है।
  2. राज्य इस अधिसूचना पर वस्तु की भंडारण सीमा निर्धारित करते हैं तथा इसका पालन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाते है।
  3. निर्धारित वस्तु के व्यापार से संबंधित थोक व्यापारीयों, खुदरा विक्रेताओं अथवा आयातकों को एक निश्चित मात्रा से अधिक भंडारण करने से प्रतिबंधित किया जाता है।
  4. हालांकि, कोई राज्य इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य नहीं है, लेकिन एक बार प्रतिबंध लागू होने के बाद, व्यापारियों को अनिवार्य रूप से निर्धारित मात्रा से अधिक भण्डार को बाजार में बेचना होता है।

परन्तु, हाल के आर्थिक सर्वेक्षण में इस अधिनियम को पुराना बताया गया है तथा इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। क्यों?

केस स्टडी

सितंबर 2019 में, केंद्र सरकार ने भारी वर्षा के कारण खरीफ की एक चौथाई फसल बर्बाद होने के फलस्वरूप कीमतों में लगातार वृद्धि होने पर प्याज की भंडारण सीमा निर्धारित करने हेतु आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम (ECA) के प्रावधानों को लागू किया था।

  • यद्यपि, ECA के अंतर्गत प्रतिबंध खुदरा और थोक व्यापारियों, दोनों पर लगाये गए थे तथा इनका उद्देश्य बाजार में जमाखोरी को रोकने तथा आपूर्ति में वृद्धि करना था। परन्तु, सर्वेक्षण से पता चला है कि प्रतिबंधो के बाद भी मूल्य अस्थिरता में वृद्धि हुई तथा थोक और खुदरा कीमतों के मध्य व्यापक अंतर था।
  • इसका कारण यह बताया गया कि, आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम (ECA) जमाखोरी और भंडारण के बीच अंतर करने में विफल रहा है।
  • इस प्रकार, दीर्घावधि में, एक्ट स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को बाधित करता है, जिससे उत्पादन / खपत के झटके के बाद कीमतों में अस्थिरता बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में पाया गया है कि ECA को 1955 में लागू किया गया था, उस समय अर्थव्यवस्था अकाल और भोजन की कमी से तबाह हो गई थी। सरकार को ध्यान देना चाहिए कि आज का परिदृश्य कहीं अधिक भिन्न है।

आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम का महत्व

  • ECA उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अनुचित वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • सरकार ने पर्याप्त आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम को कई बार लागू किया है।
  • यह अधिनियम आवश्यक वस्तुओं के जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसता है।
  • इसके अंतर्गत, राज्य की एजेंसियां ​​सर्तकता से प्रतिबंधो का पालन सुनिश्चित करने हेतु छापे मारती हैं तथा उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जाता है।

निष्कर्ष

आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम के नहीं होने पर आम आदमी के अवसरवादी व्यापारियों और दुकानदारों की दया पर निर्भर होने का सकंट हो सकता है। यह अधिनियम सरकार को कीमतों को सीधे नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित वस्तुएं।
  2. सूची से वस्तुओं को शामिल करने और हटाने की शक्तियाँ।
  3. क्या राज्यों को केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है?
  4. आर्थिक सर्वेक्षण कब और किसने जारी किया?
  5. क्या सरकार इस अधिनियम के तहत किसी उत्पाद का MRP तय कर सकती है?

मेंस लिंक:

आवश्यक वस्तु अधिनियम के महत्व पर चर्चा करें। हाल के आर्थिक सर्वेक्षण में क्यों कहा गया कि यह अधिनियम पुराना है और जाना चाहिए? चर्चा करें।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन सीमा से सटे क्षेत्रों में सरकार द्वारा बुनियादी अवसंरचना को प्रोत्साहन

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: भारत-चीन सीमा, LAC- मुद्दे और महत्वपूर्ण क्षेत्र।

मुख्य परिक्षा हेतु: सीमा विवाद का कारण, हल करने के प्रयास तथा इसके समाधान के तरीके।

संदर्भ: सरकार ने चीन सीमा के साथ क्षेत्रों में बुनियादी अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए नए दिशानिर्देशों को मंजूरी दी है।

