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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 01 June

 

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. आधिकारिक भाषा

2. ‘पीएम केयर्स फंड’ सूचना के अधिकार के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है।

3. 23 अतिरिक्त गौण वन ऊपज (MFP) वस्तुएं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सूची में सम्मिलित

 

सामान्य अध्ययन-III

1. टिड्डी नियंत्रण

2. एलिसा आधारित एंटीबॉडी टेस्ट (ELISA-based Antibody Test) क्या है?

3. केरल सरकार द्वारा डेटा सुरक्षा दिशानिर्देश

4. आपदा प्रबंधन अधिनियम

 

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

1. गोवा में जिलाधिकारी-स्वीकृत यात्रा पास प्रणाली पुनः आरंभ करने की योजना

2. लोकसभा के नियम 266 और 267

3. नेपाल का दूसरा संविधान संशोधन विधेयक

4. बैंडटेल स्कॉर्पियनफिश (Band-tail Scorpionfish)

5. राष्ट्रीय कैरियर सेवा (NCS) परियोजना

6. मिसाइल पार्क ‘अग्निप्रस्थ’

7. महेश नवमी

8. “मेरा जीवन – मेरा योग” प्रतियोगिता

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना।

उच्च न्यायालयों में आधिकारिक भाषा

 

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: संविधान क्या कहता है? हिंदी के प्रयोग को कौन अधिकृत कर सकता है?

मुख्य परीक्षा हेतु: संबंधित मुद्दे तथा उनके समाधान की विधियाँ।

 प्रसंग: हरियाणा में हिंदी को न्यायालयों की आधिकारिक भाषा बनाये जाने से संबंधित विधि को उच्चत्तम न्यायालय में वकीलों द्वारा चुनौती दी गयी है।

 विवाद क्या है?

उच्चत्तम न्यायालय में दाखिल याचिका में कहा गया है कि ‘हरियाणा राजभाषा (संशोधन) अधिनियम’ 2020 के द्वारा असंवैधानिक और मनमाने ढंग से राज्य की निचली अदालतों में हिंदी को प्रयोग की जाने वाली एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में लागू किया गया है।

 प्रमुख बिंदु?

  • वकीलों का तर्क है कि न्यायिक प्रशासन संबंधी कार्यों हेतु निचली अदालतों में अधीनस्थ न्यायपालिका तथा अधिवक्ताओं द्वारा अंग्रेजी का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • हिंदी को प्रयोग की एकमात्र भाषा के रूप में लागू करने से हिंदी में धाराप्रवाह रूप से सक्षम व अकुशल वकीलों के मध्य अनुचित वर्गीकरण हो जाएगा।
  • इनका कहना है कि यह संशोधन समानता, गरिमा और आजीविका वृत्ति अपनाने के मूल अधिकार का उल्लंघन करता है।

 संविधान क्या कहता है?

  • भारत के संविधान का अनुच्छेद 348 (1) प्रावधान करता है कि संसद के विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करने तक उच्चत्तम न्यायालय तथा प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी।
  • अनुच्छेद 348 (2) के अंतर्गत, किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में, हिन्दी भाषा का अथवा उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकते हैं, बशर्ते ऐसे उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय, डिक्री या आदेश अंग्रेजी भाषा में होंगे।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 के अनुसार, किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिन्दी या उस राज्य की राजभाषा का प्रयोग, उस राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा पारित या दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के प्रयोजनों के लिए प्राधिकृत कर सकता है। अंग्रेजी भाषा से भिन्न ऐसी किसी भाषा में दिये गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश का अंग्रेजी भाषा में भी अनुवाद जारी किया जाएगा।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के उच्च न्यायालयों की कार्यवाही में हिंदी के वैकल्पिक उपयोग का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।

 प्रारम्भिक परीक्षा लिंक:

  1. भारत के किन राज्यों में अदालती कार्यवाही में हिंदी के वैकल्पिक उपयोग का प्रावधान है?
  2. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची क्या है?
  3. अनुच्छेद 348 किससे संबंधित है?
  4. उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी के उपयोग को अधिकृत करने के लिए राज्यपालों की शक्तियां।
  5. संविधान की 8 वीं अनुसूची में भाषाओँ को सम्मिलित करने अथवा हटाने हेतु कौन सक्षम है?

मुख्य परीक्षा लिंक:

हरियाणा के वकीलों ने हरियाणा की अदालतों में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में लागू करने के राज्य सरकार के कदम का विरोध क्यों किया? चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

 ‘पीएम केयर्स फंड’ सूचना के अधिकार के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणनहीं है

 क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: PM CARES फंड की विशेषताएं, सूचना का अधिकार, सार्वजनिक प्राधिकरण क्या है?

मुख्य परीक्षा हेतु: इस फैसले के निहितार्थ, पुनर्विचार और संबद्ध चिंताओं की आवश्यकता है।

संदर्भ: प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने आरटीआई अधिनियम के तहत दायर एक आवेदन में मांगी गई सूचना को साझा करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एच) के तहत ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES FUND) ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है।

 सूचना के अधिकार (Right to Information-RTI) के अंतर्गत सार्वजनिक प्राधिकरण क्या है?

आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के अनुसार, ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ से तात्पर्य है:

  1. संविधान द्वारा या उसके अधीन;
  2. संसद द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून द्वारा;
  3. राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून द्वारा;
  4. उपयुक्त सरकार द्वारा जारी अधिसूचना या आदेश द्वारा स्थापित अथवा गठित किया गया कोई भी प्राधिकरण या निकाय या स्वायत्त सरकारी संस्था।

‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ की परिभाषा के अंतर्गत – समुचित सरकार के स्वामित्वाधीन, नियंत्रणाधीन, या उसके द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई गई निधियों द्वारा सारभूत रूप से वित्तपोषित निकाय तथा ऐसे गैर सरकारी संगठन आते हैं जो समुचित सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई गई निधियों द्वारा सारभूत रूप से वित्तपोषित है।

 निहितार्थ:

  • चार कैबिनेट मंत्रियों, पदेन सदस्यों के रूप में, द्वारा निर्मित व संचालित एक ‘ट्रस्ट’ को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ मानने से इनकार करना लोकतांत्रिक मूल्यों तथा पारदर्शिता के लिए एक बड़ा झटका है।
  • ट्रस्ट का नाम, संरचना, नियंत्रण, प्रतीकों का उपयोग, सरकारी डोमेन आदि ‘ट्रस्ट’ के ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ होने को दर्शाते हैं। आरटीआई अधिनियम के आवेदन को अस्वीकार करते हुए सरकार ने ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना है, जिससे इसके चारों ओर गोपनीयता की दीवारें खडी कर दी गयी है।

पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES FUND) क्या है?

PM CARES फंड 28 मार्च 2020 को किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति जैसे COVID-19 महामारी से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ बनाया गया था।

यह एक ‘लोक धर्मार्थ ट्रस्ट’ है।

 फंड का प्रशासन कौन करता है?

प्रधानमंत्री, PM CARES फंड के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, भारत सरकार निधि के पदेन न्यासी होते हैं।

 निगरानी की आवश्यकता

रिपोर्टों से पता चलता है कि PM CARES को पहले से ही 10,000 करोड़ रु से अधिक का अनुदान मिल चुका है। इस ट्रस्ट में गठन के पहले सप्ताह में ही बड़े कॉर्पोरेट घरानों तथा प्रसिद्ध हस्तियों से दान के रूप में 6,500 करोड़ की विशाल राशि प्राप्त हुई।

 सरकार का पक्ष

सरकार का तर्क है कि PM CARES व्यक्तियों और संगठनों के स्वैच्छिक अनुदान पर आधारित कोष है, और इसलिए यह भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षा से मुक्त है।

 समय की आवश्यकता

लोक लेखा खाते में उन राशियों को रखा जाता है, जो भारत के समेकित कोष, अनुच्छेद 266 (1) और भारत के आकस्मिकता कोष, अनुच्छेद 267 के अंतर्गत नहीं आती हैं।

इसी तरह, चूंकि PM CARES “सार्वजनिक खाता” होने के अनुरूप है और चूंकि भारत सरकार के इशारे पर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया है, इसलिए CAG को ऑडिट करने की अनुमति देना पारदर्शिता की दिशा में एक उचित कदम होगा।

भारत का संविधान क्या कहता है?

संविधान के अनुच्छेद 266 (2) के तहत, ‘भारत सरकार या उसकी ओर से प्राप्त सभी अन्य लोक धनराशियाँ, यथास्थिति, भारत के लोक लेखे में या राज्य के लोक लेखे में जमा की जाएँगी’।

 प्राम्भिक परीक्षा लिंक:

  1. लेख 266 बनाम 267
  2. सार्वजनिक खाता क्या है?
  3. पीएम केयर फंड का प्रबंधन कौन करता है?
  4. आरटीआई अधिनियम के दायरे से किन संगठनों को छूट दी गई है?
  5. भारत का समेकित कोष क्या है?

मुख्य परीक्षा लिंक:

आरटीआई अधिनियम के दायरे में PM CARES फंड क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए ।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 23 अतिरिक्त गौण वन ऊपज (MFP) वस्तुएं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सूची में सम्मिलित

 क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है? लघु वनोपज (MFP)? संबंधित योजनायें?

मुख्य परीक्षा हेतु: आदिवासियों के लिए गौण वन ऊपज (MFP) तथा संबंधित योजना का महत्व।

संदर्भ: जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support PriceMSP) सूची में 23 अतिरिक्त लघु वनोपज (Minor Forest ProduceMFP) वस्तुओं को शामिल करने की घोषणा की है।

इनमे वन तुलसी के बीज, वन जीरा, मशरूम, काले चावल और जोहर चावल आदि सामिलित किये गए हैं।

 महत्व:

जनजातीय मामले मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के जरिये लघु वनोपज (MFP)  मदों के विकास तथा MFP की मूल्य श्रृंखला के लिए तंत्र नामक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत उनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुबंध की घोषणा की है।

इसके द्वारा लघु वनोपज (MFP) अंतर्गत कवरेज की गयी वस्तुओं की संख्या 50 से बढ़कर 73 हो गयी है।

यह निर्णय कोविड-19 महामारी के कारण देश में व्याप्त असाधारण और बेहद कठिन परिस्थितियों में जनजातीय गौण वन ऊपज (MFP)  संग्रहकर्ताओं को बेहद जरुरी सहायता उपलब्ध कराने हेतु हुए लिया गया है।