प्रमुख दिशानिर्देश:

  1. केंद्र प्रायोजित योजनाओं की 10% राशि केवल लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में परियोजनाओं पर व्यय की जाये।
  2. सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) को 2020-21 वित्तीय वर्ष में 784 करोड़ रु. आवंटित किए गए हैं। यह धनराशि सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी जनसंख्या तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई जैसे विभिन्न मानदंडों के आधार पर वितरित की जायेगी।
  3. सीमा सुरक्षा बलों चिन्हित सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांवों और कस्बों को विकसित करने की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
  4. सीमा के 10 किमी के भीतर सड़कों, पुलों, पुलियों, प्राथमिक स्कूलों, स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, खेल के मैदानों, सिंचाई कार्यों, मिनी स्टेडियमों, बास्केटबॉल के लिए इनडोर कोर्ट, बैडमिंटन और टेबल टेनिस का निर्माण किया जा सकता है।

आवश्यकता

वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कई बिंदुओं पर चीन के साथ सीमा तनाव जारी है, यह पिछले सीमा विवादों की तुलना में ज्यादा गंभीर है तथा चीन की योजना तथा लंबे समय तक जारी रहने की संभावना को दर्शाता है।

इसलिए, बुनियादी अवसंरचना का निर्माण इन सीमावर्ती क्षेत्रों को आंतरिक क्षेत्रों के साथ एकीकृत करने में सहायक होगा, राष्ट्र द्वारा देखभाल की सकारात्मक धारणा का निर्माण करेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को प्रोत्साहित करेगा तथा इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत होगी।

भारत- चीन सीमा

भारत और चीन परस्पर 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। दुर्भाग्य से, पूरी सीमा विवादित है। दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारित करने वाली रेखा को मैकमोहन रेखा कहा जाता है।

वर्ष 1913 में, ब्रिटिश-भारत सरकार द्वारा एक त्रिपक्षीय सम्मेलन बुलाया गया था, जिसमें भारत तथा  तिब्बत के मध्य चर्चा के बाद भारत-तिब्बत सीमा को औपचारिक रूप दिया गया था। इस सम्मेलन में एक अभिसमय को अपनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप भारत-तिब्बत सीमा का परिसीमन किया गया। तथापि, चीन इस सीमा को विवादित मानता है और इसे अवैध बताता है।

वर्ष 1957 में, चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया और इसके होकर एक सड़क मार्ग का निर्माण कर लिया। इस प्रकरण के बाद सीमा पर कुछ अंतराल से संघर्ष होता रहा, जिसका अंत 1962 के सीमा युद्ध में हुआ। युद्ध के पश्चात बनी नयी सीमा को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के रूप में जाना जाता है।

समस्या को हल करने के प्रयास

  1. वर्ष 1976 में हुए दोनों देशों के मध्य मेल-मिलाप से भारत और चीन के मध्य 1981 में उच्च स्तरीय सीमा वार्ता का आरम्भ हुआ। आठ दौर की वार्ता के बाद, 1987 में वार्ता असफल हो गयी।
  2. 1988 में, प्रधान मंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के बाद, सीमा समस्या को हल करने के लिए संयुक्त कार्य दल (JWG) की स्थापना की गई थी।
  3. 1993 में, वास्तविक नियंत्रण सीमा (LAC) सहित मेंटीनेंस ऑफ पीस एंड ट्रैन्क्विटी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और JWG की सहायता के लिए ‘भारत-चीन विशेषज्ञ’ राजनयिक और सैन्य अधिकारियों के समूह की स्थापना की गई थी।
  4. 1996 में, LAC सहित सैन्य क्षेत्रों में कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मीजर्स (CBMs) पर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  5. 2003 में, दो विशेष प्रतिनिधियों (भारत और चीन में प्रत्येक) को सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान खोजने के लिए नियुक्त किया गया था।
  6. 2009 तक, इन दो विशेष प्रतिनिधियों ने 17 दौर की वार्ता की थी, लेकिन अभी तक कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एलओसी क्या है और इसकी स्थापना, भौगोलिक सीमा और महत्व कैसे है?
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) कहाँ है?
  5. अक्साई-चिन का प्रशासन कौन करता है?