यह योजना क्या है?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2013 में गैर-राष्ट्रीयकृत / गैर-एकाधिकार वाले लघु वन उपज (MFP) के विपणन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से लघु वन उपज के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना को मंजूरी दी जिससे कि वंचित वनवासियों को सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाया जा सके और उनकी अधिकारिता को बढ़ाया जा सके।

ये संग्राहक मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति के होते हैं जिनमें अधिकांश ऐसे क्षेत्रों में निवास करते हैं जहाँ वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित है।

योजना के उद्देश्य:

  • जनजातीय समुदायों को जंगल से एकत्रित उपज के लिए उचित पारिश्रमिक मूल्य तथा उन्हें वैकल्पिक रोजगार सुनिश्चित कराना।
  • संसाधन आधार की स्थिरता सुनिश्चित करते हुए, वनवासियों द्वारा संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण, भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन आदि के प्रयासों के लिए उचित मौद्रिक मूल्य सुनिश्चित करने हेतु एक प्रणाली स्थापित करना।
  • उत्पादों की बिक्री से होने वाले राजस्व में से लागत काटकर जो राशि बचती है उसमें आदिवासियों को भी एक हिस्सा दिया जाए।

कार्यान्वयन:

  1. MSP पर MFP खरीदने की जिम्मेदारी राज्य द्वारा नामित एजेंसियों के पास होगी।
  2. बाजार मूल्य को निर्धारित करने में, बाजार अभिकर्ताओं की सेवाओं का लाभ उठाया जाएगा।
  3. यह योजना प्राथमिक मूल्यवर्धन के साथ-साथ कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस आदि जैसे आपूर्ति श्रृंखला बुनियादी ढांचे के लिए भी सहायता प्रदान करती है।
  4. योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण मंत्रालय द्वारा TRIFED की तकनीकी सहायता से किया जाएगा।

लघु वनोपज (MFP) क्या है?

वन अधिकार अधिनियम की धारा 2 (i) लघु वनोपज (MFP)  को सभी गैर-इमारती लकड़ियों तथा बांस, ब्रशवुड, स्टंप, कैन, कोकून, शहद, मोम, लाख, तेंदू / केंदू पत्ते, औषधीय पौधे आदि को सम्मिलित करती है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. MFP के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के बारे में कौन तय करता है?
  2. वर्तमान में कितने उत्पाद MFP के अंतर्गत आते हैं?
  3. राष्ट्रीय उद्यानों और अन्य संरक्षित क्षेत्रों के अंदर एमएफपी के संग्रह की अनुमति?
  4. केंद्रीय क्षेत्र की योजनायें बनाम केंद्र प्रायोजित योजनायें।
  5. MSP का निर्णय कौन करता है?

मेंस लिंक:

गैर-लकड़ी वन उत्पादों (NTFP) पर आदिवासी अधिकारों की मान्यता से गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में तेजी आएगी। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन।

 टिड्डी नियंत्रण

 

क्या अध्ययन करें?

प्राम्भिक परीक्षा हेतु: टिड्डी अटैक, कारण, प्रभाव और आर्थिक प्रभाव।

मुख्य परीक्षा हेतु: कैसे नियंत्रित करें?

संदर्भ: भारत कोविद -19 महामारी को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष करने में लगा है, ऐसे में टिड्डियों का हमला एक नई चुनौती है। देश के कई हिस्से टिड्डियों के हमले के संकट का सामना कर रहे है।

टिड्डी कीट, फसलों और पर्ण को नष्ट कर देती है और बहुधा तबाही के मंजर छोड़ जाती है। इसे 26 सालों में सबसे भीषण हमला बताया गया है। हमला करने वाली प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डे हैं।

रेगिस्तानी टिड्डियांक्या हैं?

रेगिस्तानी टिड्डे (शिस्टोसेरका ग्रीजिया- Schistocerca gregaria), जो टिड्डा (grasshoppers) परिवार से संबंधित हैं, सामान्य रूप से अर्ध-शुष्क या रेगिस्तानी क्षेत्रों में निवास तथा प्रजनन करते हैं। इन्हें अंडे देने के लिए, नग्न जमीन की आवश्यकता होती है, जोकि घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों में बहुत कम पाई जाती है।

 ये झुण्ड का निर्माण कैसे करते हैं?

अकेले अथवा छोटे झुण्ड में, टिड्डियां बहुत खतरनाक नहीं होती हैं। लेकिन जब वे बड़ी संख्या में हो जाती है तब उनके व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है, तो वे ‘एकल अवस्था’ से यूथ प्रावस्था’ में बदल जाती हैं तथा झुंडो का निर्माण करने लगती हैं।

एक एकल झुंड में एक वर्ग किमी में 40 से 80 मिलियन वयस्क टिड्डियाँ हो सकती हैं, और ये एक दिन में 150 किमी तक यात्रा कर सकती हैं।

इनमे बड़े पैमाने पर प्रजनन तभी होता है जब स्थितियां इनके प्राकृतिक आवास, रेगिस्तान या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में बहुत अनुकूल हो जाती हैं। अच्छी बारिश के फलस्वरूप कभी-कभी पर्याप्त हरी वनस्पति उत्पन्न हो जाती है जो अंडे देने तथा इनके विकास के लिए अनुकूल होती है।

अनियंत्रित छोड़ देने पर एक झुंड अपनी पहली पीढ़ी में अपनी मूल आबादी का 20 गुना वृद्धि कर सकता है, और फिर बाद की पीढ़ियों में गुणात्मक रूप से बृद्धि कर सकता है।

 इस वर्ष वृद्धि के कारण

ये टिड्डियां आमतौर पर अफ्रीका के पूर्वी तट के साथ इथियोपिया, सोमालिया, इरीट्रिया के आसपास के सूखे इलाकों में प्रजनन करती हैं, जिसे हॉर्न ऑफ अफ्रीका के रूप में जाना जाता है। इनके अन्य प्रजनन स्थल यमन, ओमान, दक्षिणी ईरान और पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में आस-पास के एशियाई क्षेत्र हैं।

  1. इनमें से कई क्षेत्रों में मार्च और अप्रैल में असामान्य रूप से अच्छी बारिश हुई, और इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर प्रजनन और विकास हुआ। ये टिड्डियां अप्रैल के पहले पखवाड़े के आसपास राजस्थान में पहुंचने लगीं, जो सामान्यतः जुलाई-अक्टूबर में पंहुचा करती थी।
  2. चक्रवाती तूफान मेकुनु (Mekunu) और लुबान (Luban) ने इस वर्ष क्रमशः ओमान और यमन पर हमला किया था। इसके परिणामस्वरूप भारी बारिश ने निर्जन रेगिस्तान पथों को बड़ी झील में बदल दिया था, जहां टिड्डियों की नस्लें होती थीं।
  3. भोजन की खोज के अतिरिक्त, टिड्डियों की गति को बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अम्फान द्वारा निर्मित निम्न वायुदाब के कारण तीव्र हवाओं से सहायता मिली। टिड्डों को अप्रतिरोधी उड़ान वाले कीटों के रूप में जाना जाता है जो सामान्यतः हवा का अनुसरण करते हैं। टिड्डियाँ बहुत तेज हवा वाली परिस्थितियों में उड़ान नहीं भरती हैं।

चिंता का कारण

टिड्डियों का खतरा उनके प्रजनन से शुरू हो जाता है। 90 दिनों के औसत जीवन चक्र के दौरान एक एकल युवा मादा टिड्डे तीन बार 60-80 अंडे दे सकती है। यदि उनका प्रजनन काल खरीफ फसलों के समय होता है, तो हमारे देश में केन्या, इथियोपिया और सोमालिया में हुए फसलों के नुकसान की भांति हालात हो सकते हैं।

 टिड्डी नियंत्रण का आरम्भ:

उन्नीसवीं सदी में, भारत ने 1812, 1821, 1843 -’44, 1863, 1869, 1878, 1889 -’92 और 1896-’97 में गंभीर टिड्डी प्रकोपों ​​का सामना किया। टिड्डी झुंडों का मुकाबला करने के लिए कई प्रयास किए गए।

इनमें से पहला उपाय टिड्डी प्रकोपों की घटनाओं के संबंध में व्यवस्थित रूप से डेटा एकत्र करना और रिकॉर्ड करना था।

औपनिवेशिक तंत्र ने डेटा एकत्र करने में स्थानीय तथा वैश्विक सहयोग को संयुक्त रूप से नियोजित किया। यह भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ अन्य देशों के साथ ज्ञान और तकनीकों के आदान-प्रदान पर निर्भर था।

 टिड्डा चेतावनी संगठन (Locust Warning Organisation- LWO)

1927 -29 के प्रकोप के पश्चात जब भारत के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में तबाही मची थी, तब एक केंद्रीयकृत संगठन को टिड्डियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और उन्हें नियंत्रित करने की आवश्यकता महसूस हुई।

परिणामस्वरूप 1929 में स्थायी टिड्डी समिति तथा 1930 में केंद्रीय टिड्डी ब्यूरो का गठन किया गया। 1939 में वर्तमान टिड्डा चेतावनी संगठन (LWO) की स्थापना हुई।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन आने वाला टिड्डा चेतावनी संगठन मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टिड्डों की निगरानी, ​​सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिये ज़िम्मेदार है।

प्रचलित पद्धतियाँ

  • वर्तमान में, सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला नियंत्रण पद्धति ‘कीटनाशक’ दवाओं का प्रयोग है। भूमि अथवा वायु यानों से छिड़काव द्वारा पूरे झुण्ड को अपेक्षाकृत कम समय में लक्षित किया जा सकता है।
  • पन्ना में जिला प्रशासन द्वारा पुलिस सायरन का उपयोग करके टिड्डियों के झुंड को भगाया जा रहा है।
  • मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी और नसरुल्लागंज क्षेत्रों में किसान बर्तनों को पीट कर आवाज से टिड्डियों को भगाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

 गैर-रासायनिक उपाय:

विशेषज्ञों ने इस तथ्य पर निराशा व्यक्त की है कि कीटनाशकों के हवाई छिड़काव के ज्ञात दुष्परिणामों के बावजूद, सरकारों द्वारा नियंत्रण नीतियों को केवल रासायनिक छिडकाव पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। कुछ गैर-रासायनिक उपाय निम्न है:

  1. उड़ने से पहले प्रजनन के मैदान और टिड्डे के लार्वा को नष्ट कर दें।
  2. टिड्डों (जिसे साइप्रस स्क्रीन भी कहा जाता है) को मारने के लिए ऑइल टार्ड स्क्रीन का उपयोग।
  3. नेट प्रणाली और धोतार पद्धति। नेट सिस्टम में खेतों के चारों ओर जाल फैलाकर युवा टिड्डियों को फँसाना शामिल है। धोतार विधि झाड़ियों पर आराम करने वाले टिड्डियों को पकड़ना सम्मिलित है।
  4. प्राकृतिक शिकारी जैसे ततैया, पक्षी और सरीसृप टिड्डियों के झुंड को भागने में कारगर साबित हो सकते हैं।
  5. राज्य के समन्वित प्रयासों के साथ, अंतर-राज्य और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर जोर देना आवश्यक है।

 निष्कर्ष

कीटनाशक टिड्डी हमले के दौरान अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन इनका प्रयोग टिड्डियों के प्राकृतिक शिकारियों के रूप में कार्य करने वाले पक्षियों के लिए भी खतरे में डाल सकता है। इसके लिए पक्षियों के राज्य समर्थित संरक्षण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न प्रकार के टिड्डे?
  2. टिड्डियों के एकान्त और गलियारे के बीच अंतर?
  3. हिंद महासागर द्विध्रुव क्या है?
  4. टिड्डी चेतावनी संगठन क्या है?

मेंस लिंक:

भारत पर गंभीर टिड्डियों के हमलों के आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 एलिसा एंटीबॉडी टेस्ट (ELISA-based Antibody Test)

 

क्या अध्ययन करें?

प्रारंभिक परीक्षा हेतु: एलिसा एंटीबॉडी टेस्ट क्या है? यह कैसे किया जाता है?

मुख्य परीक्षा हेतु: इन परीक्षणों का महत्व और अन्य परीक्षणों के साथ तुलना।

संदर्भ: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने राज्यों को आईजीजी एलिसा टेस्ट (IgG ELISA) का उपयोग करते हुए आबादी में कोरोनोवायरस खतरे को मापने के लिए सीरो-सर्वेक्षण (Sero-Surveys) करने की सलाह दी है।

महत्व

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के दिशानिर्देशानुसार, सामान्य आबादी में तथा साथ ही उच्च जोखिम वाली आबादी में कोरोनावायरस (COVID-19) खतरे को मापा जाएगा और इसका परिणाम ‘महामारी के विरुद्ध कार्रवाई हेतु भविष्य की नीतियों को तय करने” में सहायता करेगा।

 एलिसा परीक्षण (ELISA-based test) क्या है?

एलिसा (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) जैविक नमूनों/बायलॉजिकल सैंपलों में प्रोटीन, पेप्टाइड्स, हार्मोन या रसायनों के स्तर को मापने के लिए एक एंटीबॉडी आधारित तकनीक है।

एलिसा परीक्षण का उपयोग शरीर द्वारा एंटीजन या वाह्य पदार्थों के खिलाफ लड़ने के लिए उत्पन्न एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

 यह कैसे किया जाता है?

एलिसा परीक्षण, उच्च संवेदनशीलता और विशिष्टता युक्त रक्त आधारित परीक्षण होता हैं।

  1. इस परीक्षण में व्यक्ति का रक्त लिया जाता है।
  2. रक्त-नमूना को एलिसा प्लेट के छोटे डिब्बों के अंदर रखा जाता है।
  3. ये प्लेट एंटीजन या विषाणु के निष्क्रिय रूप से लेपित होते हैं।
  4. यदि रक्त में एंटीबॉडी होते हैं, तो यह एंटीजन से जुड़ जाते है तथा और एक अधःस्तर विलयन डिब्बे की सतह से युग्मित हो जाता है।
  5. इस अभिक्रिया में सामान्यतः एक रंग परिवर्तन होता है, इस प्रकार एंटीबॉडी का पता लगता है।

आईजीजी (IgG) क्या है?

इम्युनोग्लोबुलिन जी (Immunoglobulin G-IgG)) एक एंटीबॉडी है।

शरीर एक रोगज़नक़ के विरुद्ध लड़ने के लिए इम्युनोग्लोबुलिन एम (Immunoglobulin M-IgM) और आईजीजी (IgG) एंटीबॉडी का निर्माण करता है।

  1. रोगज़नक़ों के शरीर में प्रवेश करने के चार-सात दिनों के अंदर आईजीएम एंटीबॉडी का निर्माण होता है।
  2. आईजीजी एंटीबॉडी रोगज़नक़ की उपस्थिति के 10-14 दिनों के बीच उत्पन्न होते हैं।
  3. यदि IgG एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है, तो यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि व्यक्ति SARS-CoV-2 के संपर्क में था।

 यह रैपिड एंटीबॉडी किट (Rapid Antibody Kits) और आरटी-पीसीआर परीक्षणों (RT-PCR tests) से किस प्रकार भिन्न है?