मेंस लिंक:

बुनियादी अवसंरचना का निर्माण इन सीमावर्ती क्षेत्रों को आंतरिक क्षेत्रों के साथ एकीकृत करने में सहायक होगा, राष्ट्र द्वारा देखभाल की सकारात्मक धारणा का निर्माण करेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को प्रोत्साहित करेगा तथा इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत होगी। चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA)

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: समझौते का अवलोकन, महत्व तथा इस कदम के निहितार्थ।

संदर्भ: फिलीपींस की सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ‘विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट’ (VFA) को रद्द करने की योजना को निलंबित कर दिया है। वाशिंगटन के लिए यह समझौता बीजिंग की बढ़ती क्षेत्रीय शक्ति का मुकाबला करने हेतु नीतियां तय करने के लिए महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि:

फिलीपीन सरकार ने 11 फरवरी को विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) को रद्द करने हेतु आधिकारिक तौर पर मनीला स्थित अमेरिकी दूतावास के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका को नोटिस भेजा था।

राजनीतिक विश्लेषकों ने फिलीपींस सरकार द्वारा अपने फैसले के बदलाव को पड़ोसी राज्यों द्वारा क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य दबाव से उत्पन्न चिंता के संकेत के रूप में बताया है। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों को लेकर फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया सभी का चीन के साथ विवाद है।

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) क्या है?

विज़िटिंग फोर्स एग्रीमेंट (VFA) किसी देश तथा अन्य विदेशी राष्ट्र के बीच एक समझौता होता है, इसके अंतर्गत विदेशी राष्ट्र को देश में सैन्य अभ्यास और मानवीय कार्यों में भाग लेने की अनुमति प्राप्त होती है।

VFA अमेरिकी सेना के लिए फिलीपींस में अपने कार्यक्रमों के संचालन हेतु नियमों, दिशानिर्देशों और वैधानिक स्थिति का निर्धारण करता है।

VFA, आपसी रक्षा संधि (Mutual Defense Treaty), 1951 के साथ-साथ संवर्धित रक्षा सहयोग समझौते (Enhanced Defense Cooperation Agreement) 2014 समझौतों की अभिपुष्टि करता है। ये समझौते अमेरिकी सेना को फिलीपींस में संयुक्त अभ्यास तथा अपने कार्यक्रमों के संचालन हेतु सक्षम बनाते है।

फिलीपीन सीनेट ने वर्ष 1999 में विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) की अभिपुष्टि की थी।

अमेरिका के लिए निहितार्थ

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) की समाप्ति से फिलीपींस में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का बैधानिक आधार खत्म हो जायेगा – जिससे गठबंधन के लिए एक समस्या उत्पन्न हो जायेगी। VFA के बिना, अमेरिकी सेना, फिलीपींस के साथ किसी भी रक्षा समझौते का सहयोग करने में सक्षम नहीं होगी।

फिलीपींस के लिए निहितार्थ

फिलीपींस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिकी गठबंधन और विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट महत्वपूर्ण हैं।

फिलीपींस, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति विश्वास और सहयोग की तुलना में चीन के प्रति अधिक नकारात्मक दृष्टिकोण रखती है तथा दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की कार्यवाहियों के प्रति सतर्क रहता है।

अमेरिका- फिलीपींस गठबंधन तथा VFA, फिलीपींस के लिए चीनी खतरों के विरुद्ध एक बीमा पॉलिसी के रूप में कार्य करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दक्षिण चीन सागर के तटवर्ती देश।
  2. फिलीपींस तथा आसपास के प्रमुख क्षेत्रों की अवस्थिति।
  3. विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) क्या है?
  4. विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने।
  5. LOC और LAC के मध्य अंतर?