एलिसा (ELISA) टेस्ट भी रैपिड टेस्ट का एक रूप है। हालांकि, अन्य रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट में रक्त-नमूना लेने के लिए उंगली की चुभन विधि का उपयोग किया जाता हैं।

इनमे बहुत कम समय लगता हैं और एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए एक प्रयोगशाला प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है।

एलिसा परीक्षण और पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण, दोनों का प्रयोग कोविद -19 संक्रमण की पुष्टि के लिए नहीं किया जाता है, इनका उद्देश्य केवल निगरानी करना होता हैं।

जो व्यक्ति इन परीक्षणों में पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनका सामान्यतः आरटी-पीसीआर परीक्षण (RT-PCR tests) किया जाता है।

  • RT-PCR परीक्षण को SARS-CoV-2 की उपस्थिति की पुष्टि के लिए मानक माना जाता है।
  • RT-PCR प्रयोगशाला-आधारित तथा अधिक समय लेने वाला परीक्षण होता है तथा इसमें गले और नाक से स्वाब (Swab) लिया जाता है।
  • यह रक्त-आधारित परीक्षण नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RT PCR क्या है?
  2. एलिसा परीक्षण क्या है?
  3. एंटीजन और एंटीबॉडी क्या हैं?
  4. आईजीजी और आईजीएम एंटीबॉडी के बीच अंतर।
  5. ICMR क्या है?

मेंस लिंक:

व्यक्तियों में SARS- COV2 की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एंजाइम-लिंक्ड इम्युनोसर्बेंट एसेज़ (ELISAs) आधारित परीक्षण कैसे किया जाता है। चर्चा करें

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: साइबर सुरक्षा संबंधी मुद्दे।

 केरल सरकार द्वारा जारी डेटा सुरक्षा दिशानिर्देश

 

क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: दिशानिर्देशों का अवलोकन

मुख्य परीक्षा हेतु: डेटा गोपनीयता की आवश्यकता क्यों और महत्व के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है?

संदर्भ: केरल सरकार ने COVID-19 डेटा संग्रह व संसाधन पर दिशानिर्देश जारी किये है। यह  दिशानिर्देश स्प्रिंकलर विवाद के मद्देनजर जारी किये गए है।

चर्चा का कारण?

केरल सरकार ने डेटा एकत्र करने में अमेरिका स्थित डेटा विश्लेषक फर्म ’स्प्रिंकलर’ को शामिल किया था। इसको लेकर एक विवाद उत्पन्न हो गया।

  • सरकार का कहना था कि उसने स्प्रिंकलर को एक आपातकालीन उपाय के रूप में अनुबंधित किया था।
  • इसका उद्देश्य नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को समझना तथा जिससे केरल में महामारी का व्यवहार का पाता चल सके।
  • हालांकि, विपक्ष ने राज्य की जनसँख्या की चिकित्सा जानकारी को ‘भुनाने तथा मौद्रिक लाभ’ के लिए यू.एस.-आधारित फर्म को अनुमति देने हेतु आवरण के रूप में कोविड प्रकोप का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए सरकार को उच्च न्यायालय में घसीटा था।

 मुख्य दिशानिर्देश:

  1. स्वीकृति: संवेदनशील निजी डेटा के मामले में डेटा प्रिंसिपल से स्पष्ट सहमति प्राप्त की जानी चाहिए।
  2. गुमनामी: अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि COVID-19 रोकथाम गतिविधियों पर केरल एकत्र किए गए सभी डेटा को नामरहित कर दिया जाए ताकि डेटा प्रिंसिपल की अद्वितीय पहचान संभव न हो।
  3. तीसरे पक्ष तक पहुंच: डेटा प्रदान करने वाले प्रत्येक नागरिक को सूचित किया जाएगा कि यह तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं द्वारा एक्सेस किए जाने की संभावना है।
  4. प्रारूप: अपेक्षित प्रारूप में विशिष्ट सहमति प्राप्त की जाए। मलयालम और अंग्रेजी रूपों में अनुपालन को दर्शाती गोपनीयता नीति को शामिल किया जाएगा।

गोपनीयता नीति स्पष्ट रूप से उस उद्देश्य को निर्दिष्ट करेगी, जिसके लिए डेटा एकत्र किया गया है और डेटा का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए उसे एकत्र किया गया है।

  1. डेटा भंडारण: एकत्र किए गए डेटा को एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहीत किया जाएगा। यदि डेटा क्लाउड में संग्रहीत किया जाता है, तो क्लाउड सेवा प्रदाता को केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और सरकारी विभागों द्वारा क्लाउड की खरीद के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
  2. यदि किसी डेटा प्रिंसिपल से जीपीएस और ब्लूटूथ जैसे स्वचालित उपकरण का उपयोग करके डेटा एकत्र किया जाता है, तो यह डेटा प्रिंसिपल की पूर्व स्पष्ट सहमति पर किया जाएगा।
  3. सिक्योरिटी ऑडिट: एसडीसी में होस्ट किए जाने वाले किसी भी सॉफ्टवेयर या एप्लिकेशन को होस्ट करने से पहले सिक्योरिटी ऑडिट का विषय होगा।

 दिशानिर्देशों का कारण

  • हाल ही में, केरल उच्च न्यायालय ने COVID-19 रोगियों से एकत्रित जानकारी की गोपनीयता पर अपनी चिंता व्यक्त की थी।
  • कोर्ट ने राज्य सरकार से अमेरिकी कंपनी स्प्रिंकलर इंक को एक्सेस करने की अनुमति देने से पहले नागरिकों से एकत्र किए गए सभी डेटा को नाम-रहित करने के लिए कहा।
  • राज्य सरकार, केंद्र सरकार से संपर्क करने में और स्प्रिंकलर इंक के बजाए केंद्रीय एजेंसियों से सहयोग लेने पर विचार करे।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन

आपदा प्रबंधन अधिनियम

 क्या अध्ययन करें?

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु: मुख्य प्रावधान, अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों को दी गई शक्तियां।

मुख्य परीक्षा हेतु: इन उपायों के महत्व और प्रासंगिकता, इसके लिए और निहितार्थ की आवश्यकता।

संदर्भ: COVID-19 महामारी का मुकाबला करने के लिए 68 दिनों में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने औसतन एक दिन में 1.3 आदेश जारी किए।

ये आदेश ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम’, 2005 के तहत आदेश जारी किए गए थे। इस अधिनियम का ड्राफ्ट वर्ष 2004 में सुनामी आने के पश्चात तैयार किया गया था।

 इस महामारी में आपदा प्रबंधन अधिनियम की प्रासंगिकता:

COVID-19 देश की कानूनी और संवैधानिक संस्थाओं द्वारा नियंत्रित की जाने वाली पहली अखिल भारतीय जैविक आपदा है।

वर्तमान लॉकडाउन को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (डीएम अधिनियम) के तहत लागू किया गया है।

अधिनियम के तहत, मंत्रालय द्वारा जारी व्यापक दिशानिर्देशों के आधार पर, राज्य और जिला प्राधिकरण अपने स्वयं के नियमों को लागू कर सकते हैं।

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम का वैधानिक आधार, संविधान की समवर्ती सूची की प्रवष्टि 23 “सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा” है।
  • प्रवष्टि 29, समवर्ती सूची ‘एक राज्य से दूसरे संक्रामक या संक्रामक रोगों या पुरुषों, जानवरों या पौधों को प्रभावित करने वाले कीटों के विस्तार की रोकथाम’, का उपयोग विशिष्ट कानून बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

 अधिसूचित आपदा:

वर्तमान महामारी के प्रकोप को दूर करने के लिए, केंद्र सरकार ने COVID -19 प्रकोप को “गंभीर चिकित्सा स्थिति या महामारी की स्थिति” के रूप में “अधिसूचित आपदा” के रूप में शामिल किया है।

 आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की वस्तु और उद्देश्य के अनुसार इसका मकसद, आपदाओं का प्रबंधन करना है, जिसमें शमन रणनीति, क्षमता-निर्माण और अन्य चीज़ें शामिल है।
  • यह भारत में जनवरी 2006 में लागू हुआ।
  • अधिनियम “आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन और ऐसे मामलों के लिए या आकस्मिक चिकित्सा से संबंधित है।”
  • यह अधिनियम भारत के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • अधिनियम केंद्र सरकार को राष्ट्रीय प्राधिकरण की सहायता के लिए एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) का गठन करने का निर्देश देता है।
  • सभी राज्य सरकारों को एक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) स्थापित करना अनिवार्य है।

 केंद्र को प्रदत्त शक्तियां:

  • केंद्र सरकार और NDMA को आपदा प्रबंधन अधिनियम द्वारा दी गई व्यापक शक्तियां प्रदान की गयी हैं।
  • आपदा प्रबंधन में सुविधा या सहायता के लिए केंद्र सरकार, किसी भी कानून को लागू करने (ओवर-राइडिंग पॉवर सहित) हेतु भारत में कहीं भी किसी भी प्राधिकरण को निर्देश जारी कर सकती है।
  • केंद्र सरकार और NDMA द्वारा जारी किए गए ऐसे किसी भी निर्देश का पालन केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों द्वारा किया जाना चाहिए।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. आपदा प्रबंधन अधिनियम क्या है?
  2. इस अधिनियम के तहत स्थापित निकाय।
  3. NDMA की संरचना।
  4. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्यों और केंद्र की शक्तियां।
  5. अधिसूचित आपदा क्या है?
  6. एनडीआरएफ के कार्य।

मेंस लिंक:

क्या आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, देश के मुख्य आर्थिक विधान के अनुकूल नहीं है? विश्व के समक्ष उपस्थित स्थिति में एक महामारी कानून की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रीलिम्स के लिए तथ्य


जिलाधिकारी-स्वीकृत यात्रा पास प्रणाली पुनः आरंभ करने की योजना

गोवा में पिछले कुछ दिनों में लोगों की भारी भीड़ देखी गई है। राज्य सरकार अपने पहले जारी किए गए स्व-निर्मित ई-पासों के स्थान पर, अधिकारियों द्वारा अनुमोदित यात्रा पास जारी करने की अपनी पिछली प्रणाली पर वापस जाने की योजना बना रही है।

पिछली प्रणाली के अनुसार, राज्य में प्रवेश करने हेतु इच्छुक व्यक्तियों को जिला कलेक्टर यात्रा पास जारी करेंगे। यात्रा पास प्रणाली शुरू हो जाने के बाद, स्वास्थ्य अधिकारियों इस तथ्य को जान सकेंगे कि किसी विशेष दिन पर कितने लोग आने वाले हैं।

लोकसभा के नियम 266  और 267

 संदर्भ: राज्य सभा सचिवालय ने गृह मामलों की स्थायी समिति के सदस्यों के लिए विडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से होने वाली एक पैनल की बैठक में शामिल होने अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

क्यों? गोपनीयता के सिद्धांत का उल्लंघन होने के कारण वीडियोकांफ्रेंसिंग की बैठकों की अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि इस तरह के आयोजनों में सदस्य के अकेले बैठे होने की कोई गारंटी नहीं होती थी।

क्या कहते हैं नियम?