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय।

कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा हेतु: अध्यादेश, निहितार्थ एवं महत्व।

अध्यादेश के उद्देश्य

कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश (The Farming Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance), 2020 का मूल उद्देश्य APMC बाजारों की सीमा से बाहर अतिरिक्त कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है ताकि प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

  • यह एमएसपी पर खरीद की मौजूदा प्रणाली के पूरक के तौर पर काम करेगा जो किसानों को स्थिर आय प्रदान कर रही है।
  • यह निश्चित रूप से ‘एक देश, एक कृषि बाजार’ बनाने का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और कठोर परिश्रम करने वाले हमारे किसानों के लिए उपज की मुंह मांगी कीमत सुनिश्ति करेगा।

अध्यादेश का अवलोकन

  1. अध्यादेश किसानों के लिए एक सुगम और मुक्त माहौल तैयार करेगा जिसमें उन्हें अपनी सुविधा के हिसाब से कृषि उत्पाद खरीदने और बेचने की आजादी होगी।
  2. अध्यादेश राज्य के भीतर और बाहर दोनों ही जगह ऐसे बाजारों के बाहर भी कृषि उत्पादों का उन्मुक्त व्यापार सुगम करेगा जो राज्यों के कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) अधिनियम के तहत अधिसूचित हैं।
  3. अध्यादेश में कृषि उत्पादों का सुगम कारोबार सुनिश्चित करने के लिए एक ई-प्लेटफॉर्म बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।
  4. इस अधिनियम के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री के लिए कुछ भी उपकर (सेस) या शुल्क नहीं लिया जाएगा।
  5. किसानों के लिए एक अलग विवाद समाधान व्‍यवस्‍था होगी।

महत्व

  • यह देश में व्यापक रूप से विनियमित कृषि बाजारों को खोलने का एक ऐतिहासिक कदम है।
  • इस अधिनियम से किसान के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे, किसानों के लिए विपणन लागत कम होगी तथा उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
  • इस अधिनियम से अधिशेष उपज वाले क्षेत्रों के किसानों को बेहतर मूल्य और कम उपज वाले क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमतें नहीं चुकानी पड़ेंगी।

आवश्यकता तथा चुनौतियाँ

  • भारत में किसानों को कई तरह के नियामक प्रतिबंधों के कारण अपने उत्पाद बेचने में काफी दिक्कत आती है।
  • अधिसूचित कृषि उत्पाद विपणन समिति वाले बाजार क्षेत्र के बाहर किसानों पर उत्पाद बेचने पर कई तरह के प्रतिबंध हैं।
  • उन्हें अपने उत्पाद सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त खरीदारों को ही बेचने की बाध्यता है।
  • इसके अतिरिक्त एक राज्य से दूसरे राज्य को ऐसे उत्पादों के सुगम व्यापार के रास्ते में भी कई तरह की बाधाएं हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अध्यादेश क्या है?
  2. कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) क्या हैं?
  3. eNAM क्या है?

मेंस लिंक:

इस अध्यादेश के महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-IV


 महिंद्रा लॉजिस्टिक्स द्वारा समलैंगिक समावेशन नीति का आरम्भ

संदर्भ: एलजीबीटीक्यूआई + (LGBTQAI+) कर्मचारियों के समावेशन हेतु महिंद्रा लॉजिस्टिक्स लिमिटेड (MLL) ने एक पंचवर्षीय योजना का अनावरण किया है जिसका उद्देश्य समलैंगिक लोगों को कार्य  पर नियुक्त करना तथा समान लैंगिक सहभागियों को सुविधाएँ प्रदान करना है।

मुख्य प्रावधान

  • इस नीति में समलैंगिक कर्मिकों के लिए दत्तक ग्रहण के लिए छुट्टी दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
  • समान-लिंगी पार्टनर दत्तक ग्रहण की तिथि से शुरू होने वाले 12-सप्ताह के अवकाश के पात्र होंगे।
  • अपने साथी के विवरण संबंधी घोषणा करने पर सम-लैंगिक कार्मिको को प्राप्त मौजूदा चिकित्सा बीमा के तहत सुविधाएं उनके साथी को भी प्रदान की जायेंगी।
  • कंपनी द्वारा अनुकंपा अवकाश (Compassionate Leave) – जिसे परिवार के निकट सदस्य की मृत्यु होने पर चार दिनों के लिए प्राप्त किया जा सकता है – सम-लैंगिक सहभागियों तक विस्तारित किया जाएगा।
  • सम-लैंगिक कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल को समावेशी बनाने के लिए, अनुरोध करने पर महिंद्रा लॉजिस्टिक्स लिमिटेड (MLL), LGBTQAI + स्टाफ परामर्श सेवाओं को उपलब्ध कराएगा।
  • भर्ती, स्थानांतरण, प्रशिक्षण और विकास, और पदोन्नति सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में समान अवसर और गैर-भेदभाव होगा।
  • सम-लैंगिक कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न की किसी भी घटना की जांच आंतरिक शिकायत समिति द्वारा की जाएगी।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम परिवर्तित कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट किया गया

संदर्भ: कैबिनेट ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट करने की मंजूरी दी।

यह निर्णय पूर्व में 12 जनवरी को बंदरगाह की 150 वीं वर्षगांठ समारोह के उद्घाटन समारोह में घोषित किया गया था।

प्रमुख तथ्य

  • 16 वीं शताब्दी के आरम्भ में, पुर्तगालियों ने पहली बार बंदरगाह पर अपने जहाजों को लंगर डाला, क्योकि उनका मानना था कि हुगली नदी का उपरी क्षेत्र, कोलकाता से आगे, नौ-परिवहन के लिए असुरक्षित है।
  • ब्रिटिश साम्राज्य में, वर्ष 1833 में हुए दासता उन्मूलन के पश्चात, इस बंदरगाह का उपयोग लाखों भारतीयों को ‘गिरमिटिया मजदूरों’ के रूप में साम्राज्य में दूर-दराज के इलाकों में भेजने के लिए किया गया था।
  • कोलकाता बंदरगाह पहला प्रमुख बंदरगाह होने के साथ साथ नदी के किनारे स्थित देश का पहला बंदरगाह है। जो समुद्र से 203 किमी दूर स्थित है।

अमेरी आइस शेल्फ (Amery Ice Shelf AIS)

AIS दुनिया के सबसे बड़े ग्लेशियर जल निकास घाटियों में से एक है, जो अंटार्कटिका के पूर्वी तट पर 70º S अक्षांश, 70ºE देशांतर पर स्थित है।

यह लार्स क्राइस्टेनसन कोस्ट (Lars Christensen Coast) तथा इंग्रिड क्राइस्टेनसन कोस्ट (Ingrid Christensen Coast) के मध्य प्रिड्ज़ बे (Prydz Bay) के मुख पर स्थित है।

यह मैक। रॉबर्टसन लैंड नामक स्थान पर स्थित है।

चर्चा में क्यों?

नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (The National Centre for Polar and Ocean Research -NCPOR) की भविष्यवाणी है कि 2021 तक अमेरी आइस शेल्फ (AIS) की सीमा के विस्तार में 24% की वृद्धि होगी और इसके 2016 की स्थिति से 2026 तक पुनः 24% का विस्तार होगा।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस अध्ययन से समुद्र और वायुमंडलीय बलों में चल रहे बदलावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

amery_ice_shelf

भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (PCIM&H) के लिए औषधकोष (Pharmacopoeia) आयोग

संदर्भ: केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (PCIM&H) के लिए औषधकोष (फार्माकपीआ) आयोग की पुर्न स्‍थापना को अपनी मंजूरी दे दी है।

प्रमुख तथ्य

  • वर्तमान में 2010 से स्‍थापित आयुष मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (PCIM & H) के लिए औषधकोष आयोग एक स्‍वयत्‍तशासी संगठन है।
  • औषधकोष (फार्माकपीआ) आयोग में दो केन्‍द्रीय प्रयोगशालाओं- फार्माकपीआ लेबोरेट्री फॉर इंडियन मेडिसिन (PLIM) और होम्‍योपैथिक फार्माकपीआ लेबोरेट्री (HPL) का विलय कर दिया गया है।
  • औषधकोष (फार्माकपीआ) आयोग, आयुर्वेदिक फार्माकोपिया समिति (APC), सिद्ध फार्माकोपिया समिति (SPC), यूनानी फार्माकोपिया समिति (UPC) और होम्योपैथिक फार्माकोपिया समिति (HPC) के लिए एक छाता संगठन के रूप में कार्य करता है।

 

 


Insights Current Affairs Analysis (ICAN) by IAS Topper