नियम 267 में कहा गया है कि समिति की बैठकें संसद भवन में होनी चाहिए। हालाँकि, अध्यक्ष के पास बैठकों के लिए स्थान बदलने की शक्तियाँ हैं।

नियम 266 में कहा गया है कि सभी समिति की बैठक एकान्त में आयोजित की जानी चाहिए।

नेपाल का दूसरा संविधान संशोधन विधेयक

 नेपाल सरकार ने देश के नए मानचित्र को औपचारिक रूप देने के लिए महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया है, जिसमे भारत के कुछ हिस्सों को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है।

  • विधेयक नेपाली संविधान की अनुसूची 3 को परिवर्तित करेगा तथा 20 मई को अनावरण किए गए नए मानचित्र को स्थापित करेगा।
  • नए मानचित्र में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमि को नेपाल के हिस्से के रूप में दर्शाया गया है।

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बैंडटेल स्कॉर्पियनफिश (Band-tail Scorpionfish)

वैज्ञानिक नाम- स्कोर्पैनोसप्सिस नेगलेक्टा (Scorpaenospsis neglecta)।

केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के अनुसार समुद्री घास में छिपकर रहने वाली ‘‘बैंडटेल स्कॉर्पियनफिश’’ दुर्लभ प्रजाति है।

यह जहरीले कांटे से लैस है एवं रंग बदलने में सक्षम है।

मछली को ‘स्कोर्पियनफ़िश’ कहा जाता है क्योंकि इसकी रीढ़ में न्यूरोटॉक्सिक विष होता है।

समाचार में क्यों?

भारतीय शोधकर्ताओं को मन्नार की खाड़ी में सेतुकराई तट पर रंग बदलने वाली एक दुर्लभ मछली मिली है। शोधकर्ताओं को ‘पहली बार भारतीय जलसीमा में यह प्रजाति जिंदा मिली है।

यह इलाका समुद्री जैवविविधता के मामले में दुनिया के सबसे धनी क्षेत्रों में से एक है।

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राष्ट्रीय कैरियर सेवा (NCS) परियोजना

राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) परियोजना के तहत श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अब पंजीकृत नौकरी चाहने वालों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कैरियर कौशल प्रशिक्षण की पेशकश का आरम्भ किया है।

मंत्रालय NCS के एक ऑन-लाइन पोर्टल के माध्यम से रोजगार खोज, कैरियर परामर्श, कौशल विकास पाठ्यक्रम पर जानकारी, प्रशिक्षुता और इंटर्नशिप जैसी रोजगार से संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय रोजगार सेवा के परिवर्तन के लिए एनसीएस परियोजना को लागू कर रहा है।

मिसाइल पार्क अग्निप्रस्थ’

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 मिसाइल पार्क ‘अग्निप्रस्थ’ को आईएनएस कलिंग में स्थापित किया जायेगा।

  • ‘अग्निप्रस्थ’ का उद्देश्य 1981 से लेकर अब तक आईएनएस कलिंग के मिसाइल इतिहास की झलक दिखाना है।
    • इस पार्क को वर्ष 2018-19 के लिए आईएनएस कलिंग के प्रतिष्ठित यूनिट प्रशस्ति पत्र का पुरस्कार भी दिया गया है।
    • इसका मुख्य आकर्षण पी-70 ‘अमेटिस्ट’ है, जो कि पुराने ‘चक्र’ (चार्ली-1 पनडुब्बी) के शस्त्रागार से पानी में प्रक्षेपित किया गया एक एंटी-शिप मिसाइल है, जो 1988-91 के दौरान भारतीय नौसेना में सेवारत था।
    • INS कलिंग पूर्वी नौसेना कमान के तहत विशाखापत्तनम- भीमुनिपटनम बीच पर स्थित एक प्रमुख नौसेना प्रतिष्ठान है।

महेश नवमी

यह एक शुभ हिंदू त्योहार है जिसे भगवान शिव के भक्तों द्वारा मनाया जाता है।

  • यह त्योहार मुख्य रूप से माहेश्वरी समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है, जो आमतौर पर अपने पारिवारिक व्यवसाय के लिए जाने जाते हैं।
  • त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ के महीने में शुक्ल पक्ष के नौवें दिन मनाया जाता है।
  • इस वर्ष, महेश नवमी 31 मई को मनाई जा रही है।
  • त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान के लोगों द्वारा मनाया जाता है।

 “मेरा जीवन – मेरा योग” प्रतियोगिता 

  • इसे “जीवन योग” प्रतियोगिता भी कहा जाता है।
    • यह एक वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता है।
    • यह आयुष मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) का संयुक्त प्रयास है।
    • यह प्रतियोगिता 21 जून, 2020 को मनाये जाने वाले 6 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) में हिस्सा लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए शुरू की जा रही है।

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Insights Current Affairs Analysis (ICAN) by IAS Topper